
एम. रियाज़ हाशमी
एफएएस का आरोप विमान की बिजली, इलेक्ट्रॉनिक और फ्लाइट कंप्यूटर प्रणालियों में लगातार खराबियों के सैकड़ों दस्तावेज जांच एजेंसी को उपलब्ध, लेकिन सार्वजनिक रिपोर्टों में शामिल नहीं; एएआईबी का जवाब 10 जून 2026 को प्राप्त तकनीकी जानकारी की समीक्षा की गई, जांच आईसीएओ एनेक्स 13 के अनुरूप जारी; अंतिम रिपोर्ट की समयसीमा 12 जून 2026 थी, लेकिन ड्राफ्ट अक्टूबर 2026 तक की उम्मीद
नई दिल्ली । 17 सितंबर, 2026 फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (एफएएस- FAS) के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर एड पियर्सन ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी- AAIB) को भेजे ईमेल में दावा किया कि अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हादसे का शिकार हुए एयर इंडिया के विमान वीटी-एएनबी (VT-ANB) की बिजली, इलेक्ट्रॉनिक और फ्लाइट कंप्यूटर प्रणालियों में लंबे समय से खराबियों से जुड़े सैकड़ों गैर-सार्वजनिक दस्तावेज जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए गए थे। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हुई थी और जमीन पर 19 लोगों समेत कुल 260 लोगों की मौत हुई थी।
एएआईबी ने 12 जुलाई 2025 को प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में हादसे के संभावित कारणों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया था। सरकार के 31 जुलाई 2025 के लोकसभा जवाब में अंतिम रिपोर्ट की समयसीमा 12 जून 2026 बताई गई थी। लेकिन एक साल पूरा होने पर भी अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं हुई। 12 जून 2026 को एएआईबी ने कहा कि जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट सभी जांच गतिविधियों तथा आईसीएओ (इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन) एनेक्स 13 के तहत आवश्यक समीक्षा और परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी की जाएगी। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट में दायर जवाब में एएआईबी ने ड्राफ्ट अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद जताई थी।
पियर्सन का सवाल है कि इन दस्तावेजों और विमान के तकनीकी डेटा को जांच की सार्वजनिक रिपोर्टों में शामिल क्यों नहीं किया गया? लेकिन एएआईबी ने जवाब दिया है कि 10 जून 2026 को प्राप्त तकनीकी जानकारी की जांच टीम ने समीक्षा की है और जांच नियमों के अनुरूप जारी है।
एफएएस अमेरिका स्थित एक गैर-लाभकारी विमानन सुरक्षा संस्था है। इसका काम वाणिज्यिक विमानन से जुड़े सुरक्षा मुद्दों की पड़ताल करना, उन्हें सार्वजनिक करना और विमान निर्माताओं, एयरलाइंस तथा सरकारी एजेंसियों में सुरक्षा सुधार के लिए दबाव बनाना है। पियर्सन ने ये गंभीर सवाल 27 अगस्त 2026 को एएआईबी के महानिदेशक जी.वी.जी. युगांधर को भेजे ईमेल में उठाए और इस संवाद की प्रति ‘तहलका’ को फेडरेशन आफ इंडियन पायलेट्स (एफआईपी) से हासिल हुई है।
पियर्सन के मुताबिक सैकड़ों आधिकारिक दस्तावेज यूके एएआईबी के जरिए भारत पहुंचे
पियर्सन के मुताबिक, यूके एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (यूके एएआईबी) के विशेषज्ञ के माध्यम से भारत की जांच एजेंसी को विमान से जुड़े सैकड़ों आधिकारिक, लेकिन सार्वजनिक न किए गए दस्तावेज भेजे गए थे। इन दस्तावेजों में विमान की बिजली व्यवस्था, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और फ्लाइट कंप्यूटर से जुड़ी लगातार होने वाली खराबियों का विवरण होने का दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि यह जानकारी विमान की परिचालन स्थिति और दुर्घटना के संभावित कारणों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, दस्तावेज में इन कथित खराबियों का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन या दुर्घटना का कारण होने की पुष्टि नहीं दी गई है।
प्रारंभिक और अंतरिम रिपोर्ट में दस्तावेजों का उल्लेख नहीं
एड पियर्सन ने अपने ईमेल में आरोप लगाया कि एएआईबी ने न तो प्रारंभिक रिपोर्ट और न ही बाद की अंतरिम रिपोर्ट में इन दस्तावेजों के अस्तित्व का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ- इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन) के एनेक्स 13 के तहत जांच एजेंसी को दुर्घटना से जुड़ी सभी प्रासंगिक जानकारियां जुटाकर उनका रिकॉर्ड और विश्लेषण करना चाहिए। पियर्सन ने इसी आधार पर पूछा कि अगर दस्तावेज जांच टीम को उपलब्ध थे, तो उन्हें जांच के सार्वजनिक रिकॉर्ड में क्यों नहीं शामिल किया गया? यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि फाउंडेशन का आरोप और एएआईबी की वास्तविक जांच प्रक्रिया दो अलग-अलग तथ्य हैं। उपलब्ध ईमेल में एएआईबी ने जानकारी मिलने और उसके परीक्षण की पुष्टि की है, लेकिन दस्तावेजों की प्रत्येक तकनीकी सामग्री या उसे रिपोर्ट में शामिल करने की स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
डेटा से हादसे से पहले की खराबियों का समय पता चल सकता था?
