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आधा न्याय

महिला क्रिकेटरों की मैच फीस पुरुषों के बराबर; लेकिन कॉन्ट्रेक्ट फीस अभी कई गुना कम

महिला क्रिकेट खिलाडिय़ों को पुरुष खिलाडिय़ों के समान मैच फीस देना न्याय का उदाहरण है। यह वो अधिकार था, जो उन्हें पहले ही मिल जाना चाहिए था; अब मिल गया है। देरी से ही सही, पर यह एक बेहतर फ़ैसला है। बीसीसीआई की इस फ़ैसले के लिए तारीफ़ की जानी चाहिए। जब तक ऐसा नहीं था, क्रिकेट बोर्ड उनसे अन्याय कर रहा था। लेकिन अभी भी यह न्याय भी आधा ही है। क्योंकि महिला खिलाडिय़ों की सालाना कॉन्ट्रेक्ट फीस अभी भी पुरुष खिलाडिय़ों से कई गुना कम है। बराबर की मेहनत करते हुए महिला खिलाड़ी भी जीत के साथ उतना ही सम्मान देश को दिलवाती हैं, जितना पुरुष खिलाड़ी। ऐसे में महिलाओं को पुरुषों के मुक़ाबले कम फीस देना खेल भावना का भी अपमान था।

दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कंजूसी से बाहर निकला है और उसने अपनी जेब ढीली करते हुए जो फ़ैसला किया है, उससे उसने ख़ुद अपनी इज़्ज़त की है। लगे हाथ उसे महिला खिलाडिय़ों की कॉन्ट्रेक्ट फीस पर भी कोई न्यायसंगत फ़ैसला कर देना चाहिए।

कुछ भी हो, लैंगिक असमानता ख़त्म करने की तरफ़ बीसीसीआई के इस क़दम का स्वागत किया गया है। महिला खिलाडिय़ों की मैच फीस का फ़ैसला बीसीसीआई की अपेक्स काउंसिल ने किया, जिसे लेकर सचिव जय शाह ने कहा- ‘यह घोषणा करते हुए मुझे ख़ुशी हो रही है कि भेदभाव मिटाने की दिशा में बीसीसीआई ने पहला क़दम उठाया है। हम बोर्ड से अनुबन्धित महिला क्रिकेटर के लिए समान वेतन की पॉलिसी लागू कर रहे हैं। अब महिला और पुरुष दोनों क्रिकेट खिलाडिय़ों को एक जैसी मैच फीस मिलेगी।’

इस फ़ैसले के बाद अब महिला क्रिकेटर खिलाडिय़ों को अब हर टेस्ट मैच में 15 लाख रुपये की फीस मिलेगी। एकदिवसीय (वनडे) की फीस छ: लाख और टी20 मैच की फीस तीन लाख रुपये मिलेगी। पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाडिय़ों को टेस्ट के चार लाख रुपये, जबकि वनडे और टी20 के एक लाख रुपये मिलते थे। बीसीसीआई की घोषणा होते ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने बीसीसीआई के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में महिला क्रिकेट के लिए यह एक बड़ा दिन है। पूर्व कप्तान दिग्गज मिताली राज ने ट्वीट किया- ‘भारत में महिला क्रिकेट के लिए यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। अगले साल महिला आईपीएल के साथ इक्विटी पॉलिसी, हम भारत में महिला क्रिकेट के लिए एक नये युग की शुरुआत कर रहे हैं। बीसीसीआई और जय शाह सर इसको मुमकिन बनाने के लिए आपका शुक्रिया। आज बहुत ख़ुश हूँ।’

