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धर्म की नुमाइश

आजकल नुमाइश का दौर है। वैसे तो लोग अपने फ़ायदे के लिए किसी भी चीज़ की नुमाइश करते हैं। लेकिन जिस तरह लोग ख़ुद को धार्मिक दिखाने की नुमाइश करते हैं, वो आश्चर्यजनक है। यह पूरी तरह आडम्बर है। आजकल हर धर्म में ऐसे लोगों की भरमार है। ये लोग अपने धर्म को समझे बग़ैर ही ख़ुद को सबसे बड़ा धर्मपरायरण समझते हैं। ऐसे लोगों को अज्ञानी अथवा मूर्ख कहा जाए, तो ग़लत नहीं होगा। सही मायने में यह कट्टरता है। इनकी बात कोई न माने अथवा सवाल करे, तो ये क्रोध में आपा खो देते हैं। यह इनका सबसे बड़ा और पहला अवगुण है, जो बात-बात में सामने आ जाता है। मगर इन लोगों में एक भी अपने धर्म के संस्थापकों की राह पर नहीं दिखता। सब धर्म ग्रन्थों और उनसे सम्बन्धित ग्रन्थों में लिखी कहानियाँ सुनते-सुनाते रहते हैं। अफ़सोस, कहानियों से सीख भी नहीं लेना चाहते। सबको धर्म की अफ़ीम खाकर उन्मादी नारे लगाने से फ़ुरसत नहीं है। सही मायने में अपने धर्म का पालन कोई नहीं कर रहा है।

आज न सनातन धर्म के लोग सनातन संस्कृति का पालन कर रहे हैं। न इस्लाम धर्म के लोग इस्लाम की सुन्नतों पर अमल कर रहे हैं। न ईसाई धर्म के लोग ईसाई धर्म पर चल रहे हैं। न बौद्ध धर्म के लोग धम्म के उपदेशों पर हैं। न जैन धर्म के लोग जिन की वाणी पर खरे उतर रहे हैं। न पारसी धर्म के लोग अपने धर्म पर चल रहे हैं। न ही यहूदी अपने धर्म पर टिके हैं। और न ही किसी पंथ के लोग अपने-अपने पंथ की गरिमा बनाकर रख रहे हैं। लेकिन धर्म से भटके हुए सब लोग धर्म पर होने का दावा करते हैं। कोई भी व्यक्ति यह नहीं कहता कि वह धर्म से भटक गया है। पहला अधर्म तो यही है कि सब एक-दूसरे के धर्म में ख़ामी निकालने, उसे बदनाम करने और एक-दूसरे पर हमला करने में लगे हैं। जबकि इसकी इजाज़त कोई भी धर्म नहीं देता। सवाल यह है कि क्या एक-दूसरे के धर्म से नफ़रत करने वाले लोग एक-दूसरे के बग़ैर अपना हर काम चला लेंगे? नहीं। सच तो यह है कि सभी लोग अपनी मनोदशा स्वार्थ के आधार पर तय करते हैं। सबकी सोच इसी बात पर टिकी है कि उनका फ़ायदा कहाँ, किससे होगा? अगर किसी को काम पड़ जाए या उस पर मुसीबत आ जाए, तो वह किसी भी धर्म के उस व्यक्ति के पास जाने में संकोच नहीं करता, जिसके पास उसका समाधान हो। धर्म के आधार पर वह भले ही उससे नफ़रत करता हो। लेकिन अगर उसकी मुसीबत का हल दूसरे धर्म के व्यक्ति के पास हो, तो वह अपने स्वार्थ के लिए दिखावे की मित्रता का बाना पहनकर उसके सामने दण्डवत् दिखायी देगा। जब ज़रूरत न हो, तो दूसरे धर्म का व्यक्ति दुश्मन नज़र आता है। आख़िर क्यों बिना एक-दूसरे से झगड़े, बिना एक-दूसरे का कालर पकड़े किसी की रोटी हज़्म नहीं होती? मज़हबों में दिये गये प्यार के सन्देश और इंसानियत के रास्ते पर चलने के पैग़ाम से उस समय किसी को कोई वास्ता नहीं रहता। कोई किसी के धर्म के बारे में सच भी कह दे, तो धर्म उनका निजी मामला हो जाता है, और उसे ग़ुस्सा आने लगता है। लेकिन जब कोई धार्मिक रीति का जुलूस निकालना हो, तो धर्म दिखावे की वस्तु बन जाता है। कुछ लोग तो झगड़े की जड़ें टटोलने में लगे रहते हैं।

