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सख़्ती से लागू हो हर आपराधिक क़ानून

– बलात्कारियों को जल्द सज़ा देने के पश्चिम बंगाल सरकार के निर्णय का देश भर में स्वागत होना चाहिए

संविधान के अनुच्छेद-51(1) के मुताबिक, सम्मान महिलाओं (लड़कियों और महिलाओं) का मौलिक अधिकार है। इस अनुच्छेद में महिलाओं को कई प्रकार की स्वतंत्रताएँ मिली हुई हैं; लेकिन इसके बाद भी न तो महिलाओं को पूरी तरह सम्मान मिल पाता है और न ही उन्हें पूरी स्वतंत्रता है। इसके विपरीत महिला संरक्षण को लेकर कई क़ानून होने के बाद भी उनके ख़िलाफ़ अपराध बढ़ रहे हैं। ये अपराध तब रुकेंगे, जब महिलाओं पर अत्याचार करने वाले दोषियों को जल्द-से-जल्द कड़ी-से-कड़ी सज़ा मिलनी शुरू होगी। पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पताल में 09 अगस्त को हुए जघन्य अपराध से वहाँ की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इतना बड़ा झटका लगा कि उन्होंने ऐसे अपराध रोकने के लिए सख़्त क़दम उठा लिये। पश्चिम बंगाल की विधानसभा में ध्वनिमत से सर्वसम्मति के साथ अपराजिता महिला और बाल (पश्चिम बंगाल आपराधिक क़ानून संशोधित) विधेयक-2024 पारित हो गया। इस क़ानून में सज़ा का नया प्रावधान करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने जो साहस दिखाया है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है।

हालाँकि इससे पहले भी हरेक यौन अपराधी के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद हुई है और लोगों ने ऐसे अपराधियों के लिए मौत की सज़ा की माँग भी की है। यह आवाज़ संसद से लेकर ज़्यादातर राज्यों की विधानसभाओं में भी गूँजी है और यौन अपराधियों को सज़ा देने के लिए क़ानूनों में बदलाव भी किये गये हैं। लेकिन ज़्यादातर राज्यों में इस जघन्य अपराध को करने वालों के ख़िलाफ़ नये अध्यादेश जारी करके या विधेयक पारित करके सरकारों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है। दिल्ली में सन् 2012 में निर्भया के साथ हुए इस जघन्य अपराध के बाद पूरे देश में अपराधियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठी, तो केंद्र सरकार ने 2013 में बलात्कार के मामले में अपराधियों को कड़ी सज़ा देने के लिए आपराधिक क़ानून में बदलाव किया। इसके बाद राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश समेत कई राज्यों की सरकारों ने क़ानून में बदलाव किया। लेकिन इन बदलावों से बलात्कार की घटनाओं में कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा।

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में अपराधियों के थरथर काँपने के दावे किये जाते हैं; लेकिन वहाँ अपराध रुक ही नहीं रहे हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मणिपुर समेत कई राज्यों में बलात्कार की रिकॉर्ड तोड़ घटनाओं के बाद भी सरकारें अपराधियों का कुछ ख़ास नहीं बिगाड़ पा रही हैं। लेकिन जैसा कि पश्चिम बंगाल में अपराजिता क़ानून के तहत राज्य में बलात्कार के मामले की जाँच 21 दिन में पूरी होगी, ट्रायल नहीं होगा और बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के दोषियों को मौत की सज़ा दी जाएगी। अगर पीड़ित महिला या लड़की कोमा में चली गयी है या उसकी मौत हो गयी है, तो भी दोषियों को फाँसी की सज़ा दी जाएगी, जो स्वागत योग्य है। हालाँकि कुछ लोग इस विधेयक को लेकर ममता सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब देश में पहले से ही बलात्कारियों को मौत की सज़ा देने का क़ानून है, तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को यह सब करने की क्या ज़रूरत थी?

केंद्रीय क़ानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि यह क़ानून ममता सरकार द्वारा ख़ुद को बचाने की कोशिश है। लेकिन केंद्रीय मंत्री यह नहीं बोले कि मुख्यमंत्री ममता ने इस क़ानून में संशोधन करके विधेयक पास करने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की माँग की थी, जिसका जवाब प्रधानमंत्री ने नहीं दिया। ऊपर से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस पत्र के जवाब में कहा कि देश भर में फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं; लेकिन आपने फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित नहीं किये हैं।

अपराजिता विधेयक पास करने को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार का स्वागत होना चाहिए; लेकिन इसे अमल में भी लाया जाना चाहिए। हालाँकि यहाँ ग़ौर करने की बात यह है कि किसी भी राज्य सरकार को दण्ड संहिता के क़ानून में संशोधन लागू करने के लिए राष्ट्रपति की सहमति की ज़रूरत होती है। पश्चिम बंगाल में अपराजिता क़ानून के मामले में कई क़ानूनविद यह भी कह रहे हैं कि पश्चिम बंगाल सरकार को इस क़ानून में संशोधन नहीं करना था, बल्कि मौज़ूदा क़ानून को ही सख़्ती से लागू करना चाहिए था। ऐसे लोगों का बेतुका तर्क है कि सिर्फ़ बलात्कार के सामान्य अपराध में फाँसी की सज़ा देना बहुत ग़लत होगा। इसके लिए पहले से ही सज़ा देने का क़ानून मौज़ूद है। लेकिन क़ानूनविदों से सवाल यह है कि अगर बलात्कारियों को मौत की सज़ा नहीं दी जाएगी, तो क्या देश में बलात्कार की घटनाएँ कभी रुकेंगी? इसलिए आज पूरे देश में ऐसे सख़्त क़ानून की ज़रूरत है; क्योंकि हर दिन महिलाओं के ख़िलाफ़ अनैतिक यौन हिंसा हो रही है।

केंद्रीय जाँच एजेंसी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आँकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल चार लाख से ज़्यादा मामले महिलाओं पर अत्याचार के दर्ज होते हैं। इन अपराधों में बलात्कार, मारपीट, अपहरण, तस्करी, हत्या, एसिड अटैक और छेड़छाड़ के मामले हैं, जो बच्चियों से लेकर महिलाओं तक के ख़िलाफ़ होते हैं। एनसीआरबी के मुताबिक, भारत में हर घंटे कम-से-कम तीन लड़कियाँ और महिलाएँ बलात्कार का शिकार होती हैं। यानी हर 20 मिनट में एक बलात्कार देश में होता है। बलात्कार करने वालों में 96 प्रतिशत से ज़्यादा अपराधी पीड़ितों के परिचित होते हैं। लेकिन सज़ा के मामले में भारतीय क़ानून व्यवस्था काफ़ी कमज़ोर है, जिसके चलते 100 बलात्कारियों में से सिर्फ़ 27 को ही सज़ा हो पाती है। अगर देश में होने वाले बलात्कार के ही आँकड़े हैरान-परेशान करने वाले हैं।

साल 2009 में देश में 21,397 बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के मामले दर्ज हुए। इसके बाद साल 2010 में 22,172 मामले, साल 2011 में 24,206 मामले, 2012 में 24,923 मामले, 2013 में 33,707 मामले, साल 2014 में 36,735 मामले बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के मामले दर्ज हुए। इसके बाद साल 2015 में यह आँकड़ा कुछ कम हुआ और 34,651 मामले बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के मामले दर्ज हुए। इसके बाद फिर बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के मामलों में बढ़ोतरी हुई और साल 2016 में 38,947 मामले दर्ज हुए। फिर साल 2017 में 32,559 मामले, साल 2018 में 33,356 मामले, साल 2019 में 32,032 मामले, साल 2020 में 28,046 मामले, साल 2021 में 31,677 मामले, साल 2022 में 31,516 मामले दर्ज हुए। इसके बाद के आँकड़े सामने नहीं आये हैं। हालाँकि राज्यों में होने वाले बलात्कार के आँकड़ों से पता चलता है कि देश में बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के मामले बढ़े ही हैं।