वरिष्ठ खेल पत्रकार शालिनी गुप्ता कहती हैं- ‘निश्चित रूप से बीसीसीआई का यह फ़ैसला एक बड़ा परिवर्तन है। इससे खिलाडिय़ों का मनोबल बढ़ेगा और घरेलू महिला क्रिकेटरों को आगे बढऩे का हौसला मिलेगा। साथ ही भारतीय महिलाओं को टेस्ट सीरीज के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए और अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच दिये जाने चाहिए। भारतीय टीम को अब आईसीसी ट्रॉफी जीतने का लक्ष्य रखना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्चस्व हासिल करने के लिए नियमित रूप से ऑस्ट्रेलिया जैसी शीर्ष टीम को हराना चाहिए। पहले डब्ल्यूआईपीएल के आने से यह निश्चित है कि भारत में महिला क्रिकेट का भविष्य आर्थिक रूप से अब बहुत अच्छा होगा। बीसीसीआई के सचिव जय शाह को यह श्रेय दिया जाना चाहिए, जिन्होंने पिछले साल से घरेलू खिलाडिय़ों सहित महिला क्रिकेटरों के लिए स्वागत योग्य बदलाव किये हैं। मुझे लगता है कि मिताली राज और झूलन गोस्वामी जैसे पूर्व खिलाडिय़ों को बीसीसीआई प्रशासक बनाया जाना चाहिए और उनके अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग करना चाहिए। वह ऐसा करने के लिए प्रसन्न भी होंगी। एक मज़बूत महिला प्रशासक निश्चित रूप से भारत में महिलाओं के लिए खेल को चलाने में बीसीसीआई की बेहतर मदद करेगी।’

न्यूजीलैंड पहले ही मैच फीस को लेकर क़दम उठा चुका है। न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड (एनजेडसी) ने जुलाई में महिला खिलाड़ी संघ के साथ पाँच साल का ऐतिहासिक करार किया, जिसमें पुरुष और महिला क्रिकेटरों को सभी प्रारूपों और प्रतियोगिताओं में समान मैच फीस देने की बात थी। इसके तहत प्रति टेस्ट मैच महिला खिलाडिय़ों को भी पुरुष खिलाड़ी के बराबर 10,250 न्यूजीलैंड डॉलर, वनडे इंटरनेशनल के लिए 4,000 न्यूजीलैंड डॉलर और टी-20 के लिए 2,500 न्यूजीलैंड डॉलर देने का फ़ैसला हुआ। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने भी महिला क्रिकेटरों को मातृत्व अवकाश के बाद सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट रिटेन करने, सैलरी में 10 फ़ीसदी बढ़ोतरी करने, सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में तीन खिलाड़ी ज़्यादा करने, 2021-22 सीजन के लिए 20 खिलाडिय़ों को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट देने और आठ खिलाडिय़ों को इमर्जिंग क्रिकेटर्स की कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट में रखने का फ़ैसला किया। हालाँकि महिला क्रिकेट टीम की कप्तान बिस्माह मारूफ ने हाल में खुले रूप से पीसीबी की आलोचना की थी और कहा था कि लम्बे समय टीम के वेतन में बढ़ोतरी नहीं हुई है। मारूफ ने कहा कि पाकिस्तान में महिला खिलाडिय़ों को भारत, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की बराबरी करने के लिए काफ़ी तरक़्क़ी करने की  ज़रूरत है।

ऑस्ट्रेलिया ने भी गत वर्ष महिला क्रिकेटरों के बजट में बड़ी वृद्धि की थी। उन्होंने इसे 75 लाख डॉलर से बढ़ाकर 5.52 करोड़ डॉलर कर दिया था। वहाँ के क्रिकेट बोर्ड ने अपनी घरेलू महिला क्रिकेटरों को भी लाभ पहुँचाया था और इसमें 12 लाख डॉलर की बढ़ोतरी की थी। बिग बैश लीग में रिटेनर्स के वेतन में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 14 फ़ीसदी और घरेलू क्रिकेट लीग में 22 फ़ीसदी का बढ़ोतरी की थी।

नाम मात्र की है कॉन्ट्रैक्ट फीस

महिला क्रिकेट में दिलचस्पनी रखने वाले भी कई लोगों को शायद यह मालूम नहीं होगा कि सालाना केंद्रीय कॉन्ट्रैक्ट में अभी भी महिला खिलाडिय़ों और पुरुष खिलाडिय़ों की सैलरी में ज़मीन-आसमान का अन्तर है। बीसीसीआई ने पुरुष खिलाडिय़ों के लिए चार कैटेगरी (ए ग्रेड, बी ग्रेड, सी ग्रेड और डी ग्रेड) बनाये हैं। महिला खिलाडिय़ों के लिए तीन ही कैटेगरी (ए ग्रेड, बी ग्रेड और सी ग्रेड) हैं।

