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प्रधानमंत्री समझ ही नहीं रहे जनता उनसे क्या चाहती है : राहुल गांधी

अग्निपथ योजना, कृषि कानून, नोटबंदी और जीएसटी के विरोध का उदाहरण देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कि देश की जनता क्या चाहती है, ये बात प्रधानमंत्री नहीं समझते क्योंकि उन्हें अपने मित्रों की आवाज़ के अलावा कुछ सुनाई नहीं देता।

एक ट्वीट में केंद्र की अग्निपथ योजना, जिसका देश भर में विरोध देखने को मिल रहा है, पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने सीधे पीएम मोदी पर निशाना साधा है। इस ट्वीट में कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार की चार योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा – ‘अग्निपथ योजना को युवाओं ने नकारा, कृषि कानून को किसानों ने नकारा, नोटबंदी को अर्थशास्त्रियों ने नकारा, जीएसटी को व्यापारियों ने नकारा’। ‘

गांधी ने लिखा – ”देश की जनता क्या चाहती है इसके बाद भी पीएम मोदी नहीं समझ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने ‘मित्रों’ की आवाज़ के अलावा कुछ सुनाई नहीं देता है। राहुल इससे पहले भी अग्निपथ योजना को लेकर सरकार बोल चुके हैं।

उन्होंने एक दिन पहले ट्वीट में लिखा था – ‘ न कोई रैंक, न कोई पेंशन, न 2 साल से कोई सीधी भर्ती, न 4 साल के बाद स्थिर भविष्य, न सरकार का सेना के प्रति सम्मान। देश के बेरोजगार युवाओं की आवाज़ सुनिए, इन्हें ‘अग्निपथ’ पर चला कर इनके संयम की ‘अग्नि परीक्षा’ मत लीजिए, प्रधानमंत्री जी।’

राहुल ही नहीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी भी अग्निपथ योजना के विरोध में बोल चुकी हैं। उन्होंने भाजपा सरकार पर सेना की भर्ती को प्रयोगशाला बनाने का आरोप भाजपा सरकार पर लगाया था।

प्रियंका गांधी ने एक ट्वीट में कहा – ’24 घंटे भी नहीं बीते कि भाजपा सरकार को नई आर्मी भर्ती का नियम बदलना पड़ा। मतलब, योजना जल्दबाजी में युवाओं पर थोपी जा रही है। @narendramodi जी इस स्कीम को तुरंत वापस लीजिए। एयरफोर्स की रुकी भर्तियों में नियुक्ति और रिजल्ट दीजिए। सेना भर्ती को (आयु में छूट देकर) पहले की तरह कीजिए।’

राहुल गांधी का ट्वीट –
@RahulGandhi
अग्निपथ – नौजवानों ने नकारा
कृषि कानून – किसानों ने नकारा
नोटबंदी – अर्थशास्त्रियों ने नकारा
GST – व्यापारियों ने नकारा
देश की जनता क्या चाहती है, ये बात प्रधानमंत्री नहीं समझते क्योंकि उन्हें अपने ‘मित्रों’ की आवाज़ के अलावा कुछ सुनाई नहीं देता।

गहलोत का जादू बरक़रार

प्रदेश में राजयसभा की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में तीन पर जीत हासिल कर राजनीति के चाणक्य तथा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और ज़्यादा मज़बूत होकर उभरे हैं। कांग्रेस आलाकमान सोनिया गाँधी और अन्य दूसरे नेताओं की नज़र में गहलोत का क़द और बढ़ गया है। चुनावों को लेकर भले ही सियासत पैंतरे बदलती रही। लेकिन गहलोत को जीत को सहेजना था और साधना था, इसलिए उन्होंने हर चुनौती का सामना करते हुए सियासी शतरंज पर फ़तेह का परचम लहरा दिया। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पूरा भरोसा था कि चुनौतियों की कसौटी पर गहलोत ही खरे साबित हो सकते हैं। विश्लेषक कहते हैं कि यह अशोक गहलोत के शानदार उदय की अदभुत शुरुआत है। उन्होंने अपने आपको नयी भूमिका में स्थापित कर लिया है और राजस्थान में एक सुनहरे युग का सूत्रपात करने की डगर पर दमदार सफ़र शुरू कर दिया है। गहलोत के मिज़ाज और सियासी सूझबूझ का फ़लसफ़ा समझने की कोशिश करें, तो वे स्वभाव से विनम्र और अच्छे जन-सम्पर्क वाले राजनेता माने जाते हैं। उनकी सियासी सूझबूझ और गणित को समझना आसान नहीं है। फ़िलहाल तो बेचैनियाँ पायलट ख़ेमे में ही दिखायी देती हैं। क्योंकि सियासत के बाज़ीगर गहलोत की सियासी दानिशमंदी पर पकड़ बेमिसाल है।

यही नहीं, जादूगर के नाम से विख्यात गहलोत ने विरोधियों को एक बार फिर अपना लोहा मनवा दिया। अब विरोधियों के मुँह स्वत: ही बन्द हो गये। चुनाव से ठीक पहले तक भाजपा समर्थित उम्मीदवार सुभाष चंद्रा ने दावा किया था कि कांग्रेस ख़ेमे से आठ विधायक उसके पक्ष में मतदान करेंगे। लेकिन गहलोत ने अपनी जादुई कला से सभी 13 निर्दलीयों, बीटीपी के दो सीपीआईएम के दो और आरएलडी का एक मत लेने के साथ ही उलटा भाजपा में क्रॉस वोटिंग तक करवा दी। गहलोत ने चुनावों से पहले कई बार दावे किये थे कि उनके पास 126 मत हैं, जो अन्त तक रहेंगे। कांग्रेस के समर्थित सभी विधायक न तो बिके और न ही झुके। राज्यसभा के इस चुनाव की कमान ख़ुद अशोक गहलोत के अपने हाथों में रखी थी। कुछ विधायकों में जो नाराज़गी थी, उनको भी सुना और उसे दूर भी किया। उदयपुर में की गयी बाड़ेबंदी में भी अपने साथियों के बीच रहे और एक-एक विधायक से कई बार सम्पर्क भी किया। यहाँ तक कि मतदान के दौरान भी ख़ुद गहलोत एक एजेंट के रूप में बैठे और एक-एक मत पर नज़र भी रखी। राज्यसभा में प्रदेश की सभी 10 सीटों पर भाजपा का क़ब्ज़ा था; लेकिन अब गहलोत चाणक्य नीति से तीन पर कांग्रेस का क़ब्ज़ा हो गया। इस चुनाव अभियान में गहलोत ने न केवल बीमार विधायकों के घर या अस्पताल में जाकर मुलाक़ात की, बल्कि रोज़ाना उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा। जब गहलोत को पता लगा कि कांग्रेस के तीसरे प्रत्याशी प्रमोद कुमार तिवारी संकट में आ सकते हैं, तो उन्होंने अपने अनुभव और जादुई कला से भाजपा के वोटों में सेंध भी मारी और उसमें सफल भी हुए। भाजपा की विधायक शोभारानी का वोट कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद कुमार को जीता कर पिछले दो साल में ही मुख्यमंत्री अषोक गहलोत तीसरी बार हॉर्स ट्रेडिंग को मात दे दी। राजनीतिक हलक़ों में इसे गहलोत की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

