नई दिल्ली: देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों पर अब सरकार सख्त होती नजर आ रही है। उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भ्रामक विज्ञापन देने के मामले में मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये और राजस्थान के सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (CLC) पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार जांच में सामने आया कि दोनों संस्थानों ने अपने विज्ञापनों में छात्रों की सफलता को बड़े स्तर पर प्रचारित किया, लेकिन यह साफ नहीं बताया कि उन छात्रों ने किस तरह का कोर्स किया था। कई छात्रों ने केवल ऑनलाइन क्लास, टेस्ट सीरीज या छोटे कोर्स किए थे, फिर भी संस्थानों ने उनकी सफलता का पूरा श्रेय खुद को दे दिया।
जांच में यह भी पता चला कि मोशन एजुकेशन ने नीट परीक्षा में 91.2 प्रतिशत और आईआईटी-जेईई एडवांस्ड में 51.02 प्रतिशत सफलता दर का दावा किया था। लेकिन सफल बताए गए कई छात्र “आई-एकलव्य” नाम के मुफ्त ऑनलाइन कोर्स से जुड़े थे। कुछ छात्रों को तो परीक्षा के बाद संस्थान से जोड़ा गया, लेकिन फिर भी उनकी सफलता को विज्ञापनों में शामिल किया गया।
वहीं सीएलसी कोचिंग ने अपने प्रचार में “MBBS, IIT और अन्य परीक्षाओं में 1650 से ज्यादा चयन” का दावा किया था। बाद में संस्थान की ओर से दिए गए जवाब और सुनवाई में बताए गए आंकड़ों में फर्क पाया गया। इसी आधार पर प्राधिकरण ने इसे अप्रमाणित और भ्रामक दावा माना।
सीसीपीए ने कहा कि अगर किसी छात्र ने फुल टाइम क्लास, ऑनलाइन कोर्स, क्रैश कोर्स या सिर्फ टेस्ट सीरीज ली है, तो उसकी पूरी जानकारी विज्ञापन में देना जरूरी है। ऐसा नहीं करना उपभोक्ताओं को गुमराह करना माना जाएगा।
दोनों संस्थानों को ऐसे विज्ञापन तुरंत हटाने और भविष्य में पूरी पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया गया है। हालांकि दोनों कोचिंग संस्थानों ने इस आदेश को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चुनौती दी है। प्राधिकरण के मुताबिक अब तक 60 से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं और 31 कोचिंग संस्थानों पर कुल 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है।




