मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के अलावा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी.एस. मोहना वाली पीठ तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, जिनमें सर्वोच्च न्यायालय की प्रत्यक्ष निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने आंशिक कार्य दिवसों के दौरान इन याचिकाओं की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था और मामले को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नियमित रूप से न्यायालय खुलने पर सूचीबद्ध किया था।
मामले में पहले ही प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जा चुकी है और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी), जिसकी अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं, अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, एसआईटी की जांच के दौरान अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है तथा 77 लाख रुपये की बरामदगी भी की गई है।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से गठित टीम के माध्यम से सीबीआई द्वारा जांच कराई जाना आवश्यक है।
याचिकाओं में कहा गया है कि यह मामला “असाधारण सार्वजनिक महत्व” का है, क्योंकि इसका संबंध ट्रस्ट के प्रशासन की पारदर्शिता और करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान की सुरक्षा से है। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय से राज्य सरकार और ट्रस्ट को निर्देश देने का अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक सभी भौतिक और डिजिटल अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं, ताकि किसी भी प्रकार के दस्तावेजों के नष्ट होने, उनमें फेरबदल या छेड़छाड़ की आशंका न रहे। इसमें बैंक खातों का विवरण, भौतिक दस्तावेज, दान रजिस्टर, डिजिटल लेजर, यूपीआई लेनदेन रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज तथा कंप्यूटर रिकॉर्ड शामिल हैं।
याचिकाओं में ट्रस्ट के सभी दान, वित्तीय लेनदेन और परिसंपत्तियों का किसी स्वतंत्र एजेंसी से व्यापक फोरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की गई है। वहीं, बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका में ट्रस्ट को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑडिट की गई वित्तीय रिपोर्ट तथा दान का पूरा विवरण सार्वजनिक करने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
याचिकाओं में यह भी अनुरोध किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट भविष्य में इस प्रकार के आरोपों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक सुदृढ़ ऑडिट एवं निगरानी तंत्र विकसित करें। साथ ही, जांच पूरी होने तक ट्रस्ट को बड़े निवेश करने, महत्वपूर्ण अनुबंध करने या किसी बड़े वित्तीय निर्णय लेने से रोकने का आदेश भी जारी किया जाए।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई इन तीनों परस्पर संबंधित जनहित याचिकाओं में पहली याचिका स्वयं पक्षकार के रूप में नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने दायर की है, जिसमें सीबीआई जांच और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से ऑडिट कराने की मांग की गई है। दूसरी जनहित याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने संयुक्त रूप से दायर की है, जिसमें ट्रस्ट को प्राप्त दान में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। तीसरी याचिका राजद सांसद सुधाकर सिंह ने दायर की है, जिसमें पारदर्शिता, फोरेंसिक ऑडिट तथा सार्वजनिक धन की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।