प्रदेश में राज्यसभा में 10 सांसद थे, जिसमें सात भाजपा एवं तीन कांग्रेस से है। चार सांसद ओम माथुर, हर्षवर्धन सिंह, के.जे. अल्फांस एवं राजकुमार वर्मा का कार्यकाल 4 जुलाई को पूरा हो रहा था। ख़ाली हो रही इन्हीं चार सीटों पर 10 जून को चुनाव हुए थे। कांग्रेस के तीन और भाजपा के एक सीट जीतने से भी राज्यसभा में कांग्रेस सदस्यों की संख्या बढ़ गयी। यानी राज्यसभा में कांग्रेस का पलड़ा फिर से थोड़ा भारी हो गया है।

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी को और भाजपा ने घनश्याम तिवाड़ी को मैदान में उतारा था। इसके अलावा भाजपा ने निर्दलीय उम्मीदवार सुभाश चन्द्रा को समर्थन दिया था। चन्द्रा के चुनाव मैदान में आने से मुक़ाबला का$फी रोचक हो गया था। इसे बाद कांग्रेस-भाजपा ने ख़रीद-फरोख़्त के चलते क्रॉस वोटिंग के डर से अपने विधायकों की बाड़ेबंदी में ले लिया था। इसके बावजूद भाजपा विधायक शोभारानी कुशवाहा ने क्रॉस वोटिंग की। बताया जा रहा है कि कांग्रेस विधायक परसराम मोरदिया का वोट ख़ारिज हो गया। कांग्रेस ने माकपा, बीटीपी और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से तीनों सीटों पर बाज़ी मार ली।

मुख्यमंत्री के कंधे पर इस चुनाव की ज़िम्मेदारी थी। नाराज़गी के चलते चुनाव की घोषणा के साथ ही उन्होंने विधायकों को साधना शुरू कर दिया था। कुछ विधायकों की अपने ख़िलाफ़ बयानबाज़ी के बावजूद एक जादूगर की तरह उन्होंने सभी को साथ ले लिया। कांग्रेस के पास मात्र 108 वोट थे। ऐसे में 15 वोटों की और ज़रूरत थी। गहलोत ने बहुमत से भी अधिक 18 वोट जुटा लिये।

इस जीत के बाद अब वे प्रदेश में सरकार को और मज़बूती के साथ चलाएँगे। भाजपा में चुनाव की कमान किसी एक नेता के हाथ में नहीं थी। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ मिलकर सँभाल रहे थे। ये तीनों नेता अपने ख़ेमें से वोट क्रॉस होने से भी नहीं रोक सके। वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के लिए भी वोट नहीं जुटा सके।

भाजपा कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि धौलपुर विधायक शोभारानी कुशवाह पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ख़ास मानी जाती है। पूर्व मुख्यमंत्री राजे ने सन् 2017 में उप चुनाव के दौरान उन्हें भाजपा प्रत्याशी बनाकर जीत दर्ज की थी। उसे बाद सन् 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुँची। वर्ष 2020 में विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री राजे के समर्थक चार विधायक विधानसभा की वोटिंग से ग़ायब रहे। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बारे में कई तरह की अटकलें लगायी जाती रही है।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस केे लिए ये नतीजे बूस्टर डोज माने जा रहे हैं। क्योंकि कांग्रेस देश भर में बिखरी-बिखरी सी नज़र आ रही थी; लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान में न केवल एका रखा, बल्कि दूसरी पार्टियों और निर्दलियों को भी जोड़े रखा और नाराज़गी दूर की। इन नतीजों से कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं में जोश देखने को मिलेगा।

चंद्रा के दावे बेकार

राज्यसभा चुनाव हारे निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा ने वोटिंग से तीन दिन पहले यहाँ प्रेसवार्ता कर दावा किया था कि उनके पास भाजपा के तीस कांग्रेस के आठ और आरएलपी, अन्य दलों-निर्दलीयों के नौ विधायकों का समर्थन है; लेकिन चंद्रा के दावे फेल हो गये। भाजपा के पूरे 30 वोट तक उनको नहीं मिल पाये। कांग्रेस और अन्य दलों निर्दलीयों के वोट तो दूर की कौड़ी साबित हुए। सिर्फ़ आरएलपी के तीन वोट चंद्रा को मिल सके। आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने तीनों विधायकों के वोट देने के बाद कहा कि उन्होंने अपना वादा निभा दिया है।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि उनके पास 126 विधायकों का समर्थन है। कांग्रेस प्रत्याशियों को उम्मीद से ज़्यादा वोट मिले। तीनों प्रत्याशियों को कुल 127 वोट मिले। हालाँकि एक वोट ख़ारिज हो गया। इस वजह से वोट का आँकड़ा वापस 126 पहुँच गया। वहीं भाजपा और भाजपा समर्थित प्रत्याशी को 74 वोट मिलने के दावे थे; लेकिन 73 वोट ही मिल सके।

घनश्याम तिवाड़ी इस जीत से लम्बे समय बाद फिर से सियासत की मुख्यधारा में शामिल हो गये। तिवाड़ी 2020 में वापस पार्टी में तो आ गये थे; लेकिन उन्हें कोई बड़ी ज़िम्मेदारी नहीं दी गयी। अब तिवाड़ी को और भी ज़िम्मेदारियाँ मिल सकती हैं।
भाजपा ने अपने 71 विधायकों के वोट देने के लिए एक दिन पहले ही रणनीति तैयार कर ली थी। इसके तहत 41 वोट घनश्याम तिवाड़ी और तीस वोट निर्दलीय प्रत्याशी सुभाश चंद्रा को दिलवाने का निर्णय हुआ था। लेकिन क्रॉस वोटिंग को देखते हुए पार्टी ने वोट देने के दौरान ही अपनी रणनीति बदल दी। भाजपा प्रत्याशी घनश्याम तिवाड़ी को 41 वोट की जगह 43 भाजपा विधायकों के वोट डलवाये गये। सुभाश चंद्रा को 28 वोट डाले जाने थे; लेकिन शोभा रानी कुशवाहा का वोट कांग्रेस प्रत्याशी को चला गया। इस वजह से सुभाष चंद्रा को 27 वोट ही मिल सके। आरएलपी के तीन विधायकों ने ज़रूर चंद्रा को दिये, जिस वजह से उन्हें कुल 30 वोट मिले।