क्या कोई सनातनधर्मी बतायेगा कि सनातन धर्म में जितने भी देवता, अवतार और महान् लोग हुए हैं, उन्होंने कभी हिंसा का रास्ता अपनाया हो? कभी किसी को सिर्फ़ इसलिए मार दिया हो कि वह दूसरे धर्म का व्यक्ति था? क्या कभी कोई मुस्लिम जवाब देगा कि पैगम्बर मोहम्मद ने कभी किसी से ज़रा भी नफ़रत की हो? कभी उस बुढिय़ा को गाली दी हो या उस पर हमला किया हो, जो उन पर रोज़ कूड़ा फेंकती थी? कभी किसी की इसलिए हत्या कर दी हो कि वह एक अल्लाह को नहीं मानता? क्या कभी किसी ईसाई ने ख़ुद को पीटने वाले को या जान से मारने की कोशिश करने वाले को माफ़ किया? ईशु ने तो अपनी हत्या करने वालों को माफ़ करके उनके लिए प्रार्थना की। कोई बौद्धिस्ट बताएगा कि बुद्ध ने कहाँ हिंसा, मांस भक्षण और अशान्ति फैलाने को कहा है? कोई माने अथवा न माने; लेकिन सच यही है कि किसी भी धर्म और पन्थ के लोग शत्-प्रतिशत् धर्म पर नहीं टिके हैं। किसी भी धर्म या पन्थ में बेईमानी, झूठ बोलने, दूसरों का हक़ मारने, पर स्त्री पर ग़लत नज़र डालने, दूसरों पर अत्याचार करने, उन्हें नुक़सान पहुँचाने और उनके प्रति मन में किसी प्रकार का द्वेश रखने की अनुमति तक नहीं है। कितने लोग इन नियमों पर टिके हुए हैं? जो धर्म के ठेकेदार हैं, वे तो और भी धृष्ट-भ्रष्ट हैं। उनकी नीयत में तो खोट-ही-खोट है।

सवाल यह है कि धर्मों को लेकर लोगों में टकराव बढ़ क्यों रहा है? इसकी सबसे बड़ी वजह धर्मों में होने वाला दिखावा है। धर्म की नुमाइश नहीं करनी चाहिए। लेकिन लोग अब धर्म की नुमाइश करने को ही धर्म पर चलना समझते हैं। वास्तव में धर्म क्या है? यह दुनिया में उँगलियों पर गिने जाने लायक लोग ही शायद समझते होंगे।