बीसीसीआई ए ग्रेड में शामिल पुरुष खिलाडिय़ों को सात करोड़ रुपये सालाना देती है, जबकि ए ग्रेड में शामिल महिला खिलाडिय़ों को महज़ 50 लाख रुपये दिये जाते हैं। इस तरह यह अन्तर 14 गुना का है। उदाहरण के लिए 2021-22 सीजन के लिए बीसीसीआई ने ए ग्रेड में हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना, पूनम यादव, दीप्ति शर्मा और राजेश्वरी गायकवाड़ को रखा है। इन महिला खिलाडिय़ों के 50 लाख के मुक़ाबले विराट कोहली और रोहित शर्मा को 14 गुना ज़्यादा सालाना कॉन्ट्रैक्ट फीस मिलती है। इसी तरह बी ग्रेड में शामिल पुरुष खिलाडिय़ों को पाँच करोड़, सी ग्रेड में शामिल पुरुष खिलाडिय़ों को तीन करोड़ और डी ग्रेड में शामिल पुरुष खिलाडिय़ों को एक करोड़ रुपये दिये जाते हैं। वहीं बी ग्रेड में शामिल महिला खिलाडिय़ों को 30 लाख रुपये, जबकि सी ग्रेड में शामिल महिला खिलाडिय़ों को महज़ 10 लाख रुपये दिये जाते हैं।

इसका कारण यह बताया जाता है कि महिला मैच बीसीसीआई के लिए कम कमाऊ होते हैं, जबकि पुरुष क्रिकेट से उसे ज़्यादा मुनाफ़ा होता है। मान लिया यह सही है; लेकिन इस अन्तर को कम तो किया जा सकता है। एक सम्मानजनक स्तर पर तो लाया जा सकता है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम साल 2017 में आईसीसी वल्र्ड कप के फाइनल में पहुँची थी। सन् 2020 के टी20 वल्र्ड कप में भी महिला टीम फाइनल में पहुँची थी, जबकि सन् 2009, सन् 2010 और सन् 2018 में सेमीफाइनल में पहुँची थी। इसके अलावा 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में महिला क्रिकेट टीम ने रजत पदक हासिल किया था। भारत का सबसे बेहतर प्रदर्शन एशिया कप में रहा है, जहाँ भारतीय महिलाओं ने सन् 2018 को छोड़कर नौ बार यह कप जीता है। निश्चित ही हाल के वर्षों में लोगों की दिलचस्पी महिला क्रिकेट के प्रति बढ़ी है। अगले साल से महिला आईपीएल क्रिकेट भी शुरू होने जा रहा है, जिससे महिला क्रिकेट में बड़े स्तर का आर्थिक बदलाव आएगा। एक तो भारत की उन महिला खिलाडिय़ों, जो देश की टीम में नहीं हैं, को आईपीएल टीमों में चुने जाने से उन्हें आर्थिक सपोर्ट मिलेगी। दूसरे उन खिलाडिय़ों को अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाडिय़ों के साथ खेलने का अनुभव मिलेगा, जो उनके खेल को बेहतर बनाएगा। तीसरा जो सबसे बड़ा बदलाव खेल में आएगा, वह है स्पांसरशिप्स।

आईपीएल है ही कॉरपोरेट का क्रिकेट। लिहाज़ा महिला आईपीएल भारत में क्रिकेट के खेल को नया आर्थिक स्तर देगा। हो सकता है कि इससे बीसीसीआई को जो लाभ होगा, उसका इस्तेमाल वह महिला खिलाडिय़ों की कॉन्ट्रैक्ट फीस बढ़ाने और दूसरी सुविधाएँ देने में इस्तेमाल करे।

भाजपा को यह स्वीकार नहीं कि दलितों, गरीबों और आदिवासियों को अधिकार मिलें : राहुल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जो भारत जोड़ो यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा है कि भाजपा हर रोज संविधान पर हमला करती है और सिर्फ कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जो इसकी रक्षा कर सकती है।

