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यौन जाँच में फँसे मंत्री संदीप

यौन उत्पीडऩ के गम्भीर आरोपों से चहुँतरफ़ा घिरे हरियाणा के राज्यमंत्री को बचाने में लगे खट्टर

यौन उत्पीडऩ और गम्भीर धाराओं में नामज़द हरियाणा के राज्यमंत्री संदीप सिंह आरोपी हैं। लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर शिकायतकर्ता के आरोपों को अनर्गल मतलब बेबुनियाद, मनगढ़ंत और आधारहीन बता रहे हैं। यह बयान न केवल पूर्वाग्रस्त और बेतुका है, बल्कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ वाले राज्य के आदर्श वाक्य के विपरीत भी है।

पुलिस जाँच से पहले ऐसे ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान आख़िर कोई मुख्यमंत्री भला कैसे दे सकता है? जाँच राज्य पुलिस नहीं, बल्कि केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ की पुलिस कर रही है। सरकार ने तो यह किया कि मामला प्रकाश में आते ही हरियाणा पुलिस की विशेष जाँच समिति गठित कर दी, जबकि हरियाणा में कोई प्राथमिकी ही दर्ज नहीं हुई थी।

पुलिस महानिदेशक पीके अग्रवाल के आदेश पर तुरत-फुरत एडीजीपी ममता सिंह के नेतृत्व में जाँच समिति ने मामले की छानबीन भी शुरू कर दी। ममता सिंह के अलावा समिति में पंचकूला के डीसीपी सुमेर प्रताप सिंह और एसीपी राजकुमार कौशिक को रखा गया। जिस सरकार में मंत्री गम्भीर आरोपों के बावजूद अपने पद पर बना रहे, मुख्यमंत्री आरोपों को अनर्गल बताते रहे और आरोपी झूठे आरोपों से छवि ख़राब होने के राग अलापते हों, वहाँ शिकायतकर्ता की क्या बिसात? मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक कार्यालय तक पीडि़ता पहुँची; लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। मामला लगभग छ: माह पुराना है और यह सब किसी एक दिन में नहीं, बल्कि टुकड़ों-टुकड़ों में कई बार हुआ। सवाल यह कि आख़िर छ: माह पुराने इस मामले में शिकायतकर्ता अब क्यों जागी। अगर उसके आरोपों में दम और उसके पास कोई सुबूत थे, तो वह इतन समय तक चुप क्यों रही? यह देरी उसे भी संदेह के घेरे में खड़ा करती है; लेकिन उसके पास देरी के कुछ तर्क है। वह कितने सही हैं यह दो जाँच से स्पष्ट होगा; लेकिन राज्य सरकार का इस मामले में रुख़ बेहद नकारात्मक ही रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अब तक के कार्यकाल में यह पहला ऐसा मामला है, जिसमें उनके किसी मंत्री पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगे हैं। विडंबना देखिए कि चंडीगढ़ के सेक्टर-26 थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी खेल विभाग में तैनात लोगों ने मंत्री की छवि ख़राब करने का इसे एक ज़रिया बताया।

तीन माह पहले नियुक्त हुई जूनियर कोच को क्या यह पता नहीं कि जिस विभाग में वह है उसके ही मंत्री के ख़िलाफ़ ऐसी शिकायत करने का क्या हश्र होगा? उसकी न केवल नौकरी, बल्कि उसके खेल करियर ख़राब होने का ख़तरा है। अभी वह हरियाणा और देश के लिए खेल में बहुत कुछ करना चाहती है। उसके साथ कुछ तो अप्रिय हुआ ही है, जिसके चलते उसने इतना बड़ा क़दम उठाने का साहस किया।

अब वह अकेली नहीं है, हरियाणा की कुछ खाप पंचायतें उसके समर्थन में आ गयी हैं। जूनियर महिला कोच के पक्ष में न केवल खाप पंचायतें, बल्कि भारतीय किसान यूनियन की इकाई भी इंसाफ़ की इस लड़ाई में आगे आयी है। हरियाणा में खाप पंचायतों का अपना महत्त्व है और इस मामले में वो लामबंद होने लगी हैं। सर्वखाप पंचायत की बैठक में आरोपी संदीप सिंह को तुरन्त प्रभाव से मंत्री पद से हटाने और उसकी गिरफ़्तारी की माँग की है। पंचायत ने इस मामले की जाँच सेवानिवृत्त किसी जज से कराने की माँग है।

हर आरोपी आरोपों को झूठा और शिकायतकर्ता आरोपों को सच्चा कहता है; लेकिन सच पहले पुलिस जाँच और फिर अदालत के फ़ैसले से उजागर होता है। चौतरफ़ा दबाव के चलते आरोपी संदीप सिंह ने मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने की बजाय खेल विभाग मुख्यमंत्री को सौंप दिया। आलोचना के बावजूद सरकार ने इस बाबत सर्कुलर भी जारी कर दिया। उनका मंत्री पद तो अब भी क़ायम है, वह जाँच को प्रभावित कर सकते हैं; वह सरकार का हिस्सा है।

राज्य में यह पहला मामला है, जब किसी मंत्री ने नैतिकता के आधार पर कोई एक विभाग छोड़ा हो और मंत्री बना रहा हो। नैतिकता के आधार पर कोई इस्तीफ़ा क्यों देता है, इसलिए कि जाँच निष्पक्ष हो सके। लेकिन इस मामले में ऐसा बिलकुल नहीं हुआ। खिलाड़ी से राजनीति में आये और मंत्री बने संदीप सिंह जैसा ऊपर से आदेश हो रहा है, वही कर रहे हैं।

संदीप सिंह इतनी आलोचनाओं के बावजूद नैतिकता की दुहाई देते रहे कि मामला खेल विभाग से जुड़ा है, इसलिए वह इस विभाग से जाँच पूरी होने तक दूरी बनाये रखेंगे। इसके बाद जैसा फ़ैसला होगा यह मुख्यमंत्री पर निर्भर करेगा। उन्हें पता होना चाहिए कि आरोप साबित नहीं हुए, तभी मुख्यमंत्री करेगे वरना अदालत करेगी। क्या संदीप सिंह सरकार के मुताबिक ही सब कर रहे हैं या फिर उन्हें किसी बात का डर है?