ईरान से तनाव के बीच इजरायल ने सीरिया के दो हवाई अड्डों पर की एयर स्ट्राइक

बुधवार रात सीरिया के अलेप्पो एयरपोर्ट सहित दो हवाई अड्डों पर इजरायल के हमले के बाद ईरान के साथ उसकी युद्ध जैसी स्थिति बन रही है। रात के इस हमले में इजरायल ने एक ईरानी विमान को भी निशाना बनाया है। इस एयर स्ट्राइक के बाद दोनों ही तरफ से तनाव बढ़ाने वाले बयान आये हैं। इजराइल ने हफ्तेभर से कम समय में दूसरी बार यह एयर स्ट्राइक की है।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस हमले की अमेरिका को पहले से जानकारी थी क्योंकि इजरायल के प्रधानमंत्री यैर लैपिड ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को फोन पर इसकी सूचना दी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस ईरानी विमान पर इजरायल ने हमला किया है वह मिसाइल और वेपन (हथियारों) से लैस था। इजराइल ने एक घंटे के भीतर दो हवाई अड्डों को निशाना बनाया। यह एक एयर स्ट्राइक थी। ईरानी मीडिया के मुताबिक उसके विमान को उतरने से रोकने के लिए इजरायल ने अलेप्पो एयरपोर्ट को निशाना बनाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायली हमले से एयरपोर्ट पर काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि, किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। हमले के दौरान एयरपोर्ट पर एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव था और मिसाइल को रोकने की कोशिश भी की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर स्ट्राइक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से इजरायल के प्रधानमंत्री यर लैपिड ने फोन पर बात की थी।

उधर सीरियन अरब न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सीरियाई एयर डिफेंस ने दमिश्क के ग्रामीण इलाके में इजराइली हमले का सामना करते हुए उसकी कई मिसाइलें गिरा दीं। सीरियाई सेना के हवाले से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक रात करीब सवा नौ बजे उत्तरी अधिकृत फिलिस्तीन में तिबेरियास झील की दिशा से इजरायल ने दमिश्क के दक्षिण पूर्व में कुछ जगहों को निशाना बनाते हुए हमला किया।

रात करीब आठ बजे इजराइल ने अलेप्पो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायली हमले से एयरपोर्ट को तो नुकसान हुआ है लेकिन कोई व्यक्ति हताहत नहीं हुआ।

यूएन रिपोर्ट में चीन पर शिनजियांग क्षेत्र में मानवाधिकार हनन करने का आरोप

अपने तीसरे कार्यकाल की तैयारी कर रहे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर संयुक्त राष्ट्र्र ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें उनके नेतृत्व में चीन के उइगर मुस्लिम आबादी वाली शिनजियांग क्षेत्र में गंभीर मानवाधिकार हनन में संलिप्त होने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘शिनजियांग क्षेत्र में यातना के आरोप तथ्यपरक थे और मानवता के खिलाफ संभावित अपराधों का संकेत देते हैं’। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की यह रिपोर्ट इसके उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट का चार साल का कार्यकाल पूरा होने से ऐन पहले जारी की गई जिसमें चीन पर शिनजियांग क्षेत्र में गंभीर मानवाधिकार हनन के आरोप लगाए गए हैं।

इस रिपोर्ट को बुधवार रात जारी किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ‘चीन सरकार के आतंकवाद-रोधी और अतिवाद-विरोधी रणनीतियों के आवेदन के संदर्भ में शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किए गए हैं’। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘वहां जबरन चिकित्सा उपचार और हिरासत की प्रतिकूल परिस्थितियों सहित यातना या दुर्व्यवहार के पैटर्न के आरोप विश्वसनीय हैं’।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि क्षेत्र में मानवाधिकार की स्थिति पर सरकार, संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी निकायों और मानवाधिकार प्रणाली के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अधिक व्यापक रूप से तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

नीतीश कुमार से बिहार आकर मिले तेलंगाना के सीएम केसीआर

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय राजनीति पर चर्चा करने की उम्मीद जताई जा रही है।

दोनों नेता कुछ कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिशें कर रहे हैं।

बता दें केसीआर अपनी बिहार यात्रा के दौरान गलवान घाटी में चीन के सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में शहीद हुए बिहार के सैनिकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि भी प्रदान करेंगे।

आपको बता दें, कुछ दिनों पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होकर भाजपा से अपना नाता तोड़ लिया था। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और वामपंथी दलों से हाथ मिला लिया था और राज्य में महागठबंधन की सरकार बनार्इं।

बिहार मे हुए राजनीतिक उलटफेर को भाजपा ने जनता से धोखा और जनादेश का अपमान बताया था।

