साइबर फ्रॉड में एयरटेल का डिस्ट्रीब्यूटर गिरफ्तार; गिरोह तक पहुंची सीबीआई, 700+ सिम कार्ड एक ही डिस्ट्रीब्यूटर से जारी

साइबर फ्रॉड में एयरटेल का डिस्ट्रीब्यूटर गिरफ्तार; गिरोह तक पहुंची सीबीआई
सीबीआई ने बिहार और ओडिशा में 10 ठिकानों पर छापेमारी कर एयरटेल के एक एरिया डिस्ट्रीब्यूटर को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर 700 से अधिक सिम कार्ड फर्जी तरीके से जारी कर अवैध सिम बॉक्स को उपलब्ध कराने का आरोप है।यह सांकेतिक फोटो-एआई है।

रिपोर्ट: एम. रियाज़ हाशमी

बिहार-ओडिशा में 10 ठिकानों पर छापेमारी; 1300 सिम कार्ड बरामद, 73 ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों से कनेक्शन; ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग सामने आया

नई दिल्ली — 12 सितंबर, 2026 केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अवैध सिम बॉक्स के जरिए साइबर फ्रॉड को अंजाम देने वाले नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एयरटेल के एक एरिया डिस्ट्रीब्यूटर को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड फर्जी तरीके से जारी कर उन्हें अवैध सिम बॉक्स संचालन के लिए उपलब्ध कराने का आरोप है। सीबीआई के मुताबिक, यह कार्रवाई बिहार के वैशाली और ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में 10 ठिकानों पर की गई तलाशी के बाद हुई है। तलाशी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप और सिम कार्ड समेत कई डिजिटल और आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।

एक सिम बॉक्स से जुड़े 73 साइबर क्राइम केस

सीबीआई जिस मामले की जांच कर रही है, वह मूल रूप से बिहार के सुपौल जिले में पिछले साल सामने आए अवैध सिम बॉक्स ऑपरेशन से जुड़ा है। बाद में बिहार सरकार ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया था। जांच के दौरान उस मकान से 1300 से अधिक सिम कार्ड बरामद हुए थे, जहां सिम बॉक्स संचालित किया जा रहा था। इन सिम कार्ड से जुड़े डेटा का व्यापक विश्लेषण करने पर सीबीआई को पता चला कि यह अवैध सिम बॉक्स ऑपरेशन पूरे देश में साइबर अपराध के कम से कम 73 मामलों से जुड़ा हुआ था। इनमें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए ठगी के मामले भी शामिल हैं।

1300 सिम कार्ड की पड़ताल में बिहार-ओडिशा कनेक्शन

सीबीआई ने बरामद 1300 से अधिक सिम कार्ड से जुड़े रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि इनमें बड़ी संख्या में सिम कार्ड बिहार और ओडिशा से जारी किए गए थे। इनमें से 700 से अधिक सिम कार्ड वैशाली जिले में एयरटेल के एक एरिया डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए जारी किए गए थे। सीबीआई के अनुसार, संबंधित डिस्ट्रीब्यूटर ने एक दर्जन से अधिक सिम कार्ड प्वाइंट ऑफ सेल के क्रेडेंशियल्स का कथित तौर पर दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी किए और बाद में उन्हें अवैध सिम बॉक्स ऑपरेशन में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया।

लोगों को पता नहीं, उनके नाम पर सिम कार्ड जारी

जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। सीबीआई के अनुसार, कई ऐसे सब्सक्राइबर सामने आए जिन्होंने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उनके नाम पर सिम कार्ड जारी किए गए हैं। सीबीआई के मुताबिक, कुछ मामलों में लोगों को किसी वास्तविक उद्देश्य के लिए सिम कार्ड लेने के दौरान ई-केवाईसी के लिए कई बार खुद को अधिकृत करने के लिए धोखा दिया गया, जबकि कुछ मामलों में किसी दूसरे उद्देश्य के लिए एकत्र किए गए उनके बायोमेट्रिक डेटा का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। इस तरह वैध ग्राहकों की पहचान और केवाईसी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर ऐसे सिम कार्ड तैयार किए गए, जिन्हें बाद में अवैध सिम बॉक्स के जरिए साइबर अपराधों में इस्तेमाल किया गया।

10 ठिकानों पर छापे, डिवाइस और सिम कार्ड जब्त

सीबीआई ने मामले की जांच के तहत वैशाली जिले के साथ-साथ ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में कुल 10 स्थानों पर तलाशी ली। इन तलाशी अभियानों के दौरान विभिन्न डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप और सिम कार्ड समेत आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। सीबीआई अब इन बरामद सामग्रियों और सिम कार्ड से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क तथा उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, बीएनएस के तहत जबरन वसूली, पहचान की चोरी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कंप्यूटर संबंधी अपराध और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2022 के तहत अपराधों की जांच की जा रही है।

सीबीआई की चेतावनी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई अवधारणा नहीं

एजेंसी ने लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर भी सतर्क किया है और कहा है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी अवधारणा नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों के नाम पर पैसे मांगने वाली कॉल या फर्जी निवेश योजनाओं के झांसे में न आएं।