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे ओलंपियन संदीप सिंह ने देश और हरियाणा का नाम रोशन किया है। ड्रेग फ्लिकर के तौर पर उसने कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को जीत भी दिलायी है; लेकिन इस मामले में वह फ़िलहाल ऑफ साइड ही नज़र आते हैं।

वह हरियाणा पुलिस में खेल कोटे से डीएसपी नियुक्त हुए थे; लेकिन बाद में राजनीति में आये। भाजपा की टिकट पर वह पेहोवा से विधायक बने और पहली बार मंत्री भी बन गये। उन्हें खेल, युवा, प्रिटिंग और स्टेशनरी विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया। वह अच्छा काम कर रह थे और कभी विवाद में नहीं फँसे; लेकिन इस मामले में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शिकायतकर्ता जूनियर महिला कोच के मोबाइल में ऐसा बहुत कुछ है। यही वजह है कि उसने चंडीगढ़ पुलिस के बुलाने पर अपना वह मोबाइल फोन सौंप दिया था, जबकि आरोपी ने एक सप्ताह बाद ऐसा किया। इस दौरान मोबाइल से बहुत कुछ उड़ाया जा सकता है; लेकिन साइबर विशेषज्ञ इसे फिर से बहाल कर सकते हैं। यौन उत्पीडऩ की घटना चंडीगढ़ के सेक्टर-7 में मंत्री संदीप सिंह के सरकारी आवास की है, लिहाज़ा मामला वहीं का बनता था।

शिकायतकर्ता खेल विभाग में तीन माह पहले नियुक्त हुई जूनियर एथलेटिक्स कोच को पुलिस ने चार बार बुला लिया, जबकि आरोपी मंत्री संदीप सिंह को प्राथमिकी दर्ज होने के एक सप्ताह बाद बुलाया; जबकि विषय की गम्भीरता को देखते हुए मामला दर्ज होते ही आरोपी को पूछताछ के लिए पहले बुलाया जाना चाहिए था। शिकायतकर्ता ने दबाव डालने और अपरोक्ष तौर पर धमकी जैसे आरोप लगाये हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हरियाणा पुलिस ने सुरक्षा मुहैया करायी है। राज्य पुलिस की जाँच का तो कोई मतलब ही नहीं है।

यह मामला न केवल यौन उत्पीडऩ का है, बल्कि प्रशासकीय गोपनीयता का भी है। हालाँकि पुलिस जाँच में दूसरे पक्ष को नहीं रखा गया है। अगर इसकी विस्तृत और निष्पक्ष जाँच हो जाए, तो कई बड़े अधिकारी भी लपेट में आएँगे। शिकायतकर्ता महिला कोच का आरोप है कि संदीप सिंह ने शॉर्टलिस्टिंग ऑफ आउट स्टैंडिंग स्पोट्र्स पर्सन की वह सूची भी शेयर की, जिसके आधार पर खेल विभाग में सरकारी नियुक्तियाँ की जानी थीं।

सोशल मीडिया पर शिकायतकर्ता के चरित्र पर तरह रह के आक्षेप लग रह हैं; लेकिन उसका मानना है कि इसी चरित्र के बूते उसने इतना बड़ा क़दम उठाने का साहस किया है। जब पानी सिर से गुज़रने लगा, तो उसने मंत्री के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की सोची। यह जानते-बूझते कि यह काम इतना आसान तो नहीं। यह सोचकर कि हरियाणा सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत उसे इंसाफ़ दिलाएगी। यह उसका भ्रम ही रहा, अब तक की जाँच में आरोपी की वही रुतबा दिख रहा है; जो घटना से पहले था। देखते हैं कि इंसाफ़ की लड़ाई का क्या हश्र होगा।

महिला आयोग चुप क्यों?

हरियाणा महिला आयोग की रहसमयमयी चुप्पी बहुत कुछ संकेत करती है। महिला कोच ने आयोग को मेल के माध्यम से शिकायत करने की बात कही है; लेकिन आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया इससे इनकार करती हैं। उनका कहना है कि न तो ऐसा कोई मेल मिला और न कोई शिकायत किसी अन्य माध्यम से आयी। आयोग बिना शिकायत भी मामले की पड़ताल कर सकती है। राज्य के कई मामलो में ऐसा हुआ; लेकिन मंत्री से जुड़े इस प्रकरण में आयोग मूक ही रहा। ऐसे कई उदाहरण मिल जाएँगे कि जिनमें आयोग ने स्वत: संज्ञान के आधार पर कार्रवाई को अंजाम दिया।

“बेटी को इंसाफ़ दिलाने के लिए कई खापें तैयार हैं। इस मामले में आरोपी को वीआईपी की तरह लिया जा रहा है, जबकि शिकायतकर्ता मारी-मारी फिर रही है। संदीप सिंह खिलाड़ी है, जिसने राज्य और देश का नाम रोशन किया; लेकिन वह बेटी भी तो पदक जीत रही है। उसे न्याय दिलाने से पीछे नहीं हटेंगे।’’

धनखड़ खाप पंचायत

“एक युवा खिलाड़ी ने अनर्गल आरोप लगाये हैं। आरोप लगाने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता। चंडीगढ़ पुलिस जाँच कर रही है। जाँच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। खेल विभाग से उन्होंने (संदीप सिंह ने) खुद को दूर कर लिया है।’’

मनोहर लाल खट्टर

मुख्यमंत्री, हरियाणा

फिटनेस ही सर्वोपरि, 2023 के विश्व कप से पहले खिलाडिय़ों की फिटनेस देखेगा बीसीसीआई

फिटनेस एक ऐसी आवश्यकता है, जिसके बिना स्पोट्र्स और स्पोट्र्समैन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अब इस दिशा में कुछ क़दम उठाने की तैयारी में है। दिलचस्प बात यह है कि फिटनेस को लेकर इस तरह का सुझाव स्टार क्रिकेटर विराट कोहली ने बीसीसीआई के सामने रखा था।