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के वाशिम में अलग-अलग जनसभाओं में कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा यह स्वीकार नहीं करना चाहती कि दलितों, आदिवासियों और गरीबों को अधिकार मिलने चाहिएं। उन्होंने कहा – ‘केवल कांग्रेस ही संविधान की रक्षा कर सकती है, आदिवासियों को शिक्षा दे सकती है और उनकी जमीन और अधिकारों की रक्षा कर सकती है।’

इस मौके पर राहुल गांधी ने नोटबंदी, जीएसटी, कृषि ऋण, बेरोजगारी जैसे अहम मुद्दों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जो हमेशा जनता के आम मुद्दों पर फोकस करती रही है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बंद कर रही है और शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का निजीकरण कर रही है। राहुल ने कहा – ‘क्या होगा यदि सभी सरकारी स्कूल बंद हो जाएंगे? वंचित लोग अशिक्षित रहेंगे और यह भाजपा है जो इससे लाभान्वित होगी। वे सभी रास्ते बंद कर रहे हैं। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के दरवाजे बंद हो रहे हैं।’

कांग्रेस नेता ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती पर भी मंगलवार को  एक जनसभा को संबोधित किया थ। इस रैली में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए थे। उन्होंने बिरसा मुंडा और सावरकर के बीच तुलना करने का प्रयास करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा अपने आदर्शों के लिए दृढ़ थे।

पतन का कारण

संसार में जितने भी प्राणी हैं, वे सभी भक्षक हैं। अर्थात् कोई भी प्राणी बिना भोजन के जीवित नहीं रह सकता। भले ही उसका भोजन कुछ भी हो। इसी के चलते अपने भोजन की व्यवस्था भी हर किसी को स्वयं करनी होती है। इसके लिए प्रकृति ने अपना विधान भी बना रखा है। देखने में आता है कि मनुष्य को छोड़कर बाक़ी सभी प्राणी प्रकृति के इसी विधान के अनुसार अपना जीवनयापन करते हैं। लेकिन मनुष्य हर क़दम पर अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति के विधान का उल्लंघन करता नज़र आता है। पाप और पुण्य की परिभाषाओं में उलझा सुख, समृद्धि, स्वर्ग और ईश प्राप्ति की कामना करने वाला मनुष्य ही है। अपनी इच्छापूर्ति के लिए दूसरों का अधिकार छीनकर, बेईमानी करके, अनर्थ करके सबसे ज़्यादा पाप करने वाला भी मनुष्य ही है।

धर्म कहते हैं कि दूसरों की कमायी खाना पाप है। हराम है। इसलिए दूसरों की मेहनत से कमाये हुए धन से पलने के बजाय अपनी मेहनत के कमाये धन से अपना और अपनों का पेट भरें और दूसरे अभावग्रस्त, असहाय प्राणियों को दान दें। लेकिन देखा जा सकता है कि अब बहुत-से लोग दूसरों की कमायी से अपनी सुख-सुविधाओं का इंतज़ाम करते हैं। यह भी देखा जाता है कि वही लोग सबसे ज़्यादा दूसरों की कमायी पर पलते हुए दिखते हैं, जो राजनीति से जुड़े हैं, अपने फ़ायदे के लिए दूसरी तरह की समाज सेवा से जुड़े हैं, जो धर्मों की ठेकेदारी करते हैं।

धर्मानुसार पत्नी को, नाबालिग़ रहने तक बच्चों को, सन्तान के जवान होने के बाद माँ-बाप को, यथोचित समय तक के लिए अतिथि को, बीमार को, मनोरोगी (पागल) को तथा अगर कोई कुछ करने योग्य न हो, तो उसको अर्थात् इन सबको ही पराश्रित रहने का अधिकार है। इन्हें आश्रित होने पर कोई पाप नहीं लगता। बाक़ी में अगर कोई कुछ पाने का अधिकार तभी पा सकता है, जब वह उसके बदले कुछ दे रहा हो। लेकिन अगर कोई बिना किसी परिश्रम के दूसरों के कमाये धन से अपना पेट भरता है, तो वह महापाप कर रहा होता है। शास्त्रों में ऐसे लोगों को परजीवी अर्थात् दूसरों का $खून चूसने वाला कहा गया है। ऐसे लोग मानव समाज के लिए घातक होते हैं, क्योंकि वे अपने हित साधने के लिए दूसरों को दु:ख पहुँचाते हैं। धर्म कहता है कि परजीवियों को समाज से तिरस्कृत कर देने में भी कोई पाप नहीं लगता। यह संसार के कल्याण के लिए, परिश्रमी और सज्जनों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक होता है।

