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रक्षा, विदेश मंत्री ‘टू प्लस टू’ मंत्री संवाद में हिस्सा लेने कल से जापान की यात्रा पर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर दूसरी भारत-जापान मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए 7 से 10 सितंबर तक जापान जाएंगे। दोनों भारतीय नेता अपने जापानी समकक्षों के साथ ‘टू प्लस टू’ प्रारूप में विदेश और रक्षा मंत्री स्तरीय संवाद करेंगे।

जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी और रक्षा मंत्री यसुकाजू हमादा करेंगे। जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा सहयोग और मजबूत करने के तौर-तरीकों पर विचार-विमर्श के अलावा हिंद प्रशांत क्षेत्र के घटनाक्रम पर भी चर्चा की संभावना है।

दोनों देशों के बीच ‘टू प्लस टू’ संवाद की शुरुआत साल 2019 में दोनों देशों के रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने और विशेष रणनीति और वैश्विक साझेदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। जापान के अलावा भारत का ‘टू प्लस टू’ मंत्री संवाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और रूस से भी है।

हाल के महीनों में दुनिया भर में हुई घटनाओं के मद्देनजर भारत भू-राजनीतिक उथल पुथल, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामक और विस्तारवादी नीति और ताइवान जलडमरूमध्य क्षेत्र में चीन-ताइवान तनाव से पैदा हुई स्थितियों को देखते हुए अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर खास ध्यान दे रहा है।

ईडी की 30 जगह छापेमारी ; निशाने पर दिल्ली सरकार, धनशोधन मामला दर्ज

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजधानी दिल्ली में 30 जगह छापेमारी की है। उसके निशाने पर दिल्ली सरकार और उसकी अब वापस ली जा चुकी शराब नीति है। भाजपा लगातार आरोप लगा रही है कि इस शराब नीति से दिल्ली सरकार के लोगों ने कथित रूप से खूब पैसा बनाया है जबकि मुख्यमंत्री केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री सिसोदिया इसे भाजपा का षड्यंत्र बताया है।

कुछ दिन पहले ईडी ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के यहाँ छापेमारी की थी, हालांकि, सिसोदिया ने दावा किया था कि उसके हाथ कुछ नहीं लगा। अब ईडी ने इस मामले में धनशोधन का मामला दर्ज कर लिया है। उसने 30 जगह पर छापेमारी की है। सिसोदिया के यहां छापे की खबर फिलहाल नहीं है।

भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच लम्बे समय से दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर जंग चल रही है। भाजपा के लोग आरोप लगा रहे हैं कि आप ने नई शराब नीति में खूब माल कमाया। आप भाजपा के इस आरोप को झूठ और उसे बदनाम करने का षड्यंत्र बता रही है।

नीति वापस ली जा चुकी है, हालांकि दोनों दलों के बीच सियासी जंग जारी है। भाजपा ने हाल में दावा किया था कि उसने एक स्टिंग किया है जिसमें केजरीवाल की शराब नीति में कमीशनखोरी की बात जाहिर होती है। हालांकि, आप ने इसे झूठ करार दिया था।

झारखंड विधानसभा में हेमंत सोरेन सरकार ने 48 मत से जीता विश्वास मत

झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार ने आज विश्वास मत जीत लिया है। हेमंत सोरेन सरकार को 81 में से 48 मत मिले है।

विश्वासमत जीतने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि, “जीते हैं हम शान से विपक्ष जलते रहें हमारे काम से, लोकतंत्र जिंदाबाद।“

झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने विश्वास मत पेश कर दिया है। हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा पर संकट का फायदा उठाने की कोशिश करने व चुनी हुई सरकार को गिराने का आरोप लगाया है।

वहीं दूसरी तरफ भाजपा का कहना है कि हेमंत सोरेन को एक विधायक के रूप में अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने खुद को खनन पट्टा देकर चुनावी मानदंडों का उल्लंघन किया है। पार्टी ने नए सिरे से चुनाव का आह्वान किया है और मांग की है कि मुख्यमंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा दे।

झारखंड के सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के करीब 30 विधायक विधानसभा के विशेष सत्र में भाग लेने के लिए रविवार को रांची पहुंचे। यह सभी विधायक 30 अगस्त से रायपुर के पास एक रिजॉर्ट में ठहरे हुए थे। और हेमंत सोरेन ने कल विधायकों के साथ बैठक भी की थी।

आपको बता दें, झारखंड के विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ लाभ के पद के मामले में निर्वाचन आयोग में याचिका दायर की थी। और निर्वाचन आयोग ने 25 अगस्त को राज्य के राज्यपाल रमेश बैस को अपना फैसला भेज दिया है। साथ ही वे कभी भी अपना फैसला सुना सकते है।

झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 81 सदस्यीय विधानसभा में 49 विधायक हैं। झामुमो के पास 30 विधायक, कांग्रेस के पास 18, राजद के पास एक विधायक और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के पास 26 विधायक है। बहुमत का आंकड़ा 41 है।

बेड, बाथ एंड बियॉन्ड कंपनी के सीएफओ ने 18वीं मंजिल से कूदकर दी अपनी जान: अमेरिका

अमेरिका के मैनहैटन स्थित बेड, बाथ एंड बियॉन्ड कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) ने कर्मचारियों की छंटनी के बाद ऊंची इमारत से कूद कर अपनी जान दे दी। रिटेल कंपनी द्वारा कुछ स्टोर बंद करने और कर्मचारियों को निकालने की घोषणा के बाद का दबाव वह झेल नहीं पा रहे थे।

सूत्रों के अनुसार 52 वर्षीय अर्नेल ने वर्ष 2020 में इस कंपनी में नौकरी शुरू की थी। इससे पहले वे कॉस्मेटिक ब्रांड एवोन में सीएफओ थे। साथ ही अर्नेल को प्रोक्टर एंड गैंबल के साथ काम करने का 20 साल का अनुभव भी था।

अर्नेल ने शुक्रवार शाम ऊंची इमारत के बाद बेहोश पाया गया और उन्हें 18वीं मंजिल से कूदने के बाद गंभीर चोटें आईं थीं। जिसके बाद मौके पर आपात सेवा के पहुंचने के बाद कर्मचारी ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

आपको बता दें, पिछले हफ्ते बेड, बाथ एंड बियॉन्ड ने 150 स्टोर बंद करने की घोषणा की थी, साथ ही कर्मचारियों की छंटनी करने का भी कहा था और कहा था कि वे अपनी रणनीति को दोबारा तैयार करेंगे जिससे कि नुकसान को मुनाफे में बदला जा सकें।

बेंगलुरु में भारी बारिश से कई इलाकों में जलभराव

बेंगलुरु में भारी बारिश हो रही है। और भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जल जमाव के चलते शहर तालाब में तब्दील हो नजर आ रहा है। जलभराव के चलते ट्रैफिक समस्या काफी बढ़ गयी है। सात ही बताया जा रहा है कि कर्नाटक में 9 सितंबर तक भारी बारिश के आसार है।

बेंगलुरू में भारी बारिश के चलते कई जगहों पर पानी तो भरा ही है साथ ही शहर के आउटर रिंग रोड, वाइटफील्ड में पानी भर गया है। साथ ही वर्थुर, सरजापुर रोड इत्यादि इलाकों में पानी भरने से ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे जनता को आवाजाही में मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है।

वहीं प्रशासन का कहना है कि फिलहाल बेंगलुरु में बारिश नहीं हो रही, लेकिन जलजमाव से जनता की बढ़ी मुश्किलों को जल्द से जल्द ठीक करने की कोशिश है। साथ ही जल्द हालात सामान्य कर लिए जाएगें।

जनता के विरोध के बाद विदेश भागे पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे श्रीलंका लौटे

जनता के जबरदस्त विरोध के बाद विदेश भागे श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोतबाय राजपक्षे पिछली देर रात स्वदेश लौट आये। देश में भयंकर आर्थिक संकट के बाद उनके स्थिति संभालने में नाकाम रहने के बाद जनता का गुस्सा भड़क उठा था और उन्होंने उनके महल पर कब्ज़ा कर लिया था और उन्हें देश से भागने और इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

अब करीब दो महीने बाद गोटबाया राजपक्षे शुक्रवार देर रात विमान से थाईलैंड से स्वदेश लौट आये हैं। राजपक्षे जबरदस्त सुरक्षा इंतजाम के बीच कोलंबो के भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे। उनकी अगवानी के लिए कई मंत्री और सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) के सांसद हवाई अड्डे पर उपस्थित थे।

राजपक्षे के सत्ता से हटने के बाद श्रीलंका संसद ने तत्कालीन कार्यवाहक राष्ट्रपति और छह बार प्रधानमंत्री रह चुके रानिल विक्रमसिंघे को उनके उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। विक्रमसिंघे को 225 सदस्यीय संसद में सबसे बड़े दल श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) का समर्थन हासिल है।