हालाँकि तब इस पर कुछ नहीं हुआ। अब बीसीसीआई के नये अध्यक्ष रोजर बिन्नी ने इस दिशा में काम शुरू किया है और बोर्ड की एक बैठक करके यो-यो टेस्ट के साथ डेक्सा टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। भारत के कई बड़े क्रिकेट खिलाड़ी 2022 में चोट से जूझते रहे और बीसीसीआई को अब कि फिटनेस की दिशा में कुछ बड़ा करने का समय आ गया है। बीसीसीआई की बैठक में इस मसले पर काफ़ी चर्चा हुई कि खिलाड़ी फिटनेस सर्टिफिकेट लाते हैं; लेकिन फिर भी चोटिल हो रहे हैं। ख़ुद कप्तान रोहित शर्मा ने खिलाडिय़ों के चोटिल होने का मसला उठाया था। रोहित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के कामकाज से भी असन्तुष्ट थे। मुम्बई में हुई बैठक में बोर्ड अध्यक्ष रोजर बिन्नी के अलावा सचिव जय शाह, रोहित शर्मा, हेड कोच राहुल द्रविड़, एनसीए प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण और भंग चयन समिति के अध्यक्ष चेतन शर्मा उपस्थित रहे। इसमें 20 खिलाडिय़ों का एक पूल बनाकर उसमें से वन-डे विश्व कप की टीम चुनने का फ़ैसला हुआ।

इस बैठक के फ़ैसलों पर नज़र दौड़ाएँ, तो साफ़ ज़ाहिर होता है कि बोर्ड खिलाडिय़ों की फिटनेस को लेकर गम्भीर है और 2023 के एक दिवसीय विश्व कप को लक्ष्य मानते हुए फिटनेस पर ख़ास काम करना चाहता है। इसमें यह भी एक बड़ा फ़ैसला हुआ है कि यदि विश्व कप से पहले खिलाड़ी की फिटनेस पर सन्देश जैसा कुछ होगा, तो उसे आईपीएल में नहीं खेलने दिया जाएगा। विदेशी क्रिकेट बोर्ड यही करते हैं। ऐसे खिलाड़ी, जो बड़े टूर्नामेंट से पहले फिटनेस के मामले में समस्या झेल रहे होते हैं; उन्हें आईपीएल में खेलने की इजाज़त नहीं मिलती।

अब एनसीए और आईपीएल के फ्रेंचाइजी मिलकर फिटनेस में संदिग्ध खिलाडिय़ों की फिटनेस लगातार मॉनिटर करेंगे। एनसीए को लगा कि खिलाड़ी के चोटिल होने का ख़तरा है, तो उसे आईपीएल में नहीं खेलने दिया जाएगा। यह सभी खिलाडिय़ों के मामले में नहीं, बल्कि पूल में चुने गये 20 खिलाडिय़ों में से ही होगा। हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि आईपीएल में तो खिलाड़ी खेल लेते हैं; लेकिन देश की टीम के लिए खेलते हुए उनकी फिटनेस या चोट आड़े आ जाती है।

रवींद्र जडेजा, जसप्रीत बुमराह जैसे बड़े खिलाड़ी इसका उदहारण हैं, जो 2022 में देश के लिए कई मैच नहीं खेल पाये। यहाँ तक कि हार्दिक पांड्या, जिन्हें अब टी-20 टीम का कप्तान बना दिया गया है, पीठ की चोट के कारण 2021 के टी20 विश्व कप में गेंदबाज़ी ही नहीं कर पाये। ज़ाहिर है बीसीसीआई अब खिलाडिय़ों के वर्कलोड मैनेजमेंट पर फोकस कर रहा है।

दरअसल बीसीसीआई को विराट कोहली के दिये सुझावों पर अमल करने का आइडिया तब आया, जब उसने 2022 के टी20 विश्व कप में भारत के ख़राब प्रदर्शन पर रिव्यू मीटिंग की। बैठक में उपस्थित क्रिकेट अधिकारियों ने महसूस किया कि कोहली के सुझाव महत्त्वपूर्ण थे और उन पर अमल किया जा सकता है। इस रिव्यू मीटिंग में कोहली के वर्कलोड मैनेजमेंट पर गहन चर्चा की गयी। दरअसल कोहली ने सन् 2019 के आईपीएल से ऐन पहले बीसीसीआई को सुझाव दिया था कि 50 ओवर का विश्व कप चार साल में आता है, जबकि हम आईपीएल हर साल खेलते हैं। ऐसे में कुछ बड़े खिलाडिय़ों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।

याद रहे सन् 2019 वनडे विश्व कप, 2021 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप, 2021 टी20 विश्व कप और 2022 टी20 विश्व कप में भारत को हार झेलनी पड़ी। बहुत से विशेषज्ञ मानते हैं कि बीसीसीआई को कोहली के सुझावों को गम्भीरता से लेना चाहिए था। अब बीसीसीआई ने जो फ़ैसले किये हैं। उनके मुताबिक, 50 ओवर के विश्‍व कप के लिए 20 खिलाडिय़ों का पूल तैयार किया जाए। इनमें से खिलाडिय़ों को विश्‍व कप से पहले भारतीय टीम से खेलने का अवसर मिलेगा। जो दूसरा बड़ा फ़ैसला बीसीसीआई ने किया वह था टीम में चयन से पहले डेक्‍सा टेस्‍ट अनिवार्य करना।

इसके अलावा भारत के घरेलू क्रिकेटर्स को राष्ट्रीय टीम में चयन के लिए प्रर्याप्त डॉमेस्टिक क्रिकेट खेलना होगा और आईपीएल ही राष्ट्रीय टीम में चयन का ज़रिया नहीं रहेगा। अच्छी बात यह होगी कि अगले साल के विश्व कप के लिए टीम का चयन अभी से हो जाएगा, जिससे खिलाडिय़ों को लगातार साथ खेलकर बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।

क्या है डेक्सा टेस्ट?

डेक्सा एक इमेजिंग टेस्ट है, जिसमें व्यक्ति की हड्डियों का घनत्व मापा जाता है। अर्थात् हड्डी की ताक़त मापना। इसे बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) टेस्ट भी कहा जाता है। डेक्‍सा स्‍कैन से पता चलता है कि व्यक्ति की हड्डी टूटने की कितनी सम्भावना है या नहीं है। यह टेस्ट खिलाड़ी के शरीर की संरचना को समझने में मदद करता है और उसके शरीर के भीतर के फैट और मांसपेशियों की व्यापक जानकारी सामने आती है। यहाँ बता दें कि शरीर संरचना और हड्डियों के स्वास्थ्य को मापने के लिए डेक्सा स्कैन ही अंतरराष्ट्रीय मानक भी है। 10 मिनट के इस परीक्षण से व्यक्ति के शरीर के फैट, बोन मास, फैट टिशू और मांसपेशियों के स्वास्थ्य का पता चलता है।

