
तहलका ब्यूरो।
इंफाल/नई दिल्ली। मणिपुर की राजधानी इंफाल में बीर टिकेंद्रजीत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास हुए बम विस्फोट ने एक बार फिर राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह धमाका हवाई अड्डे के नए कार्गो टर्मिनल के पास स्थित एक खुले मैदान में हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसकी गूंज काफी दूर तक सुनी गई और आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया।
गौरतलब है कि यह धमाका राज्य में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जारी जातीय संघर्ष की तीसरी बरसी के दिन हुआ। हालांकि, विस्फोट के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रतिबंधित संगठन कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने बयान जारी कर कहा कि राज्य में लगातार हो रहे बंद, नाकेबंदी और शटडाउन के विरोध में यह विस्फोट किया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही मणिपुर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। बम निरोधक दस्ते ने भी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया ताकि किसी अन्य संभावित खतरे का पता लगाया जा सके।
शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इस धमाके में किसी भी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, जो एक बड़ी राहत की बात है। हालांकि, जिस स्थान पर यह विस्फोट हुआ वह सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। हवाई अड्डे जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान के इतने करीब धमाका होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
सुरक्षा बलों ने आसपास के क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है और संदिग्धों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मणिपुर पहले से ही जातीय हिंसा और अशांति के दौर से गुजर रहा है। राज्य में पिछले तीन वर्षों से जारी उथल-पुथल के बीच इस तरह की हिंसक गतिविधियां माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना देती हैं।
यह बात भी काबिलेगौर है कि मणिपुर में वर्ष 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। यह हिंसा आज ही के दिन यानी 3 मई को तीन साल पहले 2023 को उस समय शुरू हुई थी, जब पहाड़ी जिलों में ‘ट्राइबल सॉलिडैरिटी मार्च’ निकाला गया था, जिसमें मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग का विरोध किया गया था।



