Home Blog Page 491

जनता के विरोध के बाद विदेश भागे पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे श्रीलंका लौटे

जनता के जबरदस्त विरोध के बाद विदेश भागे श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोतबाय राजपक्षे पिछली देर रात स्वदेश लौट आये। देश में भयंकर आर्थिक संकट के बाद उनके स्थिति संभालने में नाकाम रहने के बाद जनता का गुस्सा भड़क उठा था और उन्होंने उनके महल पर कब्ज़ा कर लिया था और उन्हें देश से भागने और इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

अब करीब दो महीने बाद गोटबाया राजपक्षे शुक्रवार देर रात विमान से थाईलैंड से स्वदेश लौट आये हैं। राजपक्षे जबरदस्त सुरक्षा इंतजाम के बीच कोलंबो के भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे। उनकी अगवानी के लिए कई मंत्री और सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) के सांसद हवाई अड्डे पर उपस्थित थे।

राजपक्षे के सत्ता से हटने के बाद श्रीलंका संसद ने तत्कालीन कार्यवाहक राष्ट्रपति और छह बार प्रधानमंत्री रह चुके रानिल विक्रमसिंघे को उनके उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। विक्रमसिंघे को 225 सदस्यीय संसद में सबसे बड़े दल श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) का समर्थन हासिल है।

श्रीलंका में जब गंभीर आर्थिक संकट के कारण आम आदमी को खाने के भी लाले पड़ने लगे तो उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जनता के विरोध-प्रदर्शनों ने 9 जुलाई को हिंसक रूप ले लिया। राजपक्षे 13 जुलाई को देश छोड़कर भाग गए। प्रदर्शनकारियों ने कोलंबो में राष्ट्रपति आ‍वास सहित कई अन्य सरकारी इमारतों पर धावा बोल उनपर कब्ज़ा कर लिया था।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि गोटबाया सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ान से लौटे। पहले वह थाईलैंड से सिंगापुर गये क्योंकि थाईलैंड के बैंकॉक और श्रीलंका के कोलंबो के बीच सीधी उड़ान नहीं हैं। खबर है कि राजपक्षे विजेरामा मवाथा के समीप एक सरकारी बंगले में रहेंगे और वहां जबरदस्त सुरक्षा इंतजाम होंगे।

मणिपुर में भाजपा ने पुराने सहयोगी जनता दल (यू) के 5 विधायक तोड़े

भाजपा ने विरोधी दलों की पार्टियां तोड़ने का सिलसिला जारी रखते हुए अब उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर में जनता दल (यू) के 5 विधायकों को अपने पाले में कर लिया है। जेडीयू के वहां कुल छह ही विधायक थे। अपनी प्रतिक्रिया में जेडीयू के नेता ललन सिंह ने कहा एक बार फिर बीजेपी का नैतिक आचरण सबके सामने है।

मणिपुर में जेडीयू के विधायकों के भाजपा में शामिल होने का फैसला नीतीश कुमार के उस ऐलान के बाद किया है जिसमें उन्होंने मणिपुर में बीजेपी सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की बात कही थी। जाहिर है सरकार को स्थिर रखने के लिए भाजपा ने जेडीयू के विधायक ही तोड़कर अपने पाले में कर लिए हैं, भले उसके पास पूरा बहुमत था।

उधर जेडीयू नेता राजीव रंजन ललन सिंह ने ने कहा – ‘मणिपुर में एक बार फिर बीजेपी का नैतिक आचरण सबके सामने है। आपको तो याद होगा 2015 में प्रधानमंत्री जी ने 42 सभाएं कीं, तब जाकर 53 सीट ही जीत पाए थे। साल 2024 में देश जुमलेबाजों से मुक्त होगा…इंतजार कीजिए।’

