प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गदर साथी: गोपी कृष्ण पांडे को आखिर कैसे बनाया गया राज्यसभा प्रत्याशी

भाजपा नेता गोपी कृष्ण पांडे की प्रतीकात्मक तस्वीर
भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए गोपी कृष्ण पांडे समेत आठ उम्मीदवारों की घोषणा की है। यह प्रतिनिधि तस्वीर है।

सुजीत ठाकुर, तहलका न्यूज

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए घोषित भाजपा के आठ प्रत्याशी मंगलवार को अपना नामांकन करेंगे। पार्टी ने जिन्हे अपना प्रत्याशी बनाया है उनमें सियासी रूप से कोई बहुत चर्चित नहीं है। लेकिन सबसे ज्यादा छुपा रुस्तम गोपी कृष्ण पांडे हैं।

ये बीते तीस साल से उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। इनकी खासियत यह है कि इन्होंने कभी भी मांग कर पार्टी में कोई पद नहीं लिया। चुनाव के लिए टिकट मांगने की बात तो दूर हैं। वह कई बार टिकट को इस तर्क के साथ ठुकरा चुके हैं कि, यदि वही चुनाव लड़ेंगे तो लड़वाएगा कौन। यह बात भी तब कही जब भाजपा उत्तर प्रदेश में 2014 से लगभग अजेय है।

हालांकि उनकी दूसरी और सबसे ताकतवर खूबी है पीएम मोदी का उन पर लंबे समय से भरोसा। गोपी कृष्ण पांडे वैसे तो बलिया के मूल निवासी है लेकिन वर्षों से कानपुर में रहते हुए यहीं के हो गए हैं। संगठन का काम वह कानपुर में बीते तीस साल से कर रहे हैं। भाजपा में रहते हुए जब भी नरेंद्र मोदी कभी कानपुर आते थे तो गोपी कृष्ण पांडे ही उन्हे शहर की स्थिति और भाजपा की संभावनाओं और दिक्कतों के बारे में बताते थे। मोदी से उनकी पटरी ऐसी बैठी की आज तक नहीं टूटी। लेकिन भाजपा में दोनों की मित्रता का पता 2001 में चला। इसी वर्ष जब मोदी कानपुर आए थे तो उन्होंने गोपी कृष्ण पांडे के साथ फिल्म गदर देखी थी।

बीते दो लोकसभा चुनाव में उन्हे कानपुर से भाजपा ने प्रत्याशी बनाने की पेशकश की। बीते चुनाव में तो उन पर चुनाव लड़ने का जोर भी डाला गया था। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया था कि यदि मैं ही चुनाव लड़ूगा तो लड़वाएगा कौन। संगठन के लिए चुनावी व्यवस्था करने में माहिर गोपी कृष्ण पांडे को पार्टी ने इस बार सीधा राज्यसभा का उम्मीदावर बना दिया। सूत्रों का कहना है कि उन्हे प्रत्याशी बनाने से पहले बताया गया कि, उन्हे राज्यसभा के लिए नामांकन करना है। और हां, इस बार आपको वोट पाने के लिए जनता के बीच जाकर व्यवस्था नहीं करनी है क्योंकि इस बार वही विधायक आप को वोट देकर संसद भेजेंगे जिनमें कई को आपने चुनाव लड़वाकर विधानसभा में भेजा है।