सत्या निकेतन पीजी हादसा: 7 लोगों की मौत के बाद बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता गिरफ्तार, राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया

सत्या निकेतन पीजी हादसा: बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता गिरफ्तार
सत्या निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई। बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया गया है।

तहलका वेब ब्यूरो

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली

दिल्ली के सत्या निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने भवन के मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को गुप्ता को पकड़े जाने की पुष्टि की। पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद वह फरार था और उसे तलाशने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया था। गुप्ता को इमारत ढहने के करीब 25 घंटे बाद भिवाड़ी से पकड़ा गया।

10 टीमें जुटी थीं तलाश में, लुकआउट सर्कुलर जारी

पुलिस ने गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था और उसके पासपोर्ट की डिटेल भी हासिल की थी। उसकी तलाश के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 टीमें गठित की थीं, जिनमें स्थानीय जिला पुलिस, स्पेशल स्टाफ और अन्य ऑपरेशनल यूनिट के अधिकारी शामिल थे। इन टीमों ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस की कार्रवाई के बाद उसे राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गुप्ता से मामले में आगे पूछताछ और जांच की जा रही है।

पुलिस सेक्टर-23 स्थित उसकी हरिराम पेंट्स एंड हार्डवेयर की दुकान पर भी पहुंची थी, जो पिछले दो दिनों से बंद थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, गुप्ता करीब 15 वर्षों से यह दुकान चला रहा था और इलाके के प्रमुख हार्डवेयर कारोबारियों में उसकी पहचान थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि गुप्ता परिवार के पास सेक्टर-23 और पालम विहार में कई मकान भी हैं।

मरम्मत के दौरान ढही थी पांच मंजिला इमारत

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्या निकेतन में रविवार को मरम्मत का काम चल रहा था, तभी लड़कों के पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही दशकों पुरानी पांच मंजिला इमारत ढह गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 5 लोग घायल बताए गए हैं। बचाव अभियान के दौरान अब तक 12 लोगों को मलबे से निकाला गया है। घटनास्थल पर दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) समेत कई एजेंसियां राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं। सोमवार को हादसे के दूसरे दिन भी मलबे में संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश जारी रही। बचाव दल मलबा हटाने के साथ स्निफर डॉग की मदद से भी तलाशी अभियान चला रहा है।

कईं दिनों की भारी बारिश से बेसमेंट में पानी जमा था

स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि कई दिनों की भारी बारिश के कारण इमारत के बेसमेंट में पानी जमा था, जिससे नींव कमजोर हुई होने की संभावना है। इसके अलावा मरम्मत और निर्माण कार्य के दौरान बेसमेंट में खुदाई किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह की जांच अभी जारी है। अधिकारियों ने घटना की परिस्थितियों और हादसे से पहले चल रहे मरम्मत कार्य की भी जांच शुरू कर दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर राहत और बचाव अभियान का जायजा लिया है। राज्य सरकार ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए हैं।

55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनाए गए थे 5 फ्लोर

हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सत्या निकेतन जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में कई रिहायशी इमारतों को पीजी में तब्दील किया गया है। हादसे के बाद एमसीडी ने दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। एमसीडी ने चार मंजिल से अधिक की सभी अवैध निर्माण वाली इमारतों को तत्काल सील करने का आदेश दिया है और जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। सत्या निकेतन में एक अन्य इमारत को भी खतरनाक स्थिति में पाए जाने के बाद गिराने के आदेश दिए गए हैं। ढही इमारत करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी। यह एक पुनर्वास कॉलोनी में स्थित थी, जहां मूल अनुमति केवल ग्राउंड-प्लस-वन मंजिल के निर्माण की थी, जबकि मौके पर ग्राउंड-प्लस-फाइव मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई थी।

मामले में मालिक और अन्य के खिलाफ एफआईआर

पुलिस ने हादसे के मामले में भवन मालिक हरिराम गुप्ता और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या, भवन के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस हादसे से पहले चल रहे मरम्मत कार्य, इमारत की स्थिति और कथित अवैध निर्माण से जुड़े पहलुओं पर उससे पूछताछ कर सकती है।