भारतीय दण्ड संहिता, भारतीय न्याय संहिता से सम्बन्धित धाराएँ आज बलात्कार के लिए मौत की सज़ा या उम्रक़ैद या कड़ी सज़ा का प्रावधान करती हैं। मौत की सज़ा पाँच अपराधों- बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, पुलिस अधिकारी या लोक सेवक द्वारा बलात्कार, बलात्कार के चलते मौत होने या पीड़िता के हमेशा के लिए कोमा में चले जाने और दोबारा बलात्कार का अपराध करने पर दिये जाने का क़ानून देश में है। लेकिन फाँसी की सज़ा तो दूर की बात, ज़्यादातर बलात्कार के अपराधियों को सज़ा तक नहीं होती है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 20 सितंबर, 2018 को साइबर अपराध पोर्टल लॉन्च किया था, जिससे कोई भी व्यक्ति किसी अश्लील सामग्री की रिपोर्ट कर सके। लेकिन न तो अश्लील सामग्री पर रोक लगी और न बलात्कार और अत्याचार की घटनाएँ कम हुईं। गृह मंत्रालय ने कई राज्यों में साइबर अपराध फोरेंसिक लैब स्थापित किये; लेकिन महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ साइबर अपराध कम नहीं हुए। अपराधियों का पता लगाने के लिए 410 सरकारी अभियोजक और न्यायिक अधिकारियों समेत 3,664 से ज़्यादा कर्मचारियों को सरकार ने अपराधियों पर नियंत्रण के लिए प्रशिक्षण दिया; लेकिन अपराध कम नहीं हुए।

इसके अलावा महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध रोकने के लिए देश में दहेज निषेध अधिनियम-1961, महिलाओं का अभद्र चित्रण (निषेध) अधिनियम-1986, राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम-1990, घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम-2005, बाल विवाह निषेध अधिनियम-2006, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम-2012, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम-2013 बनाये हुए हैं; लेकिन फिर भी महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ अपराध हो रहे हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 31 जनवरी, 1992 को संसद द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम-1990 के तहत राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की स्थापना की थी; लेकिन महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध नहीं रुके। इसके अलावा केंद्र सरकार ने साल 2012 में निर्भया फंड बनाया गया, जिसमें साल 2013 के केंद्रीय बजट में 1,000 करोड़ रुपये का घोषित फंड था। इस फंड में व्यक्तिगत रूप से लोगों ने ख़ूब दान किया। लेकिन इस फंड से बलात्कार पीड़िताओं की मदद या तो होती ही नहीं है या कितनी होती है, इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है।

इसके अलावा संबल नाम का सरकारी फंड है, जिसका बजट घटा दिया गया है। इसकी वजह यह बतायी जाती है कि इस फंड का पैसा ख़र्च नहीं हो पाता। यह अजीब तर्क है कि पैसा ख़र्च नहीं हो पाता। पैसा जब पीड़ित महिलाओं को दिया ही नहीं जाएगा, तो ख़र्च कहाँ से होगा? इन सब पहलुओं पर केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों तक को ध्यान देना चाहिए और क़ानूनों का सख़्ती से पालन करते हुए पीड़ित महिलाओं और लड़कियों को सांत्वना के तौर पर फंड रिलीज करना चाहिए। इसके साथ ही बलात्कारियों और महिलाओं पर अत्याचार करने वालों को कड़ी-से-कड़ी सज़ा तो हर हाल में मिलनी ही चाहिए।

चंडीगढ़ की पीसीए में नहीं होती सुनवाई

रविन्द्र कांबोज

हरियाणा सरकार द्वारा करोड़ों रुपये ख़र्च करके एक सफ़ेद हाथी पाला हुआ है, जिसे पुलिस कंप्लेंट्स अथॉरिटी (पीसीए) के नाम से जाना जाता है। इस अथॉरिटी में एक चेयरमैन और दो मैंबर्स होते, अक्सर ये रिटायर आईएएस और आईपीएस अधिकारी होते हैं। इन सबके साथ 40 से 50 लोगों का स्टाफ, सरकारी गाड़ियाँ, गनमैन इत्यादि सभी सरकार की ओर से होता है। पीडब्लूडी की पूरी बिल्डिंग चण्डीगढ़ में इस अथॉरिटी के पास है। सरकार ने इस अथॉरिटी को काम दिया है कि पुलिस की नाइंसाफ़ी से आम जनता की रक्षा करे और उन्हें न्याय दिलाए। यदि पुलिस महकमे के किसी मुलाज़िम ने ग़लत तफ़तीश की, तो उस पर भी ये अफ़सर महकमे को कार्रवाई के लिए आदेश दे सकते हैं। परन्तु यह कार्रवाई पुलिस अधिकारियों को करनी होती है।

यह अफ़सरों की मर्ज़ी होती है। कार्रवाई करें या आदेश रद्दी में डाल दें। अक्सर पुलिस के नीचे के अधिकारी अपने बड़े अधिकारियों की शह के बिना ग़लत काम नहीं करते। इसीलिए वे अन्य किसी भी कार्रवाई से नहीं डरते, चाहे वो कोई भी अथॉरिटी हो। पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी में शिकायत करने पर लगभग तीन महीने से पहले सुनवाई की तारीख़ नहीं मिलती। और उसके बाद की तारीख़ पुलिस वालों पर निर्भर है कि वे कब की क़ुबूल करें। जिस तारीख़ को वे मानेंगे, वही सबको माननी पड़ेगी। और इस कार्रवाई में महीनों निकल जाते हैं। इधर भागदौड़ में शिकायतकर्ता भी थक जाता है। इन सबके बाद पुलिस कह देती है कि केस का चालान कोर्ट में पेश कर दिया है। अब कुछ नहीं हो सकता। शिकायत को लंबा करने के लिए पुलिस अधीक्षक कई आईओ बदल देते हैं। जब भी अथॉरिटी में पेशी होती है, तो आईओ के पास अगली तारीख़ लेने का बहाना हो जाता है कि मेरे पास तो अभी फाइल आयी है।

ऐसी ही एक शिकायत रविन्द्र कुमार वासी कुरुक्षेत्र ने पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी चण्डीगढ़ में 21/7/2023 को आईओ सब इंस्पेक्टर विजय कुमार के ख़िलाफ़ की थी। एक साल से अधिक समय और 08 तारीख़े मिलने के बाद भी उस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आईओ के ख़िलाफ़ शिकायत की तफ़तीश पर अथॉरिटी ने कुरुक्षेत्र के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र भोंरिया को पत्र लिखा। अधीक्षक सुरेन्द्र ने तफ़तीश के लिए डीएसपी को निर्देश दिये और डीएसपी ने गोल-मोल रिपोर्ट अथॉरिटी को भेज दी। उस रिपोर्ट को अथॉरिटी के जज ने भी ध्यान से नहीं पढ़ा, और विजय कुमार पर कार्रवाई न हो, इसके लिए केस का रुख़ अगली कार्रवाई पर मोड़ दिया। अगर पुलिस की कार्रवाई से ही शिकायतकर्ता सन्तुष्ट होता, तो उसे चण्डीगढ़ जाने कि क्या आवश्यक थी? जबकि विजय कुमार आईओ की शिकायत को लेकर एसपी को शिकायतकर्ता तीन बार मिला। परन्तु वहाँ से कार्रवाई न होने के कारण ही शिकायतकर्ता को पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी चण्डीगढ़ जाना पड़ा।

कम्पलेंट अथॉरिटी उन्हीं से दोबारा जाँच करवाकर क्या शिकायतकर्ता को मूर्ख बना रही है? शिकायतकर्ता लगभग एक साल एक महीने पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के चक्कर लगाता रहा, परन्तु सुबूत होने के बावजूद कोई कार्रवाई किसी पुलिसकर्मी पर नहीं हुई। रिकॉर्ड में दर्ज है कि आईओ विजय कुमार, सब इंस्पेक्टर सुरेश कुमार और इंस्पेक्टर जगदीश कुमार ने आरोपी के साथ मिलकर जालसाज़ी की है, जो उस समय थाना महेश नगर, अंबाला शहर में तैनात थे।

