नई दिल्ली: उन्नाव रेप केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शुक्रवार को Supreme Court ने साफ कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट को सभी पहलुओं पर नए सिरे से विचार करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सेंगर की अपील पर जल्द फैसला किया जाए ताकि मामला ज्यादा लंबा न खिंचे। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट से कोशिश करने को कहा है कि दो महीने के भीतर मुख्य याचिका पर फैसला हो जाए।
Supreme Court की पीठ ने कहा कि अगर मुख्य अपील पर जल्दी फैसला नहीं हो पाता है, तो summer holidays से पहले सेंगर की सजा निलंबन वाली याचिका पर दोबारा आदेश पारित किया जाए। अदालत ने यह भी साफ किया कि उसने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। यानी हाईकोर्ट अब पीड़िता समेत सभी पक्षों को सुनकर नए सिरे से फैसला ले सकता है।
इस पूरे मामले में एक बड़ा कानूनी सवाल भी उठा है। Supreme Court ने High Court से यह भी विचार करने को कहा कि क्या कोई विधायक POCSO Act के तहत “लोक सेवक” माना जा सकता है या नहीं। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के तहत लोक सेवक की परिभाषा में नहीं आता। इसी आधार पर सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित किया गया था।
गौरतलब है कि High Court के फैसले के बाद देशभर में काफी विरोध देखने को मिला था। पीड़िता के परिवार, सामाजिक संगठनों और कई लोगों ने इस आदेश पर नाराजगी जताई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के बाद एक बार फिर इस केस पर सबकी नजरें टिक गई हैं। अदालत ने सभी पक्षों से यह भी कहा है कि हाईकोर्ट में सुनवाई टालने की कोशिश न की जाए, ताकि मामले का जल्द निपटारा हो सके।




