Historic Mandate: बंगाल में 93% और तमिलनाडु में 85% रिकॉर्ड मतदान

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में लोकतंत्र का अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। बंगाल में 90% और तमिलनाडु में 85.14% की रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग ने चुनावी इतिहास के पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए। भारी सुरक्षा और छिटपुट हिंसा के बीच, करोड़ों मतदाताओं ने सत्ता के नए समीकरण तय करने के लिए निर्णायक मतदान किया…

रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग और तनाव: बंगाल-तमिलनाडु चुनाव में जनता का महासंकल्प, 4 मई पर टिकी निगाहें...
रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग और तनाव: बंगाल-तमिलनाडु चुनाव में जनता का महासंकल्प, 4 मई पर टिकी निगाहें...

तहलका ब्यूरो।

कोलकाता/नई दिल्ली। लोकतंत्र के महापर्व में आज पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मतदाताओं ने जो उत्साह दिखाया, वह भारतीय चुनावी इतिहास में एक स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाने वाला अध्याय बन गया है। बंगाल से लेकर कन्याकुमारी तक, जनता ने न केवल अपने मताधिकार का प्रयोग किया, बल्कि सत्ता के समीकरणों को नई दिशा देने के लिए भारी संख्या में घरों से बाहर निकले। विशेषकर पश्चिम बंगाल में मतदान का जो सैलाब उमड़ा, उसने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। शाम 5 बजे तक करीब 90% मतदान का आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि बंगाल का मतदाता इस बार आर-पार के मूड में है। भारी सुरक्षा और कड़े पहरे के बीच कोलकाता, नदिया, हुगली और चौबीस परगना जैसे जिलों की 142 सीटों पर जनता ने अपने भविष्य को ईवीएम में कैद कर दिया।

हालांकि, मतदान की इस चमक के साथ हिंसा और तनाव की काली परछाइयां भी जुड़ी रहीं। मुर्शिदाबाद, कूचबिहार और मालदा जैसे इलाकों में लोकतंत्र के इस उत्सव के बीच उपद्रव की खबरें भी आईं। मुर्शिदाबाद में एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर के काफिले पर हमला और टीएमसी-एजेयूपी कार्यकर्ताओं के बीच खूनी झड़प ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े किए। कूचबिहार के तूफानगंज में जब बेकाबू भीड़ ने चुनावी प्रक्रिया में खलल डालने की कोशिश की, तो केंद्रीय सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज कर स्थिति पर नियंत्रण पाना पड़ा। दक्षिण दिनाजपुर में भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर हमला और मालदा के हरिश्चंद्रपुर में तृणमूल के ही दो गुटों का आपस में भिड़ना यह दर्शाता है कि बंगाल की सत्ता का संघर्ष कितना व्यक्तिगत और आक्रामक हो चुका है।

दूसरी तरफ, तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर आज एक ही चरण में शांतिपूर्ण लेकिन बेहद निर्णायक वोटिंग हुई। वहां की जनता ने द्रविड़ राजनीति के अगले उत्तराधिकारी को चुनने के लिए कतारों में लगकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। बंगाल के दूसरे और अंतिम चरण में कुल 1,448 उम्मीदवारों की साख दांव पर लगी है, जिनमें भवानीपुर की ‘हॉट सीट’ पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच का मुकाबला सबसे अधिक चर्चा में है। यह चुनाव केवल सीटों का गणित नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और विचारधाराओं का युद्ध बन गया है।

निर्वाचन आयोग ने भी इस बार तकनीक और सुरक्षा का अद्भुत समन्वय पेश किया। 41,001 केंद्रों पर सीधी वेबकास्टिंग और केंद्रीय बलों की 2,400 से अधिक कंपनियों की तैनाती ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि जनता बिना किसी डर के वोट डाल सके। ईवीएम में तकनीकी खराबी की कुछ शिकायतों के बावजूद मतदान की गति कम नहीं हुई। अब करोड़ों मतदाताओं की खामोशी और ईवीएम में बंद यह जनादेश 4 मई को खुलेगा। भारी मतदान का यह प्रतिशत बदलाव की आहट है या निरंतरता की मुहर, इसका फैसला तो मतगणना के दिन होगा, लेकिन आज की भागीदारी ने यह साबित कर दिया है कि जनता ही लोकतंत्र की असली रक्षक है।