
भारत सरकार की वेबसाइटों और अहम डिजिटल ढांचे को निशाना बनाने का मामला, 5 लैपटॉप-मोबाइल समेत डिजिटल उपकरण जब्त
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
54 सरकारी वेबसाइटों पर DDoS हमले की कोशिश का आरोप
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार से जुड़ी 54 वेबसाइटों पर साइबर हमले की कोशिश के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एनआईए ने महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, बिहार और दिल्ली में पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। जांच के दौरान तीन लैपटॉप, पांच मोबाइल फोन, पेन ड्राइव समेत कई डिजिटल उपकरण और हैकिंग गतिविधियों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। यह मामला साइबर आतंकवाद से जुड़ा है और मूल रूप से गुजरात एटीएस ने दर्ज किया था। बाद में इसकी जांच एनआईए ने अपने हाथ में ली। मामले में दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
54 सरकारी वेबसाइटों को निशाना बनाने की कोशिश
एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार से जुड़ी 54 वेबसाइटों पर डीडीओएस (डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस) हमले करने की कोशिश की थी। सरल भाषा में समझें तो डीडीओएस हमला किसी वेबसाइट या ऑनलाइन सिस्टम पर एक साथ बहुत बड़ी संख्या में इंटरनेट अनुरोध भेजकर उसे इतना व्यस्त कर देने की कोशिश है कि वह सामान्य लोगों के लिए काम करना बंद कर दे या उसकी सेवाएं बाधित होने लगें। एनआईए का कहना है कि कथित हमलों का निशाना केवल सामान्य सरकारी वेबसाइटें नहीं थीं, बल्कि महत्वपूर्ण कंप्यूटर संसाधन और क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (सीआईआई) भी थे। यानी ऐसे डिजिटल सिस्टम और नेटवर्क जो देश की जरूरी सेवाओं और महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, हमलों का कथित उद्देश्य देश की संप्रभुता, सुरक्षा और एकता को नुकसान पहुंचाना तथा लोगों में भय पैदा करना था।
पांच राज्यों और दिल्ली में NIA की एक साथ तलाशी
मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ एनआईए को ऐसे संदिग्धों के बारे में जानकारी मिली, जिन्होंने कथित तौर पर मुख्य आरोपियों को साइबर हमले की तैयारी और तकनीकी क्षमता बढ़ाने में मदद की थी। एनआईए ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर इन संदिग्धों की पहचान की। इसके बाद सक्षम अदालत से तलाशी वारंट हासिल किए गए और 24 अगस्त की सुबह पांच अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नार, गुजरात के खेड़ा जिले के नडियाद, तेलंगाना के करीमनगर जिले के रामागुंडम, बिहार के गोपालगंज और दिल्ली में की गई।
तीन लैपटॉप, पांच मोबाइल और पेन ड्राइव जब्त
तलाशी के दौरान एनआईए ने ऐसे डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए, जिनमें कथित हैकिंग गतिविधियों से जुड़ी सामग्री मिली है। एजेंसी ने कुल तीन लैपटॉप, पांच मोबाइल फोन और पेन ड्राइव समेत अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए। इन उपकरणों की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि संदिग्धों का पहले से गिरफ्तार आरोपियों के साथ किस तरह का संपर्क था और उन्होंने कथित साइबर हमलों की तैयारी में क्या भूमिका निभाई। डिजिटल उपकरण इस तरह के मामलों में अहम सबूत बन सकते हैं। इनमें बातचीत, फाइलें, इंटरनेट गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड और तकनीकी जानकारी मौजूद हो सकती है, जो जांच एजेंसियों को पूरी साजिश की कड़ियां जोड़ने में मदद करती है।
गुजरात एटीएस ने दर्ज किया था केस
यह मामला मूल रूप से गुजरात एटीएस ने दर्ज किया था। बाद में इसे एनआईए ने अपने हाथ में लेकर जांच आगे बढ़ाई। एनआईए के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह मामला 25 जून 2025 का है। मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। अब जांच उन लोगों की भूमिका तक पहुंच रही है, जिन्होंने कथित तौर पर हमले के लिए तकनीकी तैयारी, प्रशिक्षण या कौशल बढ़ाने में सहायता की।
क्या है डीडीओएस हमला?
डीडीओएस हमले को आसान उदाहरण से समझें। मान लीजिए किसी सरकारी वेबसाइट पर एक समय में सामान्य तौर पर हजारों लोग पहुंच सकते हैं। हमलावर जानबूझकर बड़ी संख्या में नकली इंटरनेट अनुरोध भेज दें तो वेबसाइट के सर्वर पर अचानक बहुत ज्यादा बोझ पड़ सकता है। इससे वेबसाइट धीमी हो सकती है या अस्थायी रूप से काम करना बंद कर सकती है। जब ऐसा हमला कई कंप्यूटरों या इंटरनेट कनेक्शनों के जरिए एक साथ किया जाता है, तो उसे डीडीओएस हमला कहा जाता है। अगर निशाना किसी महत्वपूर्ण सरकारी या राष्ट्रीय डिजिटल व्यवस्था को बनाया जाए तो इसका असर केवल वेबसाइट तक सीमित नहीं रह सकता। इसी वजह से ऐसे हमलों को गंभीर साइबर सुरक्षा खतरे के रूप में देखा जाता है।
जांच अभी जारी
एनआईए ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है। पांच राज्यों में हुई ताजा कार्रवाई से एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कौन लोग कथित गतिविधियों से जुड़े थे, उन्हें तकनीकी सहायता किसने दी और साइबर हमले की तैयारी किस स्तर तक की गई थी। फिलहाल एनआईए की ओर से पांच स्थानों पर तलाशी के बाद किसी नए आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इस कार्रवाई का मुख्य फोकस डिजिटल सबूत जुटाने और संदिग्धों की भूमिका की जांच पर है।



