शिक्षा चरित्र, संस्कृति और आत्मा को आकार देती है : रहमतुन्निसा ए.

नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026। आज जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘स्कूल ऑफ़ लाइफ़’ विषय पर ऑरा ई-मैगज़ीन की ओर से एक शैक्षिक सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में विभिन्न स्कूलों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और छात्रों ने भाग लिया। इस सेमिनार में इस बात पर चर्चा की गई कि शिक्षा किस तरह चरित्र, संस्कृति और आत्मा को आकार देती है, और यह प्रक्रिया किस तरह क्लासरूम और पेशेवर ज़िंदगी से आगे तक फैली हुई है। इसमें यह भी समझाने की कोशिश की गई कि एक शिक्षित व्यक्ति होने का असल तात्पर्य क्या है। यह सेमिनार ‘ऑरा ई-मैगज़ीन’ के तीसरे प्रिंट अंक, जिसका शीर्षक ‘द स्कूल ऑफ़ लाइफ़: रिफ़्लेक्शन्स ऑन एजुकेशन’ था, के विमोचन के अवसर पर आयोजित किया गया था।

अपने उद्घाटन भाषण में मरकज़ी तालीमी बोर्ड के चेयरमैन एवं जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफ़ेसर सलीम इंजीनियर ने शिक्षा से जुड़े अहम पहलुओं पर ज़ोर दिया और कहा कि शिक्षा के लिए बेहतरीन और आसानी से उपलब्ध होने वाले अवसर प्रदान करना ज़रूरी है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की पूर्व प्रोफेसर और लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ता प्रोफेसर नंदिता नारायण ने कहा कि शिक्षा जीवन के हर पहलू पर असर डालती है और लोगों को सशक्त बनाती है। शिक्षा हमें सिखाती है कि लोकतंत्र का सबसे अच्छा इस्तेमाल कैसे किया जाए और अपनी ज़िंदगी को सही दिशा में कैसे आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने आगाह किया कि शिक्षा का इस्तेमाल लोगों को गुलाम बनाने के लिए भी किया जा सकता है इसलिए सतर्क रहने की ज़रूरत है।

वैकल्पिक शिक्षा की विशेषज्ञ सुश्री मारिया महमूद ने कहा कि शिक्षा सिर्फ़ बोर्ड पर लिखी बातों की नकल करके नहीं दी जा सकती। बच्चों में जागरूकता और समझ विकसित करना और उन्हें कौशल हासिल करना सिखाना भी उतना ही ज़रूरी है। शिक्षा सिर्फ़ किताबों से नहीं मिलती; खेल-कूद और दोस्ताना माहौल बनाकर भी अच्छी शिक्षा के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। डॉ. शारनास मुथु (निदेशक, द वुमन एजुकेशन एंड एम्पावरमेंट ट्रस्ट) ने कहा कि आर्थिक संसाधन कभी भी शिक्षा में बाधा नहीं बनने चाहिए। उन्होंने एक ऐसे परिवार का उदाहरण दिया जिसे वे जानती हैं। अपने पति की मृत्यु के बाद एक महिला ने अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए लोगों के घरों में काम किया। इस नज़रिए से बच्चों को शिक्षित करने में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है और उन्हें सशक्त बनाना ज़रूरी है।

शैक्षिक मूल्यों पर बात करते हुए पब्लिक हेल्थ रिसर्चर शांति एनएस ने कहा कि जिस तरह पौष्टिक भोजन ज़रूरी है, उसी तरह बच्चों के सही पालन-पोषण के लिए एक स्वस्थ शैक्षिक माहौल भी उतना ही ज़रूरी है। चेन्नई के हिदाया कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. राबिया बसरी ने कहा कि बच्चों को शिक्षित करना कोई आसान काम नहीं है। एक शिक्षक की यह ज़िम्मेदारी होती है कि वह बच्चे को एक सफल इंसान बनने में मदद करे। शिक्षक का अपने छात्रों के साथ भावनात्मक जुड़ाव होना चाहिए और छात्रों को पूरी जानकारी देना शिक्षक की ही ज़िम्मेदारी है। पैगंबर मुहम्मद (उन पर शांति हो) एक आदर्श शिक्षक थे जिन्होंने मानवता को दया -भाव के साथ सिखाया।

‘ऑरा’ ई-मैगज़ीन की मुख्य संपादक रहमतुन्निसा ए. ने ‘ऑरा’ के मिशन के बारे में बात की। शिक्षा मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है; राजनीति में शिक्षा को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए और शिक्षा में राजनीति कम होनी चाहिए। कार्यक्रम के शरुआत में ‘ऑरा’ की एडिटर श्रीमती समीना अफशान ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। शायमा एस और मरियम फिरदौस ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम के अंत में उज़मा औसाफ़ ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।

द्वारा जारी:
सलमान अहमद
राष्ट्रीय सचिव, मीडिया विभाग, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, मुख्यालय