दृष्टि गुप्ता, नई दिल्ली।
राघव चड्ढा के साथ आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों ने जैसे ही कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में यह ऐलान किया कि वे भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं, सियासी हलकों में कोहराम मच गया। इस बात की पुष्टि तब हुई जब सातों सांसद भाजपा के दफ्तर पहुंचे और नितिन नबीन ने उनका बीजेपी मुख्यालय में स्वागत किया।
अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी को यह एक तगड़ा झटका उस समय लगा जब राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत राज्य सभा के उसके 10 में से सात सांसदों ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया। इन सातों सांसदों ने कहा कि उन्होंने अपने हस्ताक्षर वाला पत्र राज्य सभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को सौंप दिया है। इन नेताओं ने कहा कि पार्टी के 10 राज्य सभा सांसदों में सात के पास संविधान के तहत पार्टी के विलय के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत है। इन सात में छह पंजाब से हैं जहां अगले साल फरवरी-मार्च में चुनाव होने हैं।
इस पूरी घटना को देखते हुए आप के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने कहा, ‘भाजपा ने एक बार फिर पंजाब के लोगों को धोखा दिया है।’
आप को यह झटका उस समय लगा है जब चुनावों को देखते हुए यह साल बहुत मायने रखता है। आम आदमी पार्टी पंजाब के चुनाव के अलावा दिल्ली में सत्ता में बैठकर दिल्ली नगर निगम की सियासी जंग में भी आगे रहना चाहती है। दिल्ली नगर निगम के चुनाव 2027 के अंत में होने हैं। साथ ही आम आदमी पार्टी गुजरात में भी मजबूत दावेदारी पेश करना चाहती है जहां 2027 में नवंबर-दिसंबर में विधान सभा चुनाव होने हैं। वहीं दिल्ली और पंजाब दोनों जगह आप की सरकार है। ऐसे में साल 2027 में होने वाले पंजाब के चुनावों के लिए पार्टी ख़ुद को तैयार करने में लगी है। लेकिन आप अपने इन सात सांसदों को राज्यसभा में खोने के बाद ख़ुद को ठगा सा महसूस कर रही है। आप ने राज्य सभा के सभापति और उपराष्ट्रपति को याचिका भेज कर इन सातों सांसदों की सदस्यता ख़त्म करने की माँग भी कर डाली है। यह बात पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने अपने बयान में कही है।
अब अगर हम इस पूरे खेल को समझें तो एक बार जब आप के ये सात सांसद राज्य सभा में भाजपा में शामिल हो जाएंगे तो 245 सदस्यीय सदन में उसकी संख्या बढ़कर 113 हो जाएगी। राजग की संख्या बढ़कर 141 हो गई है जो बहुमत के 123 के आंकड़े से काफी अधिक है। ऐसे में भाजपा काफ़ी मज़बूत स्थिति में हो जाएगी, पंजाब में भी और राज्य सभा में भी। क्योंकि नितिन नबीन पहले ही ऐलान कर चुके थे कि पंजाब में भाजपा 2027 में आने वाले विधान सभा चुनावों में किसी राजनीतिक सहयोगी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और अपने दम पर ही चुनाव मैदान में उतरेगी। जिसके लिए बीजेपी पंजाब में संगठन को मजबूत करते हुए अपने जनाधार का विस्तार कर रही है। साथ ही पार्टी ने महिला वोट बैंक को लेकर भी भरोसा जताया था। अब बीजेपी सीधे मुकाबले की तैयारी में है। साथ ही पार्टी का यह भी प्रयास है कि हरियाणा मॉडल और नेतृत्व की छवि को पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में भुनाया जाए। क्योंकि 2022 के चुनाव में बीजेपी सिर्फ दो ही सीट जीत पायी थी। इस बार ज्यादा की उम्मीद अब साफ़ होती दिख रही है।
भाजपा में शामिल हुए आप के 7 सांसदों में छह पंजाब से हैं जिनमें चड्ढा, पाठक, पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और संजीव अरोड़ा शामिल हैं। स्वाति मालीवाल दिल्ली से हैं। पंजाब में अगले साल फरवरी-मार्च में विधान सभा चुनाव होने हैं।
राज्य सभा से आप के शेष बचे सांसदों में संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और बलबीर सिंह शामिल हैं। संजय सिंह और एन.डी. गुप्ता दिल्ली से सांसद हैं जबकि संत बलबीर सिंह पंजाब से हैं। चड्ढा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘आज भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए, राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसदों का भाजपा में विलय हो गया है। सात सांसदों ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्य सभा सभापति को सौंप दिया गया है। मैंने अन्य सांसदों के साथ व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज सौंपे।’
राज्य सभा सांसद मालीवाल ने आरोप लगाया कि पार्टी अपने राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल के नेतृत्व में अपने संस्थापक सिद्धांतों से भटक गई है और कदाचार में लिप्त व्यक्तियों को संरक्षण दे रही है।
भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा, ‘आम आदमी पार्टी पूरी तरह से बिखर गई है। पतन अब अटकल नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत हो गई है।’
चड्ढा ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सभा के सभापति राधाकृष्णन को पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ सौंप दिया गया है।
आप नेता संजय सिंह ने भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने का आरोप लगाया और कहा कि पंजाब की जनता पार्टी छोड़ने वाले सातों सांसदों को माफ नहीं करेगी।
आने वाले समय में जब राज्यसभा के चुनाव होने हैं, तो ऐसे में जहां बीजेपी के सांसदों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है, उसका फ़ायदा भी सीधा बीजेपी को मिलेगा। साथ ही पंजाब विधान सभा चुनाव को लेकर जो भी रणनीति आप ने बनायी थी, उसकी भी विवेचना इन सांसदों से भाजपा को पता चल जाएगी। यह सिलसिला अभी यहीं रुका नहीं है। भविष्य में आप के कई और नेताओं को जोड़ने की योजना बीजेपी बना रही है। ऐसे में देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी कैसे अपने सांसदों को पार्टी में बचाकर रख पाएगी। हालांकि पार्टी में सभी सांसदों को यह बता दिया गया है कि किसी भी सांसद के पास कोई भी राजनीतिक फ़ोन आए तो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को इसकी जानकारी देनी है। और मनीष सिसोदिया को भी सक्रिय कर दिया गया है।




