
नई दिल्ली | रिपोर्ट: स्नेहलता
दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं। भारत मंडपम में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों को पोस्टर, पेंटिंग्स और रोशनी से सजाया गया है। VVIP मूवमेंट वाले क्षेत्रों में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है और कई जगह दिल्ली पुलिस के अस्थायी बंकर बनाए गए हैं।
इस साल BRICS समिट की आधिकारिक थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” है। सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्षों, विदेशी प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है।
22 डायवर्जन पॉइंट, 35 से ज्यादा सड़कों पर बदलाव
सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान तैयार किया है। VIP काफिलों की आवाजाही के दौरान 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं, जबकि 35 से ज्यादा सड़कों पर ट्रैफिक को नियंत्रित या डायवर्ट किया जाएगा। एडिशनल CP ट्रैफिक दिनेश कुमार गुप्ता के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर VIP मोटरकेड गुजरने के दौरान कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोका जा सकता है।
विदेशी प्रतिनिधियों के लिए नौ होटल तय किए गए हैं। इन होटलों से भारत मंडपम तक के रूट की पहचान कर कारकेड रिहर्सल भी की जा रही है।
‘कवच BRICS’ के तहत NSG की ड्रिल
सुरक्षा व्यवस्था के तहत NSG ने ‘कवच BRICS’ ऑपरेशन के तहत अभ्यास किया। मंगलवार को करीब 100 NSG कमांडो ने चार अलग-अलग स्थानों पर ड्रिल में हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य किसी संभावित आतंकी खतरे की स्थिति में NSG, दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
अदालतों और सरकारी दफ्तरों पर भी असर
BRICS सम्मेलन के चलते दिल्ली हाईकोर्ट और सभी जिला अदालतें 11 सितंबर को बंद रहेंगी। ट्रायल कोर्ट में 12 सितंबर को भी अवकाश रहेगा। इसके चलते निचली अदालतों में 11 से 13 सितंबर तक लगातार तीन दिन कामकाज नहीं होगा।
MCD और केंद्र सरकार के सभी कार्यालय भी 11 सितंबर को बंद रहेंगे। हालांकि अस्पताल, सफाई और आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।
BRICS में 11 देश, अंतरिक्ष सहयोग पर नजर
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के BRIC समूह से हुई थी। दक्षिण अफ्रीका के 2011 में जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE और 2025 में इंडोनेशिया पूर्ण सदस्य बने। अब समूह में 11 पूर्ण सदस्य देश हैं।
समिट में सदस्य देशों के रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट डेटा को साझा करने और BRICS स्पेस काउंसिल बनाने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। इससे आपदा प्रबंधन, बाढ़, चक्रवात, कृषि मैपिंग और जियोस्पेशियल सेवाओं में सहयोग बढ़ने की संभावना है। भारतीय स्पेस-टेक कंपनियों के लिए भी इससे नए बाजार खुल सकते हैं।
यानी BRICS समिट सिर्फ कूटनीतिक बैठक नहीं, बल्कि दिल्ली की सुरक्षा, ट्रैफिक और प्रशासनिक व्यवस्था से लेकर अंतरिक्ष और तकनीकी सहयोग तक कई मोर्चों पर असर डालने वाला आयोजन है। अब निगाहें 12-13 सितंबर की बैठक पर हैं, जहां इन प्रस्तावों और सहयोग की दिशा को लेकर अहम फैसले सामने आ सकते हैं।