नीतीश के समर्थन वापस लेने के ऐलान के बाद भाजपा ने हालांकि, कहा था कि इससे बीरेन सिंह सरकार को कोई खतरा नहीं होगा। इस समय 60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 55 विधायकों का समर्थन है। इसमें जदयू के छह सदस्य शामिल थे जिनमें से 5 भाजपा में चले गए हैं। पार्टी समर्थन वापस ले भी लेती तो भी उसके पास 48 विधायक होते जबकि बहुमत का आंकड़ा 31 है।

साल के शुरु में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा-जेडीयू गठबंधन में नहीं था। तब एनडीए का हिस्सा होने के नाते जदयू के सात विधायकों ने बीरेन सिंह सरकार को समर्थन दिया था।

राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस का कल दिल्ली में महंगाई और बेरोजगारी पर ‘हल्ला बोल’

महंगाई, बेरोजगारी और जरूरी चीजों पर जीएसटी में बढ़ौतरी के खिलाफ कांग्रेस रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेगी। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी भी शामिल होंगे और रैली को संबोधित करेंगे।

कांग्रेस ने इस आयोजन का नाम महंगाई पर हल्ला बोल रैली रखा है। देश के कई हिस्सों से पार्टी कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे रहे हैं जो इसमें हिस्सा लेंगे। एक तरह से यह कांग्रेस की 3500 किलोमीटर लंबी मेगा ‘भारत जोड़ो पदयात्रा’ का पूर्वाभ्यास है, जिसे वह 7 सितंबर से शुरू करने जा रही है।

राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी देश भर में महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर अलख जगाने की तैयारी में है ताकि जनता को मोदी सरकार की नाकामियों से अवगत कराया जा सके। साल 2014 में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस का यह अब तक का सबसे बड़ा जनसम्पर्क अभियान होगा। सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी, जोकि फिलहाल सोनिया के इलाज के सिलसिले में विदेश में हैं, भी 7 से शुरू होने वाली पदयात्रा में हिस्सा लेंगीं।

कांग्रेस और राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर महंगाई और बेरोजगारी को लेकर हमला करते रहे हैं। वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस छोड़ देने के बावजूद कांग्रेस में कोई बड़ी हलचल नहीं है और पार्टी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम जारी रखे हुए है।

सर्वोच्च न्यायालय से तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत मिली

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत दे दी। जमानत देते हुए सर्वोच्च अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एक महिला है जो दो महीने से हिरासत में है। जो मामला है वो 2002-2010 के बीच के दस्तावेज का है।

जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस सुधांशु भट की बेंच ने कहा कि जांच मशीनरी को सात दिन तक उनसे हिरासत में पूछताछ का मौका मिला होगा। रिकॉर्ड में मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए हमारा विचार है कि हाईकोर्ट को मामले के लंबित रहते समय अंतरिम जमानत पर विचार करना चाहिए था।

गुजरात सरकार की तरफ से एसजी तुषार मेहता ने कहा कि कल सुप्रीम कोर्ट ने सही तौर पर मामला उठाया कि हाईकोर्ट ने इतना समय क्यों लगाया। मैंने सरकारी वकील से विस्तार से बात की। हाईकोर्ट ने इस मामले में वही किया जो आम तौर पर मामलों में करता है। उन्होंने कहा कि तीन अगस्त को हाईकोर्ट के पास 168 केस लगे थे। एक हफ्ते पहले 124 मामले थे जबकि इस आदेश की तारीख को 168 मामले थे।

सीजेआई ने कहा कि, आपने जो दिया उसमें मुझे एक भी महिला से जुड़ा मामला नहीं मिला। तुषार ने कहा, तीस्ता के लिए मेरे पास कम से कम 28 मामलों की सूची है जहां इसी जज ने दो दिनों के भीतर जमानत दे दी। सीजेआई ने कहा कि इस समय इस अदालत के समक्ष खुद को तथ्यों तक सीमित रखें। तुषार मेहता ने कहा, मुझे यह कहने का निर्देश है कि जज ने 30-40 मामलों का निपटारा किया है।