शोभा कुशवाहा के सवाल

कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद तिवाड़ी के समर्थन में मतदान करने पर पार्टी की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने पर धौलपुर की भाजपा विधायक शोभारानी कुशवाहा ने एक लिखित प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने भाजपा नेतृत्व से सवाल किये हैं।
उन्होंने इसमें कहा है कि वर्ष 2012 में धौलपुर उपचुनाव के लिए मैं और मेरा कुशवाहा समाज भाजपा के पास नहीं गये थे, बल्कि ये लोग ख़ुद चलकर के आये थे, और इन लोगों ने हमारे समाज के प्रदेश अध्यक्ष एवं ज़िम्मेदार 20 बुज़ुर्ग और युवाओं सामने कुछ कमिटमेंट किये थे, उनमें से एक कमिटमेंट पूरा नहीं हुआ। इसके अलावा धौलपुर नगर परिषद् चेयरमैन चुनाव में मेरे समर्थक और बीजेपी के जन्मजात कार्यकर्ता एवं अग्रवाल समाज के प्रदेश अध्यक्ष गिरीश गर्ग की बहू नगर परिषद् चेयरमैन का प्रत्याशी बनाया गया था। हमारे पास में जीतने के लिए संख्या भरपूर थी; लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने हमारे जीते हुए भाजपा पार्षदों को कांग्रेस को देकर कांग्रेस का चेयरमैन बनवा दिया, जिसकी जानकारी जयपुर से लेकर दिल्ली तक दी गयी; लेकिन उन बड़े नेताओं को बर्ख़ास्त करना तो दूर की बात है, उनके सामने किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उनको नोटिस भी दे सके।

उनका कहना है कि इसके अतिरिक्त हाल ही में सम्पन्न हुए पंचायत समिति चुनाव में मैंने धौलपुर पंचायत समिति से पंचायत समिति प्रधान के लिए लोधा समाज के नवल लोधा को भाजपा प्रधान प्रत्याशी बनाया था। लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने जानबूझकर अपने ही कार्यकताओं से उसको हरवा दिया। उनका कहना है कि भाजपा की तरफ़ से राज्यसभा चुनाव में केवल एक उम्मीदवार थे घनश्याम तिवाड़ी और हमको विश्वास पात्रों में न रखते हुए यह कहा गया कि आप लोगों को निर्दलीय उम्मीदवार को वोट करना है और वह भी उस व्यक्ति के लिए, जिसने 2014 में हमारे ख़िलाफ़ पूरे देश में अपने चैनल पर झूठी अफ़वाह फैलायी थी और वह व्यक्ति पैसे के दम पर पूरे नंबर न होने के बावजूद भी खुलेआम क्रॉस वोटिंग की चर्चा कर रहा था। ऐसे व्यक्ति को हमारे समर्थकों ने स्वीकार नहीं किया।

रामायण सर्किट पर 21 से चलेगी ‘भारत गौरव’ ट्रेन, 18 दिन में नेपाल की भी यात्रा

रेल मंत्रालय की भारत गौरव पर्यटक ट्रेन चलाने की योजना अब हकीकत बनने जा रही है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) भारत की पहली ‘भारत गौरव ट्रेन’ 21 जून से शुरू हो रही है। यह ट्रेन राजधानी दिल्ली से ‘रामायण सर्किट’ पर चलेगी और इसकी अवधि 18 दिन की होगी। यह ट्रेन केंद्र सरकार की ‘देखो अपना देश’ योजना का हिस्सा है और पहले सफर में 500 यात्री होंगे।

भारत गौरव ट्रेन रामायण सर्किट के स्वदेश में स्थित स्थलों के अलावा नेपाल स्थित जनकपुर में राम जानकी मंदिर का भ्रमण भी करवाएगी। आईआरसीटीसी की भारत गौरव ट्रेन में एसी तृतीय श्रेणी के कुल 10 कोच होंगे, जिसमें पहली यात्रा के बाद की यात्राओं में हर बार कुल 600 श्रद्धालु यात्रा कर सकेंगे।

इस ट्रेन का पहला पड़ाव श्रीराम के जन्म स्थान अयोध्या होगा और वहां से चलते हुए यह अपने अंतिम पड़ाव तेलंगना स्थित दक्षिण अयोध्या के नाम से जाने जाने वाले भद्राचलम पहुंचेगी। अपनी पूरी यात्रा के दौरान ट्रेन करीब 8000 किलोमीटर की यात्रा कर 18वें दिन दिल्ली वापस लौटेगी।

भारत गौरव पर्यटक ट्रेन, भारत सरकार की पहल ‘देखो अपना देश’ के तहत घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चलायी जा रही है। आईआरसीटीसी ने इस 18 दिन की यात्रा के लिए 62,370 रूपये प्रति व्यक्ति शुल्क निर्धारित किया है। भारत गौरव ट्रेन की इस पहली यात्रा के लिए आईआरसीटीसी प्रथम 100 यात्रियों की बुकिंग पर 10 फीसदी की डिस्काउंट देगा। भुगतान के लिए कुल राशि को 3,6,9,12,18 और 24 महीने की किस्तों में पूरा किया जाने का भी प्रावधान है। किस्तों की यह सुविधा डेबिट और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बुकिंग करने पर उपलब्ध रहेगी।

टूर पैकेज अंतर्गत यात्रियों को रेल यात्रा के अतिरिक्त स्वादिष्ट शाकाहारी भोजन, बसों द्वारा पर्यटक स्थलों का भ्रमण, एसी होटलों में ठहरने की व्यवस्था, गाइड और इंश्योरेंस आदि की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई है। कोविड को ध्यान में रखते हुए इस यात्रा की बुकिंग के लिए कम से कम 18 वर्ष की आयु होना जरूरी है साथ ही यात्री को कोविड टीके की दोनों डोज अनिवार्य होगी।

ट्रेन को भारत का गौरव के बहुरूपदर्शक के रूप में डिजाइन किया गया है। विश्व धरोहर पर आधारित पर्यटन को दर्शाती हुई रेल कोच की बाहरी दीवारों पर विश्व विरासत स्थलों से लेकर आधुनिक स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूनों को शामिल किया गया है। ट्रेन में दो डिब्बे विशेष रूप से प्राचीन आर्ट ऑफ लिविंग- योग को समर्पित है।

