
लंदन: ब्रिटेन के वेल्स स्थित ऐतिहासिक कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का राष्ट्रीय झंडा फहराने को लेकर वहां की राजनीति में खूब हंगामा मचा हुआ है। दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके (Reform UK) पार्टी ने इस कदम की तीखी आलोचना की है और इसे “ब्रिटिश संस्कृति पर हावी होने की कोशिश” करार दिया है। वहीं, काउंसिल और विपक्षी पार्टियों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि यह बहुसंस्कृतिवादी शहर की परंपरा का हिस्सा है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
मामला तब गरमाया जब 5 सितंबर को रिस्टोर पार्टी के काउंसलर ओवेन क्लैटवर्थी ने सोशल मीडिया पर कार्डिफ कैसल के ऊपर पाकिस्तानी झंडे की एक तस्वीर पोस्ट की। बाद में इसे रिस्टोर पार्टी के नेता रूपर्ट लोव और रिफॉर्म यूके के वेल्श नेता डैन थॉमस ने भी शेयर किया। रिफॉर्म पार्टी के वरिष्ठ सांसद और इकोनॉमिक स्पोकसमैन रॉबर्ट जेनरिक ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट कर लिखा, “कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तानी झंडा फहराया गया है। हम अपनी संस्कृति पर हावी होने की इस कोशिश को क्यों होने देते हैं?”
रिफॉर्म वेल्स के एक प्रवक्ता ने तो यहां तक कह दिया कि “वेल्श ड्रैगन या यूनियन फ्लैग के अलावा कोई और झंडा हमारे ऐतिहासिक स्थलों पर नहीं फहराया जाना चाहिए।”
झंडा कब और क्यों फहराया गया था?
काउंसिल के मुताबिक, पाकिस्तानी झंडा इस साल अगस्त में दो मौकों पर फहराया गया — 9 अगस्त को एक समारोह में, जिसके बाद झंडा रातभर लगा रहा, और 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर। कार्डिफ काउंसिल के लेबर लीडर क्रिस वीवर ने कहा कि यह काउंसिल की लंबे समय से चली आ रही परंपरा है कि वह महत्वपूर्ण तारीखों और अवसरों को चिह्नित करने के लिए विभिन्न देशों के झंडे फहराती है।
वीवर ने यह भी स्पष्ट किया कि 15 अगस्त को भारतीय स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय तिरंगा भी फहराया गया था। उनका कहना था कि यह किसी देश के कब्जे का संकेत नहीं, बल्कि कार्डिफ में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देने का तरीका है।
पुरानी तस्वीर ने बढ़ाया विवाद
विवाद में एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब सामने आया कि रिफॉर्म नेताओं द्वारा शेयर की गई कुछ तस्वीरें नई नहीं, बल्कि अगस्त 2024 की थीं। BBC पत्रकार पीटर गिलिब्रैंड, जिन्होंने मूल तस्वीर खींची थी, ने कहा कि वे हैरान हैं कि उनकी 2024 की तस्वीर बिना संदर्भ के नई घटना बताकर वायरल की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह तस्वीर पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ली गई थी।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
वेल्श कंजर्वेटिव पार्टी की पाकिस्तानी मूल की सेनेड (वेल्श संसद) सदस्य नताशा असगर ने रिफॉर्म पार्टी पर नस्लीय विवाद शुरू करने की कोशिश का आरोप लगाया। असगर, जिनके पिता मोहम्मद असगर बंटवारे से पहले के भारत में पैदा हुए थे और पाकिस्तान में पले-बढ़े थे, ने कहा कि ऐसे समारोह “कब्जा” नहीं, बल्कि “सम्मान” का एक तरीका हैं।
उन्होंने कहा, “मैं भारतीय समुदाय, पाकिस्तानी समुदाय और पोलिश समुदाय के लिए झंडा फहराने के कई समारोहों में शामिल हुई हूं और मुझे लगता है कि वे सभी शानदार कार्यक्रम रहे हैं, जिनमें अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।”
बहस का बड़ा सवाल
यह विवाद ब्रिटेन में राष्ट्रीय पहचान, बहुसंस्कृतिवाद और सार्वजनिक स्थानों पर प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर चल रही बहस का ही एक हिस्सा है। एक तरफ रिफॉर्म जैसे दक्षिणपंथी दल “ब्रिटिश पहचान को बचाने” की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ काउंसिल और बहुसंस्कृतिवाद के समर्थक कहते हैं कि विभिन्न समुदायों के त्योहारों और प्रतीकों को सम्मान देना ही आधुनिक ब्रिटेन की ताकत है।
फिलहाल, कार्डिफ कैसल पर सोमवार को कोई पाकिस्तानी झंडा नहीं दिखा, लेकिन इस विवाद ने वेल्स और ब्रिटेन की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है — कि आखिर सार्वजनिक जगहों पर किन झंडों को जगह मिलनी चाहिए और क्यों।



