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सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना मामले में चुनाव आयोग से अभी फैसला न करने को कहा

शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को चुनाव आयोग को कहा कि वह अभी कोई फैसला न ले। इससे उद्धव ठाकरे को कुछ राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि सभी पक्ष हलफनामा दायर कर सकते है और इस मामले पर अगली सुनवाई अब 8 अगस्त को होगी।

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यदि पक्षकार जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगते हैं तो चुनाव आयोग उसे समय देने पर विचार कर सकता है। सर्वोच्च अदालत 8 अगस्त को विचार करेगी कि क्या मामले को संवैधानिक पीठ को भेजा जाए।

आज चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर ऐसे मामलों में कोई पक्ष आयोग के पास आता है तो उस समय आयोग का ये फर्ज है कि वो तय करें कि असली पार्टी कौन है।

सर्वोच्च अदालत में गुरुवार को शिंदे गुट से सवाल किया कि अगर आप चुने जाने के बाद राजनीतिक दल को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं तो क्या यह लोकतंत्र के लिए खतरा नहीं है? इसके जवाब में शिंदे गुट की तरफ से पेश हुए वकील हरीश साल्वे ने कहा कि नहीं, मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं। हमने राजनीतिक दल नहीं छोड़ा है।

अदालत ने यह सवाल तब किया जब साल्वे ने कहा कि यदि कोई भ्रष्ट आचरण से सदन में चुना जाता है और जब तक वो अयोग्य घोषित नहीं होता तब तक उसके द्वारा की गई कार्रवाई कानूनी होती है। जब तक उनके चुनाव रद्द नहीं हो जाते, तब तक सभी कार्रवाई कानूनी है। दल बदल विरोधी कानून असहमति विरोधी कानून है। यहां एक ऐसा मामला है जहां दलबदल विरोधी नहीं है। उन्होंने (शिंदे गुट) कोई पार्टी नहीं छोड़ी है। अयोग्यता तब आती है जब आप किसी निर्देश के खिलाफ मतदान करते हैं या किसी पार्टी को छोड़ देते हैं।

साल्वे ने कहा कि कोर्ट में याचिका दाखिल करने और अयोग्यता के खिलाफ कार्रवाई दो महीने बाद होती है। उस दौरान वो सदन में वोट दे देता है तो ऐसा नहीं है कि दो महीने बाद वो अयोग्य होता है तो उसका वोट मान्य नहीं होगा। ऐसे में केवल उसे अयोग्य माना जाएगा न कि उसके द्वारा किये गए वोट को।

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने पूछा कि जब आप कोर्ट आये थे तब हमने कहा था कि विधानसभा स्पीकर अयोग्यता मामले का निपटारा करेंगे न कि सुप्रीम कोर्ट और न ही हाईकोर्ट। तो आपके कहने का मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट फैसला नहीं कर सकते। आप कहते हैं कि स्पीकर को पहले फैसला करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस पर साल्वे ने कहा – बिल्कुल।

प्रधान न्यायाधीश ने इसके बाद उद्धव ठाकरे गुट के वकील कपिल सिब्बल से पूछा कि ये मामला राजनीतिक पार्टी की मान्यता का है, इसमें हम दखल कैसे दें? चुनाव आयोग में ये मामला है। कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की।

कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग यह निर्धारित नहीं कर सकता कि असली शिवसेना कौन है ? बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला होने तक चुनाव आयोग ये फैसला नहीं कर सकता। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मान लीजिये कि आयोग इस मामले में एक फैसला देता है और तब अयोग्यता पर फैसला आता है तो फिर क्या होगा?

पाक में 1200 साल पुराना मंदिर ईसाई परिवार से मुक्त, होगा जीर्णोद्धार

पाकिस्तान के एक कोर्ट ने लाहौर स्थित 1200 साल पुराने मंदिर पर ईसाई परिवार का कब्ज़ा ख़त्म करने का आदेश दिया है। कई साल चली कानूनी लड़ाई के बाद अब इस मंदिर का जीर्णोद्धार होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मंदिर पर एक ईसाई परिवार का कब्जा था। अब कोर्ट ने इसे खाली करने को कहा है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों की देखरेख करने वाले संघीय संस्था इवेक्यूइ ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के मुताबिक ईसाई परिवार से लाहौर के अनारकली बाजार के पास स्थित वाल्मीकि मंदिर का कब्जा वापस ले लिया गया है। ईटीपीबी पाकिस्तान में 200 गुरुद्वारों और 150 मंदिरों की देखरेख करता है।