इस टेस्ट में ड्यूअल एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्पटियोमेट्री (डेक्सा) मशीन इस्तेमाल होती है, जिससे हड्डियों के डेंसिटी पारखी जाती है। डेक्सा टेस्ट से हड्डियों की कमज़ोरी की वजह का पता लगाया जाता है और उससे हड्डियों में मौज़ूद कैल्शियम और अन्य मिनरल्स की जानकारी मिलती है। अभी तक खिलाडिय़ों का सिर्फ़ यो-यो टेस्ट होता था। अब दोनों ही टेस्ट अनिवार्य कर दिए गए हैं। यो-यो टेस्ट की खोज डेनमार्क के फुटबॉल फिजियोलॉजिस्ट जेन्स बैंग्सबो ने 30 साल पहले की थी। उन्होंने इसे इंटरमिटेंट रिकवरी टेस्ट (यो-यो टेस्ट) का नाम दिया था।

यो-यो टेस्ट बीप वाला रनिंग टेस्ट होता है, जिसमें 20-20 मीटर की दूरी वाले दो सेटों के बीच दौड़ लगानी होती है। खिलाड़ी को एक से दूसरे सेट तक दौडऩा होता है और फिर दूसरे सेट से पहले सेट तक आना होता है। एक बार इस दूरी को तय करने पर एक शटल पूरा होता है। टेस्ट की शुरुआत पाँचवें लेवल से होती है। यह 23वें लेवल तक चलता रहता है। हर एक शटल के बाद दौडऩे का समय कम होता जाता है; हालाँकि दूरी उतनी ही रहती है।

एक खिलाड़ी के लिए यो-यो टेस्ट में 23 में से 16.5 स्कोर लाना अनिवार्य है। बीसीसीआई ने इसे 2017 में लागू किया। इससे पहले स्किनफोल्ट टेस्ट लम्बे समय तक बीसीसीआई में फिटनेस का पैमाना रहा था। वैसे डेक्सा टेस्ट बीच में शुरू किया गया था; लेकिन बाद में इसे बन्द कर दिया गया था। अब बीसीसीआई इसे फिर लेकर आया है। हाल के वर्षों में युवराज सिंह, सुरेश रैना, अंबाती रायुडू, मोहम्मद शमी, संजू सैमसन, पृथ्वी शॉ और वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ी यो-यो टेस्ट पास करने में नाकाम रह चुके हैं।

रोहित रहेंगे कप्तान!

बीसीसीआई की बैठक से एक संकेत यह भी मिलता है कि यदि फिटनेस बनी रही, तो रोहित शर्मा ही इस साल होने वाले विश्व कप में भारत के कप्तान रह सकते हैं। बैठक से ज़ाहिर होता है कि रोहित शर्मा की कप्तानी पर कोई ख़तरा नहीं है, भले उनकी अनुपस्थिति में अन्य खिलाडिय़ों को हाल के महीनों में कप्तान के रूप में अवसर दिये गये हों। रोहित वनडे और टेस्ट टीम में कप्तानी कर रहे हैं और इन दो प्रारूपों में बतौर कप्तान उनके भविष्य को लेकर बैठक में कोई बात नहीं की गयी, जिससे यह संकेत मिले हैं। ऐसे में लगता है कि इन दो प्रारूपों में 2023 के बाद ही किसी अन्य खिलाड़ी को कप्तानी का अवसर मिल पाएगा।

ऋषभ की सेहत

गृह राज्य में सडक़ हादसे का शिकार हुए स्टार खिलाड़ी ऋषभ पंत के भविष्य को लेकर तमाम प्रशंसकों में चिन्ता पसरी है। भयंकर हादसे में उनकी जान बच गयी; लेकिन चोटें ऐसी हैं कि उनसे बाहर निकलने में पंत को वक्त लगेगा। हालाँकि उनकी सेहत में सुधार हो रहा है। डॉक्टरों ने कहा है कि पंत को पूरी तरह ठीक होने में कम से कम चार-छ: महीने लगेंगे। क्रिकेट मैदान में उनकी वापसी रीहैब और ट्रेनिंग पर निर्भर करेगी, जो अस्पताल से छुट्टी के बाद ही सम्भव है। माना जा रहा है कि पंत सम्भवत: छ: महीने मैदान पर नहीं दिखेंगे।

बढ़ते जा रहे पाखण्डी

अब कोई भी धर्म अपने मूल रूप में नहीं दिखता। हर धर्म के लोग व्यावहारिकता के स्वरूप को अंगीकार करते जा रहे हैं। अर्थात् जिस समय जिस धर्म में जो प्रचलन में होता है, उस धर्म के लोग उसी को धर्म समझकर उसे स्वीकार करते हैं। यही कारण है कि एक ही धर्म के मानने वालों के धार्मिक क्रिया-कलापों में भिन्नता दिखती है। अर्थात् एक ही धर्म के लोग कई अलग-अलग पगडंडियों पर चलते नज़र आते हैं। सबकी अपनी-अपनी मान्यताएँ और धारणाएँ हैं। यह मान्यताओं और धारणाओं पर क्रिया-कलापों के नित नये कलेवर चढ़ते जा रहे हैं। इन्हीं क्रिया-कलापों में धीरे-धीरे नित नये पाखण्ड और नये आडम्बर प्रवेश करते जा रहे हैं।

इस दौर में इन्हीं पाखण्डों और आडम्बरों के अनुरूप चलने वालों की बहुतायत है। लोग इन्हीं पाखण्ड और आडम्बरयुक्त रीतियों, विधियों को धर्म समझने लगे हैं। विडम्बना यह है कि पाखण्ड और आडम्बर को धर्म समझने वाले ऐसे लोगों की संख्या हर धर्म में बढ़ती ही जा रही है। पाखण्डियों की इस भीड़ में हर कोई बढ़चढक़र आडम्बर करने को तत्पर है, ताकि इस भीड़ के बा$की लोग सबसे बड़ा धार्मिक समझने की भूल कर सकें।

