
राहुल नवीन का कार्यकाल बढ़ने के बाद अब सामने आया ED का रिपोर्ट कार्ड; निदेशक के नेतृत्व में 1,080 नए मनी लॉन्ड्रिंग केस, 712 अटैचमेंट ऑर्डर, ₹32,678 करोड़ की संपत्ति का रेस्टिट्यूशन
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक राहुल नवीन का कार्यकाल केंद्र सरकार ने एक साल के लिए बढ़ाकर 13 अगस्त 2027 तक कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब ईडी की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट एजेंसी के कामकाज का एक ऐसा रिपोर्ट कार्ड सामने रखती है, जिसमें कई अहम मोर्चों पर रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज हुआ है। नवीन 14 अगस्त 2024 से ईडी के पूर्णकालिक निदेशक हैं। हालांकि, सरकार ने कार्यकाल विस्तार के आदेश में इसके पीछे कोई प्रदर्शन-आधारित कारण नहीं माना था, लेकिन नवीन के नेतृत्व में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि ईडी ने पिछले वित्त वर्ष में कार्रवाई की रफ्तार और वित्तीय असर- दोनों के स्तर पर बड़ी छलांग लगाई।
सबसे बड़ा आंकड़ा है ₹81,422.63 करोड़ का। वित्त वर्ष 2025-26 में ईडी ने इतनी कीमत की संपत्तियों के लिए प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए। ईडी की अपनी रिपोर्ट इसे एक वित्त वर्ष में एजेंसी द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी अटैचमेंट बताती है। यह 2024-25 में अटैच की गई ₹30,036.41 करोड़ की संपत्तियों के मुकाबले करीब 171 फीसदी ज्यादा है।
एक साल में 712 अटैचमेंट ऑर्डर
₹81,422.63 करोड़ की अटैचमेंट 712 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) के जरिए हुई। पिछले वित्त वर्ष में 461 पीएओ जारी किए गए थे। यानी पीएओ की संख्या भी एक साल में करीब 54 फीसदी बढ़ी। ईडी के निदेशक राहुल नवीन ने अपनी रिपोर्ट में इस कार्रवाई की रणनीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई का मूल उद्देश्य अपराध की कमाई के वित्तीय प्रवाह को रोकना और अपराधियों को उसके लाभ से वंचित करना है। उनके मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में ₹81,422 करोड़ की संपत्ति अटैच हुई और ईडी की स्थापना के बाद से कुल प्रोविजनल अटैचमेंट ₹2,36,017 करोड़ तक पहुंच गई।
पहले दशक की कुल अटैचमेंट से 15 गुना से ज्यादा
ईडी की रिपोर्ट में इस आंकड़े की तुलना उसके शुरुआती वर्षों से भी की गई है। जुलाई 2005 से मार्च 2014 तक पूरे करीब नौ वर्षों में पीएमएलए के तहत कुल ₹5,171.32 करोड़ की संपत्तियां अटैच हुई थीं। इसके मुकाबले केवल 2025-26 में ₹81,422.63 करोड़ की अटैचमेंट हुई—यानी एक साल का आंकड़ा शुरुआती दौर की कुल अटैचमेंट से 15 गुना से ज्यादा है। 2014 से 2024 के दशक में कुल अटैचमेंट ₹1,19,386.25 करोड़ रही थी।
मामले भी बढ़े, एक साल में 1,080 नए केस
ईडी के प्रदर्शन का दूसरा बड़ा आंकड़ा नए मामलों का है। 2025-26 में एजेंसी ने 1,080 ईसीआईआर दर्ज किए। यह 2024-25 के 775 मामलों के मुकाबले करीब 39 फीसदी ज्यादा है। ईडी के मुताबिक 2005-14 के दौरान एक साल में औसतन 209 ईसीआईआर दर्ज होते थे। इसके मुकाबले 2025-26 में 1,080 मामले दर्ज हुए, यानी एक वित्त वर्ष में नए मामलों की संख्या उस शुरुआती औसत से करीब पांच गुना है। 31 मार्च 2026 तक ईडी द्वारा दर्ज कुल ईसीआईआर की संख्या 8,851 हो गई है। इनमें 2014 से मार्च 2024 के बीच 5,113, 2024-25 में 775 और 2025-26 में 1,080 मामले दर्ज हुए।
जांच से ट्रायल तक तेजी, 657 प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट
ईडी की रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि एजेंसी सिर्फ नए मामले दर्ज करने के बजाय उन्हें प्रॉसिक्यूशन के चरण तक तेजी से पहुंचाने पर जोर दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में ईडी ने 657 मुख्य प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल कीं। यह 2024-25 में दाखिल 333 के मुकाबले लगभग दोगुनी हैं। इसके अलावा 155 सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की गईं। दोनों को मिलाकर संख्या 812 होती है। ईडी निदेशक राहुल नवीन ने अपने वक्तव्य में इसी संयुक्त आंकड़े को रेखांकित करते हुए कहा कि 2025-26 में 812 प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट, जिनमें 155 सप्लीमेंट्री कंप्लेंट शामिल हैं, दाखिल की गईं। ईडी द्वारा अब तक दाखिल सभी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में से 41 फीसदी से ज्यादा पिछले दो वर्षों में दाखिल हुई हैं। ईडी ने जांच का औसत जीवनचक्र पहले के 3-4 साल से घटाकर 1.5-2 साल करने की दिशा में काम किया है।
