अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटरों पर ईडी की रेड: पटियाला-पुणे में 220 कर्मचारी मिले

अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटरों पर ईडी की रेड: पटियाला-पुणे में 220 कर्मचारी मिले — गिफ्ट कार्ड, कैश, सोने से वसूली; क्रिप्टो, हवाला और बैंक खातों से मनी लॉन्ड्रिंग का धंधा पकड़ा गया
ईडी ने पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में फर्जी कॉल सेंटरों पर छापा मारा। 220 कर्मचारी काम करते पाए गए। गिफ्ट कार्ड, कैश और सोने से वसूली कर क्रिप्टो, हवाला और बैंक खातों से मनी लॉन्ड्रिंग किया जाता था।

गिफ्ट कार्ड, कैश, सोने से वसूली; क्रिप्टो, हवाला और बैंक खातों से मनी लॉन्ड्रिंग का धंधा पकड़ा गया ईडी के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ के चार ठिकानों पर पीएमएलए के तहत तलाशी; तीन सक्रिय फर्जी कॉल सेंटर में 220 कर्मचारी, कंप्यूटर, हेडसेट, मोबाइल और नेटवर्किंग उपकरण बरामद; मास्टरमाइंड चंडीगढ़ से करता था नियंत्रण

रिपोर्ट: एम. रियाज हाशमी

नई दिल्ली । 16 सितंबर, 2026 — अमेरिका के नागरिकों को फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठगने वाले नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में एक ऐसा तंत्र सामने आया है, जिसमें ठगी के लिए अलग-अलग कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थी। कोई पीड़ित का भरोसा जीतता था, कोई सरकारी अधिकारी या प्रतिष्ठित कंपनी का कर्मचारी बनकर डर पैदा करता था, तो कोई भुगतान और खाते में रकम की पुष्टि का काम संभालता था। इसके बाद गिफ्ट कार्ड, नकदी और सोने के जरिए हासिल रकम को क्रिप्टोकरेंसी, हवाला और दूसरे बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था। ईडी के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ स्थित चार ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी ली। कार्रवाई में तीन सक्रिय फर्जी कॉल सेंटर मिले, जहां करीब 220 लोग काम करते हुए पाए गए।

तीन कॉल सेंटरों में 220 कर्मचारी, कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों में ठगी के राज

तलाशी के दौरान पटियाला में दो और पुणे में एक सक्रिय कॉल सेंटर मिला। इन परिसरों में कई वर्कस्टेशन, केबिन, कंप्यूटर, हेडसेट, मोबाइल फोन और नेटवर्किंग उपकरण मौजूद थे। करीब 220 कर्मचारी उस समय काम करते पाए गए।

पटियाला स्थित परिसरों में काम कर रहे लोगों के मोबाइल फोन और एक लैपटॉप से सिंडिकेट के काम करने के तरीके और ठगी से हासिल रकम के बंटवारे से संबंधित डेटा मिलने की बात ईडी ने कही है। पुणे के कॉल सेंटर में भी अमेरिकी नागरिकों को इसी तरह ठगने का तरीका सामने आने का दावा किया गया है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कर्मचारियों की वास्तविक भूमिकाएं क्या थीं, कौन लोग उन्हें निर्देश देते थे और कॉल सेंटरों के संचालन से जुड़े फैसले किस स्तर पर लिए जाते थे?

चंडीगढ़ में बैठकर पटियाला के कॉल सेंटरों को नियंत्रित कर रहा था मास्टरमाइंड

तलाशी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चंडीगढ़ स्थित आवासीय परिसरों से जुड़ा है। ईडी के मुताबिक, इन परिसरों का इस्तेमाल मास्टरमाइंड पटियाला में संचालित फर्जी कॉल सेंटरों के समन्वय और नियंत्रण के लिए कर रहा था।

यहां से कई डिजिटल उपकरण मिले, जिनमें कॉल सेंटरों के कामकाज से संबंधित डेटा होने की बात कही गई है। इसी परिसर में एक व्यक्ति कथित तौर पर अमेरिकी डॉलर में हासिल रकम को भारतीय रुपये में बदलने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ मिला। उसकी भूमिका और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है।

इससे जांच का एक अहम पहलू सामने आता है- कॉल सेंटरों में होने वाली ठगी के अलावा उसके पीछे मौजूद नियंत्रण व्यवस्था और रकम को भारत में इस्तेमाल करने की प्रक्रिया।

स्पैम ईमेल से शुरू होता था ठगी का खेल, फर्जी समाधान के लिए दिया जाता था नंबर

ईडी की सूचना के अनुसार, फर्जी कॉल सेंटरों का नेटवर्क संभावित पीड़ितों का डेटा डेटा सप्लायरों और कॉल-ब्लास्ट वेंडरों से हासिल करता था। इसके बाद अमेरिकी नागरिकों को बड़ी संख्या में स्पैम ईमेल भेजे जाते थे।

इन ईमेल में किसी समस्या के समाधान के लिए एक टोल-फ्री नंबर दिया जाता था। पीड़ित को यह बताया जाता था कि उसके सामने कोई समस्या है, जबकि ईमेल में बताई गई समस्या वास्तव में मौजूद नहीं होती थी। जब पीड़ित उस नंबर पर वापस कॉल करता था, तो वह कॉल सेंटर के ओपनर से जुड़ती थी।

