
— मोहिनी सेंगर
नई दिल्ली — 16 सितंबर, 2026 – 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। 2014 में जब नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आए, उसी दौर में भारतीय इंटरनेट पर राजनीतिक मीम्स भी तेजी से अपनी जगह बना रहे थे। ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ जैसे चुनावी नारों को लोगों ने फिल्मों, पॉप कल्चर और रोजमर्रा की बातचीत से जोड़कर मीम्स में बदलना शुरू किया। उस समय Facebook और Twitter राजनीतिक हास्य के बड़े मंच थे। 2014 के चुनावों को मीडिया ने भारत का ‘social media election’ भी कहा था।
2014: ‘नमो’ सिर्फ नेता नहीं, Meme Material भी
2014 में मोदी की सोशल मीडिया मौजूदगी तेजी से बढ़ी। The Indian Express के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान Facebook पर उनके फैन बेस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और चुनाव खत्म होने तक यह करीब 1.4 करोड़ तक पहुंच गया था। इसी दौर में मोदी से जुड़े मजेदार पोस्ट, फोटो एडिट और चुनावी चुटकुले खूब शेयर हुए। यानी राजनीति और इंटरनेट ह्यूमर का जो मेल आज सामान्य लगता है, उसकी शुरुआती लोकप्रिय तस्वीर इसी दौर में दिखाई देने लगी थी।
विदेश दौरे और ‘Modi in Snow’ वाला दौर
सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री के विदेशी दौरे भी इंटरनेट मीम्स का हिस्सा बनने लगे। मोदी की अलग-अलग देशों में तस्वीरों को भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने फिल्मों, क्रिकेट और पॉप कल्चर के संदर्भों के साथ जोड़ना शुरू किया। 2020 में प्रकाशित एक अकादमिक अध्ययन ने भी मोदी से जुड़े मीम्स में विदेशी यात्राओं, योग, विदेशी नेताओं से मुलाकात और नोटबंदी जैसे विषयों को प्रमुख meme themes के तौर पर दर्ज किया।
नोटबंदी से योग तक, हर बड़े Moment का Meme
2016 की नोटबंदी के बाद मोदी की तस्वीरों और भाषणों को लेकर इंटरनेट पर खूब मीम्स बने। कभी फैसलों पर टिप्पणी के लिए, तो कभी उनके हाव-भाव और भाषणों को रोजमर्रा की स्थितियों से जोड़ने के लिए। इसी तरह योग दिवस की तस्वीरें भी meme culture का हिस्सा बनीं। बाद में मोदी की तस्वीरें बाकायदा ‘meme templates’ की तरह इस्तेमाल होने लगीं, यानी एक ही फोटो पर अलग-अलग संदर्भों में नए टेक्स्ट लगाए जाने लगे।
2019: मीम बना चुनावी हथियार
2019 के लोकसभा चुनाव तक राजनीतिक मीम्स सिर्फ मजाक या मनोरंजन तक सीमित नहीं रहे। ThePrint की रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक दलों ने पहली बार वोटरों, खासकर युवा और first-time voters तक पहुंचने के लिए memes का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। मोदी को लेकर बनाए गए memes में समर्थक उन्हें मजबूत नेता के रूप में पेश करते थे, जबकि विरोधी खेमे के memes उनके खिलाफ राजनीतिक आलोचना का माध्यम बनते थे। यानी meme अब सिर्फ joke नहीं, political communication का हिस्सा बन चुका था।
और फिर PM खुद बने Meme Reviewer!
