लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में रविवार रात हुई हिंसा, आगजनी और झड़पों के बाद सोमवार को हालात कुछ हद तक सामान्य जरूर हुए, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है—पंजाब की सबसे बड़ी निजी यूनिवर्सिटी में हजारों छात्रों को कैंपस छोड़ने पर मजबूर करने वाला यह बवाल आखिर शुरू किसने किया?
पुलिस का दावा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है। वहीं, छात्रों के विरोध प्रदर्शन की वजह बने आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्यों और मोबाइल फोन डेटा की पड़ताल की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कैंपस में वास्तव में हुआ क्या था।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। एलपीयू के संस्थापक और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 30 सितंबर को पंजाब के दौरे पर आ रहे हैं और यूनिवर्सिटी कैंपस के नजदीक भाजपा की एक रैली को संबोधित करने वाले हैं। इन घटनाक्रमों के चलते राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। हालांकि, अभी तक कोई ऐसा सबूत सामने नहीं आया है जो राजनीतिक घटनाक्रम और हिंसा के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि करता हो।
यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। एक अक्टूबर से शुरू होने वाली मिड-टर्म परीक्षाएं भी टाल दी गई हैं। छात्रों को अपने माता-पिता या अभिभावकों से सलाह के बाद घर लौटने की अनुमति दी गई है। वहीं, कैंपस में रुकने वाले छात्रों को हॉस्टल के भीतर रहने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।
हालात का असर तत्काल दिखाई दिया। कैंपस में मौजूद करीब 40 हजार छात्रों में से आधे से ज्यादा सोमवार सुबह तक ट्रेन, बस और कैब के जरिये अपने घरों के लिए रवाना हो चुके थे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान से बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को लेने फगवाड़ा पहुंचे।
आधी रात से कैंपस में इंटरनेट सेवाएं भी बंद रहीं। हालांकि, इंटरनेट बंद किए जाने से वीडियो प्रसार और ऑनलाइन लामबंदी पर रोक लगाने में मदद मिली हो सकती है, लेकिन छात्रों का कहना था कि इससे उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुईं। यूपीआई भुगतान से लेकर ऑनलाइन अध्ययन सामग्री तक पहुंचने में दिक्कत आई। कैंपस का एटीएम भी क्षतिग्रस्त हुआ। हालांकि, कैंटीन सामान्य रूप से चलती रही।
यूनिवर्सिटी के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा, खासकर पंजाब के डीजीपी गौरव यादव के दौरे को देखते हुए। कैंपस के गेट और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बीच कई छात्रों को अपना सामान लेकर बाहर निकलते देखा गया।
आरोप जिसने भड़काया
हिंसा की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों के बाद हुई, जिनमें यूनिवर्सिटी में काम करने वाले एक बाहरी व्यक्ति पर कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था।
छात्रों के पुलिस से संपर्क करने के बाद पुलिस ने एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और बाद में SIT गठित कर दी। लेकिन अभी तक इस आरोप की पुष्टि नहीं हुई है।
एलपीयू ने कैंपस में बलात्कार की किसी भी घटना से स्पष्ट रूप से इनकार किया है। यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया पर फैल रही खबरों को “झूठा, निराधार और मनगढ़ंत अफवाह” बताया है। साथ ही छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे अपुष्ट सूचनाएं साझा न करें।
यूनिवर्सिटी ने एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें तीन छात्राओं ने दावा किया कि वे उस कमरे में मौजूद थीं जहां कथित घटना होने की बात कही जा रही थी और वहां ऐसी कोई घटना नहीं हुई।
कैंपस का दौरा करने के बाद डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि शुरुआती जांच में कैंपस में बलात्कार की घटना के संकेत नहीं मिले हैं। इसके बावजूद पुलिस ने जांच जारी रखते हुए कहा कि उपलब्ध सभी साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी।
जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने कहा कि जांचकर्ता फॉरेंसिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन डेटा की जांच करेंगे। इस प्रक्रिया में प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
प्रदर्शन से हिंसा तक
रविवार तड़के करीब 1 से 2 बजे के बीच विरोध प्रदर्शन ने जोर पकड़ा। छात्र एक हॉस्टल के पास जमा हुए और बाद में यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट की ओर बढ़े।
प्रदर्शनकारी कथित घटना की जांच, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई, छात्राओं के हॉस्टलों की सुरक्षा बढ़ाने, हॉस्टल अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग कर रहे थे।