बेंच ने मजिस्ट्रेट के सामने गवाह के बयान रखने पर गुजरात सरकार पर सवाल उठाया और कहा कि ये बयान सीलकवर में होते हैं। ये मजिस्ट्रेट के पास होने चाहिए। आपको ये बयान कैसे मिले। ये मजिस्ट्रेट कोर्ट की कस्टडी में होने चाहिए। ये कोर्ट से कोर्ट आने चाहिएं। तुषार मेहता ने कहा, हमने कोर्ट से आग्रह किया था और इसके बाद कोर्ट ने जांच अफसर को दिए हैं, ताकि सुप्रीम कोर्ट में रखे जा सकें।

तीस्ता सीतलवाड की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि, 124 लोगों को उम्रकैद हुई है। ये कैसे कह सकते हैं कि गुजरात में कुछ नहीं हुआ। ये सब एक उद्देश्य के लिए है। ये चाहते हैं कि तीस्ता ताउम्र जेल से बाहर न आए। सिब्बल ने कहा कि, 20 साल से सरकार क्या करती रही। ये हलफनामे 2002-2003 के हैं। तो ये जालसाजी कैसे हो गए? ये हलफनामे इस केस में दाखिल नहीं किए गए। ये पहले के केसों में फाइल किए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट का कश्मीर में सिखों, कश्मीरी पंडितों की हत्या की जांच याचिका पर सुनवाई से इनकार

सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू कश्मीर में सिखों और कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की जांच को लेकर एसआईटी गठित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार इनकार कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता एनजीओ को संबंधित अथॉरिटी के समक्ष जाने को कहा है।

‘वी द सिटीजन’ एनजीओ ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर जम्मू कश्मीर में 1990 से 2003 तक सिखों और कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और अत्याचार की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की थी। इसके अलावा याचिका में कश्मीर घाटी से विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास की भी मांग थी।

अदालत के याचिकाकर्ता को संबंधित अथॉरिटी के सामने जाने के लिए कहने के बाद उन्होंने याचिका वापस ले ली। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई बंद कर दी है। जम्मू- कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और सिखों के नरसंहार की जांच की मांग वाली याचिका पर जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ के सामने आज सुनवाई हुई।

इस याचिका में 1989-2003 के बीच कश्मीर से विस्थापन से जुड़े लोगों के संस्मरणों पर आधारित कई किताबों का हवाला दिया गया था। याचिका में जगमोहन की लिखी किताब ‘माई फ्रोजन टर्बुलेंस इन कश्मीर’ और राहुल पंडिता की किताब ‘अवर मून हैज ब्लड क्लॉट्स’ की चर्चा की गई है।

याचिका में कश्मीर से पलायन कर देश के अलग-अलग हिस्सों में शरणार्थियों की किस तरह रहे, कश्मीरी हिंदुओं और सिखों की गणना कराने का आदेश दिए जाने की मांग की गई। इसमें जम्मू कश्मीर में 1990 के बाद प्रवासी कश्मीरियों की आवासीय, शैक्षणिक, व्यावसायिक,कृषि, उद्योग वाली संपत्ति की खरीद फरोख्त को रद्द और निष्प्रभावी करने का आदेश सरकार को देने की गुहार लगाई गई थी।

रेप के आरोपी कर्नाटक के महंत शिवमूर्ति को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

कर्नाटक के महंत शिवमूर्ति शरणारू को दो नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। महंत के खिलाफ बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मुकदमा दायर किया गया है।

64 वर्षीय महंत शिवमूर्ति मुरुघा शरणारू मुरुघा मठ के प्रमुख हैं। और इनपर 6 दिन पहले रेप के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। और मामला सामने आने के बाद मुरुघा मठ के सभी छात्रों को सरकारी छात्रावास में स्थानांतरित कर दिया गया था। किंतु कई माता-पिता अपने बच्चों को अपने साथ घर भी ले गए है।

