एडिटर्स गिल्ड ने पीएम मोदी के प्रेस से संवाद न करने पर उठाए सवाल

गिल्ड ने कहा कि सोशल मीडिया या अन्य नियंत्रित माध्यमों के जरिए एकतरफा और पूर्व-निर्धारित संदेश देना स्वतंत्र मीडिया के साथ खुले संवाद का विकल्प नहीं हो सकता।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने विदेश मंत्रालय (एमईए) के कुछ अधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश और विदेश में बिना पूर्व-निर्धारित (अनस्क्रिप्टेड) प्रेस कॉन्फ्रेंस से परहेज़ को उचित ठहराने की कोशिशों की कड़ी आलोचना की है।

प्रधानमंत्री द्वारा मीडिया के सवालों का सामना न करने के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में एक एमईए अधिकारी ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी एक सफल राजनेता होने के नाते मीडिया के बजाय अपने मुख्यतः ग्रामीण मतदाताओं से सीधे संवाद करना पसंद करते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एडिटर्स गिल्ड ने इस तर्क को मूल रूप से त्रुटिपूर्ण बताया।

गिल्ड ने कहा कि प्रधानमंत्री केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि शहरी नागरिकों के प्रति भी समान रूप से जवाबदेह हैं और उन्हें देश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखनी चाहिए। गिल्ड ने कहा कि ऐसे समय में, जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण दुनिया अभूतपूर्व ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, प्रधानमंत्री किसी भी स्वतंत्र मीडिया मंच के माध्यम से इस गंभीर संकट पर अपने विचार साझा करने से लगातार बचते रहे हैं।

अपने बयान में गिल्ड ने कहा कि दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देशों में निर्वाचित नेता नियमित रूप से मीडिया से संवाद करते हैं और पत्रकारों के बिना पूर्व-निर्धारित सवालों का जवाब देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। मीडिया जनता की ओर से सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगता है और देश के सामने मौजूद तात्कालिक तथा महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनके विचार जानने का माध्यम बनता है।

गुरुवार को जारी बयान में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष संजय कपूर, महासचिव राघवन श्रीनिवासन और कोषाध्यक्ष टेरेसा रहमान ने उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस तरह की “सतही दलीलों” से बचें। उनका कहना था कि ऐसे तर्क न केवल मीडिया की स्वतंत्रता को कमजोर करते हैं, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को भी और गहरा करते हैं।