बता दें लाहौर में कृष्ण मंदिर के वाल्मीकि मंदिर ही खुला रहता है, जहां हिन्दू पूजा-पाठ कर सकते हैं। मंदिर पर कब्ज़ा करने वाले ईसाई परिवार का दावा था कि उसने हिंदू धर्म अपना लिया है। वह पिछले दो दशक से केवल वाल्मीकि जाति के हिंदुओं को मंदिर में पूजा करने दे रहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 1992 में भारत में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद, हथियारों से लैस एक गुस्साई भीड़ ने वाल्मीकि मंदिर पर धावा बोल दिया था। मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया और इमारत में आग लगा दी गई थी। पड़ोस की दुकानों में भी आग लग गई। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के गठित एक सदस्यीय आयोग ने सरकार को सिफारिश की थी कि मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाना चाहिए।

ताइवानी वेबसाइट पर साइबर अटैक के बीच चीन का सैन्य अभ्यास शुरू

ताइवान की वेबसाइट पर साइबर अटैक के बीच चीन ने ताइवान के ईर्द-गिर्द अपना सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर  नैंसी पेलोसी की 24 घंटे से भी कम चली ताइवान की यात्रा के बाद चीन ने यह अभ्यास शुरू किया है।

पेलोसी की इस यात्रा से पैदा हुआ तनाव अब और बढ़ गया है और इससे चीन और अमेरिका के बीच तनातनी गंभीर स्तर पर पहुँच गयी है। ताइवान को अपना हिस्सा कहने वाला चीन ने पेलोसी की ताइवान यात्रा को अपने ऊपर हमले की तरह देख रहा है।

उधर पेलोसी की यात्रा के बाद चीन की तरफ से दी गयी धमकियों से बेपरवाह ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने कहा कि इनका देश झुकेगा नहीं। इससे पहले पेलोसी ने ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन संग मुलाकात में कहा था कि अमेरिका  ताइवान को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे नहीं हटेगा और हमें अपनी दोस्ती पर गर्व है।

इस बीच बढ़ते तनाव के बीच चीन ने ताइवान के आसपास लाइव-फायर मिलिट्री ड्रिल्स की घोषणा कर दी है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह ताइवान की मुख्य बंदरगाहों और शहरी इलाकों को खतरे में डाल सकती है क्योंकि इससे चीनी सैन्य अभ्यास का ज़ोन ताइवान के 20 किलोमीटर पर रह जाएगा।

ताइवान के अधिकारियों ने कहा कि रक्षा मंत्रालय करीब से तैयारियों का जायजा ले रहा है और अपनी क्षमता मजबूत कर रहा है। उसने कहा जरूरत पड़ने पर समय रहते उचित जवाब दिया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि चीन के सैन्य अभ्यास से ताइवान की समुद्री सीमा का उल्लंघन होगा और यह इंटरनेशनल ऑर्डर को उकसाने की हरकत है। उधर जापान ने भी ताइवान के नज़दीक चीन के सैन्य अभ्यास पर चिंता जताई है।

कोरोना मामलों में उछाल-गिरावट का क्रम जारी, एक दिन में 19893 मामले

पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामलों में 16 फीसदी की उछाल के साथ 19,893 नए मामले सामने आये हैं। देश में अब कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 44,087,037 हो गई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आज सुबह जारी आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को 17,135 नए मामले सामने आए थे। पिछले 24 घंटे में 53 लोगों ने कोविड-19 संक्रमण की वजह से जान गंवा दी है। अब तक देश में कुल 526,530 लोग कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से दम तोड़ चुके हैं।

देश में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या वर्तमान में 136,478 है। पिछले 24 घंटे में 20,419 लोगों ने कोरोना वायरस को मात दी है। इसके बाद देश में कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर कुल 43,424,029 पहुंच गई है।

पिछले 24 घंटे में देश भर में 38,20,676 कोविड डोज लगाई गई हैं। देश में अभी तक कुल 2,05,22,51,408 वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी है। इससे संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या भी घटी है।

जस्टिस उदय ललित के अगले सीजेआई बनने संभावना, दो महीने रहेंगे पद पर

मुसलमानों में ‘तीन तलाक’ प्रथा अवैध ठहराने सहित कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे सर्वोच्च न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम जज जस्टिस उदय यू ललित देश के अगले प्रधान न्यायाधीश हो सकते हैं। ललित का कार्यकाल सिर्फ दो महीने का होगा लिहाजा इस साल नवंबर में तीसरे वरिष्ठतम जज डीवाई चंद्रचूड़ अगले प्रधान न्यायाधीश बन सकते हैं।