13 अगस्त को शिकायतकर्ता को अथॉरिटी की तरफ़ से बताया गया कि हम आईओ को कोई निर्देश नहीं दे सकते। और इन पर कार्रवाई से आपको कोई लाभ नहीं होगा। यह तो एक छोटा-सा केस था। पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी, चण्डीगढ़ में ऐसी बहुत-सी शिकायतें आती हैं। लेकिन शिकायतकर्ता चक्कर लगा-लगाकर मायूस लौट जाते हैं। ख़ास बात यह है कि जिनके ख़िलाफ़ शिकायत होती है, वे अधिकारियों के साथ एसी में बैठकर चाय-नाश्ता करते हैं और शिकायतकर्ता बाहर गर्मी में खड़े होकर दो-दो घंटे अपनी बारी आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं। हरियाणा सरकार सिर्फ़ अपने चहेतों को सुविधा देने के नाम पर लोगों के टैक्स के करोड़ों रुपये बर्बाद कर रही है, जो इस पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी पर ख़र्च हो रहे हैं, जिसका कोई औचित्य नहीं है। अगर किसी स्वतंत्र एजेंसी से इसके कार्यों की जाँच हो, तो पता चलेगा कि बिना किसी काम के इस अथॉरिटी पर सरकार करोड़ों रुपये उड़ा रही है।

झुग्गी पुनर्वास घोटाला

– दिल्ली में भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से केंद्र सरकार की झुग्गी पुनर्वास योजना के तहत बने फ्लैट बेच रहे दलाल

इंट्रो- भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत के चलते सरकारी योजनाओं का फ़ायदा योग्य ज़रूरतमंदों को नहीं मिल पाता। और अगर मिलता भी है, तो ज़रूरतमंद की महीनों भागदौड़ और रिश्वत की बदौलत। दिल्ली में केंद्र सरकार की झुग्गी पुनर्वास योजना के तहत बने फ्लैट, जो कि नियम के अनुसार बिना किसी अड़चन के झुग्गी में रहने वालों को मिलने चाहिए; अवैध रूप से बिचौलियों (प्रॉपर्टी-दलालों) के ज़रिये भ्रष्ट अधिकारियों की शह पर फ्लैट ख़रीदने की सामर्थ्य रखने वालों को बेचे जा रहे हैं। इसके लिए उन्हें बाक़ायदा झुग्गीवासी दिखाया जा रहा है। ‘तहलका’ एसआईटी की पड़ताल से पता चला है कि कैसे ये बिचौलिये भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर अवैध रूप से ज़रूरतमंदों के लिए झुग्गी पुनर्वास योजना के तहत बने फ्लैट्स फ़र्ज़ी क़ाग़जात के ज़रिये समृद्ध लोगों को दिलवाकर सरकार की आँखों में धूल झोंक रहे हैं। कोई बड़ी बात नहीं, इसमें कुछ राजनीतिक हस्तियों की मिलीभगत भी हो। लेकिन यह जाँच करना सरकार और उसकी जाँच एजेंसियों का काम है। पढ़िए, तहलका एसआईटी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :-

02 नवंबर, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की इन-सीटू स्लम पुनर्वास परियोजना के तहत दिल्ली के कालकाजी एक्सटेंशन में झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए 3,000 से अधिक फ्लैट्स का उद्घाटन किया था। कालकाजी एक्सटेंशन परियोजना, जिसका उद्देश्य कालकाजी के भूमिहीन शिविर, नवजीवन शिविर और जवाहर शिविर के झुग्गीवासियों का पुनर्वास करना है; की परिकल्पना सन् 2011 में की गयी थी, जिसकी आधारशिला सन् 2013 में रखी गयी थी।

पहले चरण में डीडीए ने भूमिहीन कैम्प में रहने वाले लोगों के लिए ख़ाली व्यावसायिक भूखंड पर 3,024 फ्लैट्स का निर्माण किया। हालाँकि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इन फ्लैट्स का उद्घाटन करने के ठीक दो साल बाद भ्रष्टाचारियों ने दलालों से मिलकर झुग्गीवासियों के लिए बनाये गये इन फ्लैट्स को अमीरों को बेचना शुरू कर दिया है। ये 25 वर्ग मीटर में बने 14 मंज़िला ऊँचे फ्लैट्स, जो बिक्री के लिए नहीं हैं; लाभार्थियों को केवल 1.24 लाख रुपये में प्रदान किये जाने थे। बाक़ी लागत डीडीए द्वारा ख़र्च की गयी है। इसके बावजूद बिचौलिये झुग्गी-झोंपड़ी के नक़ली पते का उपयोग करके अमीर ख़रीदारों से रिश्वत लेकर उन्हें प्रति फ्लैट 6.50 लाख रुपये के हिसाब से बेच रहे हैं, जिनमें से अधिकांश के पास पहले से ही दिल्ली में घर हैं। ‘तहलका’ जाँच से पता चला है कि झुग्गीवासियों के लिए बनी इस सोसायटी में फ्लैट दिलाने का वादा करके बिचौलिये पहले ही कई लोगों को ठग चुके हैं।

‘ये फ्लैट्स झुग्गीवासियों के लिए हैं। लेकिन मैं यह दर्शाने वाले दस्तावेज़ तैयार करूँगा कि आप 2005 से पहले से झुग्गी में रह रहे थे। सरकार जाँच नहीं करेगी। इसलिए किसी को पता नहीं चलेगा कि आप झुग्गी-झोंपड़ी से नहीं हैं। एक फ्लैट के लिए हम 6.5 लाख रुपये लेते हैं। सारा भुगतान नक़द करना होता है। यह रिश्वत प्राधिकरण के भीतर ऊपर से नीचे तक बाँटी जाती है। ये फ्लैट बेचे नहीं जा सकते; लेकिन एक बार जब हम दिखा देंगे कि आप झुग्गी बस्ती से हैं, तो आपको फ्लैट मिल जाएगा।’ -‘तहलका’ रिपोर्टर को संजय कुमार पंडित नाम के एक बिचौलिये ने दावा किया।

‘मैं पहले ही एक ग्राहक से तीन लाख रुपये रिश्वत के रूप में ले चुका हूँ। मुझे 5.5 लाख रुपये और चाहिए। और फिर उसे फ्लैट के लिए आवंटन पत्र मिलेगा। अब तक मैंने इस सोसायटी में 10 फ्लैट ऐसे धनी ग्राहकों को बेचे हैं, जो झुग्गियों से नहीं हैं। लेकिन हमारे द्वारा बनाये गये नक़ली दस्तावेज़ के माध्यम से हमने ऐसा दिखाया है कि वे झुग्गी के ही रहने वाले थे।’ – यह दावा मोइनुद्दीन अल्वी नाम के एक अन्य बिचौलिये ने ‘तहलका’ रिपोर्टर के सामने किया।

‘मेरे मुवक़्क़िल ने एक फ्लैट के लिए रिश्वत के रूप में 6.5 लाख रुपये की पूरी राशि का भुगतान किया है। वह एक अमीर व्यक्ति है; लेकिन मैंने फ़र्ज़ी दस्तावेज़ की मदद से यह साबित कर दिया है कि वह झुग्गी बस्ती का रहने वाला है। वह अपने फ्लैट का इंतज़ार कर रहा है। इन फ्लैट्स की सरकारी क़ीमत महज़ 1.47 लाख रुपये है। सरकारी अधिकारियों के पास इस सोसायटी में 25-30 फ्लैट्स हैं, जिन्हें वे पैसे लेकर उन अमीरों को बेच रहे हैं, जो झुग्गी बस्ती से नहीं आते हैं।’ -संजय कुमार पंडित ने आगे बताया।

दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी अली जान बताते हैं कि कैसे वह बिचौलियों के जाल में फँस गये। दिल्ली में अपना घर होने और झुग्गियों से कोई सम्बन्ध नहीं होने के बावजूद उन्होंने तीन लाख रुपये अग्रिम भुगतान करके 13 लाख रुपये की तय राशि में इस सोसायटी में दो फ्लैट बुक किये थे। उनसे वादा किया गया था कि उन्हें तीन महीने के भीतर दोनों फ्लैट मिल जाएँगे। हालाँकि जब समय-सीमा के बाद भी वादा किये गये फ्लैट नहीं मिले, तो अली को एहसास हुआ कि बिचौलियों ने उसे धोखा दिया है। झुग्गीवासियों के लिए फ्लैट्स की पेशकश करके लोगों को धोखा देने वाले दलालों की अधिकारियों से साँठगाँठ वाले इस भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए उन्होंने एक व्हिसल-ब्लोअर के रूप में ‘तहलका’ से संपर्क किया। ‘मैंने अपनी पत्नी और बेटी के नाम पर दो फ्लैट बुक किये और तीन लाख रुपये अग्रिम भुगतान रिश्वत के रूप में दिये। लेकिन जब निर्धारित समय के बाद फ्लैट्स की डिलीवरी नहीं हुई और बिचौलिये और पैसे माँगने लगे, तो मुझे संदेह हुआ कि मेरे साथ धोखा हुआ है। तभी मैंने इन दोषियों को बेनक़ाब करने का फैसला किया।’ – अली जान ने बताया।

अली जान की मदद से ‘तहलका’ के रिपोर्टर ने दलालों के साथ पहली बैठक नोएडा में की। ‘तहलका’ रिपोर्टर को अली ने अपने फ्लैट्स के लिए अली की ओर से रिश्वत की बक़ाया राशि का भुगतान करने के लिए तैयार हुए एक व्यवसायी के रूप में पेश किया। दो बिचौलिये- संजय और अल्वी ‘तहलका’ रिपोर्टर के साथ उन्हें व्यवसायी समझकर बैठक के लिए आये। संजय ने हमारे ख़ुफ़िया कैमरे के सामने स्वीकार किया कि ये फ्लैट कालकाजी में तीन झुग्गी समूहों- नवजीवन, भूमिहीन और जवाहर शिविरों के निवासियों के पुनर्वास के लिए हैं। उसने बताया कि वह धोखे से नक़ली काग़ज़ बनवाकर अली जान को नवजीवन झुग्गी बस्ती का निवासी साबित कर देगा, जिससे उसे एक फ्लैट मिल जाएगा। संजय ने यह भी पुष्टि की कि ये फ्लैट बिक्री के लिए नहीं हैं और इन्हें बेचना अवैध है। हालाँकि उसने कुछ सरकारी अधिकारियों से अपनी साँठगाँठ का दावा किया, जिनके पास कुछ फ्लैट हैं और वे उन्हें उन चुनिंदा लोगों के समूह को बेचने के इच्छुक हैं, जिन पर उन्हें भरोसा हो। संजय ने बताया कि ‘इस तरह हम इन फ्लैट्स को एक तय क़ीमत पर बेच रहे हैं।’

संजय : ये जो झुग्गी-झोंपड़ी वाले हैं ना…।

रिपोर्टर : झुग्गी-झोंपड़ी वालों को बसाने के लिए?

संजय : हाँ; अब उनसे ज़मीन लिया जा रहा है। अब हम जानकार लोग हैं ना पीए का, हम कुछ अपने पास रखते हैं। बाहर निकाल देंगे, तो कुछ पैसा बन जाएगा। तो हम लोग उनके साथ जुड़कर के…, उन्होंने मेरे को ये बोला कि कुछ ख़ास लोग हों, उनको दिला सकते हो। क्यूँकि ये चीज़ें सबके लिए नहीं हैं।

रिपोर्टर : ये आपको किसने बोला?

संजय : जिनके थ्रू हमारा काम हो रहा है।

रिपोर्टर : xxxx के थ्रू?

संजय : हाँ; xxxx के थ्रू हमारा काम हो रहा है, तो उन्होंने बोला- सबके लिए नहीं है। कुछ ख़ास लोग हों; क्यूँकि बेचने के लिए नहीं हैं ये। लीगल तो हैं नहीं, बेचने के लिए। कुछ ख़ास लोग हों, तो उनको हम काम करा सकते हैं; तो उसी बात का पैसा है।

रिपोर्टर : अच्छा; क्यूँकि ये मकान बेचने के लिए तो होते नहीं हैं?

संजय : और अच्छी बात ये है कि इनके नाम से हो करके मिल रहा है। साबित करके दिया जा रहा है कि इनका भी वहीं खाता है।

रिपोर्टर : मतलब, इनका मकान वहाँ से तोड़ा जा रहा है?

संजय : जैसे, जो झुग्गी-झोंपड़ी तोड़ी जा रही है ना! उसमें साबित करके मिलेगा कि इनका भी है।

रिपोर्टर : मतलब, अली भाई का भी आप साबित करोगे कि झुग्गी-झोंपड़ी में इनका घर था?

संजय : हाँ।

रिपोर्टर : ये कैसे कर दोगे घर तो था नहीं है इनका?

संजय : नहीं था ना सर! अभी पुराना रिकॉर्ड चल रहा है। 2005 का रिकॉर्ड चल रहा है, तो वो लोग अपने रिकॉर्ड में साबित करेंगे।

रिपोर्टर : झुग्गी-झोंपड़ी कौन-सी है, जो तोड़ी गयी?

संजय : नवजीवन कैम्प की अभी टूटेगी।

रिपोर्टर : टूटी नहीं है अभी? …टूटेगी?

संजय : हाँ; टूटेगी। आधा टूटी है। आधा टूटेगी। हो तो बहुत पहले जाता काम; लेकिन उन लोगों ने धरना डाल दिया, इस चक्कर में लेट हो गया सारा काम।

रिपोर्टर : इनका कहाँ शो करोगे आप नवजीवन में ही?

संजय : नवजीवन में।

‘तहलका’ रिपोर्टर के यह पूछे जाने पर कि वह (दलाल) उन्हें (रिपोर्टर को) फ्लैट के लिए पात्र बनाने के लिए उनको एक झुग्गी निवासी के रूप में कैसे दिखाएँगे? संजय ने कहा कि, चूंकि आप एक करदाता हैं और आपके वित्तीय लेनदेन आधिकारिक रिकॉर्ड में हैं, इसलिए वह इसके बजाय मेरे (रिपोर्टर के) भाई या बहन को ग़लत तरीक़े से पंजीकृत कर देगा। संजय ने कहा कि आपकी तरह आपके भाई या बहन कर (टैक्स) का भुगतान नहीं करते या उतना भी नहीं करते, जितना आप करते हो, जो उन्हें (मेरे भाई या बहन को) एक झुग्गी निवासी के रूप में साबित करके उनके नाम पर फ्लैट सुरक्षित करने के लिए काफ़ी है।

रिपोर्टर : आप मुझे झुग्गी-झोंपड़ी वाला कैसे बता दोगे?

संजय : आपको नहीं, आपके फैमिली मेंबर को।

रिपोर्टर : मेरे फैमिली मेंबर को भी झुग्गी-झोंपड़ी का कैसे साबित कर दोगे?

संजय : जैसे आपका घर यहाँ पे है, आपका कोई भाई है, बहन है, वो रह सकते हैं। वो तो नहीं भर रहे हैं टैक्स इतना। वो लोग इतना नहीं, जितना आप भर रहे हो टैक्स। और झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाला टैक्स नहीं पे करता है। सब कुछ पॉसिबल है सर!

‘तहलका’ रिपोर्टर ने संजय से पूछा कि अगर वह उन्हें झुग्गी बस्ती का निवासी साबित करने में असफल रहा, तो क्या होगा? और क्या मैं फ्लैट में निवेश किया गया पैसा खो दूंगा? तब संजय ने यह कहकर रिपोर्टर को आश्वस्त किया कि सरकारी अधिकारी सावधानी से काम करते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। उसने बताया कि अधिकारियों की संलिप्तता के कारण सोच-समझकर काम करता है, इसलिए पैसे खोने की संभावना बहुत कम होती है।

रिपोर्टर : नहीं हो पाया साबित, तो पैसे डूब गये ना?