साथ ही ट्रेन में देश के विभिन्न शास्त्रीय और लोक नृत्य रूपों जैसे कथकली, भरतनाट्यम, भांगड़ा और गरबा को बढ़ावा देने के लिए बाहरी हिस्सा सुसज्जित किया गया है। कोच के बाहरी हिस्से में विभिन्न प्रांतों के परिधानों स्नेक बोट रेस, होला मोहल्ला, होली और बरसाना को भी प्रदर्शित किया गया है।

कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के चलते व्यवस्था चौपट

कांग्रेस के चल रहे विरोध -प्रदर्शन से दिल्ली की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो रही है। दिल्ली के लुटियन जोन में तो आने -जाने वाले लोगों के भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नई दिल्ली के कई पंच सितारा होटल में आने जाने वाले देशी -विदेशी सैलानियों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।कांग्रेसियों का कहना है कि कई नेताओं के घरों के बाहर पुलिस नजर रखे है कि वे प्रदर्शन में भाग न लें सकें।

कांग्रेस के नेता अमरीश गौतम का कहना है कि विरोध – प्रदर्शन तो लोकतांत्रिक देश में होते रहते है। जो लोगों के मौलिक अधिकार है। लेकिन देश में तानाशाही सरकार के चलते लोगों की आवाज दबाई जा रही है। उनका कहना है कि जानबूझकर लोगों के बीच ये मैसेज दिया जा रहा है कि कांग्रेस भ्रष्ट है। लेकिन देश वासी अब सब जान गये है कि देश में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है।ुनका कहना है कि देश जल रहा है। युवा छात्र अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे है। उस पर सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। उनका कहना है महगांई रिकार्ड तोड़ रही है।

गरीबों को अपने परिवार का जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है। उस पर सरकार राजनीति कर रही है।कांग्रेस के नेता पीयूष कुमार का कहना है कि अग्निपथ और अग्निवीर को लेकर देशभर आंदोलन चल रहे है। गाड़ियां और ट्रेने जलाई जा रही है। करोड़ों का नुकसान हो रहा है। जहां देखो वहां पर दंगे हो रहे है। लेकिन सरकार वहां पर स्थिति को नियंत्रित करने में असफल है।लेकिन कांग्रेस के विरोध के चलते सरकार कांग्रेसियों को परेशान कर रही है।

राजस्थान के सीएम गहलोत के भाई के ठिकानों पर सीबीआई के छापे

केंद्र सरकार पर सरकारी एजेंसियों को विरोधी दलों के खिलाफ इस्तेमाल करने के कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के आरोपों के बीच सीबीआई ने शुक्रवार सुबह राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत के कई ठिकानों पर छापे मारे हैं। यह भी अभी भी जारी हैं।

जानकारी के मुताबिक केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने मुख्यमंत्री के भाई अग्रसेन गहलोत के ठिकानों पर यह छापेमारी की है और अभी भी जारी है। सीबीआई के यह छापेमारी फर्टिलाइजर घोटाले के मामले में हुई है।

अग्रसेन इस मामले में जांच का सामना कर रहे हैं। अब उनके खिलाफ एक नया मामला दर्ज किये जाने की सूचना है। कई जगहों पर सीबीआई छापेमारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सीबीआई ने इस मामले में कुछ संदिग्धों पर नया मामला दर्ज किया है और इसी सिलसिले में यह छापेमारी हुई है।

देश के कई हिस्सों में फैला ‘अग्निपथ’ विरोध, ट्रेनों में आग और तोड़फोड़

मोदी सरकार की इस हफ्ते के शुरू में सेना में ‘अस्थाई भर्ती’ की लाई गयी अग्निपथ योजना का विरोध देश भर में फैलने लगा है। इसके बाद सरकार पर इस योजना के पुनर्विचार का दबाव बढ़ रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस योजना को सेना की गरिमा के खिलाफ बताया है वहीं देश के कई हिस्सों में युवा इसके विरोध करते हुए हिंसा पर उतर आए हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में कई जगह ट्रेनों में आगजनी की गयी है, वहीं गुरूवार को हिमाचल गए पीएम मोदी के यात्रा के दौरान धर्मशाला इलाके में इस योजना के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिले।

रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बलिया में भीड़ ने ट्रेन कोच में आग लगा दी और स्टेशन पर अन्य ट्रेनों में तोड़फोड़ की। योजना में बदलाव की मांग और पुरानी भर्ती प्रणाली के समर्थन में युवा लगातार तीसरे दिन यूपी और बिहार में सुबह से सड़कों पर डटे हुए हैं। सब जगह प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।

बिहार के बक्सर, समस्तीपुर, सुपौल, लखीसराय और मुंगेर और उत्तर प्रदेश के बलिया में प्रदर्शन की खबर है। कई जगह युवा रेल ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं समस्तीपुर में जम्मूतवी-गुवाहाटी एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बों में उपद्रवियों ने आग लगा दी है। ये हाजीपुर-बरौनी रेलखंड के मोहिउद्दीन नगर स्टेशन की घटना है। यूपी के बलिया में भीड़ ने दुकानों और रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है।

दरभंगा से नई दिल्ली जा रही संपर्क एक्सप्रेस में भी आग लगाने की रिपोर्ट्स हैं। प्रदर्शनकारियों ने पहले ट्रेन में तोड़फोड़ की, फिर आग लगा दी। आरोप हैं कि कुछ तत्वों ने ट्रेन में लूटपाट भी की है। बलिया में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठिया भांजी।

विरोध के बीच केंद्र सरकार ने पिछले कल अग्निवीर योजना में भर्ती की उम्र 21 साल से बढ़ाकर 23 साल करने का ऐलान किया था, लेकिन इसका प्रदर्शनकारी युवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उनकी मांग पुरानी भर्ती प्रणाली जारी रखने की है। वैसे यह आयुसीमा केवल एक बार के लिए ही बढ़ाई गई है और उसके बाद आयुसीमा 21 साल की ही रहेगी।

यूपी के बलिया में तोड़फोड़ के दौरान एक प्रदर्शनकारी घायल हुआ है। शहर के भृगु आश्रम इलाके में युवकों ने जमकर पथराव किया। फिरोजाबाद में अग्निपथ योजना के विरोध में शुक्रवार सुबह बसों में तोड़फोड़ की गई। बिहार में सड़क जाम करने के अलावा कई ट्रेनों में आग लगा दी गई है।

