सीढ़ियां चढ़ने वालों में हार्ट की बीमारी से मौत का खतरा 39% कम मिला, 4.80 लाख लोगों की रिसर्च में खुलासा

सीढ़ियां चढ़ना हार्ट की सेहत के लिए फायदेमंद, 39% कम हृदय संबंधी मौत का खतरा
नियमित सीढ़ियां चढ़ने वाले लोगों में हृदय संबंधी मौत का जोखिम 39% कम पाया गया।

नई दिल्ली, 24 अगस्त: | M. Riyaz Hashmi

1,873 रिसर्च से चुने गए 9 अध्ययन, 4.80 लाख लोगों का डेटा, ब्रिटेन के शोधकर्ताओं का ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ कार्डियोवैस्कुलर ड्रग्स’ में प्रकाशित

लिफ्ट या एस्केलेटर के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। करीब 4.80 लाख लोगों पर किए गए नए मेटा-एनालिसिस में नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़ने वाले लोगों में हृदय संबंधी बीमारी से मौत का जोखिम उन लोगों की तुलना में 39 प्रतिशत कम पाया गया, जो सीढ़ियों का कम इस्तेमाल करते थे। वहीं, किसी भी कारण से होने वाली मौत का जोखिम भी 24 प्रतिशत कम पाया गया। हालांकि, इस रिसर्च को पढ़ते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सीढ़ियां चढ़ने और कम मृत्यु जोखिम के बीच संबंध बताती है, सीढ़ियां चढ़ने को मृत्यु जोखिम कम होने का प्रत्यक्ष कारण साबित नहीं करती।

यह अध्ययन ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने किया है और यह ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ कार्डियोवैस्कुलर ड्रग्स’ में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं ने पबमेड और एम्बेस जैसे वैज्ञानिक डेटाबेस में उपलब्ध अध्ययनों की व्यवस्थित समीक्षा की। शुरुआती खोज में 1,873 अध्ययन मिले, लेकिन तय मानकों के बाद केवल 9 अध्ययन अंतिम विश्लेषण में शामिल किए गए। इनमें कुल 4,80,479 प्रतिभागी थे। हृदय संबंधी मौत के लिए उपलब्ध पांच अध्ययनों के 4,55,619 प्रतिभागियों के आंकड़ों को एक साथ मिलाने पर जोखिम अनुपात 0.61 रहा। इसका अर्थ है कि सीढ़ियां नियमित रूप से चढ़ने वाले समूह में हृदय संबंधी मौत का जोखिम तुलना वाले समूह से लगभग 39 प्रतिशत कम था। इसी विश्लेषण में किसी भी कारण से मौत का जोखिम अनुपात 0.76 रहा, यानी लगभग 24 प्रतिशत कम।

रिसर्च में हृदयाघात, इस्केमिक स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर जैसे हृदय संबंधी परिणामों के साथ भी सीढ़ियां चढ़ने का संबंध देखा गया

रिसर्च में हृदयाघात, इस्केमिक स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर जैसे हृदय संबंधी परिणामों के साथ भी सीढ़ियां चढ़ने का संबंध देखा गया। हालांकि, इन बीमारियों के लिए शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से ऐसा कोई एक प्रतिशत नहीं दिया है, जिसे यह कहा जा सके कि सीढ़ियां चढ़ने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम इतने प्रतिशत घट जाता है। एक अध्ययन के आंकड़ों में रोजाना करीब छह फ्लाइट, यानी लगभग 60-70 सीढ़ियां चढ़ने के आसपास लाभ का संकेत मिला। लेकिन शोधकर्ताओं ने यह नहीं कहा कि छह फ्लाइट हर व्यक्ति के लिए तय ‘डोज’ है। सीढ़ियां चढ़ने की आदर्श मात्रा अभी स्पष्ट नहीं है।

सबसे जरूरी सावधानी: 39% का मतलब यह नहीं कि सीढ़ियां चढ़ने से मौत 39% घट जाएगी, यह ऑब्जर्वेशनल स्टडी है, कारण-प्रभाव का पक्का निष्कर्ष नहीं

यही इस रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहलू है। इसमें शामिल अध्ययन मुख्य रूप से ऑब्जर्वेशनल यानी अवलोकन आधारित अध्ययन हैं। लोगों को बेतरतीब ढंग से एक समूह को सीढ़ियां चढ़ने और दूसरे को सीढ़ियां नहीं चढ़ने के लिए नहीं कहा गया था। शोधकर्ताओं ने पहले से मौजूद आंकड़ों में सीढ़ियां चढ़ने की आदत और स्वास्थ्य परिणामों के बीच संबंध देखा। इसलिए इससे कारण और प्रभाव का पक्का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

मसलन, जो व्यक्ति नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़ सकता है, वह पहले से अधिक स्वस्थ, अधिक सक्रिय या बेहतर शारीरिक क्षमता वाला हो सकता है। इसके उलट हृदय, घुटने या चलने-फिरने की समस्या वाले व्यक्ति स्वाभाविक रूप से लिफ्ट या एस्केलेटर चुन सकते हैं। ऐसे में यह सवाल बना रहता है कि सीढ़ियां चढ़ने से स्वास्थ्य बेहतर हुआ या बेहतर स्वास्थ्य वाले लोग सीढ़ियां ज्यादा चढ़ते रहे। इसे रिवर्स कॉजेशन यानी उलटा कारण-संबंध कहा जा सकता है।

फिर भी इसका व्यावहारिक महत्व कम नहीं, बिना किसी विशेष उपकरण, जिम या अतिरिक्त खर्च के रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने का आसान तरीका

फिर भी इसका व्यावहारिक महत्व कम नहीं है। सीढ़ियां चढ़ना बिना किसी विशेष उपकरण, जिम या अतिरिक्त खर्च के रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने का आसान तरीका है। शोधकर्ताओं का कहना है कि घर, कार्यालय या बाहर की सामान्य दिनचर्या में ऐसी छोटी गतिविधियों को शामिल करना शारीरिक सक्रियता बढ़ाने का व्यावहारिक तरीका हो सकता है। हालांकि, घुटनों या चलने-फिरने की समस्या वाले लोगों के लिए सीढ़ियां हर स्थिति में उपयुक्त नहीं हो सकतीं। ऐसे लोगों को अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार व्यायाम का तरीका चुनना चाहिए।

यानी सीढ़ियों को लिफ्ट का विकल्प बनाना एक अच्छी स्वास्थ्य आदत हो सकती है, लेकिन इसे हार्ट अटैक से बचने की गारंटी समझना सही नहीं होगा। इस रिसर्च का असली संदेश 39 प्रतिशत नहीं, बल्कि यह है कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियां भी लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए मायने रख सकती हैं।