
वाराणसी (बीएचयू), 2 अक्टूबर 2026
अनिश्चितकालीन धरने का 10वां दिन: प्रतीकात्मक शव बनकर छात्रों ने जताया आक्रोश
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्रों की सुरक्षा, परिसर की व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी समस्याओं से जुड़ी 10-सूत्रीय मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की बीएचयू इकाई द्वारा चलाया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को दसवें दिन भी जारी रहा। मांगों पर अब तक ठोस कार्रवाई न होने के विरोध में अभाविप कार्यकर्ताओं ने विश्वनाथ मंदिर परिसर के समीप प्रतीकात्मक शव प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता प्रतीकात्मक रूप से शव बनकर लेटे और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया।
पल्लव सुमन: छात्र सुरक्षा किसी भी विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता
बीएचयू इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा, “अनिश्चितकालीन धरने का आज दसवां दिन है, लेकिन छात्रों की जायज मांगों पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। छात्र सुरक्षा किसी भी विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जब छात्रों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार आंदोलन करना पड़े, तो यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हमारी प्रमुख मांग है कि चीफ प्रॉक्टर अपने पद से इस्तीफा दें और परिसर में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। प्रशासन को छात्रों की आवाज सुनते हुए उनकी मांगों पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।”
अनुराग तिवारी: सीसीटीवी, स्ट्रीट लाइट और संवाद जरूरी
इकाई मंत्री अनुराग तिवारी ने कहा, “विश्वविद्यालय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी छात्रों को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, सीसीटीवी कैमरों एवं पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करने, अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगाने तथा मधुबन पार्क की स्वच्छता और समुचित रखरखाव जैसे विषयों पर गंभीरता से काम किए जाने की आवश्यकता है। छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद और जवाबदेही के माध्यम से होना चाहिए।”
10-सूत्रीय मांगों में क्या-क्या शामिल
उन्होंने कहा कि अभाविप की 10-सूत्रीय मांगों में चीफ प्रॉक्टर एवं प्रॉक्टोरियल बोर्ड के संबंध में कार्रवाई, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज मामलों एवं दंडात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा, छात्रों के कथित उत्पीड़न पर रोक, परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाना, छात्रावासों एवं सार्वजनिक स्थलों की व्यवस्थाओं में सुधार तथा छात्रहित से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। साथ ही सभागार आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, परिसर में मादक पदार्थों के सेवन पर प्रभावी रोक तथा छात्रों से संबंधित अनुशासनात्मक समितियों की कार्यप्रणाली को सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
आश्वासन नहीं, समयबद्ध कार्रवाई चाहिए
अभाविप ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की मांगों पर केवल आश्वासन देने के बजाय समयबद्ध और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। अभाविप ने स्पष्ट किया कि जब तक 10-सूत्रीय मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। प्रतीकात्मक शव रख के छात्रों ने प्रदर्शन किया है।
प्रशासन का पक्ष अभी सामने नहीं आया
पीआरओ महोदय को फोन करने पर उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। यानी फिलहाल इस विवाद पर विश्वविद्यालय प्रशासन का औपचारिक बयान यह खबर में शामिल नहीं है।



