
₹5 करोड़ का ‘जिंदा माल’, एक काली थार और 4000 किलोमीटर दूर का घर: ओडिशा के जंगल में मिले ओरंगुटानों का रहस्य अब इंटरनेशनल हो गया
भुवनेश्वर। ओडिशा के बालेश्वर जिले के भोगराई-भिचित्रपुर जंगल से 8 सितंबर की सुबह जब वन विभाग की टीम को पांच नन्हे ओरंगुटान मिले, तो किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह मामला कितना बड़ा निकलेगा। ये 1-1.5 साल के शावक अपनी मां से बिछड़े हुए थे और सबसे बड़ी बात: ओरंगुटान भारत में पाए ही नहीं जाते। इनका असली घर सुमात्रा और बोर्नियो के जंगल हैं, वहां से हजारों किलोमीटर दूर । तो ये कैसे पहुंचे यहां? यही सवाल अब STF और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त जांच की धुरी है।
दीघा के होटल में ₹5 करोड़ की संदिग्ध डील
जांच के नए खुलासे चौंकाने वाले हैं। जांच एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि पश्चिम बंगाल के दीघा में एक होटल में इन शावकों की बिक्री का सौदा हुआ था। शुरुआती अनुमान में हर शावक की कीमत 20-25 लाख रुपये बताई गई थी, लेकिन जांच में यह रकम बढ़कर प्रति शावक करीब ₹1 करोड़ तक पहुंची थी यानी पांचों का सौदा कुल ₹5 करोड़ का । होटल रजिस्टर में 22 लोगों के दर्ज होने की बात है, जिनमें तीन नामों पर सबसे ज्यादा शक है एक संदिग्ध का कथित कनेक्शन हावड़ा से जुड़ा मिला है। जांच एजेंसियों को नकली पहचान दस्तावेज़ भी मिले हैं, जो संभवतः कोलकाता में बनाए गए थे; हावड़ा और अन्य जगहों पर छापेमारी जारी है।
रात 10:56 बजे काली थार, फिर जंगल का रास्ता
सीसीटीवी फुटेज इस मामले का सबसे बड़ा गवाह बन रही है। जांच एजेंसियों के पास ऐसे सुराग मिले हैं कि रात लगभग 10:56 बजे एक काली थार, जिस पर पर्दे/ढकन लगे थे, भिचित्रपुर की ओर बढ़ी और करीब 11 बजे वह जंगल की ओर गई और लौट आई । दीघा से बालेश्वर के बीच करीब 186 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जांची जा रही है; एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों की फुटेज भी देखी जा रही है । मरीन पुलिस स्टेशन की जांच इसलिए की जा रही है कि शावक शायद जहाज़ों या ट्रॉलरों के जरिए समुद्री रास्ते से लाए गए थे ।
वन्यजीव विशेषज्ञ सुरेश पट्नायक का मानना है कि यह किसी रैकेट का काम है शायद ट्रॉलर चलाने वाले स्थानीय मछुआरों की मदद से तस्करी हुई, और ओडिशा में दाखिल होने के बाद तस्कर रास्ता भटक गया या जानवरों को संभाल नहीं पाया, इसलिए उसने इन्हें जंगल में छोड़ दिया । पूर्व पुलिस अधिकारी सरत चंद्र साहू इससे भी बड़ा सवाल उठाते हैं बालेश्वर अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी का केंद्र रहा है, और यहां विदेशी जानवरों का मिलना सुरक्षा तंत्र की बड़ी चूक भी है और इंटरनेशनल वन्यजीव तस्करी रैकेट का संकेत भी । मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने वन विभाग, अपराध शाखा, केंद्रीय एजेंसियों और WCCB को साथ लेकर कठोरतम कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इंडोनेशिया ने मांगे शावक वापस, ओडिशा ने कहा- पहले डीएनए टेस्ट
केस अब दो देशों की कूटनीति तक पहुंच गया है। इंडोनेशिया के वन मंत्रालय ने भारत की CITES मैनेजमेंट अथॉरिटी को पत्र लिखकर घटना की जानकारी और शावकों की डिटेल मांगी है, और कहा है कि अगर जेनेटिक जांच में इनका इंडोनेशियाई होना साबित हुआ, तो वह वापसी के सभी इंतजाम जल्द करने को तैयार है । मंत्रालय के प्रवक्ता रिस्तियांतो प्रिबादी ने बताया कि शारीरिक लक्षणों के आधार पर ये सुमात्रन ओरंगुटान होने के शक में हैं ।
लेकिन ओडिशा के अधिकारियों का रुख फिलहाल सावधानी भरा है। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के अधिकारियों का कहना है कि अभी डीएनए जांच ही नहीं हुई है, इसलिए यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि ये शावक इंडोनेशिया से आए हैं पहली प्राथमिकता इनकी सर्वाइवल है । खून और डीएनए सैंपल लिए जाएंगे, जिनसे पता चलेगा कि ये एक ही मां की संतान हैं या नहीं, उनकी असली उम्र और प्रजाति क्या है, और कोई इन्फेक्शन तो नहीं शावकों के शरीर में कीड़े भी पाए गए हैं । ओडिशा सरकार ने सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से इन्हें नंदनकानन में ही रखने की इजाज़त मांगी है, जवाब का इंतजार है । फिलहाल पांचों शावक टेम्परेचर-कंट्रोल्ड कमरे में क्वारंटीन में हैं और धीरे-धीरे स्थानीय माहौल से अनुकूल हो रहे हैं ।
असली सवाल अब भी वही है ये नन्हे ‘जिंदा खजाने’ लाखों की दूरी तय करके बालेश्वर के जंगल कैसे पहुंचे, और इतना बड़ा सौदा किस खरीदार तक पहुंचाया जाना था? जवाब 186 कैमरों की फुटेज और एक काली थार के मालिक के भेद में छिपा है।