सरकार ने प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना को पत्र लिखकर अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश का अनुरोध किया है। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने जो पत्र लिखा है वह पिछले कल देर शाम मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय में प्राप्त हुआ है। सीजेआई एनवी रमना अब अपने उत्तराधिकारी के रूप में अपने बाद वरिष्ठतम जज जस्टिस यूयू ललित के नाम की सिफारिश करेंगे।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की पिछले कल जो बैठक हुई थी उसमें जजों की नियुक्ति पर कोई सहमति नहीं बन पाई। तय किया गया कि नए प्रधान न्यायाधीश ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति पर फैसला करेंगे। जस्टिस रमना रमना 26 अगस्त को सेवानिवृत्त होंगे।

वर्तमान सीजेआई रमना का कार्यकाल काफी उपलब्धियों भरा रहा है और वे अपनी बात कहने में काफी मुखर भी रहे हैं। उनके कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में एक साथ 9 जजों सहित सहित पहली बार एक साथ तीन महिला जजों ने शपथ ली। यही नहीं इनमें एक जस्टिस बीवी नागरत्ना भविष्य में देश की पहली महिला सीजेआई बनेंगी। रमना के कार्यकाल में ही देश के अलग-अलग उच्च न्यायालयों में 250 जजों की नियुक्तियां हुई।

जहाँ तक दूसरे वरिष्ठतम जज जस्टिस उदय यू ललित की बात है वे मुसलमानों में तीन तलाक प्रथा ख़त्म करने वाले ऐतिहासिक फैसले सहित कई बड़े फैसलों का हिस्सा रहे हैं। यदि वह अगले सीजेआई बनते हैं तो बार से सीधे शीर्ष अदालत की पीठ में 1964 में जस्टिस एसएम सीकरी के बाद पदोन्नत किये जाने वाले दूसरे सीजीआई बनेंगे।

इसके अलावा जस्टिस ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय के त्वचा से त्वचा के संपर्क संबंधी विवादित फैसले को खारिज कर दिया था। नौ नवंबर, 1957 को जन्मे न्यायमूर्ति ललित ने जून 1983 में एक वकील के रूप में नामांकन किया था और दिसंबर 1985 तक बॉम्बे उच्च न्यायालय में वकालत की थी।

जनवरी 1986 में ललित दिल्ली आकर वकालत करने लगे और अप्रैल 2004 में, उन्हें शीर्ष अदालत द्वारा एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया। उन्हें 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सुनवाई के लिए केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था।

ममता मंत्रिमंडल का विस्तार, सरकार में 9 नए मंत्री शामिल

पश्चिम बंगाल केबिनेट में बुधवार को किये गए विस्तार में बाबुल सुप्रियो सहित 9 नए मंत्री शामिल किये गए हैं। मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के दोबारा सत्ता में आने के बाद मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार है।

हाल में धनशोधन मामले में मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद यह विस्तार हुआ है। पार्थ को ममता का करीबी माना जाता था। कुछ महीने पहले भाजपा छोड़कर टीएमसी में आये बाबुल सुप्रिया को मंत्री बनाया गया है।

आज किये गए विस्तार में स्‍नेहाशीष चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, उदयन गुहा और प्रदीप मजूमदार को भी केबिनेट मंत्री बनाया गया है जबकि चार जूनियर मंत्रियों के तौर पर बिरभा हंसदा, बिप्‍लब रॉय चौधरी, ताजमुल हुसैन और सत्यजीत बर्मन ने शपथ ली है।

याद रहे धनशोधन मामले में गिरफ्तार होने के बाद पार्थ चटर्जी को मंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उनके मंत्रालयों उद्योग, वाणिज्य सहित पांच विभागों का को दिया जाना था।

अफगानिस्तान में सिखों पर हमले चिंता का विषय, राज्यसभा में बोले हरभजन

क्रिकेटर से राजनेता बने आम आदमी पार्टी (आप) के राज्य सभा सदस्य हरभजन सिंह ने बुधवार को सदन में शून्यकाल के दौरान अफगानिस्तान में सिखों और गुरुद्वारों पर हमले का मुद्दा जोरशोर से उठाया। हरभजन सिंह ने कहा कि हमें क्यों निशाना बनाया जा रहा है? उनकी बात की राज्यसभा के सभापति ने तारीफ़ की।

हरभजन सिंह ने यह मुद्दा उठाते हुए राज्यसभा ने कहा – ‘ये एक सिख होने की पहचान पर हमला है। यह ऐसा मसला है जिसने दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले सिख समुदाय की भावनाओं को आहत किया है।’

भगवा पगड़ी पहने हरभजन सिंह ने जोर देकर कहा कि इस तरह के हमले हमें कई सवाल उठाने पर मजबूर करते हैं कि ये हमले हमारे ऊपर ही क्यों? क्यों हमें ही निशाना बनाया जा रहा है?’

