
तहलका की पड़ताल: 18 अगस्त को मुरीद एयरबेस पहुंचा ए-400 एम, 19 अगस्त को भी पाकिस्तान में ट्रैकिंग संकेत; इसी दौरान चीन-तुर्की के सैन्य विमानों की 60 घंटे की हलचल
एम. रियाज़ हाशमी | नई दिल्ली
7 अगस्त को मक्का में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने संयुक्त रक्षा समझौता किया। 13 अगस्त को तीनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग सहयोग बढ़ाने की बात सामने आई। इसके पांच दिन बाद, 18 अगस्त को तुर्की वायुसेना का एक भारी सैन्य परिवहन विमान पाकिस्तान के सैन्य एयरबेस से जुड़ी गतिविधि में दिखाई देता है। 19 अगस्त को भी उसी विमान की पाकिस्तान में मौजूदगी का एक और ट्रैकिंग संकेत मिलता है। इसके अगले दिन, 20 अगस्त को न्यूज़-18 ने दावा किया कि करीब 60 घंटे तक चीन और तुर्की के सैन्य परिवहन विमानों ने पाकिस्तान के कई सैन्य एयरबेसों के चक्कर लगाए।
A400M विमान की पहचान और मुरीद एयरबेस से जुड़ा संकेत
लेकिन ‘तहलका’ की पड़ताल में इस घटनाक्रम की एक अहम कड़ी सामने आई है- तुर्की वायुसेना का ए-400 एम एटलस, सीरियल नंबर 18-0093। एडीएस-बी आधारित विमान निगरानी रिकॉर्ड में पहचान संख्या 4बी8213 और कॉलसाइन टीयूएएफ526 के रूप में दर्ज है। स्वतंत्र सैन्य विमान ओएसआईएनटी विश्लेषक जॉनी जेमिनी ने भी इसी पहचान वाले विमान को पाकिस्तान के पीएएफ बेस मुरीद से लौटता बताया है। उनके मुताबिक विमान 18 अगस्त को मुरीद पहुंचा था।
इस्तांबुल-इस्लामाबाद उड़ान मार्ग की अतिरिक्त कड़ी
तुर्की के एक सोशल मीडिया स्रोत में भी टीयूएएफ526 के लिए इस्तांबुल-इस्लामाबाद मार्ग और विमान की पहचान ए400एम 18-0093 के रूप में दी गई है। यह स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन पाकिस्तान से जुड़ी उड़ान की एक अतिरिक्त कड़ी जरूर बनती है।
19 अगस्त को भी पाकिस्तान में ट्रैकिंग संकेत
19 अगस्त को ‘तहलका’ की पड़ताल में एक और संकेत सामने आता है। एक अन्य विमान-निगरानी रिकॉर्ड में 4बी8213 पहचान वाले इसी विमान की पाकिस्तान के खेवड़ा क्षेत्र के आसपास गतिविधि का संकेत मिलता है। इससे 18 अगस्त को मुरीद पहुंचने के ओएसआईएनटी दावे के अगले दिन भी पाकिस्तान में विमान की मौजूदगी का संकेत मिलता है। हालांकि सार्वजनिक आंकड़ों से यह अभी तय नहीं किया जा सकता कि विमान मुरीद में कितनी देर रुका या पाकिस्तान में उसकी कुल मौजूदगी कितने घंटे रही।
A400M विमान क्या ले जा सकता है?
मुरीद में उतरा तो क्या लेकर? ए-400 एम भारी सैन्य परिवहन विमान है और सैनिकों, वाहनों, सैन्य उपकरणों तथा दूसरी सैन्य रसद के परिवहन के लिए इस्तेमाल होता है। मुरीद पाकिस्तान वायुसेना का सैन्य हवाई अड्डा है, जिसे खुले स्रोतों में ड्रोन गतिविधियों से भी जोड़ा जाता है। न्यूज़-18 के मुताबिक करीब 60 घंटे की अवधि में चीनी सैन्य परिवहन विमान भी नूर खान और मसरूर एयरबेस पर उतरे। सुरक्षा सूत्रों ने इन्हें सैन्य उपकरण और ड्रोन की संभावित आवाजाही से जोड़ा। हालांकि किसी चीनी विमान की विशिष्ट पहचान या स्वतंत्र उड़ान रिकॉर्ड अभी सामने नहीं आया है।
मक्का से मुरीद तक- क्या कोई कड़ी है?
7 अगस्त का रक्षा समझौता, 13 अगस्त को सैन्य सहयोग बढ़ाने की घोषणा, 18 अगस्त को तुर्की के ए400एम की पाकिस्तान यात्रा और 19 अगस्त को उसकी ट्रैकिंग का संकेत- यह क्रम सवाल जरूर खड़ा करता है।
पाकिस्तान पहले से चीन का प्रमुख रक्षा साझेदार है। अब मक्का समझौते के बाद तुर्की के साथ उसका सैन्य सहयोग भी नए स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ऐसे में चीन और तुर्की के सैन्य परिवहन विमानों की एक साथ गतिविधि भारत के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
सैन्य सामग्री पहुंचने की अभी पुष्टि नहीं
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान में कोई सैन्य सामग्री पहुंचाई गई। लेकिन विमान की पहचान मिल गई है, पाकिस्तान के सैन्य एयरबेस से जुड़ाव का संकेत भी मिल गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है- ए-400 एम 18-0093 पाकिस्तान में क्या लेकर आया था?