ईडी की 2,892 सर्च, 156 गिरफ्तारियां
वित्त वर्ष 2025-26 में ईडी ने 2,892 सर्च किए और 156 लोगों को गिरफ्तार किया। इसी दौरान एजेंसी ने ₹710.25 करोड़ की संपत्ति/रकम जब्त की। रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़ों में यह भी दर्ज है कि 2025-26 में 19 आरोपियों को दोषी ठहराया गया और कुल 9 मामलों में कन्विक्शन हुई। ईडी के अनुसार अब तक पीएमएलए मामलों में 56 कन्विक्शन हो चुकी हैं और 124 लोग दोषी ठहराए जा चुके हैं।
94 फीसदी कन्विक्शन रेट का दावा
राहुल नवीन ने अपने वक्तव्य में कहा है कि ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कन्विक्शन रेट करीब 94 फीसदी है और ट्रायल कोर्ट में लंबित 2,400 से अधिक मामलों में से बड़ी संख्या में दोषसिद्धि और अपराध की कमाई की जब्ती की उम्मीद है। वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों में अब तक 60 मामलों में फैसला होने और 56 में कन्विक्शन का आंकड़ा है, जिससे गणना के आधार पर दर 93.33 फीसदी बैठती है।
अटैच किया ही नहीं, ₹32,678 करोड़ वापस भी किया
ईडी के प्रदर्शन का शायद सबसे महत्वपूर्ण बदलाव रेस्टिट्यूशन है। वित्त वर्ष 2025-26 में एजेंसी ने ₹32,677.97 करोड़ की संपत्ति पीड़ितों और वास्तविक हकदारों को लौटाई। 2024-25 में यह रकम ₹15,263.03 करोड़ थी। यानी एक साल में रेस्टिट्यूशन में करीब 114 फीसदी की वृद्धि हुई।
अब तक ईडी के जरिए ₹63,142.65 करोड़ की संपत्ति का रेस्टिट्यूशन किया जा चुका है। इसमें बैंक, निवेशक और होमबायर्स जैसे वास्तविक हकदार शामिल हैं। राहुल नवीन ने इसे ईडी के काम का अहम हिस्सा बताया है। उनके मुताबिक 2019 में पीएमएलए में किए गए बदलाव के बाद कुछ परिस्थितियों में ट्रायल पूरा होने से पहले भी संपत्ति को जब्त कर पीड़ितों को लौटाने का रास्ता खुला। उदयपुर के एक रियल एस्टेट मामले में 200 से अधिक होमबायर्स को अटैच संपत्तियां रिलीज की गईं, जबकि पीएसीएल लिमिटेड मामले में करीब ₹15,581 करोड़ की संपत्ति जस्टिस आर.एम. लोढ़ा कमेटी के जरिए लाखों निवेशकों में वितरण के लिए रेस्टिट्यूट की गई।
इसी अवधि में अपराध का चेहरा भी बदला
ईडी की रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण संकेत है- आर्थिक अपराध का बदलता स्वरूप। राहुल नवीन के मुताबिक कुछ वर्ष पहले ईडी का बड़ा फोकस बैंक फ्रॉड, बड़े कॉरपोरेट घोटालों और रियल एस्टेट फ्रॉड पर था। लगातार कार्रवाई और आईबीसी तथा रेरा जैसे सरकारी सुधारों के बाद इन अपराधों में दिखाई देने वाली कमी के बीच अब क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड, साइबर आधारित वित्तीय अपराध, टेरर फाइनेंसिंग, एंटी-नेशनल गतिविधियां और नारकोटिक्स तस्करी एजेंसी की बड़ी प्राथमिकताओं में आ गई हैं। यानी ईडी अब सिर्फ पारंपरिक आर्थिक अपराधों के पीछे नहीं है, बल्कि डिजिटल मनी ट्रेल, क्रिप्टो, ड्रग मनी और आतंक के वित्तीय नेटवर्क तक अपनी जांच का दायरा बढ़ा रही है।
भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर भी कार्रवाई
फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के तहत 31 मार्च 2026 तक 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी थी। इनमें 21 को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया गया। दो मामलों में आरोपी की मौत हो गई या उसने अभियोजन का सामना करना शुरू कर दिया, जबकि 31 मामले सक्षम अदालतों में लंबित हैं। इस कानून के तहत ₹2,178.34 करोड़ की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। राहुल नवीन के नेतृत्व वाले इस कार्यकाल की रिपोर्ट केवल कार्रवाई के आंकड़े नहीं देती, बल्कि एजेंसी के काम करने के तरीके में बदलाव भी बताती है। अक्टूबर 2025 से पीएमएलए के तहत दर्ज होने वाले सभी मामलों को रिस्क असेसमेंट मैनेजमेंट कमेटी (आरएएमसी) के स्तर पर मंजूरी देने की व्यवस्था मजबूत की गई और इसकी बैठकें तिमाही के बजाय मासिक की गईं। उद्देश्य हाई-रिस्क मामलों की प्राथमिकता तय करना और उनके बाद सर्च, जब्ती, गिरफ्तारी, अटैचमेंट तथा प्रॉसिक्यूशन जैसी कार्रवाई को तेज करना है।
फर्जी ईडी समन के मामलों को रोकने के लिए क्यूआर कोड आधारित समन सत्यापन व्यवस्था भी शुरू की गई है, जिसके जरिए ईडी की वेबसाइट पर समन की पुष्टि की जा सकती है। वहीं आईबीसी और पीएमएलए के बीच तालमेल के लिए नवंबर 2025 में ऐसी व्यवस्था शुरू की गई, जिसके तहत इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स कुछ शर्तों के साथ पीएमएलए के तहत अटैच संपत्तियों की सशर्त रिलीज के लिए स्पेशल कोर्ट का रुख कर सकते हैं।