सूत्रों के अनुसार, पीड़ित लड़की में एक लड़की के दलित होने के चलते उन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के तहत भी आरोप लगाए गए है। महंत की तत्काल गिरफ्तारी को लेकर दलित संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद एससी और एसटी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आईएनएस विक्रांत का ‘श्रेय’ लेने पर कांग्रेस ने साधा पीएम पर निशाना

कांग्रेस ने विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का ‘श्रेय’ लेने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा कि यह सिर्फ मोदी सरकार की उपलब्धि नहीं बल्कि 1999 के बाद की सभी सरकारों की सामूहिक कोशिशों का प्रतिफल है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक ट्वीट करके पीएम मोदी से पूछा है कि क्या वे यह स्वीकार करेंगे कि यह सभी सरकारों के प्रयासों से हो सका है। जयराम ने कहा कि भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत आज सन 1999 से जारी सभी सरकारों के सामूहिक प्रयास की देन है। क्या प्रधानमंत्री इसे स्वीकार करेंगे?

जयराम ने कहा – ‘आइए मूल आईएनएस विक्रांत को भी याद करें जिसने 1971 के युद्ध में हमारी अच्छी सेवा की थी। कृष्णा मेनन ने इसे यूके से प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।’

याद रहे पीएम मोदी ने आज कोचीन में चालक दल के करीब 1,600 सदस्यों के लिए डिजाइन किया गया करीब 2,200 कमरों वाला देश का अब तक का सबसे बड़ा और पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत ‘आईएनएस विक्रांत’ राष्ट्र को समर्पित किया। विक्रांत 25 वर्ष बाद नए रूप में नौसेना की शान बना है।

पीएम ने इस मौके पर कहा – ‘विक्रांत विशाल है, विराट है, विहंगम है, विक्रांत विशिष्ट है, विक्रांत विशेष भी है। भारत के बुलंद हौसलों की हुंकार है। विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं है। ये 21वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यदि लक्ष्य दुरन्त हैं, यात्राएं दिगंत हैं, समंदर और चुनौतियाँ अनंत हैं – तो भारत का उत्तर है विक्रांत। आजादी के अमृत महोत्सव का अतुलनीय अमृत है विक्रांत। आत्मनिर्भर होते भारत का अद्वितीय प्रतिबिंब है विक्रांत।’

जयराम रमेश का ट्वीट – @Jairam_Ramesh India’s 1st indigenous aircraft carrier INS Vikrant commissioned today is a collective effort of all govts since 1999. Will PM acknowledge?
Let’s also recall original INS Vikrant that served us well in 1971 war. Much reviled Krishna Menon played a key role in getting it from UK.

सर्वे में बोरिस जॉनसन को ब्रिटेन का सबसे खराब पीएम बताया जनता ने

बोरिस जॉनसन को इप्सोस के एक सर्वे में ब्रिटिश इतिहास का सबसे कमजोर प्रधानमंत्री आंका गया है। सर्वे में 49 फीसदी लोगों ने जॉनसन किए काम को खराब बताया। सर्वे के मुताबिक विंस्टन चर्चिल प्रधानमंत्रियों की सूची में आज भी ब्रिटिश जनता में शीर्ष पर बने हुए हैं जबकि मार्गरेट थैचर दूसरे नंबर पर हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बोरिस जॉनसन, जिनका कार्यकाल अगले सप्ताह पूर्ण हो जाएगा, के लिए यह रिपोर्ट एक बड़ा झटका है। मार्केट अनुसंधान कंपनी ‘इप्सोस’ के सर्वे में लोगों से 1945 से युद्धकाल के बाद के ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों के प्रदर्शन के बारे में पूछा गया था जिनमें से 49 प्रतिशत लोगों ने निवर्तमान प्रधानमंत्री के काम को ‘खराब’ बताया।

सर्वे में करीब 41 फीसदी लोगों ने थेरेसा में और 38 फीसदी लोगों ने डेविड कैमरन के काम को खराब बताया। विंस्टन चर्चिल को 62 फीसदी लोगों ने अच्छा व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा चर्चिल ने युद्ध के समय अच्छा काम किया था।

