राघवेंद्र द्विवेदी

नई दिल्ली : जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के धरना प्रदर्शन और “चलो संसद” मार्च के दौरान कई आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग शामिल थे। AI द्वारा फेस रिकॉग्निशन तकनीकी इस्तेमाल होने से ये तथ्य उजागर हुआ है। दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास 2873 आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग शामिल थे जिनमें से 989 पर हत्या, डकैती जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। “चलो संसद” मार्च के दौरान हुई हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस के वेरिफिकेशन और डोजियर विश्लेषण में ये चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
दिल्ली पुलिस के सूत्रों से पता चला है कि जांच में ये पुख्ता जानकारी मिली है कि धरना प्रदर्शन के दौरान धरना स्थल और उसके आसपास हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, बलात्कार, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध, अवैध हथियार रखने और मादक पदार्थ से जुड़े मामलों में संलिप्तता वाले लोग देखे गए। अगर अपराध के चरित्र के हिसाब से आंकड़े देखें 101 पर हत्या, 62 पर हत्या का प्रयास, 284 पर लूट और डकैती, 61 पर बलात्कार, 06 पर पॉस्को, 25 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध, 229 पर अवैध हथियार रखने, 135 पर स्नेचिंग, 19 पर अपहरण, 67 पर मादक पदार्थ रखने और 1884 पर IPC की अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं।
20 जुलाई को संसद की तरफ कूच करने पर प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में करीब 70 प्रदर्शनकारी और 200 से ज़्यादा पुलिसकर्मी ज़ख्मी हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण था लेकिन सुरक्षा बलों ने उन पर बर्बरता की। लाठी चार्ज के अलावा पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया गया। दूसरी तरफ पुलिस पर भी पथराव हुआ। प्रदर्शनकारियों से भिड़ंत हुई। इस मामले ने तूल पकड़ा और इसमें कई सियासी दल भी कूद पड़े। बहुत बयानबाजी भी हुई। पक्ष विपक्ष ने और उनके समर्थकों ने एक दूसरे पर उंगली उठाई।
हिंसा के हालात कैसे बने जब इसकी जांच शुरू हुई तो छानबीन में पाया गया कि प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास बड़ी संख्या में संदिग्ध लोग दिखाई दिए। AI की फेस रिकग्निशन तकनीकी से आपराधिक इतिहास वाले लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। चेहरों की पहचान के साथ पुलिस डाटा बेस से मिली जानकारी के आधार पर हुए सत्यापन से ये बेहद चौंकाने वाले तथ्य पता चला।
शुरुआत में इस कवायद का मक़सद सिर्फ प्रदर्शन स्थल पर आने वाले या उसके आसपास घूमने वाले व्यक्तियों की प्रकृति का आकलन करना था। जैसे जैसे तकनीकी का इस्तेमाल आगे बढ़ा उतनी संख्या में लोगों का क्रिमिनल रिकॉर्ड सामने आने लगा। जितने लोगों चिन्हित किया गया उनमें से एक तिहाई लोगों का क्रिमिनल रिकॉर्ड दिल्ली पुलिस के डाटा बेस से मेल खा गया। जानकारी के मुताबिक कुल 2873 अपराधिक प्रवृत्ति के लोग शामिल पाए गए जिनमें से 2402 की पहचान उनकी क्राइम कुंडली से हुई जबकि 471 की शिनाख्त डोजियर से हुई।
