स्नेहलता चौरसिया | नई दिल्ली
आपदा के समय भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
जब भी किसी देश पर प्राकृतिक आपदा का कहर टूटता है, उस समय राहत और बचाव के लिए हर संभव मदद की जरूरत होती है। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत कई बार सिर्फ अपने नागरिकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पड़ोसी और मित्र देशों के लिए भी मदद का हाथ बढ़ाता रहा है। हाल ही में नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत ने राहत और बचाव अभियान में तेजी से सहयोग पहुंचाकर एक बार फिर अपनी मानवीय भूमिका को मजबूत किया है।
बीते दशक में कई देशों तक पहुंची भारत की सहायता
पिछले एक दशक में भारत ने भूकंप, बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे कई देशों तक राहत सामग्री, बचाव दल और जरूरी संसाधन पहुंचाए हैं। नेपाल के अलावा म्यांमार, तुर्किये और मालदीव जैसे देशों में भी संकट के समय भारत की मदद देखने को मिली है।
नेपाल में बाढ़ के बाद बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ से कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ। ऐसे समय में भारत की ओर से राहत और बचाव के लिए सहायता पहुंचाई गई। भारत और नेपाल के बीच भौगोलिक और सामाजिक संबंधों को देखते हुए आपदा के समय दोनों देशों के बीच सहयोग का विशेष महत्व है।
तुर्किये में भूकंप के बाद ‘ऑपरेशन दोस्त’
फरवरी 2023 में तुर्किये और सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने बड़े स्तर पर राहत अभियान चलाया था। भारत ने बचाव दल, खोजी कुत्ते, चिकित्सा टीम और जरूरी उपकरण भेजे। इस अभियान को ‘ऑपरेशन दोस्त’ के नाम से जाना गया।
पड़ोसी देशों के लिए भी मददगार
म्यांमार में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी भारत ने राहत सामग्री और जरूरी सहायता पहुंचाई है। मालदीव में भी संकट के समय भारत की सहायता और राहत अभियानों ने दोनों देशों के संबंधों में भरोसे को मजबूत किया है।
‘पहले मदद’ वाली छवि को मजबूती
आपदा के समय त्वरित सहायता पहुंचाने की यह नीति भारत की ‘पहले मदद’ वाली छवि को मजबूत करती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक ऐसे देश के तौर पर देखा जा रहा है, जो संकट की घड़ी में मानवीय सहायता के लिए आगे आने की क्षमता और इच्छाशक्ति रखता है।