संजय : मतलब ही नहीं होता सर! सरकारी अधिकारी जो होता है ना! कोई भी क़दम उठाता है, उसमें चार बार पहले सोचता है। ठीक है सर!

फिर संजय ने ‘रेड पेपर’ के बारे में बताया। उसके अनुसार, सरकार द्वारा जारी किया गया यह दस्तावेज़ महत्त्वपूर्ण है; क्योंकि यह सोसायटी में फ्लैट के लिए पात्रता साबित करता है। उसने रिपोर्टर को आश्वासन दिया कि उन्हें (नक़ली ग्राहक यानी रिपोर्टर को) निश्चित रूप से फ्लैट मिलेगा; क्योंकि वे (दलाल) केवल चुनिंदा लोगों को फ्लैट बेच रहे हैं।

संजय : एक बार कोई पेन चल गया ना सरकारी अफ़सर का, तो काम होना-ही-होना है। नहीं तो ऐसा हो नहीं सकता, पहली बात। दूसरी बात, जो लाल वाला पेपर आपके पास आ गया ना सर!…।

रिपोर्टर : लाल वाला?

संजय : रेड पेपर एक तरह से कार्ड है, जिसमें फोटो भी होता है बंदे का। गवर्नमेंट का मोहर भी होता है। xxxx का पेपर होता है। ये पेपर आ गया ना जब आपके पास, तो किसी का हो या न हो, आपका ज़रूर होगा। क्यूँकि जो भी करवा रहा है ना! उसको डर है, कल को मेरा नाम ख़राब हो सकता है। मैं तो इतना ही तसल्ली करवा सकता हूँ कि आपका काम 100 पर्सेंट होगा, इसमें दो-राय नहीं है। क्यूँकि हम लोग ज़्यादा लोगों को बेचे नहीं हैं। कुछ ख़ास लोगों को दिया है।

संजय अब लाल काग़ज़ के बारे में विस्तार से बताने लगा। उसके अनुसार, यह अधिकारियों द्वारा जारी किया जाता है और इंगित करता है कि धारक 2005 से पहले झुग्गी बस्ती का निवासी है। इसके आधार पर धारक झुग्गीवासियों के लिए बने फ्लैट के लिए पात्र है। संजय ने दावा किया कि लाल काग़ज़ की क़ीमत 35 लाख रुपये है। उसने आश्वासन दिया कि यदि फ्लैट सुरक्षित नहीं है, तो 35 लाख रुपये वापस कर दिये जाएँगे। हालाँकि ‘तहलका’ अपनी ओर से इस दस्तावेज़ की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर रहा है और न ही कर सकता है।

संजय : सर! रेड पेपर जो है ना! वो 2005 के बैक डेट से दिखाएगा कि आपके वहाँ सब कुछ थे; वो 35 लाख का पेपर है, अगर नहीं हुआ तो।

रिपोर्टर : वो कहाँ दिखाएगा संपत्ति हमारी?

संजय : स्लम में। उसी से और उस पेपर की वैल्यू सरकार की नज़र में 35 लाख है। अगर मान के चलो, सबको अलॉट हो गया और आपका नहीं हुआ। लाल पेपर आपके पास है, आप चले जाओ लेने। या तो 35 लाख रिटर्न करेगी सरकार या तो जहाँ पर फ्लैट होगा, अलॉट कराएँगे। मुकर नहीं सकते।

संजय ने आश्वासन दिया कि यदि फ्लैट मिल गया और जाँच हुई, तो कोई दिक़्क़त नहीं होगी। उसने बताया कि एक बार जब सरकार किसी के नाम पर फ्लैट जारी कर देती है, तो वे (अधिकारी) आगे की जाँच नहीं करेंगे। इसके अतिरिक्त संजय और अल्वी दोनों ने क़ुबूल किया कि उन्होंने अली जान से रिश्वत के रूप में तीन लाख रुपये अग्रिम रूप से लिये हैं।

रिपोर्टर : एक बात बताओ, हमने ये फ्लैट ले लिया; कल को कोई जाँच बैठ गयी, सवाल उठ गया?

संजय : सर! कोई सवाल नहीं उठेगा।

रिपोर्टर : 25-30 फ्लैट जो हैं, वो कैसे उन लोगों को बिक गये, पैसे वाले लोगों को?

संजय : ऐसा कुछ नहीं होगा सर! गवर्नमेंट एक बार इश्यू कर देगी ना आपके नाम, पूछने नहीं आएगी कि आप क्या कर रहे हो उसमें। क्यूँकि वो आपको दे रही है। पाँच साल तक मेंटेनेंस फ्री रहेगा आपका, गवर्नमेंट की तरफ़ से।

रिपोर्टर : आप बताओ, आपने कैश कितना लिया अली साहिब से?

अल्वी : तीन लाख लिया।

रिपोर्टर : पूरा तीन लाख लिया?

अल्वी : नहीं; दो लाख लिया।

रिपोर्टर : दो लाख ऑनलाइन, एक लाख कैश? वैसे इस मामले में कोई ऑनलाइन देता नहीं है।

संजय : आपस की बात है, इसलिए लिया।

रिपोर्टर : देखो, अगर तीन लाख आपने इनसे लिया है, ठीक है। अगर कुछ काग़ज़-पत्री आपने दे दी होती, इन्हें एक भरोसा-सा हो जाता।

संजय : सर! उस पैसे का तो डाक्यूमेंटेशन हो गया। अब जो जाएगा, मैं इतना गारंटी कर सकता हूँ कि आप सिर्फ़ चार लाख रुपया ऑनलाइन करते हो, सिर्फ़ चार लाख ऑनलाइन में दिलवा दूँगा।

अब अल्वी और संजय ने ‘तहलका’ रिपोर्टर को बताया कि वे एक फ्लैट के लिए 6.5 लाख रुपये रिश्वत के तौर पर ले रहे हैं। अली ने दो फ्लैट बुक किये हैं, इसलिए उन्हें कुल 13 लाख रुपये चुकाने होंगे। लेकिन उन्होंने केवल तीन लाख रुपये का भुगतान किया है, इसलिए वे (संजय और अल्वी) अली से 10 लाख रुपये और माँग रहे हैं।

रिपोर्टर : तो इसमें हमें क्या करना है, ये बताइए?

संजय : पेमेंट चाहिए। ..इनका काम हो जाएगा।

रिपोर्टर : अभी तक कितना पेमेंट जा चुका है?

संजय : इनका पेमेंट दो चला गया है, अब पूरा पेमेंट देंगे तो..।

रिपोर्टर : कितना चला गया है?

अली : तीन लाख चला गया मेरा।

रिपोर्टर : टोटल आप कितना ले रहे हैं इनसे, एक फ्लैट का?

संजय : साढ़े छ: (6.5) के हिसाब से बताया आपको।

रिपोर्टर : साढ़े छ:। मतलब, टोटल इनको 13 लाख देना है, दो अपार्टमेंट का?

संजय : हाँ।

रिपोर्टर : तीन जा चुका है, 10 बचता है?

दो फ्लैट बुक करने वाले अली जान को कुल 13 लाख रुपये का भुगतान करना होगा; लेकिन उन्होंने अब तक केवल तीन लाख रुपये का भुगतान किया है। दलालों ने उनसे (अली से) कहा कि उन्हें फ्लैट सुरक्षित करने के लिए पूरा भुगतान करना होगा। जब अली की ओर से दो फ्लैट्स के लिए 13 लाख रुपये के निवेश के बाद होने वाले लाभ के बारे में दलालों से पूछा गया, तो संजय ने आश्वासन दिया कि प्रत्येक फ्लैट को बाद में 15 लाख रुपये में बेचा जा सकता है, जिससे पर्याप्त लाभ होगा। इसका तात्पर्य यह है कि संजय के मुताबिक, अभी निवेश करने से भविष्य में अच्छा लाभ हो सकता है।

रिपोर्टर : मान लीजिए, मैं इनकी तरफ़ से बाक़ी का 10 लाख रुपया दे दूँ, मेरा उसमें क्या फ़ायदा है?