असम में बाढ़ से तबाही; 4 लोगों की मौत, सवा 11 लाख लोग प्रभावित

असम में मानसून शुरू हुई ही है और वहां बाढ़ ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। राज्य में बाढ़ और बारिश से पिछले 24 घंटे के दौरान चार लोगों की जान चली गयी जबकि इससे सूबे के 25 जिलों में सवा 11 लाख लोग प्रभावित हुए हैं जिनमें से कई को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा है।

नलबाड़ी जिले में रेलवे ट्रैक के बाढ़ के पानी से भर जाने के कारण देश को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाला रेल यातायात प्रभावित हुआ है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए शुक्रवार को कामरूप महानगर जिले में सभी शैक्षणिक संस्थान बंद के दिए गए हैं।

इस बार गुवाहाटी में औसत से 121 फीसदी ज्यादा बारिश अब तक हो चुकी है। गुवाहाटी में इस महीने अब तक 385.4 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि वहां औसतन 174 मिमी बारिश होती है। राज्य के कई जिलों में ब्रह्मपुत्र, मानस, पगलाड़िया, पुथिमारी, कोपिली और गौरांग नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जा चुका है।

नलबाड़ी में रेलवे ट्रैक में पानी भरने से जहां भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाला रेल यातायात प्रभावित हुआ है वहीं नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के मुताबिक, 6 ट्रेनों को फिलहाल पूर्ण रद्द जबकि 4 को आंशिक रूप से रद्द करने के अलावा 7 रेलगाड़ियों के मार्ग में परिवर्तन बदले गए हैं।

राज्य में बाढ़ ने खेती का भी जबरदस्त नुक्सान किया है और करीब 19782.80 हेक्टेयर फसली जमीन जलमग्न हो गई है। सरकार के मुताबिक 72 राजस्व मंडलों के तहत आने वाले 1,510 गांवों में बाढ़ की जद में हैं।

राष्ट्रीय शर्मिंदगी के क्षण

कश्मीर में अल्पसंख्यकों, प्रवासी श्रमिकों और कर्मचारियों की लक्षित हत्याओं के बाद उनका सुरक्षित स्थानों को पलायन हुआ है। स्थिति ठीक 1990 के दशक जैसी है। उस समय भी घाटी से बड़े पैमाने पर कश्मीर पंडितों का पलायन हुआ था। यह एक तरह से राष्ट्रीय अपमान है। यह सब कुछ तब हुआ है, जब कुछ दिन पहले ही वर्तमान सरकार ने अपने आठ साल के कार्यकाल को एक ऐसी सरकार के कार्यकाल के रूप में मनाया, जिसने भारतीयों का शर्म से सिर झुकने नहीं दिया। हालाँकि बहुत-से लोग इससे सहमत नहीं हैं और इस पर सवाल उठते रहे हैं।

ध्यान रहे, यह केवल कश्मीर तक सीमित नहीं है, जिसने हाशिये के तत्त्वों द्वारा जातीय संहार हम सभी के लिए शर्मिंदगी का कारण बना दिया है। केंद्र में सत्तारूढ़ दल के दो प्रवक्ताओं की इस्लाम के पैगंबर के बारे में बेहूदा टिप्पणियों ने भी एक तू$फान खड़ा कर दिया है।
इस अंक में कश्मीर पर हमारी कवर स्टोरी ‘दोराहे पर घाटी’ तहलका के श्रीनगर स्थित विशेष संवाददाता रियाज़ वानी की ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्ट है। हमारी दूसरी महत्त्वपूर्ण स्टोरी उत्तर प्रदेश के कानपुर ज़िले में साम्प्रदायिक दंगों पर है। दंगे उस समय हुए जब राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कानपुर (ग्रामीण) में एक समारोह में मौज़ूद थे, जो हिंसा स्थल से महज़ 100 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है। यह संयोग ही है कि प्रदेश सरकार राज्य की राजधानी में अनुकूल माहौल बताकर जब शीर्ष उद्योगपतियों से व्यावसायिक क्षेत्र में निवेश करने के लिए एक मेगा समारोह की मेज़बानी कर रही थी, तब यह सब हुआ। सरकार का दावा था कि उसने अपराध और अपराधियों का ख़ात्मा कर यह अनुकूल माहौल बनाया है। लेकिन वास्तव में देश को ऐसी स्थिति में रखने का जोखिम हम नहीं उठा सकते।

गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देशों या देश में ही ग़ुस्सा अब निलंबित भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली भाजपा के मीडिया सेल के निष्कासित प्रमुख के ख़िलाफ़ स्पष्ट था, जिन्होंने इस्लाम और उसके पैगंबर को लेकर प्रतिकूल टिप्पणियाँ कीं। यह तब हुआ, जब उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू क़तर में थे और इसके उपरान्त क़तर राज्य के उप अमीर (डिप्टी अमीर) ने अचानक भारतीय गणमान्य व्यक्ति के लिए आधिकारिक दोपहर के भोजन को रद्द कर दिया और भारतीय दूत को सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने के लिए बुलाया। यह ध्यान दिया जा सकता है कि जीसीसी देश न केवल 87 अरब डॉलर के व्यापार के चलते महत्त्वपूर्ण हैं, बल्कि उन नौकरियों के लिए भी महत्त्वपूर्ण हैं, जो वे भारतीय प्रवासियों को प्रदान करते हैं।

जबकि अरब आक्रोश हमारे बीच व्याप्त नफ़रत को ख़त्म करने के लिए एक सन्देश है, कश्मीर की स्थिति सभी हितधारकों को कट्टरपंथी समूहों को कमज़ोर और शान्ति से हासिल हुए लाभों को और आगे बढ़ाने का आह्वान करती है, न कि फिर से आतंकवाद के काले दौर की तरफ़ लौटने के लिए। काम कठिन है, क्योंकि कट्टरपंथियों ने अब और भयानक तरीक़े अपना लिए हैं, जिनमें गोली मारो और भागो की नीति शामिल है। उनका उद्देश्य एक को मारकर हज़ारों को आतंकित करना है। फ़िलहाल प्राथमिकता 30 जून से 11 अगस्त तक होने वाली अमरनाथ यात्रा में सुरक्षा पुख़्ता करने की है, ताकि भय और चिन्ता की भावना को दूर किया जा सके।