टोनी ब्लेयर के काम को 36 फीसदी और मार्गरेट थैचर के काम को 43 फीसदी लोगों ने अच्छा बताया। इप्सोस ने यह सर्वेक्षण 19 से 22 अगस्त के बीच किया गया था। इप्सोस में राजनीतिक अनुसंधान मामलों के निदेशक कीरन पेडले ने कहा कि विंस्टन चर्चिल प्रधानमंत्रियों की उनकी सर्वे सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं। जनता को लगता है कि उन्होंने अच्छा काम किया। उनके बाद मार्गरेट थैचर का नाम है।

पेडले के मुताबिक बोरिस जॉनसन इस सूची में चौथे स्थान पर रहने से उचित रूप से संतुष्ट होंगे लेकिन खराब काम करने के मामले में सूची में शीर्ष पर रहने से कम खुश होंगे। इप्सोस के सर्वेक्षण में शामिल 1,100 लोगों में से करीब 33 फीसदी ने पार्टी गेट घोटाले से प्रभावित निवर्तमान नेता जॉनसन ने अच्छा काम किया है। वहीं, टोनी ब्लेयर के काम को 36 फीसदी और मार्गरेट थैचर के काम को 43 फीसदी लोगों ने अच्छा बताया।

तहलका ब्यूरो
बोरिस जॉनसन को इप्सोस के एक सर्वे में ब्रिटिश इतिहास का सबसे कमजोर प्रधानमंत्री आंका गया है। सर्वे में 49 फीसदी लोगों ने जॉनसन किए काम को खराब बताया। सर्वे के मुताबिक विंस्टन चर्चिल प्रधानमंत्रियों की सूची में आज भी ब्रिटिश जनता में शीर्ष पर बने हुए हैं जबकि मार्गरेट थैचर दूसरे नंबर पर हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बोरिस जॉनसन, जिनका कार्यकाल अगले सप्ताह पूर्ण हो जाएगा, के लिए यह रिपोर्ट एक बड़ा झटका है। मार्केट अनुसंधान कंपनी ‘इप्सोस’ के सर्वे में लोगों से 1945 से युद्धकाल के बाद के ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों के प्रदर्शन के बारे में पूछा गया था जिनमें से 49 प्रतिशत लोगों ने निवर्तमान प्रधानमंत्री के काम को ‘खराब’ बताया।

सर्वे में करीब 41 फीसदी लोगों ने थेरेसा में और 38 फीसदी लोगों ने डेविड कैमरन के काम को खराब बताया। विंस्टन चर्चिल को 62 फीसदी लोगों ने अच्छा व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा चर्चिल ने युद्ध के समय अच्छा काम किया था।

टोनी ब्लेयर के काम को 36 फीसदी और मार्गरेट थैचर के काम को 43 फीसदी लोगों ने अच्छा बताया। इप्सोस ने यह सर्वेक्षण 19 से 22 अगस्त के बीच किया गया था। इप्सोस में राजनीतिक अनुसंधान मामलों के निदेशक कीरन पेडले ने कहा कि विंस्टन चर्चिल प्रधानमंत्रियों की उनकी सर्वे सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं। जनता को लगता है कि उन्होंने अच्छा काम किया। उनके बाद मार्गरेट थैचर का नाम है।

पेडले के मुताबिक बोरिस जॉनसन इस सूची में चौथे स्थान पर रहने से उचित रूप से संतुष्ट होंगे लेकिन खराब काम करने के मामले में सूची में शीर्ष पर रहने से कम खुश होंगे। इप्सोस के सर्वेक्षण में शामिल 1,100 लोगों में से करीब 33 फीसदी ने पार्टी गेट घोटाले से प्रभावित निवर्तमान नेता जॉनसन ने अच्छा काम किया है। वहीं, टोनी ब्लेयर के काम को 36 फीसदी और मार्गरेट थैचर के काम को 43 फीसदी लोगों ने अच्छा बताया।