इस प्रकार कह सकते हैं कि दूसरों के कमाये धन से अपना भरण-पोषण करने वालों को जीवित रहने का अधिकार नहीं है। अर्थात् संसार में जितने भी कामचोर और दूसरों का हिस्सा छीनने वाले लोग हैं, उन्हें जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं है; भले ही वे नेता हों, धर्म के तथाकथित ठेकेदार हों, धर्म के नाम पर या व्यर्थ में ख़ुद को लाचार बताकर भीख माँगने वाले हों, समाजसेवा के नाम पर ठगी और लूट करने वाले हों अथवा आलसी हों। ऐसे लोगों से उसी तरह मेहनत करवायी जानी चाहिए, जिस प्रकार खेत में बैलों को जोता जाता है। इनमें भी जो अपने स्वार्थ तथा पालन के लिए अथवा धन की कामना से धर्म के नाम पर और शासन में आने पर लोगों को गुमराह करके उनसे ठगी करके, उन्हें लूटकर ख़ुद ऐशपरस्ती और अय्याशी में लगे रहते हैं, ऐसे लोगों को बैलों की तरह काम कराते हुए लगातार कोड़ों से भी मारते रहना चाहिए। क्योंकि मानव समाज के दु:ख का सबसे बड़ा कारण यही लोग हैं। यही लोग समाज के पतन के असली ज़िम्मेदार होते हैं।

एक राजा तभी राज्य करने के योग्य है, जब वह अपनी मेहनत की कमायी से अपना पेट भरे। वहीं एक धर्माचार्य भी तभी धर्म का उपदेश देने योग्य है, जब वह ख़ुद भी पूरी तरह से धर्म का आचरण करते हुए धर्म के मार्ग पर चलता हो। राजनीति में आकर सेवा की जगह घोटाले करके देश और देशवासियों को गुमराह करने वालों याद दिलाना होगा कि उन्हें सेवा के लिए सत्ता दी गयी है, किसी अय्याश की तरह भोग करने के लिए नहीं। तथाकथित धर्माचार्यों को भी यह याद दिलाना होगा कि धर्म त्याग, तपस्या, कल्याण और संन्यास की ओर ले जाता है, किसी को निकम्मा नहीं बनाता। लेकिन आजकल के तथाकथित धर्म के ठेकेदार और जनप्रतिनिधि निकम्मे, नाकारा, अयोग्य, लोगों को गुमराह करने वाले और धन लोलुप हैं। जबकि इसकी इजाज़त न तो राज-धर्म देता है और न ही कोई भी धर्म नहीं देता। इसका अर्थ यही हुआ कि जो लोग इस तरह सेवा और धर्म के क्षेत्र में आकर भी अपने स्वार्थ साध रहे हैं, वे निश्चित ही महापाप कर रहे हैं। सज्जनों का मत है कि पापी सम्मान देने के योग्य तो होते ही नहीं हैं, समाज में भी रहने योग्य नहीं होते हैं। लेकिन आजकल देखा जाता है कि ऐसे ही महापापियों को सबसे ज़्यादा सम्मान मिलता है और उनके आगे ही लोग नतमस्तक होते हैं। इसीलिए आज इंसान पतन की ओर जा रहा है।

ट्रंप ने की अमेरिका का अगला राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा, समर्थकों ने जताई खुशी

हाल में अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव में मिली-जुली सफलता मिलने के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका का अगला राष्ट्रपति चुनाव लड़ने जा रहे हैं। इसे लेकर उन्होंने संबंधित दफ्तर को जानकारी दे दी है।

ट्रंप ने यह घोषणा करते हुए कहा – ‘मैं आज रात 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर रहा हूं।’ उनकी इस घोषणा के बाद उनके समर्थकों ने इसका जश्न मनाया और कहा कि अमेरिका की वापसी अभी शुरू होती है।

