पंजाब में 85 हजार कर्मचारियों के लिए डीए बढ़ाने की सिफारिश, आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा कदम

इस पूरे घटनाक्रम का आम आदमी पार्टी सरकार के लिए राजनीतिक महत्व भी है, क्योंकि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। राज्य में करीब चार लाख सरकारी कर्मचारी और लगभग 3.5 लाख पेंशनभोगी हैं। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक और चुनावी असर काफी व्यापक हो सकता है।

पंजाब सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती किए गए करीब 85 हजार सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) मौजूदा 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की सिफारिश की है। यह कदम वेतन विसंगतियों को दूर करने और कर्मचारियों में बढ़ते असंतोष को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने शुक्रवार को इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की शिकायतों और मांगों की जांच के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी ने डीए बढ़ाने की सिफारिश की है। अब यह सिफारिश अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान को भेजी जाएगी।

इस कैबिनेट सब-कमेटी में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर और अमन अरोड़ा शामिल हैं।

अरोड़ा ने कहा कि प्रस्ताव के दायरे में वे कर्मचारी आते हैं, जिन्हें 17 जुलाई 2020 के बाद केंद्र सरकार के वेतन ढांचे के तहत भर्ती किया गया था। इन कर्मचारियों का मूल वेतन केंद्रीय वेतनमान के आधार पर तय किया गया है, लेकिन वर्तमान में उन्हें 42 प्रतिशत डीए मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डीए दिया जा रहा है।

प्रस्तावित बढ़ोतरी के बाद इन कर्मचारियों का डीए केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर हो जाएगा।

अरोड़ा ने कहा, “आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में भर्ती किए गए 71 हजार कर्मचारियों को इस फैसले का लाभ मिलेगा, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान भर्ती किए गए करीब 14 हजार कर्मचारी भी इसके दायरे में आएंगे।”

उन्होंने कहा कि विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के बीच वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर यह फैसला लिया गया है। अरोड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को 17 जुलाई 2020 से पहले भर्ती किए गए कर्मचारियों को पंजाब के पुराने वेतन ढांचे के तहत अधिक वेतन या अन्य लाभ मिलने पर कोई आपत्ति नहीं है।

सरकार का यह फैसला कर्मचारी संगठनों के साथ बढ़ते तनाव के बीच आया है। कर्मचारी संगठन लंबित डीए की किस्तों और सेवा से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं। जुलाई 2020 से पहले भर्ती किए गए करीब 3.15 लाख कर्मचारी अभी भी अपनी लंबे समय से लंबित मांगों पर राहत का इंतजार कर रहे हैं। इनमें बकाया डीए का भुगतान प्रमुख मांग है।

इस घोषणा का समय भी महत्वपूर्ण है। कर्मचारी संगठनों ने 8 सितंबर को सामूहिक आकस्मिक अवकाश के एक और दौर का ऐलान किया है। इससे पहले कर्मचारियों ने 27 अगस्त को भी सामूहिक आकस्मिक अवकाश लिया था। इसके बाद सरकार ने विभागों को अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। इस कार्रवाई के बाद कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच टकराव और बढ़ गया।

ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि कारण बताओ नोटिस 7 सितंबर तक वापस नहीं लिए गए तो देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

इस बीच, सरकार बातचीत के जरिए टकराव को टालने की कोशिश कर रही है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर ने गुरुवार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की समस्याओं के समाधान के लिए उनके साथ बातचीत करने की सरकार की इच्छा से अवगत कराया था।

डीए बढ़ाने का ताजा प्रस्ताव कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग को राहत दे सकता है, लेकिन इससे पूरे सरकारी कर्मचारी वर्ग के भीतर मतभेद भी पैदा होने की संभावना है। खासकर जुलाई 2020 से पहले भर्ती किए गए कर्मचारी अपने लंबित बकाया और अन्य मांगों को लेकर पहले से ही दबाव बनाए हुए हैं।