पटना में छात्रों का बड़ा मार्च, मुख्यमंत्री आवास घेराव की तैयारी; 70वीं BPSC रद्द करने समेत कई मांगें

पटना में मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करते छात्र प्रदर्शनकारी
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और देरी के विरोध में पटना में छात्र संगठनों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च का ऐलान किया।

पटना में छात्रों का बड़ा आंदोलन, सीएम आवास घेराव के लिए मार्च; कई मांगों को लेकर सड़क पर उतरे छात्र

स्नेहल चौरसिया | नई दिल्ली

70वीं BPSC रद्द करने समेत कई मांगों पर छात्रों का मार्च

बिहार की राजधानी पटना में छात्रों का आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया। अलग-अलग छात्र संगठनों से जुड़े छात्र अपनी कई मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हैं। छात्रों ने गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसे देखते हुए पटना में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
छात्र संगठनों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और देरी से युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है। आंदोलनकारी छात्र 70वीं बीपीएससी परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग भी उठाई जा रही है।

TRE-4 में सिंगल परीक्षा और भर्ती कैलेंडर की मांग

छात्रों की एक प्रमुख मांग शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर भी है। छात्र संगठनों की मांग है कि शिक्षक भर्ती में सिंगल परीक्षा कराई जाए। इसके साथ ही नेगेटिव मार्किंग हटाने, लंबित सरकारी भर्तियों का कैलेंडर जारी करने और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
आंदोलनकारी छात्रों ने BSSC और दरोगा भर्ती समेत दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई है। कुछ संगठनों ने अधिकतम उम्र सीमा बढ़ाने और डोमिसाइल नीति में बदलाव की मांग भी रखी है।

गांधी मैदान से जेपी गोलंबर तक सुरक्षा बढ़ा दी गई

पटना में छात्रों के मार्च को देखते हुए पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई है। गांधी मैदान, डाकबंगला, तारामंडल और जेपी गोलंबर समेत कई इलाकों में पुलिस बल तैनात किए जाने की बात सामने आई है।
वहीं, गर्दनीबाग में लंबे समय से चल रहा PhD धारकों का अनशन राज्यपाल से बातचीत के बाद खत्म हो गया है। हालांकि छात्रों के दूसरे संगठनों का आंदोलन अभी जारी है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।