तहलका डेस्क।
तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों की पूर्व संध्या पर संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के खेमे से एक बड़ी रणनीतिक स्पष्टता सामने आई है। एआईसीसी महासचिव और केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी ने साफ कर दिया है कि गठबंधन के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कोई रस्साकशी नहीं है। यूडीएफ के तमाम घटक दलों ने एकजुटता का परिचय देते हुए नेतृत्व का फैसला पूरी तरह से कांग्रेस के विवेक पर छोड़ दिया है। यह कदम न केवल गठबंधन की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि चुनाव परिणामों से पहले किसी भी संभावित अंतर्कलह की गुंजाइश को भी समाप्त करता है।
दीपा दासमुंशी का यह बयान उस समय आया है जब सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर स्वस्थ चर्चा हो चुकी है और सहयोगियों ने कांग्रेस के निर्णय को शिरोधार्य करने की प्रतिबद्धता जताई है। दीपा ने चुटकी लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जितनी बेचैनी सोशल मीडिया और बाहरी गलियारों में दिख रही है, गठबंधन के भीतर उतनी ही स्पष्टता और अनुशासन है।
विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखें तो यह कांग्रेस आलाकमान के लिए एक बड़ी राहत है। 140 सीटों वाली विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को हुए मतदान के बाद, अब सबकी नजरें 4 मई के परिणामों पर टिकी हैं। दासमुंशी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए संकेत दिया कि मुख्यमंत्री का चयन किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि एक तय प्रक्रिया के तहत होगा। पहले निर्वाचित विधायकों की राय ली जाएगी और फिर आलाकमान अंतिम मुहर लगाएगा।
यह रणनीति दर्शाती है कि कांग्रेस केरल में ‘कलेक्टिव लीडरशिप’ के फॉर्मूले के साथ-साथ ‘हाईकमान’ के वर्चस्व को संतुलित रखना चाहती है। सहयोगियों द्वारा कांग्रेस को दी गई यह खुली छूट आगामी सरकार के स्थायित्व के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है।




