सीईसी पर मचे रार के बीच डिलिमेटशन विधेयक लाने की तैयारी में सरकार

सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर बने सियासी नैरेटिव को तोड़ने के लिए सरकार एक बड़ा मुद्दा लाकर पूरा माहौल बदलने की तैयारी में है। सरकार की इस सोच को मौजूदा चर्चा के माहौल से देश को बाहर निकालने की है। इसके लिए परिसीमन विधेयक संसद में एक बार फिर से लाया जा सकता है।

इस दिशा में सरकार को एक बड़ी सफलता मिली है। द्रमुक (डीएमके) ने 1970 के जनगणना के आधार पर परिसीमन को समर्थन देने की बात की है। यह केंद्र सरकार के लिए बड़ी सफलता है। हालांकि डीएमके ने साफ किया है कि यदि तमिलनाडु की मौजूदा सीटों की संख्या में 50 फीसदी के फॉर्मूले पर वृद्धि होती है तो वह 1970 के जनगणना के आधार पर परिसीमन विधेयक को अपना समर्थन देगी।

सरकार अप्रैल में इसी फॉर्मूले की तहत परिसीमन विधेयक अप्रैल में लाई थी। लेकिन दो तिहाई बहुमत नहीं मिलने की वजह से यह विधेयक गिर गई थी। हालांकि,उस समय भी सरकार की तरफ से साफ किया गया था कि, वह इस मसले पर पिछे नहीं हटेगी और दोबारा से इस मुद्दे पर बहुमत हासिल करने की कोशिश होगी।

चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है इसलिए संसद से पास कराने के लिए तो तिहाई बहुमत की जरूरत सरकार को है। एनडीए के पास संसद में दो तिहाई बहुमत नहीं है। अप्रैल में डीएमके भी इस विधेयक के विरोध में थी और कांग्रेस के साथ थी। लेकिन तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के टीवीके के साथ जाने से द्रमुक नाराज हो गई थी और उसने संसद में कांग्रेस से अलग बैठने की गुहार लोकसभा अध्यक्ष को लगाई थी।

शनिवार को चेन्नई में डीएमके की बैठक में 1970 की जनगणना के आधार पर परिसीमन विधेयक के समर्थन के द्रमुक के फैसले के बाद सरकार का इस दिशा में बढ़ने की राह आसान हो गई है। हालांकि सिर्फ द्रमुक के समर्थन भर से तो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं होगा। हालांकि, सरकार के सूत्रों का कहना कि कुछ अन्य दल भी समर्थन की प्रत्यक्ष और परोक्ष बात कर चुके हैं। कुछ विपक्षी दल के सांसद इस विधेयक पर मतदान के समय वाक आउट या अनुपस्थित रहने का रुख अपना कर विधेयक पास कराने में भूमिका निभा सकते हैं।