संजय : जी, आपका क्या फ़ायदा? ये आप इनसे पूछिए।

रिपोर्टर : ये तो ये कहेंगे, आप उसको ज़्यादा पैसों में बेच दीजिए।

संजय : बिक ही जाएगा। वो ज़्यादा में बिक जाएगा। दो-तीन महीने रुक कर अगर 15 में भी बेचोगे, तो बिक जाएगा।

रिपोर्टर : दोनों 15 में?

संजय : नहीं, एक ही 15 लाख में।

अब संजय 10 लाख रुपये नक़द लेने पर अड़ा रहा और चेक से भुगतान लेने से इनकार कर दिया। उसने स्पष्ट किया कि पूरी राशि का भुगतान एक ही बार में किया जाना चाहिए। उसने दूसरे तरीक़े से (चेक आदि से) भुगतान की जगह नक़द भुगतान करने को प्राथमिकता देते हुए बक़ाया देने पर ज़ोर दिया।

रिपोर्टर : 10 लाख का आप पेमेंट लोगे, तो कैसे लोगे? …इंस्टॉलमेंट पर या वन टाइम?

संजय : वन टाइम।

रिपोर्टर : पूरे 10 लाख, कैश?

संजय : हाँ।

रिपोर्टर : चेक नहीं चलेगा?

संजय : नहीं सर! चेक नहीं चलेगा।

इस बिंदु पर मोइनुद्दीन अल्वी ने टिप्पणी की कि हालाँकि ये गतिविधियाँ अवैध हैं; लेकिन इन्हें अक्सर ईमानदार और पारदर्शी तरीक़े से किया जाता है। संजय ने कहा कि फ्लैट कुछ सरकारी अधिकारियों की सहायता से बेचे जा रहे हैं, जिनके बिना वे इस काम को पूरा नहीं कर पाएँगे।

अल्वी : एक बात मैंने भी कहनी है आपसे, …ये जो दो नंबर का काम है, ये बड़ी ईमानदारी से होता है।

रिपोर्टर : नहीं, ईमानदारी से होता है। लेकिन कई बार दो नंबर में भी बेईमानी हो जाती है।

संजय : नहीं; एक बात जानते हैं? हर व्यक्ति को अपनी नौकरी का डर होता है।

रिपोर्टर : तो आपकी तो किसी की नौकरी नहीं है?

अल्वी : हमारी किसी की नहीं है, मगर जिनके लिए हम काम करा रहे हैं, उनकी तो है।

रिपोर्टर : xxxx वालों की?

संजय : ऑब्वियसली सर!

रिपोर्टर : ये xxxx ने बनवाया है?

संजय : उनके इन्वॉल्वमेंट के बग़ैर हम कैसे करा सकते हैं?

अब अल्वी ने ख़ुलासा किया कि उन्होंने (संजय और अल्वी ने) इसी सोसायटी में 10 फ्लैट्स बेचे हैं। दलालों के दावों को सत्यापित करने के लिए ‘तहलका’ रिपोर्टर ने संजय से कहा कि वह उन अन्य ग्राहकों से उन्हें मिलवाये, जिन्हें उनके फ्लैट के आवंटन पत्र प्राप्त हुए हैं। जवाब में संजय ने रिपोर्टर को बाद की बैठक में मोहम्मद जमील से मिलवाया और दावा किया कि जमील ने एक फ्लैट के लिए 6.50 लाख रुपये की पूरी राशि का भुगतान किया था; लेकिन अभी भी फ्लैट के मिलने का इंतज़ार कर रहा है।

रिपोर्टर : कितने फ्लैट ऐसे आपने दिलवा दिये?

अल्वी : मेरे ख़याल में दस एक करवा दिये।

संजय : मैं जमील भाई को डायरेक्ट मिलवा दूँगा, आपको; …उसका लाल पेपर भी देख सकते हैं आप। और इनका भी लाल पेपर आ जाएगा, जमील भाई का और इनका सबका इकट्ठा आएगा; …फ्लैट इकट्ठा आएगा।

रिपोर्टर : जमील भाई का नहीं आया अभी?

संजय : पेपर आ जाएगा, फ्लैट नहीं मिला।

रिपोर्टर : उनसे कितना पैसा लिया?

संजय : उनसे पूरा पैसा हो गया।

रिपोर्टर : एक ही लिया है?

संजय : क्या चीज़?

रिपोर्टर : एक ही फ्लैट लिया है? पैसा कितना?

संजय : साढ़े छ: (6.5 लाख)।

रिपोर्टर : साढ़े छ:, पूरा?

अब संजय ने अपने लिए एक फ्लैट सुरक्षित करने के लिए मोहम्मद जमील को झुग्गी निवासी के रूप में धोखाधड़ी से सूचीबद्ध करने की बात स्वीकार की। उसने आगे ख़ुलासा किया कि जमील ने झुग्गी में न रहने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक और फ्लैट हासिल किया था। यह फ्लैट प्राप्त करने के लिए निवास की शर्तें पूरी न होने पर भी हेरफेर किया गया।

रिपोर्टर : एक इसमें और ले लिया है उन्होंने, पीएम आवास में।

संजय : हाँ; एक और ले लिया है।

रिपोर्टर : झुग्गी में नहीं रहते वो?

संजय : झुग्गी में कहाँ रहेंगे वो…!

संजय ने अब ख़ुलासा किया कि फ्लैट आधिकारिक तौर पर बिक्री के लिए नहीं हैं; फिर भी सरकारी अधिकारी 25-30 फ्लैट्स पर क़ब्ज़ा किये हुए हैं और उन्हें चयनित बिचौलियों के माध्यम से बेच रहे हैं। उसने कहा कि सभी अधिकारियों में फ्लैट्स के बदले रिश्वत के रूप में मिला पैसा वितरित होता है। अब केवल कुछ ही फ्लैट बचे हैं। ज़ाहिर है इससे इन फ्लैट्स के आसपास भ्रष्टाचार और वित्तीय हेराफेरी के नेटवर्क का पता चलता है।

रिपोर्टर : अच्छा; सरकारी पैसा उसमें 1.47 है?

संजय : आरएस (रुपीज) 1.47 लाख की डीड जाती है। और डेढ़ लाख, …रुपीज 1.5 ऐसे ही लोग लेते हैं; उसका लेते हैं, जिसका ज़मीन हो।

रिपोर्टर :  ये किन-किन लोगों में जाता है पैसा?

संजय : ये ऊपर से नीचे तक जाता है। इनके पास 15-20 फ्लैट बचे हैं; …ज़्यादा नहीं हैं। और वही सब वो पेमेंट ऑनलाइन करवा देंगे सारा।

रिपोर्टर : हम जैसे और भी लोग हैं लेने वाले?

संजय : नहीं सर! ये बेचने के लिए नहीं हैं।

रिपोर्टर : बेचने के लिए तो नहीं हैं, पर फिर भी बेचे जा रहे हैं ना!

संजय : सरकारी आदमी के हाथ में 25-30 फ्लैट था।

रिपोर्टर : अच्छा! 25-30 थे। सब नहीं हैं?

