तहलका ब्यूरो।
बेंगलुरु/नई दिल्ली। मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि के बीच एक हृदयविदारक हादसे में ‘Boring and Lady Curzon Hospital’ की भारी-भरकम चारदीवारी गिरने से दो मासूम बच्चों सहित सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बुधवार को हुई इस घटना ने शहर के बुनियादी ढांचे और मानसून पूर्व तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, तेज हवाओं और भारी बारिश से बचने के लिए ये लोग अस्पताल की दीवार के पास शरण लिए हुए थे, तभी जर्जर ढांचा ढह गया और सभी मलबे में दब गए।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल घटनास्थल का दौरा किया और इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह बुनियादी ढांचे की विफलता का मामला प्रतीत होता है, जिसके लिए उन्होंने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 5-5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) की घोषणा की है, जबकि घायलों के उपचार का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
राहत और बचाव कार्यों के दौरान पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने स्थानीय नागरिकों की मदद से घंटों मशक्कत कर मलबे से शवों को बाहर निकाला। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पुलिस सूत्रों के मुताबिक सातों मृतक रेहड़ी-पटरी वाले थे। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस और आपातकालीन सेवा कर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थानीय निवासियों की मदद से मलबे से शवों को बाहर निकाला। इस हादसे में सात अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है और फिलहाल उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर में हाल के दिनों में हुई अनियंत्रित बारिश ने पुरानी इमारतों और दीवारों की मजबूती को कमजोर कर दिया है। मुख्यमंत्री ने बीबीएमपी (BBMP) और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि शहर के उन सभी संवेदनशील ढांचों का ऑडिट किया जाए जो मानसून के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। इस घटना ने एक बार फिर बेंगलुरु के ड्रेनेज सिस्टम और पुराने सरकारी परिसरों के रखरखाव की पोल खोल दी है।




