
स्नेहलता | नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जून 2026 में देश की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह 6.9 फीसदी थी। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान निजी घरेलू खपत यानी लोगों के खर्च में भी 7.1 फीसदी की वृद्धि हुई।
लेकिन इन चमकते आंकड़ों के बीच आम परिवार की कहानी कुछ अलग नज़र आती है। सवाल है, अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेज रफ्तार से बढ़ रही है तो घर की रसोई का बजट क्यों बिगड़ रहा है?
GDP बढ़ रही है, लेकिन खाने-पीने की महंगाई भी चिंता बढ़ा रही है
जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45 फीसदी हो गई, जो जून में 4.38 फीसदी थी। खाद्य महंगाई भी जुलाई में 5.52 फीसदी रही, जबकि जून में यह 5.32 फीसदी थी।
यानी औसत महंगाई का आंकड़ा भले ही नियंत्रित दिखाई दे, लेकिन परिवार के रोजमर्रा के खर्च में भोजन की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण रसोई पर दबाव ज्यादा महसूस हो सकता है।
आखिर GDP और जेब का अनुभव अलग क्यों होता है?
GDP पूरे देश में पैदा होने वाली वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को मापती है। लेकिन किसी परिवार की आर्थिक स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी आमदनी कितनी बढ़ी और जरूरी चीजों की कीमतें कितनी बढ़ीं।
अगर वेतन या आय सीमित गति से बढ़े और सब्जी, दाल, तेल, दूध, मसाले तथा दूसरी जरूरी वस्तुओं पर खर्च बढ़ जाए, तो GDP की तेज वृद्धि के बावजूद परिवार को अपनी बचत या दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
इसीलिए आर्थिक विकास और परचेजिंग पावर को एक ही चीज मानना सही नहीं है।
ग्रामीण परिवारों के लिए चुनौती ज्यादा?
GDP की पहली तिमाही के आंकड़ों में कृषि क्षेत्र की वृद्धि करीब 3.6 फीसदी रही। कृषि उत्पादन, मौसम और खाद्य आपूर्ति से जुड़े जोखिम आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों पर असर डाल सकते हैं।
वहीं निवेश और सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि दिखाई दे रही है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था के कई हिस्से तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन इस वृद्धि का लाभ हर परिवार तक एक समान गति से पहुंचे, यह जरूरी नहीं।
असली सवाल—GDP की ग्रोथ जेब तक कब पहुंचेगी?
7.8 फीसदी GDP ग्रोथ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत संकेत है। लेकिन आम जनता के लिए आर्थिक मजबूती का असली पैमाना सिर्फ GDP नहीं, बल्कि रोजगार, वास्तविक आय, महंगाई और बचत की क्षमता भी है।
यानी तस्वीर का एक हिस्सा कहता है अर्थव्यवस्था तेज दौड़ रही है।
दूसरा हिस्सा पूछ रहा है क्या आम आदमी की आमदनी भी उसी रफ्तार से बढ़ रही है?
क्योंकि देश की GDP बढ़ने का फायदा तभी महसूस होगा, जब महीने के अंत में घर का बजट भी पहले से थोड़ा आसान नजर आए।