सुकेश चंद्रशेखर धोखाधड़ी मामले में जैकलीन से दिल्ली पुलिस करेगी पूछताछ

सुकेश चंद्रशेखर धोखाधड़ी मामले में जैकलीन फर्नांडीज से दिल्ली पुलिस करेगी पूछताछ। जैकलीन को 12 सितंबर को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया है।

आपको बता दें, इससे पहले अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज ने अपीलकर्ता प्राधिकरण के समक्ष अपनी याचिका में कहा कि सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ रुपये के धन शोधन मामले को लेकर कहा है कि आरोपी सुकेश चंद्रशेखर से उपहार प्राप्त करने वाली हस्तियों को गवाह बना लिया गया है जबकि उन्हें एक आरोपी के रूप में घसीटा जा रहा है।

जैकलीन ने कहा कि मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर से उपहार लेने वालो में नोरा फतेही और अन्य हस्तियों को गवाह बनाया गया है, जबकि उन्हें आरोपी। जैकलीन ने पीएमएलए के न्याय निर्णायक अधिकारियों को जवाब में कहा कि उनके फिक्स्ड डिपॉजिट का किसी भी अपराध से कोई संबंध नहीं है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अप्रैल में पीएमएलए के तहत उनकी 7.27 करोड़ रुपये की निधि अस्थायी तौर पर कुर्क की थी और 15 लाख रुपये की नकदी जब्त की थी।

ग्लासनोस्त, पेरेस्त्रोइका के जनक पूर्व सोवियत राष्ट्रपति गोर्बाचेव का निधन

तत्कालीन सोवियत संघ में ‘ग्लासनोस्ट’ और ‘पेरेस्त्रोइका’ के जनक नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मिखाइल गोर्बाचेव का 30 अगस्त को निधन हो गया है। महज 53 साल की उम्र में 1985 में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बनने वाले गोर्बाचेव को बिना रक्तपात शीत युद्ध ख़त्म करने का श्रेय दिया जाता है, हालांकि उनके आलोचक सोवियत संघ का पतन होने का जिम्मेवार उन्हें मानते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूसी समाचार एजेंसियों ने अस्पताल के अधिकारियों के हवाले से तत्कालीन सोवियत संघ के उदारवादी राष्ट्रपति की 91 साल की उम्र में मौत होने की पुष्टि की है।

गोर्बाचेव महज 53 साल की उम्र में 1985 में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बन गए थे और 1991 तक इस पद पर रहे जब पार्टी खुद भंग हो गई और फिर सोवियत संघ का भी पतन हो गया। उनकी ‘ग्लासनोस्ट’ और ‘पेरेस्त्रोइका’ की नीतियां दुनिया भर में चर्चा में रहीं जिसमें उन्होंने मुक्त बाज़ार और मुक्त भाषण की बात कही थी। इसे पहले राज्य और पार्टी की आलोचना लगभग अकल्पनीय बात थी।

उनकी नीति ने उन राष्ट्रवादियों को प्रोत्साहित किया जिन्होंने लातविया, लिथुआनिया, एस्टोनिया और अन्य जगहों के बाल्टिक गणराज्यों में स्वतंत्रता के लिए दबाव डालना शुरू किया था। नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले गोर्बाचेव लम्बे समय से बीमार थे।

यह गोर्बाचेव ही थे जिन्होंने बिना रक्तपात ‘शीत युद्ध’ खत्म किया, हालांकि वो सोवियत संघ का विखंडन नहीं रोक सके। साल 1989 में साम्यवादी पूर्वी यूरोप के सोवियत ब्लॉक राष्ट्रों में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए, तब भी उन्होंने बल प्रयोग करने से परहेज किया।

क्रेमलिन ने 1956 में हंगरी और 1968 में चेकोस्लोवाकिया में विद्रोह कुचलने के लिए टैंक भेजे थे, लेकिन मिखाइल गोर्बाचेव ने सोवियत संघ के 15 गणराज्यों में स्वायत्तता की आकांक्षाओं को कुचला नहीं बल्कि दो साल जो अराजकता फ़ैली उससे उपजे पतन को रोकने के लिए उन्होंने संघर्ष किया। रूस के कई नेताओं ने गोर्बाचेव को उस उथल-पुथल का दोषी माना और उन्हें कभी इसके लिए माफ नहीं किया।

अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की सेहत के लिए अच्छा ही होगा : थरूर

वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशी थरूर, जिन्हें कांग्रेस के भीतर गैर गांधी को अध्यक्ष बनाने का समर्थक माना जाता है, ने बुधवार को कहा कि उम्मीदवारों को आगे आकर लोकतांत्रिक रूप से काम करने वाली इस पार्टी के चुनाव में हिस्सा लेने दीजिए, यह पार्टी के लिए अच्छी बात होगी। वैसे उन्होंने पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की अपनी संभावना को ‘अटकल’ बताया और कहा यह चुनाव पार्टी की सेहत के लिए अच्छा है।

उन्होंने कहा कि उनके चुनाव लड़ने की बात महज अटकल है। थरूर ने कहा – ‘मैंने कुछ घोषणा नहीं की है। मैंने सिर्फ यही कहा है कि चुनाव होना चाहिए और यह पार्टी के लिए अच्छा है। यदि कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव होता है तो इससे लोगों का ध्यान पार्टी की तरफ जाएगा और जनता पार्टी की कार्यशैली, विचारधारा, मूल्य, देश के प्रति उसके दृष्टिकोण की चर्चा करेगी, जो अच्छी बात है।’

शशी थरूर ने गांधी परिवार से किसी के अध्यक्ष का चुनाव लड़ने को लेकर सीधा कमेंट नहीं किया अलवत्ता कहा कि ‘मैं पहले ही घोषणा कर चुका हूँ कि चुनाव नहीं लडूंगा। किसी अन्य व्यक्ति के इस शीर्ष पद को ग्रहण करने का मैं समर्थन करता हूँ। इसलिए, कई उम्मीदवारों को आगे आकर लोकतांत्रिक रूप से काम करने वाली इस पार्टी के चुनाव में हिस्सा लेने दीजिए, यह पार्टी के लिए अच्छी बात होगी।’

झारखंड: निलंबित भाजपा नेता सीमा पात्रा गिरफ्तार, घरेलू मेड पर किए जुल्म

झारखंड के रांची में घर में काम करने वाली मेड गुमला (29) पर सालों जु़ल्म ढाने वाली पूर्व आईएएस की पत्नी और भाजपा नेता (अब निलंबित) सीमा पात्रा को गिरफ्तार कर लिया गया है। सीमा से इस भाजपा नेता के जुल्म की कहानियां हाल में सामने आई हैं और देश भर में इसके कड़ी निंदा हुई है। सीमा पात्रा भाजपा राष्ट्रीय महिला मोर्चा कार्यसमिति के आलावा प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की सदस्य रही है।

जुल्म की शिकार झारखंड की लड़की गुमला की जो दर्द भरी दास्ताँ सामने आई है उसके मुताबिक इस घटना के बाद भाजपा से निलंबित की गयी नेता सीमा ने उसके साथ जुल्म की सारी इंतेहा पार कर दी। उस पर आरोप है कि उसने सीमा से जो किया वो इतना खतरनाक है कि फ़िल्मी कहानियों में भी नहीं मिलता।

आरोप के मुताबिक सीमा ने उसे गरम तवे से जलाने से लेकर रॉड तक से दागा और उसके दांत तोड़ दिए। उसे लम्बे समय तक भूखे-प्यासे कमरे में बंद करके रखा गया और कभी भी भरपेट खाना नहीं दिया गया। कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती, क्योंकि सीमा पात्रा ने इस लड़की को पेशाब तक जीभ से साफ़ करने पर मजबूर किया।