हरभजन ने कहा – ‘दुनियाभर में गुरुद्वारों ने कोविड काल में भोजन से लेकर ऑक्सीजन तक लोगों को मुहैया कराया था। स्वतंत्रता के बाद देश में सिखों का योगदान अद्भुत था। देश की जीडीपी, रोजगार, दान-धर्म में सिख हमेशा सबसे आगे रहे हैं। सिख समुदाय भारत और अन्य देशों के बीच संबंधों में एक मजबूत कड़ी रहा है। वो अपने साहस, पराक्रम और कड़ी मेहनत के लिए जाने जाते हैं। ये सब होने के बावजूद हमारे साथ ऐसा सलूक क्यों?

अपने संबोधन में सिंह ने जून में अफगानिस्तान के काबुल में एक गुरुद्वारे में किये गए धमाकों का उदाहरण देते हुए कहा कि दो लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। मार्च 2020 को काबुल के गुरुद्वारों में आत्मघाती हमलों में बच्चों समेत 25 सिखों की मौत हुई। मेरा विदेश मंत्रालय से आग्रह है कि उन्हें जरूरी कदम उठाने चाहिएं।

अफगानिस्तान को लेकर हरभजन ने कहा कि वह कभी हजारों सिखों का गढ़ था। दशकों के संघर्ष के कारण यह संख्या कम होकर मुट्ठी भर रह गई है। हरभजन सिंह ने कहा – ‘साल 1980 के दशक में अफगानिस्तान में 2.20 हजार सिख और हिंदू रहते थे। साल 1990 के दशक की शुरुआत में यह आंकड़ा गिरकर 15 हजार पहुंच गया और 2016 में कम होकर 1350 हो गया है। अब वहां महज 150 सिख ही बचे हैं।’

इससे पहले हरभजन सिंह जब बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने सभापति और सदस्यों की तरफ हाथ जोड़कर अभिवादन किया। हरभजन के बोलते के बाद सभापति वेंकैया नायडू ने भी उनकी तारीफ की। कहा कि हरभजन सिंह जाने माने क्रिकेटर हैं और आपने जो विषय उठाया वह महत्वपूर्ण है। मेरे ख्याल से विदेश मंत्री इसपर और ध्यान देंगे। इसपर सदस्यों ने मेज थपथपाकर उनका अभिवादन किया।

राहुल और कांग्रेस नेताओं ने डीपी में लगाई तिरंगे वाली नेहरू की तस्वीर

आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर पीएम मोदी ने देशवासियों का अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जहां तिरंगे के साथ वाली डीपी (डिस्प्ले फोटो) का आह्वान किया है वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की तिरंगा लिए तस्वीर को डीपी बनाया है।

देशभर में आजादी के अमृत महोत्सव के कार्यक्रम चल रहे हैं। पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ-साथ भाजपा के तमाम मंत्रियों और नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की डीपी पर तिरंगा लगाया है। वहीं
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के कई नेताओं ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की हाथ में तिरंगा लिए तस्वीर वाली डीपी लगाई है।

कांग्रेस ने तो आरएसएस से सवाल पूछा है कि उन्होंने अपने मुख्यालय पर आजादी के बाद 52 साल तक तिरंगा क्यों नहीं फहराया ? क्या वे अब प्रधानमंत्री की बात मानेंगे? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाथ में तिरंगा लिए नेहरू की तस्वीर वाली डीपी लगाने के बाद ट्वीट में कहा – ‘देश की शान है हमारा तिरंगा, हर हिंदुस्तानी के दिल में है हमारा तिरंगा।’

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यही तस्वीर लगाकर ट्वीट किया – ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा।’ यही नहीं कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी डीपी के तौर पर यही तस्वीर लगाई गई है।

कांग्रेस ने कहा – ‘तिरंगा हमारे दिल में है, लहू बनकर हमारी रगों में है। 31 दिसंबर, 1929 को पंडित नेहरू ने रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराते हुए कहा था, ‘अब तिरंगा फहरा दिया है, ये झुकना नहीं चाहिए। आइए हम सब देश की अखंड एकता का संदेश देने वाले इस तिरंगे को अपनी पहचान बनाएं। जय हिंद।’

राजनीतिक दलों के मुफ्त सुविधाओं के वादों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

