राघवेंद्र द्विवेदी

नई दिल्ली : 29 जुलाई को राज्यसभा में वंदे मातरम् बिल पास होने के अगले ही दिन यानी आज 30 जुलाई को लोकसभा में भी पास हो गया। दोनों सदनों से पास होने के बाद अब ये बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और कानून बनने के बाद राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रगान जैसा कानूनी सुरक्षा मिलेगी। कानून बनने के बाद वंदे मातरम का अपमान करना भारी पड़ेगा। जो भी अपमान करेगा दंडनीय अपराध के दायरे में आएगा और दोषी को सज़ा दी जाएगी।
वंदे मातरम् गाए जाने के दौरान व्यवधान उत्पन्न करना या किसी को वंदे मातरम् गाने से रोकना भी दंडनीय अपराध माना जाएगा। अगर सजा की बात करें तो सजा का प्रावधान राष्ट्रगान के अपमान करने पर मिलने वाली सजा जैसा ही होगा। वंदे मातरम् का अपमान करने पर तीन साल तक की जेल, आर्थिक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यही सजा राष्ट्रगान का अपमान करने पर भी होती है। अभी तक सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान जन गण मन को कानूनी सुरक्षा मिली हुई थी लेकिन अब इस लिस्ट में वंदे मातरम भी जुड़ जाएगा।
‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ के पारित होने के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “विरोध करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन वंदे मातरम बिल का विरोध करना ठीक नहीं। वंदे मातरम भारतीय स्वतंत्रता का अहम हिस्सा और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ा है, लिहाजा इसकी जितनी तारीफ की जाए, कम है।
बिल पर चर्चा के दौरान कुछ विपक्षी दलों ने राज्यसभा में विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट भी किया था। विपक्ष का कहना था कि इस तरह के कानून की आवश्यकता पर जितनी चर्चा होनी चाहिए उतनी नहीं हुई, व्यापक चर्चा की जरूरत थी। दूसरी तरफ सरकार ने बिल को राष्ट्रीय सम्मान से जोड़ते हुए बिल पास होने के बाद कानून बनने को मौजूद दौर की आवश्यकता बताया। राज्यसभा में बिल पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का विषय दलगत राजनीति से ऊपर होना चाहिए। लोकसभा से पास होने पर एनडीए के सांसदों ने खुशी जताते हुए इसे निर्णायक कदम बताया।
