ARIN-AP बैठक दिल्ली में शुरू: विदेशों में छिपी अपराध की कमाई की वसूली और पीड़ितों को रकम लौटाने पर जोर

दिल्ली में ARIN-AP की वार्षिक बैठक में अंतरराष्ट्रीय संपत्ति वसूली पर चर्चा का प्रतीकात्मक दृश्य
भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में ARIN-AP की 11वीं वार्षिक बैठक आयोजित की जा रही है। यह प्रतिनिधि तस्वीर है।

दिल्ली में एआरआईएन-एपी (ARIN-AP) की 11वीं वार्षिक बैठक शुरू; भारत ने अपराधियों की संपत्तियां जब्त करने के साथ पीड़ितों को रकम लौटाने पर दिया जोर, ईडी ने कहा- अप्रैल 2024 से अब तक करीब 90% अंतरराष्ट्रीय सहायता अनुरोधों पर पूरी या आंशिक कार्रवाई

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए जुटाई गई रकम को विदेशों में छिपाने वाले अपराधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने के लिए भारत ने बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में सोमवार को एसेट रिकवरी इंटरएजेंसी नेटवर्क-एशिया पैसिफिक (ARIN-AP) की 11वीं वार्षिक आम बैठक शुरू हुई। भारत पहली बार इस नेटवर्क की वार्षिक बैठक की मेजबानी कर रहा है और वर्ष 2026 के लिए इसकी अध्यक्षता भी भारत के पास है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मेजबानी में 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलने वाली इस बैठक में 32 सदस्य क्षेत्राधिकारों और 10 पर्यवेक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा है- अपराधियों की अवैध कमाई का पता लगाने, उसे जब्त करने और अंततः पीड़ितों तथा सरकार को वापस लौटाने की प्रक्रिया को तेज करना।
ईडी ने स्पष्ट किया है कि अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितनी सूचनाएं साझा की गईं, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि सहयोग के बाद कितनी संपत्तियां वास्तव में जब्त हुईं और कितनी रकम पीड़ितों को वापस मिली।

ARIN-AP बैठक में अपराध की संपत्ति जब्त करने के बाद रकम लौटाने पर जोर क्यों?

बैठक के उद्घाटन सत्र में ईडी के निदेशक राहुल नवीन ने कहा कि संपत्ति की वसूली एक पूरी प्रक्रिया है, जिसमें चार प्रमुख चरण होते हैं- संपत्ति का पता लगाना, उसे सुरक्षित करना, जब्ती की कानूनी प्रक्रिया पूरी करना और फिर उसका प्रबंधन करते हुए उसे वापस लौटाना। किसी भी एक चरण में चूक होने पर पूरा मामला प्रभावित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरुआती जांच और सूचनाओं के आदान-प्रदान में सहयोग मजबूत हुआ है, लेकिन दूसरे देश में संपत्ति जब्त करने, विदेशी अदालतों के आदेश लागू कराने और संपत्ति या रकम वापस लाने में अब भी देरी होती है।
ईडी निदेशक ने नेटवर्क के सदस्य देशों से प्रस्ताव रखा कि वे ऐसे मामलों की संख्या का भी रिकॉर्ड रखें, जिनमें एआरआईएन-एपी के सहयोग से संपत्तियां वास्तव में जब्त की गईं और पीड़ितों या संबंधित सरकारों को वापस लौटाई गईं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के कानूनों में अंतर के बावजूद उद्देश्य एक ही है—अपराध से हासिल लाभ को अपराधियों के हाथों से निकालना।

अंतरराष्ट्रीय सहायता अनुरोधों पर ईडी ने क्या जानकारी दी?

बैठक में ईडी ने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आंकड़ा भी साझा किया। एजेंसी के मुताबिक, अप्रैल 2024 से अब तक उसे मिले सहायता अनुरोधों में करीब 90 प्रतिशत पर पूरी या आंशिक कार्रवाई की जा चुकी है। ईडी निदेशक ने बताया कि नेटवर्क का सीधा संपर्क व्यवस्था वाला मॉडल औपचारिक पारस्परिक कानूनी सहायता (Mutual Legal Assistance) प्रक्रिया का पूरक है। इससे जांच एजेंसियां दूसरे देशों में संपत्तियों के गायब या स्थानांतरित होने से पहले जरूरी सूचनाएं तेजी से हासिल कर सकती हैं। ईडी के पास बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संस्थाओं से सीधे जानकारी तथा रिकॉर्ड प्राप्त करने की वैधानिक शक्तियां हैं। इससे नेटवर्क के जरिए मिलने वाले अनुरोधों पर तेजी से खुफिया जानकारी साझा करने में मदद मिलती है।
ईडी ने यह भी कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA – Prevention of Money Laundering Act), 2002 के तहत भारत विदेशों में स्थित संपत्तियों को रोकने और जब्त करने का अनुरोध कर सकता है। कानून में समतुल्य मूल्य की संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है, ताकि अपराध की रकम विदेश भेज देने से उसकी वसूली असंभव न हो जाए।

ऑनलाइन बेटिंग, साइबर फ्रॉड और वर्चुअल एसेट्स पर क्या चर्चा होगी?