ओपनर का काम पीड़ित से शुरुआती बातचीत करना और उसका भरोसा हासिल करना था। पीड़ित की चिंता समझने और बातचीत आगे बढ़ाने के बाद कॉल को अगले स्तर के कर्मचारी यानी क्लोजर के पास भेज दिया जाता था।

ओपनर के बाद क्लोजर की एंट्री, प्रतिष्ठित संस्थाओं का अधिकारी बनकर डराते थे

क्लोजर पीड़ित से बातचीत के दौरान खुद को किसी प्रतिष्ठित कंपनी, बैंक या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताता था। इसके जरिए पीड़ित के मन में डर या जल्द भुगतान करने की मजबूरी पैदा करने की कोशिश की जाती थी।

ईडी के अनुसार, पीड़ितों को गिफ्ट कार्ड खरीदने या गिफ्ट कार्ड, नकदी, सोने और अन्य माध्यमों से भुगतान करने के लिए राजी किया जाता था। भुगतान या सामान सीधे हासिल किया जाता था या कूरियर के जरिए मंगाया जाता था।

इस प्रक्रिया में पीड़ित को यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया जाता था कि भुगतान किसी समस्या के समाधान या सुरक्षा से जुड़ी जरूरी कार्रवाई है।

बैंकर का काम था खाते में रकम की पुष्टि और भुगतान की प्रक्रिया संभालना

कॉल सेंटर के इस नेटवर्क में बैंकर की भूमिका भी सामने आई है। यहां बैंकर से आशय बैंक के कर्मचारी से नहीं, बल्कि फर्जी कॉल सेंटर में काम करने वाले अपने कर्मचारियों से है, जो पीड़ित के खाते में उपलब्ध रकम की पुष्टि और भुगतान की प्रक्रिया संभालते थे।

ये कर्मचारी पीड़ित को भुगतान करने के तरीके समझाते थे और भुगतान से संबंधित जानकारी हासिल करते थे। गिफ्ट कार्ड के विवरण, नकदी या सोने को एकत्र करने तथा आगे उसके इस्तेमाल या भुनाने की व्यवस्था में भी उनकी भूमिका बताई गई है।

इस तरह कॉल सेंटर के भीतर पीड़ित से संपर्क करने, उसे भुगतान के लिए तैयार करने और रकम हासिल करने की जिम्मेदारियां अलग-अलग कर्मचारियों के बीच बांटी गई थी।

गिफ्ट कार्ड और बिटकॉइन से रकम को कई स्तरों पर घुमाते थे

ईडी के मुताबिक, गिफ्ट कार्डों को बिटकॉइन या यूएसडीटी में बदला जाता था। यूएसडीटी एक ऐसी क्रिप्टोकरेंसी है, जिसका मूल्य अमेरिकी डॉलर से जुड़ा होता है।

जांच में सामने आए कथित तरीके के अनुसार, अमेरिका में हासिल डॉलर और सोने को स्थानीय बाजारों में बेचने के बाद रकम को नकदी या बैंक खातों में क्रेडिट के रूप में बदलने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इसमें क्रिप्टो ट्रेडर, हवाला ऑपरेटर और अकॉमोडेशन एंट्री प्रोवाइडर की भूमिका की जांच की जा रही है।

अकॉमोडेशन एंट्री प्रोवाइडर से आशय ऐसे व्यक्ति या संस्था से है, जो दिखावटी या समायोजन वाले वित्तीय लेनदेन के जरिए किसी अन्य व्यक्ति की रकम को बैंक खातों में घुमाने में मदद करता है। हालांकि, इस मामले में संबंधित लोगों की भूमिका और लेनदेन की वास्तविक प्रकृति जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

आरोपियों, परिवार और सहयोगियों के खातों से संपत्तियों में निवेश

ईडी की सूचना के अनुसार, ठगी से हासिल रकम को आरोपियों, उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के खातों के जरिए आगे भेजा जाता था। इसके बाद इस रकम का इस्तेमाल संपत्तियां और अन्य परिसंपत्तियां खरीदने में किए जाने का दावा किया गया है।

जांच एजेंसी अब इन वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा, कॉल सेंटरों के संचालन संबंधी रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी से हासिल रकम किन लोगों तक पहुंची और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।

220 कर्मचारियों से लेकर मास्टरमाइंड तक, जांच में सामने आएगा पूरा नेटवर्क

ईडी की कार्रवाई में एक तरफ तीन सक्रिय कॉल सेंटर और करीब 220 कर्मचारी मिले, वहीं दूसरी तरफ चंडीगढ़ स्थित आवासीय परिसरों से नेटवर्क के कथित नियंत्रण और रकम बदलने की गतिविधियों से जुड़े सुराग मिलने की बात कही गई है।

अब जांच का फोकस कॉल सेंटरों के कर्मचारियों की भूमिकाओं, कथित मास्टरमाइंड के नियंत्रण तंत्र, डॉलर को रुपये में बदलने वाले व्यक्ति और ठगी की रकम के वित्तीय प्रवाह पर है। ईडी द्वारा बरामद डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तथा संपत्तियों में रकम के इस्तेमाल से संबंधित जानकारी सामने आ सकती है।