श्रीलंका में जब गंभीर आर्थिक संकट के कारण आम आदमी को खाने के भी लाले पड़ने लगे तो उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जनता के विरोध-प्रदर्शनों ने 9 जुलाई को हिंसक रूप ले लिया। राजपक्षे 13 जुलाई को देश छोड़कर भाग गए। प्रदर्शनकारियों ने कोलंबो में राष्ट्रपति आ‍वास सहित कई अन्य सरकारी इमारतों पर धावा बोल उनपर कब्ज़ा कर लिया था।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि गोटबाया सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ान से लौटे। पहले वह थाईलैंड से सिंगापुर गये क्योंकि थाईलैंड के बैंकॉक और श्रीलंका के कोलंबो के बीच सीधी उड़ान नहीं हैं। खबर है कि राजपक्षे विजेरामा मवाथा के समीप एक सरकारी बंगले में रहेंगे और वहां जबरदस्त सुरक्षा इंतजाम होंगे।

मणिपुर में भाजपा ने पुराने सहयोगी जनता दल (यू) के 5 विधायक तोड़े

भाजपा ने विरोधी दलों की पार्टियां तोड़ने का सिलसिला जारी रखते हुए अब उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर में जनता दल (यू) के 5 विधायकों को अपने पाले में कर लिया है। जेडीयू के वहां कुल छह ही विधायक थे। अपनी प्रतिक्रिया में जेडीयू के नेता ललन सिंह ने कहा एक बार फिर बीजेपी का नैतिक आचरण सबके सामने है।

मणिपुर में जेडीयू के विधायकों के भाजपा में शामिल होने का फैसला नीतीश कुमार के उस ऐलान के बाद किया है जिसमें उन्होंने मणिपुर में बीजेपी सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की बात कही थी। जाहिर है सरकार को स्थिर रखने के लिए भाजपा ने जेडीयू के विधायक ही तोड़कर अपने पाले में कर लिए हैं, भले उसके पास पूरा बहुमत था।

उधर जेडीयू नेता राजीव रंजन ललन सिंह ने ने कहा – ‘मणिपुर में एक बार फिर बीजेपी का नैतिक आचरण सबके सामने है। आपको तो याद होगा 2015 में प्रधानमंत्री जी ने 42 सभाएं कीं, तब जाकर 53 सीट ही जीत पाए थे। साल 2024 में देश जुमलेबाजों से मुक्त होगा…इंतजार कीजिए।’

नीतीश के समर्थन वापस लेने के ऐलान के बाद भाजपा ने हालांकि, कहा था कि इससे बीरेन सिंह सरकार को कोई खतरा नहीं होगा। इस समय 60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 55 विधायकों का समर्थन है। इसमें जदयू के छह सदस्य शामिल थे जिनमें से 5 भाजपा में चले गए हैं। पार्टी समर्थन वापस ले भी लेती तो भी उसके पास 48 विधायक होते जबकि बहुमत का आंकड़ा 31 है।

साल के शुरु में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा-जेडीयू गठबंधन में नहीं था। तब एनडीए का हिस्सा होने के नाते जदयू के सात विधायकों ने बीरेन सिंह सरकार को समर्थन दिया था।

राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस का कल दिल्ली में महंगाई और बेरोजगारी पर ‘हल्ला बोल’

महंगाई, बेरोजगारी और जरूरी चीजों पर जीएसटी में बढ़ौतरी के खिलाफ कांग्रेस रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेगी। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी भी शामिल होंगे और रैली को संबोधित करेंगे।

कांग्रेस ने इस आयोजन का नाम महंगाई पर हल्ला बोल रैली रखा है। देश के कई हिस्सों से पार्टी कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे रहे हैं जो इसमें हिस्सा लेंगे। एक तरह से यह कांग्रेस की 3500 किलोमीटर लंबी मेगा ‘भारत जोड़ो पदयात्रा’ का पूर्वाभ्यास है, जिसे वह 7 सितंबर से शुरू करने जा रही है।

राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी देश भर में महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर अलख जगाने की तैयारी में है ताकि जनता को मोदी सरकार की नाकामियों से अवगत कराया जा सके। साल 2014 में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस का यह अब तक का सबसे बड़ा जनसम्पर्क अभियान होगा। सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी, जोकि फिलहाल सोनिया के इलाज के सिलसिले में विदेश में हैं, भी 7 से शुरू होने वाली पदयात्रा में हिस्सा लेंगीं।

कांग्रेस और राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर महंगाई और बेरोजगारी को लेकर हमला करते रहे हैं। वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस छोड़ देने के बावजूद कांग्रेस में कोई बड़ी हलचल नहीं है और पार्टी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम जारी रखे हुए है।

सर्वोच्च न्यायालय से तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत मिली

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत दे दी। जमानत देते हुए सर्वोच्च अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एक महिला है जो दो महीने से हिरासत में है। जो मामला है वो 2002-2010 के बीच के दस्तावेज का है।

जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस सुधांशु भट की बेंच ने कहा कि जांच मशीनरी को सात दिन तक उनसे हिरासत में पूछताछ का मौका मिला होगा। रिकॉर्ड में मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए हमारा विचार है कि हाईकोर्ट को मामले के लंबित रहते समय अंतरिम जमानत पर विचार करना चाहिए था।

गुजरात सरकार की तरफ से एसजी तुषार मेहता ने कहा कि कल सुप्रीम कोर्ट ने सही तौर पर मामला उठाया कि हाईकोर्ट ने इतना समय क्यों लगाया। मैंने सरकारी वकील से विस्तार से बात की। हाईकोर्ट ने इस मामले में वही किया जो आम तौर पर मामलों में करता है। उन्होंने कहा कि तीन अगस्त को हाईकोर्ट के पास 168 केस लगे थे। एक हफ्ते पहले 124 मामले थे जबकि इस आदेश की तारीख को 168 मामले थे।

सीजेआई ने कहा कि, आपने जो दिया उसमें मुझे एक भी महिला से जुड़ा मामला नहीं मिला। तुषार ने कहा, तीस्ता के लिए मेरे पास कम से कम 28 मामलों की सूची है जहां इसी जज ने दो दिनों के भीतर जमानत दे दी। सीजेआई ने कहा कि इस समय इस अदालत के समक्ष खुद को तथ्यों तक सीमित रखें। तुषार मेहता ने कहा, मुझे यह कहने का निर्देश है कि जज ने 30-40 मामलों का निपटारा किया है।

बेंच ने मजिस्ट्रेट के सामने गवाह के बयान रखने पर गुजरात सरकार पर सवाल उठाया और कहा कि ये बयान सीलकवर में होते हैं। ये मजिस्ट्रेट के पास होने चाहिए। आपको ये बयान कैसे मिले। ये मजिस्ट्रेट कोर्ट की कस्टडी में होने चाहिए। ये कोर्ट से कोर्ट आने चाहिएं। तुषार मेहता ने कहा, हमने कोर्ट से आग्रह किया था और इसके बाद कोर्ट ने जांच अफसर को दिए हैं, ताकि सुप्रीम कोर्ट में रखे जा सकें।

तीस्ता सीतलवाड की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि, 124 लोगों को उम्रकैद हुई है। ये कैसे कह सकते हैं कि गुजरात में कुछ नहीं हुआ। ये सब एक उद्देश्य के लिए है। ये चाहते हैं कि तीस्ता ताउम्र जेल से बाहर न आए। सिब्बल ने कहा कि, 20 साल से सरकार क्या करती रही। ये हलफनामे 2002-2003 के हैं। तो ये जालसाजी कैसे हो गए? ये हलफनामे इस केस में दाखिल नहीं किए गए। ये पहले के केसों में फाइल किए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट का कश्मीर में सिखों, कश्मीरी पंडितों की हत्या की जांच याचिका पर सुनवाई से इनकार

सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू कश्मीर में सिखों और कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की जांच को लेकर एसआईटी गठित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार इनकार कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता एनजीओ को संबंधित अथॉरिटी के समक्ष जाने को कहा है।

‘वी द सिटीजन’ एनजीओ ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर जम्मू कश्मीर में 1990 से 2003 तक सिखों और कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और अत्याचार की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की थी। इसके अलावा याचिका में कश्मीर घाटी से विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास की भी मांग थी।

अदालत के याचिकाकर्ता को संबंधित अथॉरिटी के सामने जाने के लिए कहने के बाद उन्होंने याचिका वापस ले ली। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई बंद कर दी है। जम्मू- कश्मीर में कश्मीरी पंडितों और सिखों के नरसंहार की जांच की मांग वाली याचिका पर जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ के सामने आज सुनवाई हुई।

इस याचिका में 1989-2003 के बीच कश्मीर से विस्थापन से जुड़े लोगों के संस्मरणों पर आधारित कई किताबों का हवाला दिया गया था। याचिका में जगमोहन की लिखी किताब ‘माई फ्रोजन टर्बुलेंस इन कश्मीर’ और राहुल पंडिता की किताब ‘अवर मून हैज ब्लड क्लॉट्स’ की चर्चा की गई है।

याचिका में कश्मीर से पलायन कर देश के अलग-अलग हिस्सों में शरणार्थियों की किस तरह रहे, कश्मीरी हिंदुओं और सिखों की गणना कराने का आदेश दिए जाने की मांग की गई। इसमें जम्मू कश्मीर में 1990 के बाद प्रवासी कश्मीरियों की आवासीय, शैक्षणिक, व्यावसायिक,कृषि, उद्योग वाली संपत्ति की खरीद फरोख्त को रद्द और निष्प्रभावी करने का आदेश सरकार को देने की गुहार लगाई गई थी।