
जल शक्ति योजनाओं की PM मोदी ने की समीक्षा, बोले- कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखे बदलाव
रिपोर्टर प्रिया तिवारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा शासित राज्यों के जल शक्ति मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में जल शक्ति मंत्रालय से जुड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति और उनके जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
योजनाओं का असर धरातल पर दिखना जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि केवल योजनाएं और नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है। सरकार की योजनाओं का वास्तविक असर आम जनता के जीवन में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि सरकारी योजनाओं की सफलता का आकलन केवल फाइलों और आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए वास्तविक बदलाव से होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कोई भी पात्र नागरिक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
क्रियान्वयन में आने वाली अड़चनें तुरंत दूर करने के निर्देश
बैठक में योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली प्रशासनिक, तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें दूर करने पर जोर दिया गया।
सेवा वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक देरी के सीधे लाभार्थियों तक पहुंच सके। साथ ही परियोजनाओं की लगातार निगरानी और तय समयसीमा में उनके पूरा होने पर भी विशेष जोर दिया गया।
राज्यों के सफल मॉडल एक-दूसरे से साझा करने पर जोर
प्रधानमंत्री ने राज्यों के बीच सफल योजनाओं, नवाचारों और ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की बात कही।
एक राज्य में सफल रही पहल को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया, ताकि देशभर में जल संरक्षण, जल प्रबंधन और जल आपूर्ति के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें। प्रधानमंत्री ने केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर संवाद और बेहतर समन्वय को भी जरूरी बताया।
विकसित भारत 2047 के लिए दीर्घकालिक योजना पर जोर
बैठक के बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और सरकार की दीर्घकालिक सोच को लेकर अपने विचार साझा किए।
नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश के करोड़ों परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि अब सरकार केवल सीमित अवधि की योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अगले 25 से 50 वर्षों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।