राष्ट्रपति चुनाव के बहाने एकजुट होता विपक्ष

राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेशी वाले दिन इसे ‘राजनीतिक बदला’ बताते हुए जिस तरह विरोध के लिए कांग्रेस के तमाम बड़े नेता ईडी दफ़्तर के बाहर जुटे, उससे यह ज़ाहिर हो गया है कि कांग्रेस अब मोदी सरकार के ख़िलाफ़ आर-पार की लड़ाई की तैयारी कर चुकी है। इधर कांग्रेस यह सब कर रही थी, उधर तृणमूल नेता ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव के बहाने विपक्ष के 22 नेताओं को 15 जून को दिल्ली में बैठक बुलाकर भाजपा के ख़िलाफ़ एकजुटता दिखाने की कोशिश की।

राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया इसी महीने के तीसरे पखवाड़े शुरू हो जाएगी, जब एनडीए और विपक्ष के उम्मीदवारों के नाम साफ़ हो जाएँगे। मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए विपक्ष राष्ट्रपति चुनाव को ज़रिया बनाना चाहता है। विपक्ष की कोशिश है कि किसी भी सूरत में भाजपा (एनडीए) को और वोटों का इंतज़ाम करने से रोका जाए। एनडीए के पास अभी राष्ट्रपति का चुनाव जीत सकने लायक वोट नहीं हैं। कांग्रेस सहित विपक्ष उस पर दबाव बनाये रखना चाहता है।

उधर राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष को एकजुट करने की कोशिशों के बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव भी राष्ट्रीय राजनीति में कूदने की तैयारी में जुट गये हैं। वह अपनी पार्टी टीआरसी का विस्तार करके उसे राष्ट्रीय स्वरूप देने की तैयारी कर रहे हैं। उधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार को सूचित किया है कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के साझे उम्मीदवार का समर्थन करेगी।

इस तरह विपक्ष राष्ट्रपति चुनाव के लिए अलग-अलग ही सही भाजपा के ख़िलाफ़ मज़बूत तैयारी करता दिख रहा है। महीने बाद ही राष्ट्रपति का चुनाव है, लिहाज़ा वार्ताओं का दौर शुरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस शरद पवार को राष्ट्रपति पद के लिए आगे करने के हक़ में है। ऐसा करके पार्टी एक तीर से दो निशाने साधना चाह रही है। एक, पवार के क़द को देखते हुए विपक्ष उनके नाम पर एकजुट हो सकता है। भाजपा के पास अभी भी राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए पूरे वोट नहीं हैं। ऐसे में पवार उस पर भारी पड़ सकते हैं।

पवार जीत जाते हैं, तो वे विपक्ष के साझे उम्मीदवार होते हुए भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के नेता के रूप में जीते हुए ही कहलाएँगे। निश्चित ही चुनाव हारना भाजपा के लिए बहुत बड़ा झटका होगा, भले वह किसी भी सूरत में यह चुनाव जीतना और वोटों का इंतज़ाम करना चाहेगी। यदि पवार जीत जाते हैं, तो यूपीए में प्रधानमंत्री पद का एक बड़ा दावेदार कम हो जाएगा।

सोनिया गाँधी ने जिस तरह पहले ही शरद पवार को आधिकारिक सन्देश भिजवाकर राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन की बात कही है, उससे विपक्ष के किसी और नेता का ममता शायद ही समर्थन कर पाएँ। कांग्रेस यूपीए के ही किसी वरिष्ठ नेता को राष्ट्रपति पद के लिए आगे करने की मंशा रखती रही है। यह देखना होगा कि शरद पवार का क्या रुख़ रहता है, क्योंकि वह उसी सूरत में मैदान में उतरेंगे यदि उनके जीतने की पक्की सम्भावना होगी।

इस बीच टीआरएस नेता और तेलंगना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव भी राष्ट्रीय राजनीति की चाह रखने लगे हैं। कई बार वे कांग्रेस के समर्थन में दिखते हैं, और कहते रहे हैं कि कांग्रेस के बिना विपक्षी एकता की कल्पना नहीं की जा सकती। भले तेलंगना की राजनीति में कांग्रेस उनकी विरोधी है, एक समय वह कांग्रेस के ही नेता रहे हैं। हाल में अपने दौरे के दौरान राहुल गाँधी ने उनकी सरकार की कुछ मुद्दों को लेकर आलोचना भी की थी।

राव जून के आख़िर तक अपनी पार्टी की घोषणा कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, इस पार्टी का नाम भी तय कर लिया गया है और यह भारतीय राष्ट्र समिति हो सकता है। पिछले पाँच-छ: महीने से राव अचानक सक्रिय हुए हैं और वे शरद पावर, ममता बनर्जी सहित कई बड़े नेताओं से मिल चुके हैं। राव को विश्वास है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलेगा और ऐसे में प्रधानमंत्री पद के लिए चंद्रशेखर, देवेगौड़ा या आई.के. गुजराल की तरह किसी को मौ$का मिल सकता है।

मतों का गणित
यह रिपोर्ट लिखे जाने समय तक राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए बहुमत के आँकड़े से क़रीब 13,000 मत (वोट) दूर है। पार्टी वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल पर निर्भर है। दोनों का समर्थन मिल जाता है, तो एनडीए उम्मीदवार की जीत का रास्ता साफ़ हो जाएगा। इन दोनों दलों ने 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राम नाथ कोविंद का समर्थन किया था।

राज्यों में कुल 4,790 विधायक हैं। उनके वोटों का मूल्य 5.4 लाख (5,42,306) होता है। सांसदों की संख्या 767 है, जिनके मतों का कुल मूल्य भी क़रीब 5.4 लाख (5,36,900) बैठता है। इस तरह राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल मत लगभग 10.8 लाख (10,79,206) हैं। एक विधायक के मत (वोट) का मूल्य राज्य की आबादी और विधायकों की संख्या के आधार पर तय होता है। सांसदों के मत का मूल्य विधायकों के मतों का कुल मूल्य को लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों की संख्या से भाग देकर तय होता है।

एनडीए के पास 5,26,420 मत हैं। यूपीए के हिस्से में 2,59,892 मत हैं। अन्‍य (तृणमूल कांग्रेस, वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल, सपा और वामपंथी) के पास 2,92,894 मत हैं। अगर वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल (43,500+31,700 मत) एनडीए के पाले में जाते हैं, तो उसका उम्मीदवार आसानी से जीत जाएगा, अन्यथा एनडीए को दिक़्क़त आएगी। कारण यह है कि हाल के महीनों में क्षेत्रीय दलों के साथ भाजपा के सम्बन्ध ख़राब हुए हैं। शिवसेना और अकाली दल उसके पाले से बाहर हैं।