मेरा मानना है कि अगर धर्म आडम्बर और पाखण्ड में पूरी तरह भर गये हों, तो ऐसे धर्मों को अपनाने से बेहतर है कि आदमी नास्तिक बने। जिन धर्मों के लोग, विशेषकर धर्माचार्य ही भटते हुए हों, उन धर्मों में जाने से क्या फ़ायदा? ऐसे किसी धर्म में अगर आप सही रूप से धार्मिक बने भी रहे, और पाखण्डी लोग आपको अपने आडम्बर-जाल में फँसाकर भटकाकर ढोंगी न भी बना पाये, तो भी आपकी आने वाली पीढिय़ाँ उस धर्म के पाखण्डों, आडम्बरों में ज़रूर फँस जाएँगी। जिस तरह ग़लत रास्ता अनजान राही को भटका देता है। यह तब और ज़्यादा होता है, जब ग़लत रास्ते को सही कहने और उस पर चलने वाले संख्या में ज़्यादा हों। वैसे भी ग़लत परम्पराओं की नींव पर खड़ा धर्म अपने अनुयायियों को किसी भी छोर पर भटकाएगा-ही-भटकाएगा। यह तब और तय हो जाता है, जब धर्माचार्य भटके हुए हों। हर धर्म के लोगों को अपने-अपने धर्मों के ऐसे भटके हुए तथाकथित धर्माचार्यों का विरोध करके उन्हें धर्मों से ही निष्कासित कर देना चाहिए। तभी उनका धर्म भी बच सकेगा और धर्म को मानने वाले लोग भी सच्चे धर्मानुयायी होकर सुख से रह सकेंगे और उनका ईश्वर को पाने का ध्येय साकार हो सकेगा।

आजकल तो कई तथाकथित धर्माचार्य कई अनैतिक, असामाजिक गतिविधियों में लिप्त पाये जाने के उपरान्त भी एक बड़ी भीड़ के पूज्यनीय बने रहते हैं। बलात्कार और गुण्डागर्दी करके भी मूर्ख लोग उन्हें पूज्यनीय बनाये रहते हैं। ऐसे मूर्खों की एक बड़ी भीड़ आजकल हर धर्म में है। यह भीड़ उनके तथाकथित धर्मगुरु पर किसी भी सामाजिक टिप्पणी और क़ानूनी कार्रवाई का विरोध करने लगती है। हिंसा और तोडफ़ोड़ पर आमादा हो जाती है।

सही मायने में यह भीड़ सदियों से धर्म के नाम पर भटकी हुई है। इस तरह के लोगों को जिन तथाकथित धर्मगुरुओं के द्वारा जितना ज़्यादा भटकाया जा रहा है, ये उनके उतने ही ज़्यादा मुरीद होते जाते हैं। ये भीड़ सच्चाई को देखना ही नहीं चाहती। इन्हें धर्म का चोला ओढ़े बैठे इन पापी और पाखण्डी लोगों में भी अपने-अपने भगवान दिखायी देते हैं। इसी के चलते इन तथाकथित पाखण्डी धर्माचार्यों के भटके हुए अनुयायी इनके एक इशारे पर धर्म के विरुद्ध कोई भी अनुचित और अनैतिक काम करने से भी नहीं चूकते।

अगर हर धर्म के लोग वास्तविक धर्म को समझ लें, तो उन्हें कोई नहीं भटका सकता। लेकिन ऐसा नहीं है। यही हाल आजकल राजनीति का है। राजनीति में मठाधीश बने आपराधिक प्रवृत्ति के लोग जनता को धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र को लेकर पड़े बिखण्डन का सहारा लेकर उलझाये रखते हैं। राजनीति के क्षेत्र में भी लोगों को जागरूक होना चाहिए, ताकि इस महत्त्वपूर्ण क्षेत्र से गन्दगी छँट सके। यह तभी सम्भव है, जब धर्म पर लोग होंगे। धर्म पर लोग तब होंगे, जब उन्हें सही धर्मगुरु मिलेंगे। धर्मों को पढ़ाया जाएगा। लेकिन आजकल के तथाकथित धर्माचार्य स्वयं भी धर्म की सही जानकारी नहीं रखते और अगर कोई सही जानकारी है, तो उसे आगे प्रसारित नहीं करना चाहे। ज़्यादातर धर्माचार्य मठाधीश बने रहना चाहते हैं। इस मठाधीशी को पाने के लिए राजनीति करते हैं। राजनेताओं के तलवे चाटते  हैं। उनसे मिलकर नंबर-2 के धन्धे करते-कराते हैं। अपने प्रतिद्वंद्वी धर्माचार्यों और सच्चे धर्माचार्यों से लड़ते हैं। लोगों को समझना चाहिए कि जिन धर्माचार्यों को धर्म का सही रास्ता दिखाने के लिए चुना गया हो, अगर वही धर्म भटकाने लगें, तो उन्हें धर्म से निकाल देना ही बेहतर है। ऐसे लोगों को हर धर्म के सभी अनुयायियों द्वारा एकजुट होकर तिरस्कृत और त्यक्त कर देना चाहिए। अगर कोई धर्माचार्य अनैतिक काम करे, तो उसे सामान्य व्यक्ति की तरह ही दण्डित भी करना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र का 1945 का तंत्र वर्तमान चिंताओं से निपटने में अक्षम: जयशंकर

भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र का 1945 में तैयार किया गया तंत्र अपनी सदस्यता की व्यापक चिंताओं को सामने रखने में अक्षम हो रहा है। भारत के विदेश मंत्री इस जयशंकर ने कहा कि कुछ शक्तियां अपने लाभ पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं और जब जी20 की बात करें तब अपनी सदस्यता के स्वरूप को देखते हुए इसके अपने विषय है और इसलिए हम बदलाव की मांग कर रहे हैं।

विदेश मंत्री ने यह बात वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ डिजिटल शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन के एक सत्र को संबोधित करते हुए कही। अपने संबोधन में उन्होंने अवहनीय कर्ज, कारोबारी बाधा, अनुबंधित वित्तीय प्रवाह और जलवायु दबाव जैसी चुनौतियों का भी उल्लेख किया जिनका विकासशील देशों को सामना करना पड़ रहा है।

जयशंकर ने इस अवसर पर एक नये वैश्वीकरण प्रारूप की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा – ‘एक अधिक लोकतांत्रिक और समतामूलक विश्व का निर्माण वृहद विविधीकरण और क्षमताओं के स्थानीयकरण के आधार पर ही हो सकता है।’

यूक्रेन संघर्ष के प्रभावों का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा – ‘इसके कारण आर्थिक स्थिति और जटिल हो गई है क्योंकि ईंधन, खाद्य और उर्वरकों की कीमतें और उपलब्धता हमारे लिये महत्वपूर्ण चिंताओं के रूप में उभरी हैं। इससे कारोबार और वाणिज्यिक सेवाएं बाधित हुई हैं, हालांकि वैश्विक परिषदों में इन विषयों को जितनी तवज्जों मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिली।’

