ईद मिलाद के जुलूसों के दौरान कई शहरों में विवाद और झड़प, बेंगलुरु में 6 गिरफ्तार; मुंबई-राजस्थान में भी तनाव

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नई दिल्ली, 27 अगस्त: देशभर में बुधवार को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के अवसर पर जुलूस, नमाज और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई शहरों में उत्सव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन कुछ स्थानों पर जुलूस के दौरान विवाद और झड़प की घटनाएं सामने आईं।

बेंगलुरु के बसवनगुडी, मुंबई के परेल और राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी में अलग-अलग घटनाओं के बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। शुरुआती सोशल मीडिया पोस्टों में घटनाओं को लेकर अलग-अलग दावे किए गए, लेकिन पुलिस जांच के बाद सामने आई जानकारी के आधार पर ही घटनाक्रम को समझना जरूरी है।

बेंगलुरु में झड़प, 6 गिरफ्तार

सबसे गंभीर घटनाओं में से एक बेंगलुरु के बसवनगुडी इलाके में सामने आई। बुधवार शाम KR Road से ईद मिलाद का जुलूस गुजर रहा था। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान एक समूह के जुलूस के पास पहुंचने और नारे लगाए जाने के बाद दोनों पक्षों में विवाद हुआ।

पुलिस के मुताबिक, जुलूस के रास्ते में पुनीत केरेहल्ली और उनके साथियों के पहुंचने के बाद नारेबाजी हुई और स्थिति बिगड़ी। इसके बाद मारपीट हुई, जिसमें मुरली नामक व्यक्ति के सिर में चोट आई और उसे अस्पताल ले जाया गया।

पुलिस ने मामले में तीन FIR दर्ज की हैं और छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें केरेहल्ली और उनके दो सहयोगी शामिल हैं, जबकि दूसरी शिकायत के आधार पर दूसरे पक्ष के तीन लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। दो नाबालिगों को भी हिरासत में लिए जाने की शुरुआती जानकारी सामने आई थी।

एक तीसरा मामला ट्रैफिक पुलिस की शिकायत पर सड़क बाधित करने को लेकर दर्ज किया गया है। पुलिस CCTV फुटेज और अन्य सबूतों की जांच कर रही है।

पुलिस के मुताबिक दोनों पक्षों की शिकायतें

बेंगलुरु पुलिस के अनुसार, एक शिकायत जुलूस में शामिल लोगों की ओर से की गई, जबकि दूसरी शिकायत केरेहल्ली की ओर से दर्ज कराई गई। इसी वजह से दोनों पक्षों के खिलाफ अलग-अलग कानूनी कार्रवाई हुई है।

पुलिस का कहना है कि वह यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद की शुरुआत किस तरह हुई और किसकी भूमिका क्या थी। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे एकतरफा दावों को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं है।

मुंबई के परेल में भी तनाव

मुंबई के परेल-चिंचपोकली इलाके में बुधवार रात ईद के जुलूस के बाद दो समूहों के बीच झड़प हुई। कुछ रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को संदेह है कि दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी के बाद बहस बढ़ी और स्थिति झड़प तक पहुंच गई। पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया और इलाके में स्थिति को नियंत्रण में बताया।

बाद में मुंबई पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने कहा कि घटना की वास्तविक वजह अभी जांच का विषय है और सोशल मीडिया पर चल रहे अलग-अलग दावों के आधार पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है। कुछ रिपोर्टों में पथराव और पुलिस द्वारा हल्के बल प्रयोग का भी उल्लेख हुआ है।

चित्तौड़गढ़ के बस्सी में पन्नियों को लेकर विवाद

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी कस्बे में ईद मिलाद के जुलूस के दौरान हवा में उड़ाई जा रही पन्नियों को लेकर विवाद हुआ।

कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि इन पन्नियों पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बने हुए थे। इसके बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हुआ और दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 200 लोग पुराने बस स्टैंड के पास जमा हुए और कुछ समय के लिए बाजार बंद रहा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पन्नियां उड़ाने की गतिविधि रुकवाई और अतिरिक्त बल तैनात किया। दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद जुलूस को आगे जाने दिया गया।

इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पन्नियों पर चित्र जानबूझकर लगाए गए थे या घटना की पूरी परिस्थितियां क्या थीं।

ग्वालियर में DJ को लेकर पुलिस से विवाद

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी ईद मिलाद के जुलूस के दौरान पुलिस और जुलूस में शामिल लोगों के बीच DJ की आवाज को लेकर बहस की खबर सामने आई।

रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने तेज आवाज में बज रहे DJ को कम करने के लिए कहा, जिसके बाद कुछ लोगों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस हुई। समझाइश के बाद जुलूस आगे बढ़ा।

यह घटना सांप्रदायिक झड़प की बजाय ध्वनि और जुलूस प्रबंधन को लेकर विवाद के रूप में सामने आई है।

कई शहरों में कड़े सुरक्षा इंतजाम

ईद मिलाद से पहले कई शहरों में पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की थी। कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में करीब 3,000 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया था। बेंगलुरु में भी जुलूस के मार्ग पर ट्रैफिक डायवर्जन और पुलिस बंदोबस्त किया गया था।

कई अन्य शहरों में जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से निकले। उदाहरण के लिए इंदौर और नागपुर में धार्मिक कार्यक्रमों और जुलूसों के दौरान शांति और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया गया।

सोशल मीडिया पर तेजी से फैले अलग-अलग दावे

इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो और दावों की तेजी से बाढ़ आई। कई पोस्टों में किसी एक समुदाय को घटना का जिम्मेदार बताया गया, जबकि दूसरी पोस्टों में इसका उल्टा दावा किया गया।

लेकिन अलग-अलग मामलों में पुलिस जांच अभी जारी है। इसलिए किसी वायरल वीडियो के आधार पर घटना का पूरा संदर्भ तय करना जोखिम भरा है। वीडियो की तारीख, स्थान, घटनाक्रम और उससे पहले की परिस्थितियों की पुष्टि जरूरी है।

प्रशासन के सामने चुनौती

ईद मिलाद के साथ देश में अन्य धार्मिक आयोजनों का मौसम भी चल रहा है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी धार्मिक जुलूसों के लिए समान नियम लागू करना और अफवाहों को फैलने से रोकना है।

जुलूस के मार्ग, लाउडस्पीकर/DJ, नारेबाजी, सड़क बाधित करने और धार्मिक प्रतीकों से जुड़े नियम यदि लागू किए जाते हैं, तो उनका पालन सभी समुदायों और आयोजनों में समान रूप से होना जरूरी है।

बेंगलुरु और मुंबई में पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में बताया है, जबकि राजस्थान के बस्सी में भी प्रशासन ने निगरानी बढ़ाई है। फिलहाल इन घटनाओं से जुड़े मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।