संजय : जिसमें से क़रीबन पाँच-छ: निकल गये हैं। 23-24 और बचे हुए हैं। ठीक है ना! …वो जैसे ही निकलेंगे, उसी का पैसा खाएँगे ये लोग।

शुरुआती रिश्वत देने के बाद अली जान को जल्द ही एहसास हुआ कि उसे दो बिचौलियों द्वारा धोखा दिया जा रहा है। नतीजतन, उसने आगे का भुगतान रोक दिया। क्योंकि उसे न तो लाल काग़ज़ मिला और न ही वह फ्लैट मिला, जिसका उनसे वादा किया गया था। इस बीच मोहम्मद जमील, जिसने अपने फ्लैट के लिए पूरी रक़म का भुगतान करने का दावा किया था; को केवल एक लाल काग़ज़ मिला; लेकिन कोई फ्लैट नहीं मिला।

जमील ने स्वीकार किया कि वह कभी झुग्गी-झोंपड़ी में नहीं रहता था, फिर भी रिश्वत देने के बाद उसे जो लाल काग़ज़ मिला, उसमें सर्वेक्षण संख्या का ग़लत संकेत दिया गया है। उसमें दिखाया गया है कि वह 2005 से पहले से झुग्गी-झोपड़ी में रहता रहा है। इस तरह संजय कुमार पंडित और मोइनुद्दीन अल्वी, दोनों बिचौलिये धनी लोगों को झुग्गीवासियों के लिए बने फ्लैट बेचकर लोगों को धोखा देने का काम कर रहे हैं।

अब दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के लिए हस्तक्षेप करते हुए झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए कालकाजी एक्सटेंशन परियोजना के आसपास बने फ्लैट्स में हो रहे कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों को उजागर करके भ्रष्टाचारियों और दलालों को सज़ा दिलाने का समय आ गया है। क्योंकि आगे के शोषण को रोकने और प्रभावित लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए यह हस्तक्षेप आवश्यक है। मौज़ूदा समस्याएँ आवास क्षेत्र में कड़े नियमों के उल्लंघन के निरीक्षण और इसकी जवाबदेही की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर डालती हैं।

नाइजीरिया में बड़ा हादसा, नाव पलटने से 41 लोगों की मौत

अबुजा : नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी राज्य जामफारा में शनिवार को एक नाव के पलट जाने से कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई। वहीं 12 अन्य को रेस्क्यू कर्मियों ने बचा लिया। नाइजीरिया के संघीय प्रतिनिधि सभा में गुम्मी-बुक्कुयुम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले राष्ट्रीय विधायक सुलेमान गुम्मी ने रविवार को बताया कि नाव में 50 से अधिक यात्री और चालक दल सवार थे। उन्होंने कहा कि नाव जम्फारा के गुम्मी स्थानीय सरकारी क्षेत्र के गुम्मी कस्बे के पास नदी में पलट गई।

गुम्मी ने बताया कि यात्री किसान थे जो रोजाना नाव से पास के इलाके में अपने खेतों पर जाते थे। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार अधिकारियों ने सूचना मिलते ही स्थानीय गोताखोरों सहित अन्य कर्मचारियों को घटनास्थल पर तुरंत भेज दिया। कम से कम एक दर्जन लोगों को जीवित बचा लिया गया। जम्फारा राज्य आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी के प्रमुख हसन दौरा ने स्थानीय मीडिया से एक इंटरव्यू में कहा कि इस घटना में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे मारे गए हैं। पश्चिमी अफ्रीकी देश में नाव पलटने की दुर्घटनाएं अक्सर होती हैं। आमतौर पर इन घटनाओं के लिए ओवरलोडिंग, प्रतिकूल मौसम की स्थिति और परिचालन संबंधी त्रुटियों जैसे कारकों को जिम्मेदार बताया जाता है।

नीरज चोपड़ा डायमंड लीग फाइनल में दूसरे स्थान पर रहे

ब्रुसेल्स : विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा डायमंड लीग फाइनल 2024 में पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में एक सेंटीमीटर की चूक के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

बेल्जियम के ब्रुसेल्स में शनिवार को हुए मुकाबले में पेरिस ओलंपिक 2024 के कांस्य पदक विजेता ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स ने 87.87 मीटर के प्रयास के साथ अपना पहला डायमंड लीग खिताब जीता। वहीं भारतीय भाला फेंक स्टार नीरज चोपड़ा 87.86 मीटर, एक सेंटीमीटर की चूक के साथ दूसरे स्थान पर रहे। 2023 यूरोपीय खेलों के चैंपियन जर्मनी के जूलियन वेबर 85.97 मीटर की दूरी के साथ तीसरे स्थान रहे।

दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने अच्छी शुरुआत करते हुए अपना पहला थ्रो 83.49 मीटर के साथ पूरा किया। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में पीटर्स से आगे निकलने के लिए शानदार वापसी की, लेकिन एक सेंटीमीटर से चूक गए। भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी की अगली थ्रो 82.04 मीटर, 83.30 मीटर और 86.46 मीटर रही। डायमंड लीग फाइनल में नीरज चोपड़ा ने पांचवीं बार भाग लिया। वह 2017 में सातवें स्थान पर रहे, अगले साल चौथे स्थान पर रहे और साल 2022 में 88.44 मीटर थ्रो के साथ डायमंड लीग का खिताब जीता था। पिछले वर्ष नीरज चोपड़ा 83.80 मीटर के प्रयास के साथ जैकब वाडलेज्च के बाद दूसरे स्थान पर रहे थे।

इससे पहले फाइनल के लिए क्वालीफाई करने के लिए नीरज ने इस सीजन में दो डायमंड लीग मुकाबलों में 14 अंक अर्जित किए। चोपड़ा मई में दोहा चरण और पिछले महीने लुसाने इवेंट दोनों में दूसरे स्थान पर रहे और ओवरऑल अंक तालिका में चौथे स्थान पर रहे। पुरुषों के भाला फेंक फाइनल में कुल सात एथलीटों ने प्रतिस्पर्धा की। उल्लेखनीय है कि पेरिस ओलंपिक 2024 के स्वर्ण पदक विजेता, पाकिस्तान के अरशद नदीम ने इस वर्ष डायमंड लीग में केवल एक बार प्रतिस्पर्धा की और वह फाइनल के लिए जगह नहीं बना सके थे।

2025 में अपनी पहली उड़ान भर सकता है एलसीए तेजस मार्क-2

जोधपुर : स्वदेशी आधुनिक लड़ाकू विमान एलसीए तेजस मार्क-2 के 2025 में अपनी पहली उड़ान भरने की संभावना है। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने राजस्थान के जोधपुर में एक कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी।

इस कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के विमान एएमसीए और तेजस मार्क-2 के मॉडल को प्रदर्शित किया गया। भारतीय वायुसेना इस स्वदेशी और आधुनिक लड़ाकू विमान को में 2035 तक अपने बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। साथ ही स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के विमान एमका (एएमसीए) को 2040 तक अपने बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य है।

कार्यक्रम के दौरान एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के अधिकारी वाजी राजपुरोहित ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि तेजस मार्क-2 इसके ही पूर्ववर्ती एलसीए तेजस मार्क-1 का आधुनिक वर्जन है। इस एयरक्राफ्ट में मार्क-1 की तुलना में आधुनिक हथियार होंगे। इसके साथ ही इसमें आधुनिक एवियॉनिक्स, डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम (फ्लाई-बाय-वायर) भी शामिल होगा। इस विमान का डिजाइन पूरा कर लिया गया है। 2025 तक हम इस विमान की पहली उड़ान भी कर लेंगे। इसके अलावा हमारी पांचवी पीढ़ी के स्वदेशी एयरक्राफ्ट एमका की पहली उड़ान हम 2028 तक करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यह विमान स्टेल्थ तकनीक पर आधारित होगा। इसमें अलग प्रकार की तकनीक और धातु की इस्तेमाल किया जाता है। यह 5.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान होगा। हम इसके 2040 तक भारतीय वायुसेना में शामिल करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। यह दो इंजनों वाला बहुउद्देशीय विमान होगा।

बता दें कि तेजस भारत की रक्षा प्रयोगशालाओं द्वारा निर्मित किया गया विमान है। यह सिंगल इंजन डेल्टा विंग बहुउद्देशीय हल्का लड़ाकू विमान है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स ने तैयार किया है। एलसीए को 2003 तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने तेजस नाम दिया था। इस विमान की पहली स्क्वाड्रन को भारतीय वायुसेना में 2016 में शामिल किया गया था।  