फाउंडेशन ने विमान के दो महत्वपूर्ण डेटा स्रोतों का भी उल्लेख किया है:
एसीएआरएस (ACARS- एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशंस एड्रेसिंग एंड रिपोर्टिंग सिस्टम): विमान और जमीन के बीच विमान की स्थिति तथा तकनीकी सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रणाली।
एएचएम (AHM- एयरक्राफ्ट हेल्थ मॉनिटरिंग): विमान की तकनीकी स्थिति और प्रणालियों से संबंधित निगरानी डेटा।
एड पियर्सन का दावा है कि इन डेटा स्ट्रीम में विमान की प्रणालियों में हुई खराबियों और उनके सटीक समय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद है। उनका कहना है कि यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इन रिकॉर्डों का विश्लेषण यह समझने में मदद कर सकता है कि दुर्घटना से पहले विमान में कौन-सी तकनीकी घटनाएं हुई थीं और वे किस समय हुईं?
एएआईबी का जवाब: 10 जून की जानकारी का परीक्षण किया गया
फाउंडेशन को भेजे गए जवाब में एएआईबी के महानिदेशक कार्यालय ने 26 अगस्त 2026 को ईमेल भेजा। इसमें कहा गया- फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी द्वारा एआई-171 दुर्घटना जांच से संबंधित साझा की गई तकनीकी जानकारी और इनपुट 10 जून 2026 को यूके एएआईबी के विशेषज्ञ के माध्यम से प्राप्त हुए थे। जांच टीम ने जांच के दौरान इनका परीक्षण किया है। जांच एयरक्राफ्ट (इन्वेस्टिगेशन ऑफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025 और आईसीएओ एनेक्स 13 के लागू प्रावधानों के अनुरूप निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से की जा रही है। जांच टीम के पास सभी प्रासंगिक तथ्यात्मक जानकारियां और साक्ष्य उपलब्ध हैं और उनका जांच के दौरान उचित तरीके से परीक्षण किया जा रहा है।
बोइंग को बचाने और पायलटों पर दोष मढ़ने के बीच सरकार का रुख
एआई-171 की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद होने और कॉकपिट में पायलटों के बीच हुई बातचीत को लेकर पायलटों की भूमिका पर सवाल उठे थे। इस घटनाक्रम के बीच पायलट संगठनों और अन्य पक्षों ने चिंता जताई कि कहीं दुर्घटना की जिम्मेदारी समय से पहले पायलटों पर तो नहीं डाली जा रही है। इसके साथ ही बोइंग और विमान की तकनीकी प्रणालियों से जुड़े संभावित कारणों की पर्याप्त पड़ताल किए जाने का सवाल भी उठा। इस मामले में केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2025 को लोकसभा में कहा था कि एएआईबी की जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और न्यायसंगत तरीके से की जा रही है। सरकार ने जांच की पारदर्शिता और पायलट की संभावित गलती से जुड़े सवालों के जवाब में जांच की प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन का उल्लेख किया था।
नवंबर 2025 में पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट में मृतक पायलट को दोषी नहीं ठहराया गया है। 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि प्रारंभिक रिपोर्ट में पायलट के खिलाफ कोई संकेत नहीं है। अदालत की यह टिप्पणी उन चिंताओं के बीच आई थी, जिनमें दुर्घटना के लिए पायलटों को जिम्मेदार ठहराए जाने की आशंका जताई गई थी। सरकार और एएआईबी ने जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की बात कही थी। 12 जून 2026 को जारी एएआईबी के अंतरिम बयान में स्पष्ट किया गया कि दुर्घटना जांच का उद्देश्य भविष्य की विमान दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा संबंधी सीख और सिफारिशें तैयार करना है, न कि किसी व्यक्ति पर दोष या कानूनी जिम्मेदारी तय करना।
सुरक्षा सिफारिशों को लेकर भी फाउंडेशन ने उठाया सवाल
एड पियर्सन ने अपने ईमेल में दावा किया कि विमान की प्रणालियों में गंभीर और लगातार होने वाली खराबियों से संबंधित जानकारी होने के बावजूद एएआईबी ने कोई अंतरिम सुरक्षा सिफारिश या वैश्विक विमानन समुदाय के लिए चेतावनी जारी नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जांच में ऐसे संभावित खतरे सामने आते हैं, तो यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए गए? यह सवाल दुर्घटना जांच के एक महत्वपूर्ण उद्देश्य से जुड़ा है- सिर्फ हादसे का कारण पता करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समय पर सुरक्षा कदम उठाना। हालांकि, उपलब्ध ईमेल में एएआईबी की ओर से इस बात का कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि अंतरिम सुरक्षा सिफारिशें जारी करने की आवश्यकता का तकनीकी आकलन क्या था या ऐसा कोई आकलन किया गया था या नहीं?