जयशंकर ने कहा कि जी20 की भारत की अध्यक्षता में जी20 समूह के नेताओं के बीच हरित विकास समझौते पर आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। यह सम्पूर्ण विश्व में अगले दशक में हरित विकास को मजबूती प्रदान करने का खाका होगा। विदेश मंत्री ने कहा कि यह टिकाऊ जीवन शैली में निवेश, जलवायु कार्रवाई के लिये हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा और टिकाऊ विकास लक्ष्य को गति प्रदान करके होगा।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब अलग अलग देश विकास के विभिन्न स्तरों पर है और डाटा प्रेरित नवाचार की तैयारी में जुटे हैं, तब हम डाटा के लिये विकास पर चर्चा को आगे बढ़ा रहे हैं। विदेश मंत्री ने डाटा से जुड़ी क्षमताओं, नवाचार और प्रौद्योगिकी में अंतरराष्ट्रीय सहयोग खास तौर पर वैश्विक दक्षिण के देशों में सहयोग पर जोर दिया ताकि सभी के लिये अवसर सृजित किये जा सकें।

ट्रम्प की रियल एस्टेट कंपनी टैक्स फ्रॉड की दोषी पाई गई, 130 करोड़ जुर्माना

राष्ट्रपति का पद छोड़ने के बाद भी लगातार चर्चा में रहे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पारिवारिक रिएल एस्टेट कंपनी ‘द ट्रम्प ऑर्गेनाइजेशन’ और इससे जुड़ी दो अन्य कंपनियों को टैक्स फ्रॉड समेत कई अपराधों का दोषी पाया गया है। न्यूयॉर्क कोर्ट की ज्यूरी ने ट्रंप के फैमिली बिजनेस पर टैक्स फ्रॉड करने के लिए अधिकतम 1.6 मिलियन डॉलर यानी करीब 130 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ट्रंप के खिलाफ मैनहैटन की कोर्ट की ज्यूरी का यह फैसला शुक्रवार को आया। अमेरिका की राजनीति के मामले में इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है, भले ट्रम्प की अमीर कंपनियों के टर्न ओवर के लिहाज से उन्हें यह रकम चुकाना मामूली बात हो।

याद रहे ट्रम्प ने पिछले चुनाव हरने के बाद ही व्हाइट हाउस में दोबारा लौटने की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर दिया था। लेकिन यदि वे इस तरह के मामलों के चलते कानूनी दिक्क्तों में घिरते हैं तो उनके लिए परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।

बता दें ट्रंप कॉर्पोरेशन और ट्रंप पेरोल कॉर्प, ‘द ट्रंप ऑर्गनाइजेशन’ की संस्थाएं हैं और दोनों को पिछले महीने झूठे बिजनेस रिकॉर्ड के जरिये टैक्स चोरी करने की मंशा से प्लॉटिंग करने का दोषी पाया गया था। एक महीने चली सुनवाई में ज्यूरी ने ट्रंप की कंपनियों को 17 मामलों में दोषी घोषित दिया है।

वैसे डोनाल्ड ट्रंप पर कोई आरोप नहीं लगाया गया, लेकिन ज्यूरी के फैसले ने उनकी इमेज और रुतबे को नुकसान जरूर पहुंचाया है। ट्रंप ने साल 2024 में राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी की तरह से नॉमिनेशन की मांग की हुई है।

बजट-2023 में समायोजन हेतुइं डियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन के सुझाव

वर्ष 2022 के बजट में केंद्र सरकार ने आयकर अधिनियम में एक नई धारा194आर की शुरुआत

की थी,जिसके तहत “व्यवसाय या पेशे के सम्बन्ध में अनुलाभ पर कर की कटौती” का प्रावधान किया

गया, जो 01 जुलाई,2022 से लागू हो गया। इस नई धारा के प्रावधानों के अनुसार,व्यक्ति या

कॉपोरेट इकाई, जो किसी निवासी को कोई लाभ या अनुलाभ नकद या अन्य किसी रूप में प्रदान

करता है, तो उसे ऐसा करने के पूर्व लाभ या अनुलाभ के कुल मूल्य पर 10प्रतिशत की दर से स्रोत

पर कर कटौती करना अनिवार्य है।

इस नए प्रावधान से प्रभावितव्यावसायिकगतिविधियों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय यात्राएं या कार्यक्रम

भी शामिल हैं, जो व्यावसायिक अथवा कार्पोरेट संस्थाओं द्वारा अपने कर्मचारियों या सहयोगियों को

प्रोत्साहित या सम्मानित करने के लिएआयोजित किए जाते हैं। यद्यपिहम कर कटौती के इस नए

प्रावधान की शुरुआत के उदेश्य या तर्क का समर्थन करते हैं, लेकिन ऐसे सभी कार्यक्रम जहां प्राप्तकर्ता

या लाभार्थियों को निःशुल्क भागीदारी प्रदान की जाती है या जहां उनकी यात्राएं प्रायोजित होती हैं, इन

सभी पर स्रोत पर कर कटौती के प्रावधान में संशोधन का अनुरोध करना चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी से भारतीय आतिथ्य क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है, ऐसे में घरेलू

कार्यक्रमों और यात्राओं के आयोजनों के प्रोत्साहन, घरेलू हितधारकों के राजस्व में वृद्धि करने तथा

आतिथ्य क्षेत्र को पुन: पटरी पर लाने के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतुहमारी राय में धारा194आर के तहत

ऐसी गतिविधियों पर कर कटौती में छूट प्रदान करना एक सार्थक कदम साबित हो सकता है।

मौजूदा व्यवस्था में जहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों या यात्राओं को धारा194आर के तहत

एक समान कर कटौती दर के दायरे में रखा गया है, ऐसे में कॉपोरेट संस्थानों को विदेश के मुकाबले

देश के भीतर ऐसी गतिविधियों के आयोजन में ऐसा कोई विशेष लाभ या प्रोत्साहन हासिल नहीं होता

है, जो इन्हें मिलनाचाहिए। अगर ऐसे आयोजनों और यात्राओं के देश में आयोजन पर कर कटौती में

छूट मुहैया कराई जाये, तो कार्पोरेट संस्थान इन्हें आयोजित करने के लिएप्रोत्साहित होंगे तथा इससे

न केवल आतिथ्य क्षेत्र के राजस्व में वृद्धि होगी,बल्कि इसका सरकारी खजाने में करों के रूप में