याद रहे इसी महीने के शुरू में ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए लिखा था 15 नवंबर को वे बड़ी घोषणा करने जा रहे हैं। उन्होंने पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद कहा – ‘उम्मीद है कि आज का दिन हमारे देश के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक साबित होगा।’

हाल में ट्रंप काफी चर्चा में रहे हैं। कुछ सर्वे में उनकी पार्टी को हाल के मध्यावधि चुनाव में जबरदस्त कामयाबी मिलने की बात कही गयी थी, हालांकि, यह चुनाव ट्रंप को उतनी बड़ी सफलता नहीं दिला पाए थे।

युद्ध के बीच मिसाइल पोलैंड में गिरने से 2 की मौत, रूस ने कहा उसकी मिसाइल नहीं थी

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बुधवार को रूस की एक मिसाइल के नाटो सदस्य देश पोलैंड में गिरने की ख़बरों के बीच तनाव और बढ़ गया है। रूस ने पोलैंड में उसकी मिसाइल गिरने की रिपोर्ट को गलत बताया है और कहा है ऐसा दावा करके तनाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। पोलैंड ने पहले कहा था कि यह मिसाइल रूस में बनी है,  हालांकि, बाद में देश के राष्ट्रपति ने कहा कि अभी यह पता नहीं है कि यह किस देश की निर्मित है, लेकिन इसके रूस में बने होने की अधिक संभावना है।

पोलैंड ने दावा किया है इस घटना में उसके दो नागरिकों की मौत हो गयी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेन्स्की ने घटना पर कहा कि अब तो रूस नाटो देशों में भी मिसाइल गिराने लगा है। हालांकि, अमेरिका ने कहा है वो इस बात की सत्यता का पता लगा रहा है कि क्या यह रूस की मिसाइल थी। घटना के बाद पोलैंड ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रख दिया।

पोलैंड के राष्ट्रपति एंद्रेस डूडा ने कहा – ‘इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि यह मिसाइल किसने छोड़ी थी। इस मिसाइल के रूस में बनी होने की संभावना सबसे अधिक है।’

पहले घटना के बाद पोलैंड के विदेश मंत्रालय ने दावा किया था कि यह रॉकेट पूर्वी पोलैंड के प्रेजवोडो गाँव में गिरा है और रूस निर्मित है। यह इलाका यूक्रेन की सीमा से सिर्फ 6 किलोमीटर दूर है।  मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह मिसाइल अनाज सुखाने के एक केंद्र पर गिरी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पोलैंड के राष्ट्रपति ने घटना के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन से बात की है। बाइडेन बाली में जारी जी 20 सम्मेलन में हैं। वहां भी इस घटना के बाद आपात बैठक बुलानी पड़ी। बैठक की अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने की और इसमें अन्य देशों के साथ बड़े पश्चिमी ताकतवर देश भी शामिल हुए। यह सभी नाटो सदस्य देश हैं। बैठक के बाद बाइडेन ने कहा कि अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी इस धमाके की जांच कर रहे हैं।

दुनिया की आबादी हुई 800 करोड़; आज डेढ़ बजे 8 अरबवें बच्चे का जन्म, 12 साल में बढ़े 100 करोड़

दुनिया की आबादी 800 करोड़ पार कर गयी है। मंगलवार दोपहर 1:30 बजे इस बच्चे ने जन्म लिया। जनसंख्या को लेकर रियल टाइम ट्रैक करने वाली साइट https://www.worldometers.info/ ने यह जानकारी दी है।

जनसंख्या पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में पहले ही बताया गया था कि इस साल 15 नवंबर को दुनिया की आबादी 800 करोड़ हो जाएगी। याद रहे 1998 में दुनिया की आबादी 600 करोड़ जबकि 2010 में बढ़कर 700 करोड़ हो गई थी।

अब दुनिया में 800 करोड़वें बच्चे ने जन्म ले लिया है। साइट https://www.worldometers.info/ के मुताबिक, आज दोपहर डेढ़ बजे इस बच्चे का जन्म हुआ। ख़ास बात यह है कि पिछले 24 साल में दुनिया में 200 करोड़ पैदा हुए हैं। इसके बाद अगले 12 साल यानी 2022 तक आबादी फिर 100 करोड़ बढ़ गयी।

