
मोदी के खास क्यों हैं विनोदे तावड़े!
-क्या है पवार और तावड़े का हैलिकॉप्टर कनेक्शन
-पवार ने की थी घोषणा बड़ा नेता बनने की
सुजीत ठाकुर,नई दिल्ली।
भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों की मुहर के बाद विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बना दिया गया है। वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तो हैं ही राज्यसभा के सदस्य भी हैं। इससे पहले वह बिहार का प्रभार निभा चुके हैं। जनसंख्या के लिहाज से देश के इस सबसे बड़े राज्य में अगले साल फरवरी-मार्च में चुनाव होने हैं। भाजपा राज्य में लगातार तीसरी बार जीत कर इतिहास रचना जब चाह रही है। ऐसे में विनोद तावड़े को वहां का प्रभारी चुने जाने के लिए संगठन ने उनके किस खूबी को ध्यान में रखा है? चलिए जानते हैं क्या खासियत है तावड़े की।
संगठन सर्वोपरि
वर्ष 1995 की शुरूआत में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। शरद पवार सीएम थे। वह विनोद तावड़े का नाम तक नहीं जानते थे। जिस दिन चुनाव आयोग तिथि घोषित करने वाला था, मुंबई स्थित भाजपा कार्यालय में सभी कार्यकर्ता टेलीविजन पर नजर जमा कर चुनाव आयोग की प्रेस कांफ्रेंस का इंतजार कर रहे थे। तावड़े भी थे। जैसे ही तिथि घोषित हुई तावड़े ने फोन से सभी एयर लाइन्स वालों से पूरे चुनाव के लिए उपलब्ध सभी हेलिकॉप्टर भाजपा के नाम पर बुक करा लिया और एडवांस पैसे पार्टी के चेक से तुरंत भिजवा दिया। यह सब कुछ दो घंटे में हुआ। बाद में जब शरद पवार की पार्टी और ऑफिस से हेलिकॉप्टर बुक कराने के लिए फोन किया गया तो उन्हे कंपनियों से बताया गया कि बुकिंग फुल हो चुकी है और भाजपा के किसी विनोद तावड़े ने बुक करा ली है। बाद में पवार ने भाजपा के कद्दावर नेता प्रमोद महाजन को फोन कर पूछा कि ये आपकी पार्टी में विनोद तावड़े नाम का लड़का कौन है। महाजन ने बताया कि प्रदेश भाजपा में कार्यकर्ता है। पवार को झटका तो लगा था लेकिन उन्होंने विनोद तावड़े का नाम हमेशा के लिए याद कर लिया। पवार वह चुनाव हार गए थे और राज्य में पहली बार भाजपा-शिवसेना सरकार बनी और मनोहर जोशी राज्य में पहली बार गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। चुनाव हारने के बाद पवार ने प्रमोद महाजन को तावड़े को बारे में बोला था कि आपका यह कार्यकर्ता एक दिन बड़ा नेता बनेगा।
शरद पवार ने तावड़े को पार्टी में लाने की कोशिश की
बाद में पवार ने तावड़े को मिलने के लिए बुलाया। तावड़े मिले भी। पवार उनकी योग्यता के मुरीद बन गए और उन्हे कई बार अपनी पार्टी (एनसीपी) में लाना चाहा। बड़े पद का ऑफर तक आया। लेकिन तावड़े को कभी भी,कोई भी ऑफर संगठन और भाजपा से बड़ा नहीं लगा।