बैठक में ईडी निदेशक ने आर्थिक अपराधों के बदलते स्वरूप को भी रेखांकित किया। उनके मुताबिक, हाल के मामलों में अपराध से अर्जित रकम तेजी से सीमा पार जा रही है। इनमें अवैध ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म, साइबर धोखाधड़ी के जरिए जुटाई गई रकम को वर्चुअल एसेट्स में बदलना, पेमेंट एग्रीगेटर और पेमेंट गेटवे का दुरुपयोग, शेयरों की कीमतों में हेरफेर और विदेशों में रकम भेजने के लिए पेशेवर प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग जैसे मामले शामिल हैं।
बैठक के दौरान इन मामलों में सूचनाओं के तेजी से आदान-प्रदान, संपत्तियों की पहचान और उन्हें फ्रीज करने के तरीकों पर चर्चा की जा रही है।
29 सितंबर को होने वाले सत्रों में लाभार्थी स्वामित्व (Beneficial Ownership) संबंधी जानकारी, वर्चुअल एसेट्स को फ्रीज करने, इंटरपोल सिल्वर नोटिस और अनौपचारिक अनुरोधों के बाद औपचारिक कानूनी सहायता की प्रक्रिया पर चर्चा होगी। गैर-दोषसिद्धि आधारित संपत्ति जब्ती और जब्ती आदेशों के खिलाफ अपील से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में हैं।arin-ap2026

ARIN-AP क्या है और भारत इस नेटवर्क की अध्यक्षता कब तक करेगा?

आरआईएन-एपी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कानून प्रवर्तन और न्यायिक एजेंसियों के संपर्क अधिकारियों का एक अनौपचारिक नेटवर्क है। इसकी शुरुआत नवंबर 2013 में दक्षिण कोरिया में हुई थी। यह यूरोप के कारिन (CARIN – Camden Asset Recovery Inter-Agency Network) नेटवर्क की तर्ज पर बनाया गया है। इसका उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्तियों का पता लगाने और उनकी वसूली के लिए सदस्य देशों के बीच सीधे और तेजी से सूचनाओं तथा बेहतर कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना है। इसमें ऐसे देश भी सहयोग कर सकते हैं, जिनके बीच पारस्परिक कानूनी सहायता की संधि नहीं है।
नेटवर्क में 32 सदस्य क्षेत्राधिकार और 10 पर्यवेक्षक हैं। इनमें इंटरपोल, संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC – United Nations Office on Drugs and Crime), विश्व बैंक और अन्य क्षेत्रीय संपत्ति वसूली नेटवर्क शामिल हैं। भारत को 2024 में सिडनी में हुई बैठक के दौरान नेटवर्क के संचालन समूह में शामिल किया गया था और 2026 की अध्यक्षता सौंपी गई थी। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और मंगोलिया ने वार्षिक बैठकों की मेजबानी की थी।

भारत की अध्यक्षता में संपत्ति वसूली की दो प्राथमिकताएं क्या हैं?

ईडी निदेशक ने भारत की अध्यक्षता के तहत नेटवर्क के लिए दो प्राथमिकताएं तय की हैं- सहायता अनुरोधों पर तेजी से जवाब देना और मामलों को अंतिम नतीजे तक पहुंचाना। बैठक में वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF – Financial Action Task Force) के संपत्ति वसूली संबंधी संशोधित मानकों और अवैध वित्तीय प्रवाह के क्षेत्रीय रुझानों पर भी चर्चा होगी। 30 सितंबर को जब्त संपत्तियों के प्रबंधन और पीड़ितों को रकम लौटाने पर सत्र आयोजित होंगे। इसमें भारत का एक केस स्टडी भी शामिल होगा। बैठक के समापन पर 2027 के लिए नेटवर्क की अध्यक्षता भारत से सिंगापुर को हस्तांतरित की जाएगी।
ईडी के मुताबिक, इस बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच कार्यस्तरीय संबंध मजबूत करना, अनौपचारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज करना और अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के साथ उसे वास्तविक लाभार्थियों तक वापस पहुंचाने पर साझा रणनीति बनाना है।