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया की आबादी 100 करोड़ तक पहुंचने में 1800 साल लगे थे। हालांकि, इसके बाद की 100 करोड़ आबादी और बढ़ने में महज 130 साल ही लगे।

आज सबसे ज्यादा आबादी चीन की है जिसकी जनसंख्या 142.58 करोड़ है। दूसरे नंबर पर भारत है जिसके आंकड़े करीब 142.07 करोड़ के हैं। अगले एक-दो साल में भारत के चीन को पीछे छोड़ देने का अनुमान है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक, अगले 15 साल में दुनिया की जनसंख्या 8 अरब से बढ़कर 9 अरब हो जाएगी।

आंकड़ों के मुताबिक इस साल दुनिया भर में करीब 11.68 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ है। वहीं, साल भर में करीब 5.9 करोड़ लोगों की मौत हुई है। इस साल दुनिया की आबादी में 5.9 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, दुनिया में जनसंख्या वृद्धि की दर कम हुई है जिसके कारण 8 अरब से 9 अरब होने में कुल 15 साल लगेंगे। बता दें आबादी 7 से 8 अरब होने में 12 साल का ही समय लगा है।

डिंपल यादव के खिलाफ भाजपा ने मैनपुरी में शाक्य को उतारा, दो और उम्मीदवार घोषित

भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट से उपचुनाव के लिए सपा की डिंपल यादव के खिलाफ रघुराज सिंह शाक्य को टिकट दिया है। अन्य दो सीटों के लिए भी उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। पहले चर्चा थी कि भाजपा उप चुनाव में मुलायम सिंह की दूसरी बहू अपर्णा यादव को टिकट दे सकती है।

याद रहे डिंपल यादव ने सोमवार को ही नामांकन दाखिल किया है। भाजपा ने अब शाक्य को टिकट दिया है जो उत्तर प्रदेश विधानसभा के पहले भी सदस्य रहे हैं। उस समय (2012) वे इटावा से भाजपा के टिकट से जीते थे।

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने शाक्य के अलावा दो और सीटों के उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। आजम खान की रामपुर सीट से भाजपा ने आकाश सक्सेना को उम्मीदवार बनाया है। सक्सेना खान के कट्टर राजनीतिक विरोधी रहे हैं। रामपुर में आज़म खान की सदस्यता ख़त्म होने के कारण उपचुनाव हो रहा है।

उधर मुज़फरनगर की खतौली सीट से भाजपा ने राजकुमार सैनी पर भरोसा जताया है। सपा-आरएलडी गठबंधन पहले ही यहाँ से आरएलडी के मदन भैया को उम्मीदवार घोषित कर चुका है। खतौली में भाजपा विधायक विक्रम सिंह सैनी की सदस्यता रद्द होने के बाद चुनाव की नौबत आई है। इस तरह यह उपचुनाव भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर साबित होंगे।

दिल्ली की हवा थोड़ी सुधरी; अब बहुत खराब से खराब श्रेणी में, एक्यूआई 221 दर्ज किया

कुछ दिन से बहुत खराब चल रही राजधानी दिल्ली की हवा में सुधार आया है। सिस्टम ऑफ़ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च ने मंगलवार को इसे ‘बहुत खराब’ से अब ‘खराब’ बताया है।

संस्था के मुताबिक राजधानी में मंगलवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 221 दर्ज किया गया। यह पहले से कहीं बेहतर है, हालांकि, अभी भी यह ख़राब श्रेणी में है। गुरुग्राम में एक्यूआई 162 जबकि नोएडा में एक्यूआई 302 दर्ज किया गया जो कि ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है।

बता दें शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को सबसे अच्छा माना जाता है जबकि 51 से 100 तक संतोषजनक। हालांकि, दिल्ली में दिवाली के बाद दो हफ्ते तक कई जगह यह 401 और 500 के बीच जाकर गंभीर श्रेणी में पहुँच गया था। वैसे 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’  जबकि 401-500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में मानी जाती है।