योगदान भी बढ़ेगा।

हमें पूरा विश्वास है किउपरोक्त सुझाव पर सम्बन्धित मंत्रालय के अधिकारी अवश्य विचार करेंगे और

यदि आवश्यक हो, तो हम इस पर विस्तार से चर्चा करने की पेशकश भी करते हैं।

इंदौर समय से आगे चलने वाला एक दौर है, प्रवासी सम्मेलन में बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि इस वर्ष भारत दुनिया के जी-20 समूह की अध्यक्षता कर रहा है, लिहाजा हम इस जिम्मेदारी को एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने प्रवासी दिवस पर कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में जब भारत के लोग एक कॉमन फैक्टर की तरह दिखते हैं तो वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साक्षात दर्शन होते हैं।

पीएम ने यह बातें सोमवार को इंदौर में प्रवासी दिवस सम्मेलन के उदघाटन पर कहीं। उन्होंने कहा – ‘इस साल देश जी-20 समूह की अध्यक्षता कर रहा है। भारत इस जिम्मेदारी को एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा हैं। हमारे लिए ये दुनिया को भारत के बारे में बताने का अवसर है। हमारे इन प्रवासी भारतीयों के योगदान का विश्व आकलन करता है, तो उसे सशक्त और समर्थ भारत की आवाज़ भी सुनाई देती है।’

मोदी ने इस अवसर पर प्रवासी दिवस सम्मेलन को लेकर कहा –  ‘दुनिया के किसी एक देश में जब भारत के अलग-अलग प्रान्तों और क्षेत्रों के लोग मिलते हैं तो एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सुखद एहसास होता है।’ पीएम ने कहा कि 130 करोड़ भारतवासियों की तरफ से आपका स्वागत करता हूं।

इस सम्मेलन में 70 देशों के प्रवासी भारतीय शिरकत कर रहे हैं। करीब 4 साल बाद प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन एक फिर से अपने मूल स्वरूप में हो रहा है। ये सम्मेलन मध्य प्रदेश के उस धरती पर हो रहा है जिसे देश का हृदय क्षेत्र कहा जाता है।

उन्होंने कहा – ‘वैसे हम सभी जिस शहर में हैं वो भी अपने आप में अद्भुत है। लोग कहते हैं कि इंदौर एक शहर है लेकिन मैं कहता हूं इंदौर एक दौर है। ये वो दौर है जो समय से आगे चलता है फिर भी विरासत को समेटे रहता है। अपन का इंदौर देश ही नहीं पूरी दुनिया में लाजवाब है। साबूदाने की खिचड़ी, कचौड़ी, समोसे शिकंजी जिसने भी देखा उसका मुंह का पानी नहीं रुका, जिसने इसे चखा उसने कहीं और मुड़कर नहीं देखा।’

पीएम ने कहा कि यही वजह इंदौर को स्वच्छता के साथ साथ स्वाद की राजधानी भी कहते हैं। मुझे विश्वास है कि यहां के अनुभव नहीं भूलेंगे और यहां के अनुभवों को वापस जाकर बताना भी नहीं भूलेंगे।

मोदी ने कहा – ‘यह प्रवासी भारतीय दिवस कई मायनों में खास है। अभी कुछ महीने पहले ही हमने भारत की आजादी के 75 साल मनाए हैं। यहां स्वतंत्रता संग्राम की प्रदर्शनी लगाई गई है। देश अमृत काल में प्रवेश कर चुका है. भारत की वैश्विक दृष्टि को मजबूती मिलेगी।’

उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी एक देश में जब भारत के अलग-अलग प्रान्तों और क्षेत्रों के लोग मिलते हैं तो एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सुखद एहसास होता है। जब दुनिया के अलग अलग देशों में सबसे शांति प्रिय और अनुशासित नागरिकों की चर्चा होती है तो भारत को गौरव और बढ़ जाता है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी होने का गौरव होता है।

गो फर्स्ट के बाद इंडिगो की फ्लाइट में भी महिला क्रू से छेड़खानी, दो यात्री गिरफ्तार

गो फर्स्ट एयरलाइंस में महिला क्रू मेंबर से छेड़खानी की घटना के बीच अब इंडिगो एरलालाइंस में महिला क्रू मेंबर से शराब पीकर छेड़खानी करने एयर पायलट से मारपीट करने का मामला सामने आया है। पटना जा रही इस फ्लाइट के दो आरोपी यात्रियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि तीसरा फरार है।

पहले शनिवार को गोवा जा रही जो फर्स्ट की फ्लैट में एक विदेशी के महिला क्रू मेंबर पर अश्लील टिप्पणी करने का मामला सामने आया था। इस विदेशी आरोपी यात्री को गोवा में प्लेन उतरते ही सीआईएसएफ के हवाले कर दिया गया।

अब अब इंडिगो एरलालाइंस की पटना जा रही फ्लाइट में भी महिला क्रू मेंबर से शराब पीकर छेड़खानी करने का मामला सामें आया है। साथ ही इन शराब पिए हुए यात्रियों ने पायलट से मारपीट भी की। फ्लाइट के दो आरोपी यात्रियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि तीसरा फरार है। दोनों आरोपियों को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा।

दिल्ली से पटना जा रही इंडिगो के इस प्लेन में तीन युवक नशे की हालत में सवार हुए थे। आरोप के मुताबिक करीब 80 मिनट की उड़ान के दौरान तीनों ने एयरहोस्टेस से बदतमीजी और छेड़खानी की। जब बीच बचाव के लिए विमान का कैप्टन वहां पहुंचा, तो तीनों ने उनके साथ भी मारपीट कर दी। घटना की जानकारी उड़ान के दौरान ही पटना एयरपोर्ट अधिकारियों और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल सीआईएसएफ को दे दी गई।

प्लेन जब पटना पहुंचा तो आरोपियों नितिन और रोहित को सीआईएसएफ ने तुरंत हिरासत में लेकर एयरपोर्ट पुलिस के हवाले कर दिया। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। तीसरा यात्री पिंटू फरार हो गया है। इंडिगो ने तीनों आरोपी यात्रियों के खिलाफ एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है। ब्रेथ एनेलाइजर टेस्ट में दोनों गिरफ्तार किए गए यात्रियों के शराब पिए होने की पुष्टि हुई है।

राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जारी, महिला और कई पूर्व सेनाधिकारी जुड़े