चुनाव प्रचार में जनता को मुफ्त में सुविधाएं (बिजली-पानी आदि) उपलब्ध करवाने के वादों पर सर्वोच्च न्यायालय ने एक विशेषज्ञ निकाय बनाने की वकालत करते हुए एक हफ्ते के भीतर इसे लेकर प्रस्ताव पेश करने को कहा है। इस मामले पर अब 11 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ये मुद्दा (फ्री बी) सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालता है। अदालत ने एक हफ्ते के भीतर ऐसे विशेषज्ञ निकाय के लिए प्रस्ताव मांगते हुए ऐसे निकाय में केंद्र, विपक्ष के दलों, चुनाव आयोग, नीति आयोग, आरबीआई और अन्य हितधारकों को शामिल करने का सुझाव दिया है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे निकाय में दोनों अर्थात फ्री बी पाने वाले और इसका विरोध करने वाले भी शामिल किये जाएं।

इस मामले पर अब 11 अगस्त को अगली सुनवाई होगी। बुधवार को देश के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है। मुफ्त उपहारों का एक पहलू यह है कि ये गरीबों और दलितों के कल्याण के लिए आवश्यक हैं लेकिन आर्थिक पहलू पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग को इससे दूर रखें। यह एक आर्थिक मुद्दा है और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग सुझाव दे सकता है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि आपको लगता है कि संसद इस पर बहस करेगी? कोई भी राजनीतिक दल इस पर चर्चा करने के लिए सहमत होगा ? सभी दल मुफ्त चाहते हैं। लेकिन अंतत: करदाता की सोच महत्वपूर्ण है। वे चाहते हैं कि धन का उपयोग विकास के लिए हो न कि केवल राजनीतिक दलों द्वारा उपयोग किया जाए।

उन्होंने कहा कि सभी को एक स्वतंत्र मंच पर बहस में भाग लेने दें। सत्तारूढ़ दल, विपक्ष आदि सहित सभी हितधारकों को इस पर बहस करने दें। उन्हें सभी वर्गों के साथ बातचीत करने दें। मुफ्त के लाभार्थियों के साथ-साथ इसका विरोध करने वाले भी शामिल हों। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि दबे-कुचले लोगों के बारे में भी सोचना होगा।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने कहा कि राजनीतिक दलों को फ्रीबीज के लिए पैसा कहां से मिलता है ? केंद्र सरकार के महाधिवक्ता (सॉलिसिटर जनरल ) तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग को एक बार समीक्षा करने दी जाए। ये देश राज्य और जनता पर बोझ बढ़ाता है और सैद्धांतिक रूप से सरकार भी इस दलील से सहमत है।

मानसून सत्र: मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकारी एजेंसियों के दुरूपयोग का मुद्दा राज्यसभा में उठाया

कांग्रेस संसदीय दल और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को राज्यसभा में सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स सहित सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला उठाया। खड़गे ने कहा कि इन संवैधानिक एजेंसियों का दुरुपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है। शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने भी ईडी के पार्टी सांसद संजय राउत के घर छापे और उनकी गिरफ्तारी का मसला उठाया।

खड़गे ने कहा कि सरकार राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ भेदभाव कर रही है और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गयी सरकारों को गिरा रही है। खड़गे की ही तरह शिवसेना सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा में पार्टी सांसद संजय राउत की ईडी की तरफ से की गई गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि कानून और संविधान को महाराष्ट्र में अनदेखा किया जा रहा है। इससे पहले लोकसभा की कार्यवाही को 12 बजे तक के लिए स्थगित किया गया।

उधर भाजपा की तिरंगा यात्रा पर लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आजादी की जंग के समय जो अखबार निकला था, उसके खिलाफ आज घिनौनी साजिश हो रही है।

उन्होंने कहा कि हम अपना कार्यक्रम करेंगे। हम भाजपा के पोलिटिकल एजेंडा में कैसे शामिल हो सकते हैं। सरकारी कार्यक्रम को अगर राजनीतिक कार्यक्रम बनाया जाए तो उसमें हम शामिल नहीं होंगे।

इस बीच आम आदमी पार्टी के सदस्य हरभजन सिंह ने अफगानिस्तान में गुरुद्वारों और सिखों पर हमले को लेकर राज्यसभा में शून्यकाल नोटिस दिया है। भाजपा के सुशील कुमार मोदी ने राज्यसभा में देश में राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त उपहार देने की प्रथा पर अंकुश लगाने के लिए शून्यकाल नोटिस दिया है। आप के सदस्य संजय सिंह ने गुजरात के नवसारी में मंदिर तोड़े जाने पर राज्यसभा में सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस दिया है।