इस बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्राधिकारियों को चरणबद्ध प्रक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के तीसरे चरण के तहत दिल्ली-एनसीआर में लागू पाबंदियां तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि क्षेत्र में निर्माण आदि गतिविधियां फिर शुरू की जा सकती हैं। हालांकि, एजेंसियों को धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया गया है।

‘एम्स’ में चार साल के मरीज को परोसी गयी दाल में मिला ‘कॉकरोच’, जांच के आदेश

देश के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले अस्पताल और मेडिकल कालेज एम्स में चार साल के मरीज एक बच्चे को परोसे गए खाने में कथित तौर पर कॉकरोच मिलने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। एम्स प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद इसे गंभीर बात मानते हुए इस प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चार साल के एक मरीज को जब दाल परोसी गई तो उसमें कॉकरोच पाया गया जिसकी शिकायत उसके परिजनों ने अधिकारियों से की। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने इसकी जांच शुरू की है।

घटना का पता तब चला जब एक ट्विटर यूजर ने तस्वीरों के साथ दाल में कॉकरोच मिलने की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा की। इसमें दावा किया गया है कि चार साल के बच्चे को परोसी गई दाल में कॉकरोच मिला।

ट्वीट में कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में दयनीय और भयावह स्थिति। पेट की प्रमुख सर्जरी के बाद पहले भोजन के रूप में चार साल के बच्चे को कॉकरोच दाल परोसना हैरान करने वाली घटना है।

जी-20 मुलाकात में बाइडेन ने जिनपिंग से उठाए ताइवान, तिब्बत, शिनजियांग, हांगकांग के मुद्दे

लगातार तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बने शी जिनपिंग की सोमवार रात अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात हुई जिसमें काफी मुद्दों पर बातचीत हुई। इंडोनेशिया के बाली में जी 20 की बैठक में मुलाकात के दौरान बाइडेन ने जिनपिंग से बातचीत के दौरान ताइवान से लेकर तिब्बत, शिनजियांग और हांगकांग में मानवाधिकार तक के मुद्दे उठाए। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस दौरान जिनपिंग ने कहा कि स्वतंत्रता, लोकतंत्र और मानवाधिकार, इंसानियत के साझा लक्ष्य हैं और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इन लक्ष्यों की ओर लगातार अग्रसर रहती है। लेकिन अमेरिका में अमेरिकी स्टाइल का लोकतंत्र  है जबकि चीन में चीन के तरीके का लोकतंत्र है।

बाइडेन ने जिनपिंग से बहुप्रचारित बैठक के दौरान कहा कि चीन की ताइवान पर आक्रामक कार्रवाई ने शांति को खतरे में डाला है। बाइडन ने चीन के राष्ट्रपति से कहा कि दोनों देश साथ मिलकर जलवायु परिवर्तन, आर्थिक स्थिरता, स्वास्थ्य और फूड सिक्योरिटी पर काम करें।  शिनजियांग तिब्बत हांगकांग में मानवाधिकार के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि चीन ताइवान पर यथास्थिति बनाए रखे। एक तरफा बदलाव करने की कोशिश न करे।

इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन में बंदी अमेरिकी नागरिकों का मुद्दा भी उठाया और रूस के परमाणु धमकी के मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने कहा  – ‘हम ज़ोर शोर से प्रतियोगिता करेंगे लेकिन वो विवाद में न बदले इस बात का जरूर ध्यान रखेंगे।’

जिनपिंग ने यूक्रेन संकट पर कहा कि इन मुद्दों पर गौर करना होगा कि संघर्ष और युद्ध कोई विजेता नहीं पैदा करते और दूसरे किसी जटिल मुद्दे का कोई सरल समाधान नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रमुख देशों के बीच टकराव से बचना चाहिए। चीन हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है और शांति वार्ता को प्रोत्साहित करता रहेगा। बता दें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।

चीनी राष्ट्रपति ने कहा – ‘हम रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता की बहाली का समर्थन करते हैं। साथ ही, हमें आशा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, नाटो और यूरोपीय संघ रूस के साथ व्यापक वार्ता करेंगे।’