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में रविवार को जहाँ कई बड़े पूर्व सेनाधिकारी शामिल हुए, वहीं यह यात्रा सोमवार को खानपुर कोलियाँ से शुरू हुई। इधर आज भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी के साथ आज सभी महिलाएं चल रही हैं।

कांग्रेस सांसद जोथिमनी ने बताया कि सोमवार को राहुल गांधी के साथ सभी महिलाएं चल रही हैं। राहुल गांधी ने रविवार को कुरुक्षेत्र में मीडिया कांफ्रेंस में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्रीय सरकार पर ईंधन और उर्वरक की बढ़ती कीमतों के जरिए किसानों को परेशान करने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने कहा – ‘किसानों को बचाने की जरूरत है। देश की रीढ़ और लोगों का पेट भरने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।’

इस बीच रविवार को राहुल गांधी के साथ बड़ी संख्या में बड़े पूर्व सेनाधिकारी शामिल हुए। इनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर, लेफ्टिनेंट जनरल आरके हुड्डा, लेफ्टिनेंट जनरल वीके नरूला, मेजर जनरल एसएस चौधरी, मेजर जनरल धर्मेंद्र सिंह, कर्नल जितेंद्र गिल, कर्नल पुष्पेंद्र सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल डीडीएस संधू, मेजर जनरल दयाल भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए।

शाम को राहुल ने मीडिया कांफ्रेंस में कहा – ‘किसान को हर तरफ से घेरा जा रहा है।  उस पर सीधे तौर पर ईंधन की कीमतों की मार पड़ रही है, उसे मौसम के कारण खराब हुई फसल के लिए बीमा दावे नहीं मिल रहे हैं। उस पर सीधे तौर पर खाद की बढ़ी हुई कीमतों की मार पड़ रही है।’

कांग्रेस नेता ने कहा – ‘तीन कृषि कानून (अब निरस्त), कृषि कानून नहीं थे। वे उन (किसानों को) पर हमला करने का हथियार थे, जैसे कि नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) छोटे व्यापारियों पर हमले के लिए हथियार थे। उन्हें बचाने की जरूरत है।’

उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि किसानों पर हमले हो रहे हैं। मैं एक बात की गारंटी दे सकता हूं कि अगर कांग्रेस पार्टी कहीं भी सत्ता में आती है, तो इस हमले को रोका जाएगा। किसानों को बचाया जाएगा। अगर हम अरबपतियों के लाखों करोड़ रुपये माफ कर सकते हैं, तो हम किसानों की भी मदद कर सकते हैं।’

राहुल ने बेरोजगारी को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा – ‘यह देश अपने युवाओं से झूठ बोल रहा है। मैंने 3,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की है और युवाओं से पूछा है कि वे क्या करना चाहते हैं, वे कहते हैं कि वे इंजीनियर, डॉक्टर, वकील बनना चाहते हैं, सेना और प्रशासन में शामिल होना चाहते हैं।’

गहरी धुंध का ट्रेन और हवाई सेवाओं पर असर, दिल्ली में स्कूल 15 तक बंद रहेंगे

कड़ाके की ठंड से जहाँ लोग घरों में दुबके हुए हैं, वहीं घनी धुंध के कारण राजधानी दिल्ली में सरकार ने प्राइवेट स्कूल 15 जनवरी तक बंद रखने का आदेश जारी किया है। उधर कई ट्रेन निर्धारित समय से डेरी से चल रही हैं और हवाई उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं।

उत्तर भारत के कई हिस्सों में घनी धुंध के चलते दिल्ली की ओर आने वाली 30 ट्रेनें  पांच घंटे तक की देरी से चल रही हैं। राजधानी में सर्दी के चलते दिल्ली सरकार की प्राइवेट स्कूलों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए 15 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया है।

उधर रेलवे अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि दरभंगा-नई दिल्ली क्लोन स्पेशल, पुरी-नई दिल्ली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, गया-नई दिल्ली महाबोधि एक्सप्रेस,मालदा टाउन-दिल्ली एक्सप्रेस, बरौनी-नई दिल्ली क्लोन स्पेशल, दरभंगा-नई दिल्ली बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, गोरखपुर-बठिंडा गोरखधाम सुपरफास्ट एक्सप्रेस, हावड़ा-नई दिल्ली पूर्वा एक्सप्रेस, कानपुर सेंट्रल-नई दिल्ली श्रम शक्ति एक्सप्रेस, सहरसा-नई दिल्ली वैशाली एक्सप्रेस, रीवा-आनंद विहार टर्मिनल सुपरफास्ट एक्सप्रेस दो से पांच घंटे की देरी से चल रही हैं।

देरी से चलनी वाले ट्रेन में उधर प्रयागराज-नई दिल्ली एक्सप्रेस, भागलपुर-आनंद विहार टर्मिनल विक्रमशिला एक्सप्रेस, राजेंद्र नगर टर्मिनल-नई दिल्ली, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-अमृतसर एक्सप्रेस, कामाख्या-दिल्ली ब्रह्मपुत्र मेल, काठगोदाम जैसलमेर रानीखेत एक्सप्रेस, प्रतापगढ़-दिल्ली पद्मावत एक्सप्रेस, राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी सुपरफास्ट एक्सप्रेस, राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी सुपरफास्ट एक्सप्रेस, सुल्तानपुर-आनंद विहार टर्मिनल सद्भावना एक्सप्रेस, जयनगर-अमृतसर क्लोन स्पेशल, हैदराबाद डेक्कन नामपल्ली – हजरत निजामुद्दीन दक्षिण सुपरफास्ट एक्सप्रेस, जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन गोंडवाना एक्सप्रेस, डॉ अंबेडकर नगर- श्री माता वैष्णो देवी कटरा मालवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, एमजीआर चेन्नई सेंट्रल-नई दिल्ली ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस, एमजीआर चेन्नई सेंट्रल-नई दिल्ली तमिलनाडु एक्सप्रेस, फिरोजपुर-छत्रपति शिवजी महाराज टर्मिनस पंजाब मेल, अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन शामिल हैं।

इस बीच कड़ाके की ठंड के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। दफ्तर जाने वाले लोग पूरा इंतजाम करके ही घर से बाहर निकल रहे हैं। दिल्ली में तापमान में काफी गिरावट आई है। गहरी धुंध से हवाई उड़ानें भी काफी प्रभावित हुई है। दिल्ली में धुंध के कारण आज दृश्यता बहुत कम थी।