गुजरात के अरवल्ली में सड़क हादसे में 7 तीर्थयात्रियों की मौत

गुजरात के अरवल्ली जिले में शुक्रवार सुबह एक सड़क हादसे में 7 लोगों की मौत हो गयी। यह सभी तीर्थयात्री थे, जो अंबाजी की तरफ जा रहे थे।

जानकारी के मुताबिक तीर्थ यात्रियों को एक कार ने कुचल दिया। इनमें से सात की मौत हो गयी। पुलिस के मुताबिक हादसे में साथ तीर्थयात्रियों की मौत हुई है जबकि पांच घायल हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है।

यह हादसा सुबह करीब छह बजे अरवल्ली को बनासकांठा जिले से जोड़ने वाली सड़क पर हुआ, जहां प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर स्थित है। तीर्थयात्री पंचमहल जिले की कलोल तहसील से ताल्लुक रखते थे।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने तीर्थयात्रियों की मौत पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के लिए चार-चार लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। पटेल ने घायलों में से प्रत्येक के लिए 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि की भी घोषणा की है। सीएम ने अरवल्ली जिला कलेक्टर को घायलों का समुचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

पीएम ने स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस विक्रांत नौसेना को समर्पित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को स्वदेशी युद्धपोत (एयरक्राफ़्ट कैरियर) आईएनएस विक्रांत देश और नौसेना को समर्पित किया। भारत में बनने वाला सबसे बड़ा युद्धपोत आईएनएस विक्रांत 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है। उन्होंने नौसेना का नया ध्वज भी समर्पित किया। इससे पहले केरल के कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड पहुंचने पर पीएम को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इसके निर्माण की शुरुआत 2009 में यूपीए सरकार के समय हुई थी, जब तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इसके निर्माण शुरुआत कार्यक्रम में शिरकत की थी।

पीएम ने इस मौके पर विक्रांत को विशेष और विशिष्ट बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत की प्रतिबद्धता का परिणाम बताया। उन्होंने देशवासियों को इसके जलावतरण पर बधाई दी। करीब 20 हज़ार करोड़ रुपये से तैयार हुआ आईएनएस विक्रांत अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है और इससे आने से भारत की नौसेना क्षमता और मजबूत होगी। इसके ऊपर से 30 एयरक्राफ्ट उड़ान भर सकते हैं। एक साल के ट्रायल के बाद इसे आज पीएम ने नौसेना के बेड़े में शामिल किया। अब भारत के पास दो विमान वाहक पोत हो गए हैं।

भारत के समुद्री इतिहास में आईएनएस विक्रांत अब तक का सबसे बड़ा जहाज है। पीएम मोदी कोचीन शिपयार्ड में 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्वदेशी अत्याधुनिक स्वचालित यंत्रों से युक्त विमान वाहक पोत का जलावतरण किया। इस मौके पर रक्षमंत्री राजनाथ सिंह, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, सीएम पिनराय विजयन, नौसेना के तमाम बड़े अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने नौसेना का नया ध्वज भी समर्पित किया।

आईएनएस विक्रांत को इसलिए इसे समंदर में चलता फिरता शहर कहा जा रहा है। यहाँ पहुँचने पर पीएम को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। आईएनएस विक्रांत हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में योगदान देगा। आईएनएस विक्रांत पर विमान उतारने का परीक्षण नवंबर में शुरू होगा, जो 2023 के मध्य तक पूरा हो जाएगा।

भारत में बनने वाला सबसे बड़ा युद्धपोत आईएनएस विक्रांत 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है। आईएनएस विक्रमादित्य के बाद यह देश का दूसरा विमानवाहक पोत होगा, जिसे रूसी प्लेटफॉर्म पर बनाया गया। आईएनएस विक्रांत हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में योगदान देगा। आईएनएस विक्रांत पर विमान उतारने का परीक्षण नवंबर में शुरू होगा, जो 2023 के मध्य तक पूरा हो जाएगा।