AI की जंग में चीन का नया मोर्चा, दुनिया को मुफ्त AI मॉडल देने का ऐलान

शी जिनपिंग

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच चीन ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभाव को चुनौती देने वाला बड़ा कदम उठाया है। चीन ने ‘वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन’ (World AI Cooperation Organization) स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम शुरू करने की घोषणा की है। चीन का कहना है कि AI का विकास और शासन कुछ चुनिंदा देशों या कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका लाभ पूरी दुनिया को मिलना चाहिए।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि बीजिंग AI के क्षेत्र में अधिक न्यायसंगत और समावेशी वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि चीन जुलाई में शंघाई में होने वाले विश्व AI सम्मेलन के दौरान वैश्विक AI सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए नए प्रस्तावों पर चर्चा करेगा। चीन ने सभी देशों को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया है।

रिपोर्टों के अनुसार, चीन विशेष रूप से BRICS और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों के माध्यम से AI सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। बीजिंग का दावा है कि वह विकासशील देशों के साथ AI तकनीक, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहयोग करने को तैयार है, ताकि तकनीकी असमानता कम की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और चीन के बीच AI तकनीक, उन्नत चिप्स और डिजिटल प्रभुत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। अमेरिका ने हाल के वर्षों में चीन पर कई तकनीकी प्रतिबंध लगाए हैं, जबकि चीन लगातार अपने AI इकोसिस्टम को मजबूत करने में जुटा है।

हालांकि चीन ने सीधे तौर पर G7 देशों का नाम नहीं लिया, लेकिन उसकी यह पहल वैश्विक AI शासन के लिए पश्चिमी मॉडल के विकल्प के रूप में देखी जा रही है। चीन का तर्क है कि AI मानवता की साझा संपत्ति होनी चाहिए और इसके नियम सभी देशों की भागीदारी से तय होने चाहिए, न कि कुछ शक्तिशाली देशों द्वारा।