लेकिन देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में प्रदर्शनकारियों को शीशे और गमले तोड़ते तथा कुछ सामान में आग लगाते देखा गया। फर्नीचर, मोटरसाइकिलों और अन्य संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाए जाने की खबर है। कुछ प्रदर्शनकारी कैंपस में प्रदर्शित एक निष्क्रिय MiG-23 लड़ाकू विमान और सैन्य टैंक पर भी चढ़ गए।
सुबह करीब चार बजे प्रदर्शनकारी दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे पर पहुंच गए और यातायात रोक दिया। इस नाकेबंदी से जालंधर और फगवाड़ा के बीच यातायात प्रभावित हुआ और पंजाब के दूसरे हिस्सों तथा पड़ोसी राज्यों की ओर जाने वाले रास्तों पर भी असर पड़ा।
पुलिस ने शुरुआत में प्रदर्शनकारियों को हाईवे खाली करने के लिए मना लिया, लेकिन कुछ समय बाद फिर से रास्ता जाम कर दिया गया।
तनाव बढ़ता देख रविवार देर रात भारी पुलिस बल कैंपस में दाखिल हुआ। एडीजीपी एम.एफ. फारूकी और डीआईजी नवीन सिंगला समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हालात सामान्य करने की कोशिशों में जुटे रहे। पुलिस ने बाद में यूनिवर्सिटी परिसर में फ्लैग मार्च भी किया।
रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात हाईवे से प्रदर्शनकारियों को हटाया गया। पुलिस के मुताबिक इसके बाद यातायात बहाल हो गया और स्थिति शांतिपूर्ण रही।
राजनीतिक कोण
शिरोमणि अकाली दल के नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम अशोक मित्तल के हाल में आप छोड़कर भाजपा में शामिल होने से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, जांच में अभी तक इस आरोप की पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस ने भी पंजाब सरकार, पुलिस और प्रशासन पर निशाना साधते हुए स्थिति से निपटने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया।
राजनीति विज्ञान के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि आंदोलन के पीछे राजनीति भी एक कारण हो सकती है। उन्होंने वीडियो में दिखाई दे रहे कुछ हिंसक तत्वों के छात्र होने पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, कुछ तस्वीरों में ऐसे लोग दिखाई दे रहे हैं जिनके हाथों में वॉकी-टॉकी और हथियार नजर आ रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
छात्र नेता गगन संग्रामी ने इससे अलग तस्वीर पेश की। उनका कहना है कि छात्रों में शिक्षा के स्तर, अत्यधिक नियंत्रण और कथित अनुचित जुर्माने को लेकर पहले से नाराजगी थी। उन्होंने कैंपस में बाहरी लोगों के प्रवेश की संभावना से इनकार नहीं किया, लेकिन कहा कि स्थानीय छात्र भी आंदोलन में शामिल थे और उनकी शिकायतों को भी सुना जाना चाहिए।
भाजपा ने हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की मांग की है। पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने यह पता लगाने के लिए जांच की मांग की कि हिंसा में बाहरी या आंतरिक ताकतों की कोई भूमिका थी या नहीं।
जाखड़ ने इस संभावना पर भी सवाल उठाया कि कहीं छात्रों के गुस्से का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए तो नहीं किया गया। उन्होंने अलगाववादी समूहों से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया।
जाखड़ ने हिंसा के समय को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगामी पंजाब दौरे से भी जोड़ते हुए सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे किसी पक्ष ने छात्रों का इस्तेमाल अशांति पैदा करने के लिए किया।
हालांकि, ये सभी राजनीतिक आरोप हैं और चल रही पुलिस जांच में अभी तक इनकी पुष्टि नहीं हुई है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने कथित आरोपियों की पहचान या कार्रवाई का कोई विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।
जांच पर निगाहें
फिलहाल हिंसा की चिंगारी बनी मूल घटना ही सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल है।
पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और SIT गठित की है। जांचकर्ता सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक सामग्री और मोबाइल फोन रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी लगातार यह कह रही है कि कथित यौन उत्पीड़न की घटना कैंपस में हुई ही नहीं।
जो मामला एक अपुष्ट आरोप को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ, वह देखते ही देखते बड़े कानून-व्यवस्था संकट में बदल गया। यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुंचा, राष्ट्रीय राजमार्ग जाम हुआ और हजारों छात्रों ने कैंपस छोड़ दिया।
अब जांच के सामने कई अहम सवाल हैं—क्या मूल आरोप जानबूझकर गढ़ा गया था? क्या बाहरी लोगों ने हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई? वास्तविक शिकायतों से जूझ रहे छात्रों की इसमें क्या भूमिका थी? और क्या इस पूरी लामबंदी के पीछे कोई राजनीतिक या बाहरी ताकत थी?
इन सवालों के जवाब सोशल मीडिया के दावों या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि जांच के निष्कर्षों से सामने आने होंगे।




