
तहलका डेस्क। नई दिल्ली। दिल्ली के विवेक विहार में हुआ भीषण अग्निकांड अब महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि शहरी नियोजन और सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का प्रतीक बन गया है। रविवार तड़के हुए इस हादसे में नौ लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया है।
ताजा अपडेट के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी है। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि इमारत में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे और रिहायशी इलाके में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था, जिसने आग की तीव्रता को और बढ़ा दिया।
घटनास्थल से मिल रही तस्वीरें रूह कंपा देने वाली हैं। बचाव दल ने जब मलबे और धुएं के बीच तलाशी अभियान चलाया, तो शवों की स्थिति देखकर उनकी भी आंखें नम हो गईं। दूसरी मंजिल पर मिले पांच शवों और मुमटी के पास फंसे तीन लोगों की मौत यह चीख-चीख कर कह रही है कि अगर इमारत में ‘इमरजेंसी एग्जिट’ की सुविधा होती, तो शायद ये लोग आज जीवित होते।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। मुमटी का दरवाजा बंद होना सबसे बड़ी लापरवाही साबित हुई, क्योंकि छत की ओर भागे लोग वहां फंस गए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है, लेकिन सवाल वही बरकरार है कि आखिर घनी आबादी वाले इन इलाकों में नियमों की धज्जियां कैसे उड़ाई जा रही हैं? दमकल विभाग की रिपोर्ट में बिल्डिंग के नक्शे और सुरक्षा क्लीयरेंस पर भी सवाल उठाए गए हैं।
फिलहाल, फॉरेंसिक टीम (FSL) ने मौके से नमूने एकत्र किए हैं ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। यह हादसा उन हजारों इमारतों के लिए एक डरावना सबक है, जहाँ सुरक्षा के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। अब सबकी नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर हैं कि क्या केवल जांच की फाइलें बनेंगी या वास्तव में ऐसी ‘मौत की इमारतों’ पर नकेल कसी जाएगी।



