US-IranWar : अमेरिका के 2 लाख करोड़ स्वाहा, संकट में Trump!  

विफल होती शांति वार्ता और बढ़ता खर्च: अमेरिका-ईरान संघर्ष से दुनिया में ऊर्जा संकट, मिड-ईस्ट में बढ़ता तनाव और अमेरिकी सैन्य क्षति… पेंटागन ने बताई ईरान युद्ध की पहली आधिकारिक लागत आई सामने, 13 सैनिकों की मौत और अरबों का खर्च...

ट्रंप ने 60 दिनों में उड़ाए अरबों, अमेरिकी खजाना खाली! …Photo Credit : ANI
ट्रंप ने 60 दिनों में उड़ाए अरबों, अमेरिकी खजाना खाली! …Photo Credit : ANI

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली/वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 से जारी भीषण संघर्ष ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राजनीति पर गहरे निशान छोड़े हैं। पिछले आठ हफ्तों से चल रहे इस युद्ध ने न केवल सैन्य मोर्चे पर चुनौतियों को बढ़ाया है, बल्कि अमेरिकी खजाने पर भी भारी बोझ डाल दिया है। पेंटागन के कार्यवाहक कॉम्प्ट्रोलर जूल्स हर्स्ट तृतीय द्वारा हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी को दी गई जानकारी के अनुसार, इस युद्ध में अब तक लगभग 25 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपये) खर्च हो चुके हैं। यह सैन्य खर्च का पहला आधिकारिक अनुमान है, जिसने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

इस विशाल धनराशि का बड़ा हिस्सा गोला-बारूद, आधुनिक हथियारों की आपूर्ति, सैन्य अभियानों के संचालन और युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए उपकरणों के प्रतिस्थापन पर खर्च हुआ है। हालांकि, पेंटागन ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस लागत में मध्य पूर्व में क्षतिग्रस्त हुए अमेरिकी ठिकानों की मरम्मत का खर्च शामिल है या नहीं। इस युद्ध ने मानवीय मोर्चे पर भी अमेरिका को चोट पहुंचाई है, जिसमें अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर अमेरिका ने क्षेत्र में तीन विमान वाहक पोतों के साथ हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती कर रखी है।

राजनीतिक रूप से यह संघर्ष राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। मिड-टर्म चुनावों से मात्र छह महीने पहले ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है। रॉयटर्स के पोल के मुताबिक, युद्ध के प्रति जनसमर्थन मार्च के 38 प्रतिशत से घटकर अब 34 प्रतिशत रह गया है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और तेल की शिपमेंट बाधित होने से अमेरिका में पेट्रोल, डीजल और उर्वरकों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम जनता में असंतोष है। दूसरी ओर, ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा खारिज किए जाने के बाद शांति की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं। विपक्षी डेमोक्रेट्स ने सरकार पर असल लागत छिपाने का आरोप लगाते हुए इसे जनता की जेब पर भारी बोझ करार दिया है, जो आगामी चुनावों में एक निर्णायक मुद्दा बन सकता है।