2019 में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इंटरनेट पर बने memes को लेकर प्रतिक्रिया दी। Brut India के साथ एक वीडियो में उन्होंने अपने ऊपर बनाए गए memes देखे और उन पर प्रतिक्रिया दी। इससे यह भी सामने आया कि meme culture अब इतना mainstream हो चुका था कि उसका हिस्सा खुद राजनीतिक व्यक्ति भी बन रहे थे।
2020: ‘सोशल मीडिया छोड़ दूं?’ और मीम्स की बाढ़
मार्च 2020 में मोदी ने सोशल मीडिया अकाउंट्स छोड़ने पर विचार करने की बात कही। इसके बाद Twitter पर #NoSir और दूसरे hashtag campaigns के साथ memes की भी बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे परीक्षा से पहले छात्रों के ‘अब नहीं पढ़ूंगा’ जैसे वादों से जोड़ा, तो कुछ ने टेक कंपनियों के संभावित reaction पर jokes बनाए। बाद में मोदी ने स्पष्ट किया कि महिला दिवस पर उनके social media accounts महिलाओं को संभालने थे।
2021: ‘Congratulations From Modi’ भी बन गया Template
2021 में मोदी की एक बड़ी तस्वीर और सामने किसी उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्ति की छोटी तस्वीर वाला format इंटरनेट पर meme template बन गया। इसे ‘Congratulations From Modi’ के नाम से भी जाना गया। Tokyo Olympics के विजेताओं से जुड़े एक award ceremony के visuals के बाद यह format वायरल हुआ और फिर लोगों ने इसे अलग-अलग मजाकिया संदर्भों में इस्तेमाल करना शुरू किया।
2024: Meme Culture पहुंचा AI के दरवाजे तक
2024 के लोकसभा चुनावों तक राजनीतिक memes ने नया मोड़ लिया। अब सिर्फ फोटो पर text डालना ही काफी नहीं था, AI-generated videos, altered images और parody content भी political communication का हिस्सा बनने लगे। Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 चुनावों में BJP और Congress दोनों से जुड़े official handles ने AI-crafted political content का इस्तेमाल किया।
‘Melodi’: जब दो नाम मिलकर बना Meme
2024-25 में मोदी और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की मुलाकातों से जुड़ी तस्वीरों और videos ने ‘Melodi’ नाम का viral internet trend पैदा किया। ‘Modi’ और ‘Meloni’ को मिलाकर बना यह शब्द memes में खूब इस्तेमाल हुआ। जनवरी 2025 में Nikhil Kamath के podcast पर मोदी से भी इन memes का जिक्र हुआ, जहां उन्होंने इस इंटरनेट चर्चा को हल्के अंदाज में लिया।
2025: Meme सिर्फ reaction नहीं, बातचीत का हिस्सा
2025 में memes लगातार राजनीतिक और सोशल मीडिया चर्चाओं का हिस्सा बने रहे। Budget से लेकर राजनीतिक घटनाओं तक, इंटरनेट पर बड़े public moments के साथ meme reactions दिखाई देते रहे। The Indian Express ने 2025 के Budget से पहले सोशल मीडिया पर चल रहे meme reactions को भी दर्ज किया था। यानी अब किसी बड़े राजनीतिक event की online life अक्सर news headlines के साथ memes में भी दिखाई देती है।
2026: Meme से आगे, AI और Real-Time Internet Politics
2026 तक आते-आते meme culture और भी तेज हो चुका है। AI-generated images, reels और instantly edited videos ने राजनीतिक घटनाओं को internet humour में बदलने की रफ्तार बढ़ा दी है। सितंबर 2026 में मोदी से जुड़े ‘Naraaz Fufa’ जैसे राजनीतिक expressions भी memes और Gen Z internet humour का हिस्सा बने। वहीं BRICS Summit 2026 में मोदी और व्लादिमीर पुतिन की साथ में कार यात्रा को सोशल मीडिया ने ‘Carplomacy’ नाम दे दिया और उस पर memes बनने लगे।
12 साल में बदला सिर्फ Meme का Format
2014 में जहां चुनावी slogan को मजेदार तस्वीर और punchline में बदला जाता था, वहीं 2026 तक memes AI images, reels, video edits और viral expressions तक पहुंच चुके हैं। मोदी की तस्वीरें कभी चुनावी jokes का हिस्सा बनीं, कभी नीतियों पर राजनीतिक टिप्पणी का, कभी विदेशी दौरों के humour का और कभी internet trends का।
यानी 2014 से 2026 तक की यह कहानी सिर्फ एक नेता के memes की कहानी नहीं है। यह भारत के बदलते internet culture की भी कहानी है, जहां राजनीति अब सिर्फ संसद, टीवी और अखबार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि meme, reel और AI-generated image के रूप में भी लोगों की स्क्रीन पर पहुंचती है।