अभी तक भाजपा विपक्ष के एकजुट नहीं होने से ताक़तवर दिखती। यदि विपक्ष एकजुट होता है, तो उसके लिए दिक़्क़त हो सकती है। विपक्षी दल एकजुट होने की कोशिश में दिख रहे हैं। ग़ैर-कांग्रेस उम्मीदवार बनाकर विपक्ष का काम नहीं चलेगा। ऐसे में सब साथ आते हैं, तो कुछ कमाल हो सकता है।

चर्चा में नाम
राष्ट्रपति पद के लिए अभी किसी भी पक्ष से कोई नाम सामने नहीं है। भाजपा से कुछ नाराज़ दिख रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का क्या रोल रहेगा, यह बहुत अहम होगा। विपक्ष में कुछ नेता उन्हें राष्ट्रपति पद का उमीदवार बनाने के हक़ में हैं। कोई हैरानी नहीं यदि कांग्रेस ग़ुलाम नबी आज़ाद का नाम आगे करे। केरल के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद $खान का नाम भी हाल में तेज़ी से चर्चा में आया है। ऐसे में जबकि भाजपा पर मुस्लिम-विरोधी होने के आरोप तेज़ी पकड़ रहे हैं, पार्टी आरिफ़ मोहम्मद ख़ान को राष्ट्रपति बनाकर विरोधियों को चुप करा सकती है। यदि किसी महादलित या दलित को राष्ट्रपति बनाया जाता है, तो राज्यसभा से बेदखल किये गये मुख़्तार अब्बास नक़वी उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बन सकते हैं। पार्टी किसी सिख को भी आगे कर सकती है। विपक्ष के पास शरद पवार, फ़ारूक़ अब्दुल्ला, मीरा कुमार, मनमोहन सिंह, मुलायम सिंह यादव, यहाँ तक कि मायावती भी हैं।

कश्मीर में पर्यटकों की धूम

ग़ैर-कश्मीरियों और कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याएँ ख़ूबसूरत घाटी में आने वाले पर्यटकों की भावना को कम करने में विफल रही हैं। एक तरह से कश्मीर में आने वाले पर्यटकों की बड़ी संख्या ने शान्तिभंग करने की कोशिश करने वालों को ठेंगा दिखाया है।
सन् 2021 में क़रीब 7,00,000 पर्यटकों के मुक़ाबले कश्मीर घाटी ने जनवरी और मई, 2022 के बीच 8,00,000 से अधिक पर्यटकों को अपनी मनमोहक उपस्थिति से आश्चर्यचकित और मंत्रमुग्ध कर दिया है। यह क्या दर्शाता है? कश्मीर के पर्यटन विभाग के निदेशक जी.एन. इट्टू कहते हैं कि विभाग ने कश्मीर में सभी मौसमों में पर्यटकों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। इट्टू ने कहा कि यह पहली बार है जब कश्मीर में वसंत के मौसम को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पिछले साल कश्मीर पर्यटन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के रूप में असामान्य ब्रांड एंबेसडर मिला। प्रधानमंत्री ने तब एक ट्वीट में कहा था- ‘जब भी आपको अवसर मिले, जम्मू-कश्मीर का दौरा करें और सुन्दर ट्यूलिप उत्सव देखें। ट्यूलिप के अलावा आप जम्मू-कश्मीर के लोगों के गर्मजोशी भरे आतिथ्य का अनुभव करेंगे।’

मोदी ने ट्वीट में इस जगह और इसके लोगों दोनों की विशिष्टता पर प्रकाश डाला। अमित शाह के जम्मू-कश्मीर दौरे के बाद के ट्वीट ने भी इसी तरह की भावनाओं को प्रतिध्वनित किया। आँकड़ों से पता चलता है कि जनवरी और फरवरी में 1,62,664 घरेलू पर्यटकों और 490 विदेशियों ने कश्मीर घाटी का दौरा किया। साल 2022 के पहले तीन महीनों के दौरान गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम में ब$र्फ का आनन्द लेने के लिए 3,00,000 से अधिक पर्यटक कश्मीर पहुँचे। उसके बाद श्रीनगर की डल झील के आसपास वसंत पर्यटन हुआ। अधिकारियों का कहना है कि श्रीनगर में जबरवान रेंज की तलहटी में कश्मीर के ट्यूलिप गार्डन में सीजन के खुलने के 10 दिन के भीतर 2,00,000 पर्यटक आये थे।

श्रीनगर हवाई अड्डे ने 4 अप्रैल को इतिहास में अब तक का सबसे व्यस्त दिन देखा, जब 15,014 लोग कश्मीर में 90 उड़ानों के जरिये आये और यहाँ से वापस गये। श्रीनगर में लगभग सभी होटलों के 60,000 कमरे, जो लगभग एक लाख पर्यटकों को समायोजित कर सकते हैं; जून के पहले सप्ताह तक बुक किये जा चुके थे। दरअसल कश्मीर में इस साल पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या देखी जा रही है। तीन साल की मंदी के बाद अकेले मार्च में क़रीब 2,00,000 पर्यटक घाटी में आये। उद्योग जगत के सूत्रों ने बताया कि इस बार इतनी भीड़ है कि इस साल जून के मध्य तक होटल पूरी तरह से बुक हो चुके हैं।

जम्मू और कश्मीर पर्यटन विभाग और केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के आँकड़ों से संकेत मिलता है कि जनवरी और 15 मई, 2022 के बीच पर्यटकों की संख्या बढ़कर 7,00,000 हो गयी, जो पिछले 10 साल में सबसे अधिक है। यह पिछले साल इसी अवधि में देखे गये 1,25,000 पर्यटकों से चार गुना से अधिक है। पर्यटन मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, अक्टूबर 2021 से मार्च 2022 के बीच कम से कम 80,00,000 लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश का दौरा किया। कश्मीर होटल्स एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष अब्दुल वाहिद मलिक ने कहा कि वर्तमान में श्रीनगर में 80-90 फ़ीसदी हाई-एंड (लग्जरी) होटल हैं।