उत्तर कोरिया संविधान संशोधन के लिए 7 अक्टूबर को करेगा संसदीय बैठक

सोल : उत्तर कोरिया अगले महीने एक महत्वपूर्ण संसदीय बैठक आयोजित करेगा। बैठक में मुख्य रूप से देश के संविधान में संशोधन किया जाएगा। यह जानकारी सोमवार को राज्य मीडिया ने दी। इससे पहले उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन ने दक्षिण कोरिया को अपना मुख्य दुश्मन बताने के लिए संवैधानिक संशोधन का आह्वान किया था। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी अनुसार, 14वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली (एसपीए) का 11वां सत्र 7 अक्टूबर को प्योंगयांग में आयोजित किया जाएगा। योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में एसपीए की बैठक में उत्तर कोरिया के नेता ने संविधान में संशोधन कर दक्षिण कोरिया को अपना प्रमुख शत्रु बताया था। वहीं, युद्ध की स्थिति में दक्षिण कोरियाई क्षेत्र पर पूर्ण कब्जा करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई थी।

किम ने संवैधानिक संशोधन की समीक्षा करने का आदेश जारी किया, जिससे एकीकरण संबंधी धाराएं हटा दी गईं तथा समुद्री सीमा सहित देश की क्षेत्रीय सीमाओं को नए सिरे से निर्धारित किया गया। दिसंबर में साल के अंत में पार्टी की बैठक में उन्होंने अंतर-कोरियाई संबंधों को “एक दूसरे के प्रति शत्रुतापूर्ण दो राज्यों” के बीच संबंधों के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने दक्षिण को सुलह और एकीकरण के समकक्ष के रूप में नहीं मानने की कसम खाई। दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने पहले कहा था कि उत्तर कोरिया अपनी अगली एस.पी.ए. बैठक में 1991 में हस्ताक्षरित अंतर-कोरियाई बुनियादी समझौते को रद्द कर सकता है।

बता दें कि 1991 के समझौते के तहत अंतर-कोरियाई संबंधों को एक विशेष संबंध के रूप में परिभाषित किया गया था। केसीएनए ने कहा कि देश के समाजवादी संविधान में संशोधन और उसे त्रुटि मुक्त (पूरक) करने के साथ ही उत्तर कोरिया हल्के उद्योग और बाह्य आर्थिक मामलों पर कानूनों पर विचार-विमर्श और उन्हें अपनाने तथा गुणवत्ता नियंत्रण कानून के प्रवर्तन की निगरानी के मुद्दे पर भी चर्चा करेगा।

गौरतलब है कि एसपीए उत्तर कोरिया के संविधान के तहत राज्य सत्ता का सर्वोच्च अंग है, लेकिन वास्तव में यह सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के निर्णयों पर केवल मुहर लगाता है। इस बीच, उत्तर कोरिया द्वारा नए एसपीए प्रतिनिधियों को चुनने के लिए शीघ्र ही चुनाव कराने की संभावना है, क्योंकि उसने अगले महीने संसदीय बैठक बुलाने की घोषणा की है।उत्तर कोरिया ने मार्च 2019 में पांच साल के कार्यकाल के लिए 14वें एसपीए के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव किया था। इसलिए उसे मार्च में नए प्रतिनिधियों का चुनाव करना था। हालांकि, शासन ने नए एसपीए प्रतिनिधियों के चुनाव के कार्यक्रम की सार्वजनिक सूचना भी नहीं दी है।

गणपति विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा, मेश्वो नदी में 10 लोग डूबे; 8 की मौत

गांधीनगर : गुजरात की राजधानी गांधीनगर के देहगाम तहसील के वासणा सोगठी गांव के पास मेश्वो नदी में गणपति विसर्जन के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ। शुक्रवार को गणपति विसर्जन के लिए नदी में पहुंचे 10 लोग डूब गए, जिनमें से 8 की मौत हो गई। बाकी 2 लोगों की तलाश जारी है।

यह घटना गणपति विसर्जन के दौरान गुजरात में डूबने की चौथी घटना है। पिछले छह दिनों में इस तरह के हादसों में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले पाटण में चार, नडियाद में दो और जूनागढ़ में एक युवक की मौत हो चुकी है।

शुक्रवार को वासणा सोगठी गांव से मेश्वो नदी पर विसर्जन के लिए पहुंचे युवक नदी के तट पर गणपति की मूर्तियों का विसर्जन कर रहे थे। विसर्जन के बाद कुछ युवक नदी के पास बने चेक डैम में नहाने लगे। तभी अचानक सभी 10 युवक डूबने लगे। अन्य युवकों ने शोर मचाया, जिससे आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।

सूचना मिलने के बाद देहगाम नगर पालिका की फायर ब्रिगेड टीम और स्थानीय गोताखोर तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। लगभग दो घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गोताखोरों ने 8 शव नदी से बाहर निकाले। इन शवों को पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल, गोताखोर अन्य दो युवकों की तलाश कर रहे हैं।

भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का सफल परीक्षण

नई दिल्ली : भारत ने वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (वीएलएसआरएसएएम) के एक के बाद एक सफल उड़ान परीक्षण किए हैं। लगातार दूसरा परीक्षण शुक्रवार को किया गया। इससे एक दिन पहले भी 12 सितंबर को भी चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज से वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया था। शुक्रवार को एक बार फिर ओडिशा के चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) व भारतीय नौसेना ने मिसाइल का सफल परीक्षण किया।

शुक्रवार को किए गए परीक्षण में मिसाइल ने बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए समुद्र में खतरे का अनुकरण किया और इस दौरान एक उच्च गति वाले हवाई लक्ष्य को रोक दिया।रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इससे लक्ष्यों को बेअसर करने की इस मिसाइल की सटीकता और क्षमता का प्रदर्शन हुआ है। यह परीक्षण 12 सितंबर, 2024 को हुए पहले परीक्षण के बाद किया गया है।

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि 12 सितंबर को किए गए पहले परीक्षण में वीएलएसआरएसएएम मिसाइल ने कम ऊंचाई वाले एक अन्य लक्ष्य को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया था। ये लगातार परीक्षण हथियार प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रदर्शित करते हैं। साथ ही साथ इस हथियार प्रणाली के विभिन्न घटकों में किए गए हालिया अपग्रेडशन को भी दर्शाते हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, भारतीय नौसेना एवं सभी संबद्ध टीमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकियों से लैस यह मिसाइल सशस्त्र बलों की तकनीकी क्षमता को और अधिक संवर्द्धित करेगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी वीएलएसआरएसएएम प्रणाली के उड़ान परीक्षणों में शामिल टीमों को बधाई दी है।

दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल को मिली जमानत

नई दिल्ली : दिल्ली शराब नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल गई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस भुइंया दोनों ने केजरीवाल को जमानत दी। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के केस में उन्हें ये जमानत दी है। केजरीवाल को 10 लाख के बॉन्ड पर जमानत मिली है। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की थीं। पहली जमानत याचिका और दूसरी सीबीआई द्वारा की गई गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती दी गई थी।

ईडी के केस में केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी है जबकि यह मामला सीबीआई की ओर से की गई गिरफ्तारी और रेगुलर बेल से जुड़ा था। ईडी मामले में केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से 12 जुलाई को जमानत मिली थी। वहीं, अब सीबीआई केस में भी सर्वोच्च न्यायालय से केजरीवाल को जमानत दे दी है। ईडी केस में अंतरिम जमानत मिलने के बाद सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल 26 जून को तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट 5 सितंबर को केजरीवाल की जमानत याचिका पर फैसला 5 सितंबर को सुरक्षित रखा था। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार गिरफ्तार किया। 10 दिन की पूछताछ के बाद 1 अप्रैल को तिहाड़ जेल भेजा गया। 10 मई को 21 दिन के लिए आम चुनाव में प्रचार के लिए रिहा किया गया। ये रिहाई 51 दिन जेल में रहने के बाद मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की एक जून तक की रिहाई मंजूर की थी। 2 जून को केजरीवाल ने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया था। आज यानी 13 सितंबर को केजरीवाल की रिहाई होती है तो कुल जेल गए 177 दिन हो जाएंगे। अगर 21 दिन की रिहाई को कम कर दिया जाए तो केजरीवाल कुल 156 दिन जेल में रहे।