
कानपुर (उत्तर प्रदेश): शहर के दिग्गज दवा कारोबारी विनीत मिनोचा (63) की बेरहमी से की गई हत्या की जांच में जो परतें खुल रही हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। जिस बहू को परिजनों की लाश पर फूट-फूटकर रोते देखा गया था, पुलिस के सामने उसी की पूछताछ में पूरी साजिश खुल गई। वारदात का सबसे बड़ा सबूत बना एक फोन रिकॉर्ड — हत्या से पहले के 21 दिनों में परिवार और पुराने नौकर के बीच हुई करीब 330 कॉल।
5 सितंबर की रात क्या हुआ था?
कानपुर के पॉश इलाके कल्याणपुर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में पिछले शनिवार देर रात 11:28 बजे के आसपास विनीत मिनोचा अपने फ्लैट में अकेले थे। इसी बीच दो हमलावर घर में घुसे और चाकू से 26 वार कर दहशत में डूबा दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला रेते जाने की भी पुष्टि हुई है। अगली सुबह पार्टी से लौटे बेटे-बहू को खून से लथपथ शव मिला। घर से न कोई नकदी गायब थी, न ज्वेलरी — इसी संकेत ने पुलिस की जांच परिवार के अंदर मोड़ दी।
साजिश की बिसात कैसे बनी?
जांच एजेंसियों के अनुसार, बहू शालू (36) अपने ससुर से खुश नहीं थी। विनीत मिनोचा बहू की हर हरकत पर CCTV से नजर रखते थे और पैसे भी सिर्फ उतने ही देते थे, जितनी जरूरत हो। बताया जाता है कि देर रात घूमने और पार्टी की आदतों को लेकर भी घर में तनाव बना रहता था। इसी नाराजगी का अंजाम था कि शालू ने साल भर पहले चोरी के आरोप में निकाले गए पुराने नौकर विशाल गौतम (30) से संपर्क किया और 6 लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या की साजिश रची।
पुलिस के मुताबिक, योजना के तहत शालू ने विशाल को फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी भी दी थी। पहले तो यह सोचा गया था कि हत्या को हार्ट अटैक जैसी सामान्य मौत दिखाया जाए, लेकिन बाद में हमलावर फ्लैट में घुसकर सीधे वारदात को अंजाम दे गए। सोसाइटी के गार्ड ने भी पुलिस को बताया कि उस रात ‘मैडम’ के फोन करने पर ही उसने दोनों शख्सों को दवा लेकर आने के बहाने अंदर जाने दिया था।
330 कॉल कैसे बने जांच की धुरी?
कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगालने पर सामने आया कि हत्या से पहले के 21 दिनों में शालू और उसके पति सुब्रत का पुराने नौकर विशाल से लगातार संपर्क रहा — शालू की तरफ से करीब 30 बार और सुब्रत की तरफ से करीब 300 बार, यानी कुल मिलाकर करीब 330 कॉल। हत्या वाले दिन सुबह 9 बजे से देर रात तक शालू और विशाल के बीच 14 बार बातचीत हुई। इन्हीं सबूतों के आगे टिक नहीं सकी शालू और उसने साजिश स्वीकार कर ली।
ध्यान देने वाली बात यह है कि 330 कॉल में से 300 कॉल सुब्रत की तरफ से हैं। सुब्रत की ओर से यह दलील दी गई है कि विशाल घर के छोटे-मोटे और बाहरी काम निपटाता था, इसलिए लगातार संपर्क जरूरी था। पुलिस अभी तय कर रही है कि इन कॉलों का कितना हिस्सा रोजमर्रा के कामकाज से जुड़ा था और कितना हत्या की तैयारी से। बेटे की संलिप्तता का कोई ठोस सबूत अभी नहीं मिला है, लेकिन वह जांच के दायरे में बना हुआ है।
तीनों आरोपी गिरफ्तार
कानपुर पश्चिम के डीसीपी एसएम कासिम आब्दी के नेतृत्व वाली टीम ने एनकाउंटर के बाद विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर (30) को पकड़ा, दोनों को पैर में गोली लगी थी। वारदात के महज 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपी — शालू, विशाल और राजकिशोर — जाल में आ चुके थे और अब तीनों जेल भेज दिए गए हैं। पुलिस केरेक्ट्री, सीसीटीवी फुटेज और गार्ड के बयान को मिलाकर साक्ष्यों को दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।