इस लड़की ने बताया कि उसने सालों से सूरज की रोशनी नहीं देखी। पिछले 8 साल से उसके साथ जुल्म जारी था। गिरफ्तार की गयी इस निलंबित भाजपा नेता सीमा पात्रा के पति पूर्व आईएएस हैं इसके बावजूद उनके घर में यह जुल्म हुआ और किसी को कानों कान खबर तक नहीं लगी। लड़की पर जुल्म का वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा ने सीमा को निलंबित किया।

गुमला पिछले दस साल से पात्रा परिवार के यहाँ काम कर रही थी। उससे ज्यादती का सच तब बाहर आया जब एक पड़ोसी ने पुलिस को इसकी ख़बर दी। लड़की को पुलिस ने सीमा के घर से छुड़ाया और अब उसका रांची के रिम्स में इलाज चल रहा है।

सिमी पर प्रतिबंध मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से चार हफ्ते में जवाब माँगा

केंद्र ने 2019 में स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) संगठन पर पांच साल के लिए प्रतिबंध बढ़ाया था, जिसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी थी। अब सर्वोच्च अदालत ने इसके खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार से चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को आखिरी अवसर देते हुए कहा कि अब इसकी अगली सुनवाई पहली नवंबर को होगी। दिल्ली हाईकोर्ट के सुरेश कैट की अध्यक्षता वाली अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) ट्रिब्यूनल ने 2014 में सिमी पर प्रतिबंध को वर्ष 2019 तक बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया था। इसके बाद साल 2019 में केंद्र ने सिमी पर और पांच साल के लिए प्रतिबंध बढ़ा दिया था। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

इससे पहले 2001 से लेकर अब तक ट्रिब्यूनल के जारी प्रतिबंध के समय-समय पर आदेश को सिमी ने सर्वोच्च न्यायालय में अलग से चुनौती दी हुई है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 2008 में ट्रिब्यूनल के उस फैसले को भी चुनौती दी गई है जिसमें सिमी पर प्रतिबंध हटा लिया गया था।

तब ट्रिब्यूनल ने कहा था कि अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत सिमी पर प्रतिबंध जारी रखने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। लेकिन अगले ही दिन सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रिब्यूनल के फैसले पर रोक लगा दी थी।

अडानी 137.4 अरब डॉलर संपत्ति के साथ, दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने

गुजरात के बिजनेसमैन गौतम अडानी 137.4 अरब डॉलर (करीब 10,97,517 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ, दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने तीसरे स्थान के लिए फ्रांस के बर्नार्ड अरनॉल्ट को पीछे छोड़ा। अमेरिका के एलन मस्क और जेफ बेजोस ही अब उनसे आगे हैं।

पहली बार कोई एशियाई ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के शीर्ष तीन में शामिल हुआ है। ब्लूमबर्ग के अनुसार अडानी (60) ने फरवरी में पहली बार अंबानी को सबसे अमीर एशियाई के रूप में पीछे छोड़ा था। पिछले महीने ही अडानी ने दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के बिल गेट्स को पीछे छोड़ दिया था।

अडानी ने पिछले कुछ सालों में अपने कोल-टू-पोर्ट्स समूह का विस्तार करते हुए डेटा सेंटर से लेकर सीमेंट, मीडिया और एल्युमिना तक हर व्यापार में हाथ आजमाया है।
अडानी का समूह अब भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बंदरगाह और हवाई अड्डे के संचालक, शहर-गैस वितरक और कोयला खनिज का मालिक है।

नवंबर में दुनिया की सबसे बड़ी अक्षय-ऊर्जा उत्पादक बनने के लिए हरित ऊर्जा में उन्होंने 70 बिलियन डॉलर के निवेश की बात कही है। भले अडानी संपत्ति के मामले में ऊंची उड़ान भर रहे हैं, कुछ लॉमेकर और बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ अपारदर्शी शेयरधारक संरचनाओं और अडानी समूह की कंपनियों में विश्लेषक कवरेज की कमी पर चिंता भी जाता रहे हैं।