Bengal Election: स्ट्रॉन्ग रूम और CCTV को लेकर आयोग बनाम Mamta! 

भवानीपुर से नोआपारा तक तनाव की लहर; ईवीएम की सुरक्षा पर तृणमूल का पहरा तो भाजपा नेता के घर पर फायरिंग ने सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी निष्पक्षता पर खड़े किए गंभीर सवाल…

क्या बदल जाएंगे नतीजे? | बंगाल में दावों-प्रतिदावों और गोलीबारी के बीच बढ़ी बेचैनी!...
क्या बदल जाएंगे नतीजे? | बंगाल में दावों-प्रतिदावों और गोलीबारी के बीच बढ़ी बेचैनी!...

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने से ठीक पहले राज्य का सियासी तापमान अपने चरम पर पहुंच गया है। मतदान के बाद अब सत्ता की असली लड़ाई स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के बीच सिमट गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में रविवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सखावत मेमोरियल गर्ल्स स्कूल स्थित मतगणना केंद्र के परिसर में भाजपा के झंडे लगी दो संदिग्ध कारों के प्रवेश का दावा किया।

यह घटना इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि खुद ममता बनर्जी ने हाल ही में इसी केंद्र के बाहर चार घंटे का धरना देकर अनधिकृत प्रवेश की आशंका जताई थी। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा जांच के बाद ही वाहनों को जाने दिया गया, लेकिन सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि राज्यभर के स्ट्रॉन्ग रूम अब किलों में तब्दील हो चुके हैं।

तनाव की यह आग केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है। उत्तर 24 परगना के नोआपारा में भाजपा नेता कुंदन सिंह के आवास पर शनिवार आधी रात को हुई गोलीबारी ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नए प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। भाजपा ने इसे मतगणना से पहले कार्यकर्ताओं को डराने की साजिश करार दिया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को हार की खींचतान और “पब्लिसिटी स्टंट” बताया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दो लोगों को गिरफ्तार जरूर किया है, लेकिन बैरकपुर के इस औद्योगिक बेल्ट में राजनीतिक हिंसा का इतिहास देखते हुए सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं।

वर्तमान परिदृश्य में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भी खींचतान जारी है। हावड़ा में स्ट्रॉन्ग रूम के पास मरम्मत कार्य का विरोध हो या आसनसोल और बारासात में सीसीटीवी कैमरों के बंद होने की शिकायतें, तृणमूल कांग्रेस हर कदम पर ‘ईवीएम से छेड़छाड़’ के प्रति सतर्क और हमलावर नजर आ रही है। दूसरी ओर, भाजपा इसे सत्ता खोने के डर से उपजी हताशा बता रही है। दोनों पक्षों के चुनावी भाग्य अब बंद मशीनों में कैद हैं, लेकिन सड़कों पर जारी यह रस्साकशी साफ संकेत दे रही है कि परिणाम चाहे जो भी हों, बंगाल में राजनीतिक सौहार्द की बहाली फिलहाल एक कठिन चुनौती बनी हुई है।