
₹62,500 करोड़ की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के जरिए भारतीय ब्रांड, डिजाइन और कंपोनेंट निर्माण पर जोर; 2027 तक मजबूत स्वदेशी मोबाइल ब्रांड का लक्ष्य
नई दिल्ली। भारत अब सिर्फ दुनिया के लिए मोबाइल फोन बनाने का केंद्र बनने से आगे बढ़कर अपने स्वदेशी मोबाइल ब्रांड और तकनीक विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। केंद्र सरकार ने इसके लिए ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फ़ोन निर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दी है, जिसका मकसद देश में मोबाइल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू वैल्यू एडिशन, भारतीय ब्रांड, डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को मजबूत करना है।
सरकार के मुताबिक इस योजना के तहत भारत में बनने वाले मोबाइल फोन के लिए सिर्फ असेंबली पर निर्भर रहने के बजाय सप्लाई चेन और कंपोनेंट निर्माण को भी मजबूत किया जाएगा। योजना में प्रमुख कंपोनेंट और सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है। भारतीय ब्रांड विकसित करने के लिए डिजाइन और R&D से जुड़ी गतिविधियों को भी इंसेंटिव दिया जाएगा।
असेंबली से डिजाइन तक: भारत की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यात्रा
भारत ने पिछले एक दशक में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में तेज विस्तार किया है। सरकार के अनुसार देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2 फीसदी मोबाइल फोन अब भारत में निर्मित होते हैं और भारत मात्रा के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। लेकिन अगली चुनौती सिर्फ फोन को भारत में असेंबल करना नहीं, बल्कि उसके ज्यादा से ज्यादा हिस्सों और तकनीक को देश के भीतर विकसित करना है।
इसी दिशा में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण योजना (ईसीएमएस) को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल, PCB, कनेक्टर, लिथियम-आयन सेल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। अगस्त 2026 तक इस योजना के तहत 15 राज्यों में 106 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी थी, जिनमें से 38 प्लांट उत्पादन शुरू कर चुके हैं।
एमपीएमएस की मुख्य बातें: प्रोत्साहन, अवधि और लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य अब ऐसा इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम तैयार करना है जिसमें भारत केवल विदेशी कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र न रहे, बल्कि भारतीय डिजाइन, भारतीय पेटेंट और भारतीय ब्रांड भी वैश्विक बाजार में जगह बना सकें।
मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस अवधि में देश में मोबाइल फोन का संचयी उत्पादन करीब ₹39 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है और लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
यानी अगली कहानी सिर्फ यह नहीं होगी कि फोन भारत में बना है या नहीं। असली सवाल यह होगा कि फोन के पीछे की तकनीक, डिजाइन, कंपोनेंट और ब्रांड में भारत की हिस्सेदारी कितनी है। यही वह अंतर है जिसे सरकार अगले कुछ वर्षों में पाटना चाहती है।