श्रीनगर हवाई अड्डे के निदेशक कुलदीप सिंह ने कहा कि 28 मार्च को हमारे पास 7,824 यात्रियों के साथ 45 आगमन उड़ानें और 7,190 यात्रियों के साथ 45 प्रस्थान उड़ानें थीं। इस दौरान 15,014 यात्रियों के साथ कुल 90 उड़ानें इस हवाई अड्डे के इतिहास में सबसे ज़्यादा हैं।
कश्मीर में हाल के दिनों में ग़ैर-कश्मीरियों की लक्षित हत्याओं के बाद सोशल मीडिया पर हताश टिप्पणियों की बाढ़ आ गयी है, जो एक तरफ़ कश्मीर की बिगड़ती स्थिति और दूसरी तरफ़ ‘द कश्मीर फाइल्स’ फ़िल्म और इसी तरह के विषयों के बारे में बात करती हैं।
हालाँकि लक्षित हत्याओं की बाढ़ से बेपरवाह पर्यटकों ने इस गर्मी में रिकॉर्ड संख्या में घाटी का दौरा किया है। पिछले साल 7,00,000 पर्यटकों की थोड़ी शर्म के मुक़ाबले, कश्मीर घाटी ने जनवरी और मई 2022 के बीच 8,00,000 से अधिक पर्यटकों को देखा है। कश्मीर में पर्यटन फल-फूल रहा है। डल झील रंगीन शिकारों के एक व्यस्त शहर जैसा दिखता है। रिपोर्ट बताती हैं कि होटल तो फुल हैं ही, बाज़ार भी पर्यटकों से भरे हुए हैं और रेस्तरां में पैर रखने की जगह नहीं है। पर्यटक कश्मीरी व्यंजनों का आनन्द उठाते हुए सबसे अच्छे पल बिता रहे हैं।
अप्रैल, 2022 में घाटी में रिकॉर्ड 2.8 लाख पर्यटक आये, जो लगभग तीन दशक में सबसे अधिक हैं। पर्यटन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि भीड़ जून तक जारी रहेगी और पूरे साल पर्यटकों के आगमन में वृद्धि होगी। अब 30 जून से अमरनाथ यात्रा के बाद इस सीजन में आठ लाख से अधिक तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है।

गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम, डल झील और वुलर झील सहित पर्यटकों की अधिकतम संख्या को आकर्षित करने वाले मुख्य स्थलों के अलावा, राज्य पर्यटन विभाग ने 75 नये गंतव्य खोले हैं, जिनमें बुंगस, लोलाब, गुरेज और डोडी पथरी शामिल हैं।
साहसिक पर्यटन और साहसिक खेल गतिविधियों अधिक लोकप्रिय हो रही हैं, क्योंकि अधिक पर्यटक घाटी में अपने प्रवास के दौरान ट्रैकिंग, कैंपिंग, माउंटेन बाइकिंग, रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और हॉट एयर बैलून राइड का चयन कर रहे हैं। टूर ऑपरेटरों के हवाले से मीडिया रिपोट्र्स बताती हैं कि पर्यटकों का औसत प्रवास एक से दो सप्ताह का होता है।

पर्यटकों की भीड़ के बीच होटल के कमरे ढूँढना आसान नहीं है, क्योंकि वे दोगुनी दरों पर मिलते हैं। कश्मीर में पर्यटन की वापसी कोरोना वायरस के विकट प्रकोप के बाद की अवधि में शुरू हुई, जब प्रमुख भारतीय पर्यटन स्थल, केरल तक में पर्यटन को कोरोना वायरस ने बुरी तरह प्रभावित किया है। पर्यटन विभाग के अधिकारी इस सफलता का श्रेय आक्रामक मार्केटिंग, अखिल भारतीय प्रचार और प्रभावी कोरोना-प्रबंधन को देते हैं, जिसमें कैब ड्राइवरों से लेकर होटल मालिकों तक सभी हितधारकों का टीकाकरण हुआ है। सीधी शाम की उड़ानों की शुरुआत ने जम्मू-कश्मीर में पर्यटन के लिए एक मौक़ा दिया है और श्रीनगर के शेख़-उल-अलाम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रात की उड़ानों का संचालन शुरू हो चुका है। इस प्रकार यात्रियों को हर समय घाटी में प्रवेश करने की अनुमति मिलती है।

विभिन्न रिपोर्टों से पता चलता है कि कश्मीर घाटी में सामान्य स्थिति की भावना मज़बूत हुई है और ग़ैर-कश्मीरियों और कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्या आतंकवादियों द्वारा उभरती शान्ति और विश्वास को भंग करने के लिए हताशा का क़दम हो सकता है। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2021 से मार्च 2022 के बीच कम-से-कम 80 लाख लोगों ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। पर्यटन और संस्कृति सचिव सरमद हफ़ीज़ ने कहा कि चूँकि जम्मू-कश्मीर सरकार ने पर्यटन को प्राथमिकता के रूप में लिया है, इसलिए पर्यटकों को कश्मीर आने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पूरे भारत में विज्ञापन अभियान शुरू किये गये हैं। सरकार ने जम्मू-कश्मीर में 75 कम ज्ञात स्थलों की पहचान की है, जिनमें शीर्ष पर्यटन स्थल बनने की क्षमता है।

हालाँकि ज़्यादातर लोगों का कहना है कि विकास प्रक्रिया की शृंखला में बुनियादी ढाँचा एक कमज़ोर कड़ी बना हुआ है। जबकि मुख्य सड़कें उपेक्षा की स्थिति में हैं। यह ज्ञात है कि हर इन सड़कों को भारी हिमपात झेलना होता है, लिहाज़ा समस्या का कुछ समाधान खोजने की ज़रूरत है। अनियमित बिजली आपूर्ति और अन्य आधुनिक सुविधाओं की कमी भी बड़ा मुद्दा है। बुनियादी ढाँचे की कमी हमेशा पर्यटकों के लिए एक बाधा है और यह स्थिति जितनी जल्दी ठीक हो जाए, उतना अच्छा है। तनावपूर्ण सुरक्षा स्थिति अब इस दिशा में आवाजाही को रोकने का बहाना नहीं है। यदि पर्यटक और व्यावसायिक क्षमता का पूरी तरह से दोहन करना है, तो कश्मीर के लिए एक महत्त्वपूर्ण बदलाव देखना अनिवार्य है। यह समय है जब सभी वास्तविक हितधारक, जिनके मन में कश्मीर की भलाई है; जो उन लोगों को अलग-थलग करने में हाथ मिलाते हैं, जिनकी मंशा शत्रुतापूर्ण है।
यह परिपक्व होने और कड़ी मेहनत और महान् बलिदान के परिणामस्वरूप अर्जित लाभ को मज़बूत करने की दिशा में काम करने का समय है। जम्मू-कश्मीर को रचनात्मक योगदान की ज़रूरत है न कि अवसरवाद की। एक दर्दनाक अतीत को इस तरह से जीने या विलाप करने से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता है, जो एक उज्ज्वल भविष्य पर छाया हो। इसके बजाय यह आगे देखने और उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करने का समय है। लक्षित हत्याओं के दौरान भी पर्यटकों की आमद से पता चलता है कि कश्मीर बाधाओं के बावजूद पर्यटकों को लुभा सकता है।